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बीजेपी विरोधी सियासत पर वज्रपात है राहुल का फैसला

By Prem Kumar
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नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। इसलिए नहीं कि उन्होंने पहले चरण के चुनाव से ठीक 11 दिन पहले अमेठी के अलावा एक और सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। बल्कि, यह गलती बड़ी इसलिए है क्योंकि राहुल गांधी उस सीट पर चुनाव लड़ने पहुंचे हैं जहां बीजेपी है ही नहीं। क्या बीजेपी से लड़े बगैर, बीजेपी को हराए बगैर देश में गैर बीजेपी राजनीति की अगुआई कोई नेता कर सकता है?

 Lok sabha Elections 2019: Rahul Gandhi picks Wayanad as his second Lok Sabha seat,How this decision is his Big Mistake.

वायनाड में राहुल को मिलेगा क्या?

वायनाड जाकर चुनाव लड़ना या जीतना 2019 में राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए पराजय के समान है। सबसे बड़ा सवाल है कि राहुल या कांग्रेस को हासिल क्या होगा? 2014 के 42 के आंकड़े में कोई सुधार तक नहीं होगा। इसके बजाए लोकसभा में कांग्रेस की ताकत एक और कम हो जाएगी क्योंकि अमेठी या वायनाड में से एक सीट पर राहुल को इस्तीफ़ा देना होगा। ऐसा भी नहीं है कि राहुल गांधी किसी क्षेत्रीय दल को चुनौती देने वायनाड पहुंचे हों। वह महज एक सांसद वाली राष्ट्रीय पार्टी सीपीआई से लड़ेंगे। यह सीट ऐसी है जहां चाहे वामदल की जीत होती या फिर कांग्रेस की। राहुल गांधी के इस सीट पर चुनाव लड़ने से कांग्रेस के खाते में क्या जुड़ने वाला है! सीपीआई का भी कोई नुकसान नहीं होगा। इस सीट पर उसकी जीत की उम्मीद एक बार फिर टूट जाएगी। प्रश्न सिर्फ लोकसभा में कांग्रेस की गिनती तक का नहीं है। प्रश्न ये है कि राहुल गांधी के रूप में कांग्रेस के पास जो चुनावी रणभूमि में हथियार है उसे उस जगह पर क्यों व्यर्थ आजमाया जा रहा है जहां मुख्य शत्रु है ही नहीं?

कांग्रेस तय ही नहीं कर पायी कौन है दुश्मन नम्बर वन?

क्या कांग्रेस अब भी नहीं तय कर पायी है कि उसका राजनीतिक दुश्मन नम्बर वन बीजेपी है? अगर ऐसा है तो क्या बिहार में महागठबंधन में कांग्रेस सिर्फ लोकसभा में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए हुई है? वायनाड जाकर राहुल के चुनाव लड़ने के इस एकमात्र कदम से कांग्रेस की रणनीति के मायने ही बदल गये हैं। अब कहा जा सकता है कि सिर्फ लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने या बचाने के लिए ही कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ना पसंद किया। यूपी में चुनावी तालमेल के प्रति रुझान नहीं दिखाया। वाम मोर्चे के साथ देश में कहीं कोई गठबंधन करने की जरूरत नहीं समझी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी से दूरी बनाए रखा और सबसे बड़ी बात कि देशव्यापी स्तर पर महागठबंधन को बनने नहीं दिया।

आप और बीजेपी से सीख लेते राहुल

राहुल गांधी को बीजेपी और आम आदमी पार्टी से सीख लेनी चाहिए। अरविन्द केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया, उन्होंने वाराणसी जाकर नरेंद्र मोदी को चुनौती दी और बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी से ताल ठोंकवाया। यहां तक कि आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास ने भी राहुल को अमेठी में ललकारा। तब देश में कांग्रेस विरोध की सियासत परवान चढ़ रही थी। आज अगर राहुल गांधी वाराणसी से लड़ने का फैसला कर लेते, तो उनकी हार में भी जीत का आनन्द मिलता। यही वक्त की जरूरत थी। इस परिप्रेक्ष्य में देखें तो राहुल गांधी पर यह इल्जाम बनता है कि उन्होंने बीजेपी रहित लोकसभा सीट पसंद कर देश में बीजेपी विरोध की राजनीति को रसातल में मिलाने का काम किया है।

बीजेपी के कांग्रेस विरोध में कोई नरमी नहीं

निस्संदेह कांग्रेस भले ही बीजेपी विरोध की राजनीति से दूर हो रही हो, लेकिन बीजेपी के कांग्रेस विरोध में कोई कमी नहीं आयी है। बीजेपी का हमला और तेज होगा। जनता में अमेठी हारने के डर से मैदान छोड़ने का संदेश देगी पार्टी और अमेठी के मतदाताओं का विश्वास भी डगमगाएगा। सम्भव है कि बीजेपी स्मृति ईरानी को वहां भी उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने को कह दे हालांकि वह प्रतीकात्मक ही होगा।

हिन्दू आबादी में डरने लगे हैं राहुल!

वायनाड में बिना कोई जोखिम उठाए बीजेपी राहुल गांधी पर हमला बोल सकेगी। वह निश्चित रूप से कहेगी कि वायनाड में गैर हिन्दू आबादी 50 फीसदी से अधिक है इसलिए राहुल वहां चुनाव लड़ने गये। इसका मतलब ये हुआ कि राहुल को हिन्दू मतदाताओं के बीच चुनाव लड़ने से डर लगता है।

सॉफ्ट हिन्दुत्व के मकसद को भी चोट

राहुल का वायनाड में चुनाव लड़ने जाना सॉफ्ट हिन्दुत्व के नारे पर लौटने के मकसद से ठीक उल्टा है। सॉफ्ट हिन्दुत्व का नारा पार्टी से विमुख हुए हिन्दू समुदाय को दोबारा जोड़ना था। राहुल के इस कदम से कांग्रेस हिन्दुओं से दूर होगी। राहुल का फैसला कांग्रेस के लिए आत्मघाती तो है ही, पूरे बीजेपी विरोध की सियासत पर वज्रपात है।

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English summary
Lok sabha Elections 2019: Rahul Gandhi picks Wayanad as his second Lok Sabha seat,How this decision is his Big Mistake
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