Rahul Gandhi in USA: अमेरिका में राहुल के आयोजक कौन?

न्यूयार्क में होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम के आयोजकों में कुछ ऐसे लोग हैं, जिनके आतंकी संगठन जमायत-ए-इस्लामी और मुस्लिम ब्रदरहुड से ताल्लुक हैं।

Rahul Gandhi in USA

आज से 31 साल पहले रुचिरा गुप्ता नाम की 24 साल की एक लड़की सुर्ख़ियों में छाई हुई थी, क्योंकि वह बाबरी ढांचा टूटने की चश्मदीद गवाह थी। वह 6 दिसंबर 1992 के दिन बिजनेस इंडिया के लिए रिपोर्टिंग करने अयोध्या गई हुई थी, उसकी आँखों के सामने बाबरी ढांचा टूटा था। रुचिरा गुप्ता एक पत्रकार से तुरंत एक्टिविस्ट बन गई, उसने कहा कि जब वह टूट रही मस्जिद में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी, तो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि यहां मन्दिर का गर्भग्रह है।

उसने आरोप लगाया कि भगवा पटका पहने बजरंग दल वालों ने उसके साथ छेड़खानी की| उसे रोका गया और उसे मुस्लिम बता कर उसकी हत्या की कोशिश की गई, लेकिन तभी उन्हीं में से एक व्यक्ति ने कहा कि इसे ढांचे के अंदर नहीं मारो, बाहर खाई में ले जाओ। उसका कहना था कि वे उसके साथ बलात्कार करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उसे बाबरी मस्जिद से बाहर खींच लिया था । उसने दुनिया भर के अखबारों को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वह मौत के मुंह से निकल कर बाहर आई। बाद में केंद्र की कांग्रेस सरकार के आदेश पर अशोक सिंघल, लाल कृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती के खिलाफ जो आपराधिक केस दायर किया गया, उसमें वह गवाह बनी थी।

रुचिरा गुप्ता का जिक्र मैंने आज इसलिए किया है क्योंकि वह इन दिनों अमेरिका रह रही हैं, और राहुल गांधी के सभी कार्यक्रमों में को-आर्डिनेटर की तरह काम कर रही है । उन्होंने खुद भी हंटर कालेज के प्रोफेसर मनु भागवान के साथ मिलकर रूजवेल्ट हाउस में राहुल गांधी के साथ बातचीत के लिए एक सेमिनार रखी है ।जिसका विषय वामपंथियों के लोकप्रिय मुद्दे सिविल राइट्स और डेमोक्रेसी है। मैं रुचिरा गुप्ता का एक इंटरव्यू देख रहा था, जिसमें वह कह रही थी कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का पूरी दुनिया में प्रभाव पड़ रहा है, वह पूरी दुनिया में लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष के प्रतीक बन गए हैं, क्योंकि पूरी दुनिया में नफरत की राजनीति हो रही है।

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1992 और 2023 की इन दोनों घटनाओं में एक बात समान है, और वह यह है कि रुचिरा गुप्ता भारत से लेकर अमेरिका तक पर्दे के पीछे रह कर कांग्रेस के लिए काम कर रही है| रुचिरा गुप्ता से जब इंटरव्यू करने वाले एंकर ने पूछा कि इस तरह की गुफ्तगू में आप सिर्फ राहुल गांधी को क्यों बुलाते हैं, नरेंद्र मोदी को क्यों नहीं बुलाते। तो रुचिरा ने वही टिप्पणी की, जो राहुल गांधी ने सेन फ्रान्सिसको में सवाल जवाब शुरू होने से पहले चुटकी लेते हुए की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि सवाल जवाब का ऐसा सेशन आपने कभी नरेंद्र मोदी के साथ होता हुआ नहीं देखा होगा।

आप इस से अंदाज लगा सकते हैं कि राहुल गांधी के विदेशी दौरों में किस तरह के लोग, और किस मकसद से उन्हें गोष्ठियों में बुलाते हैं। चार जून को न्यूयार्क में होने वाले राहुल गांधी के एक कार्यक्रम के आयोजकों में सिर्फ मोदी या भाजपा विरोधी ही नहीं है, कुछ जाने माने भारत विरोधी तत्व भी हैं, जिनके पाकिस्तान के आतंकी संगठन जमायत-ए-इस्लामी और मुस्लिम ब्रदरहुड से ताल्लुक हैं।

इन आयोजकों में से एक तंजीम अंसारी हैं, तंजीम अंसारी मुस्लिम कम्युनिटी आफ न्यूजर्सी का पदाधिकारी है| मुस्लिम कम्युनिटी आफ न्यूजर्सी का पाकिस्तानी अध्यक्ष इमाम जावेद अहमद इस्लामिक सर्कल आफ नार्थ अमेरिका का भी प्रोजेक्ट डायरेक्टर है, जोकि अमेरिका का कुख्यात मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन है। इस संगठन का पाकिस्तान की जमायत-ए-इस्लामी से सीधा ताल्लुक है। अहमद और अंसारी दोनों कश्मीर के मुद्दे पर भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक लाईन अपनाते हैं ।इस्लामिक सर्कल आफ नार्थ अमेरिका भारत में मोस्ट वांटेड आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सैयद सलाहुद्दीन का समर्थन करता है।

राहुल गांधी के कार्यक्रम के आयोजकों में से एक अन्य नाम मोहम्मद असलम का है, वह एक अन्य इस्लामिक संगठन मुस्लिम सेंटर ऑफ ग्रेटर प्रिन्सटन का सदस्य है। यह संगठन भी कट्टरवादी संगठन इस्लामिक सर्कल ऑफ नार्थ अमेरिका से जुडा है। भारत में प्रतिबंधित संगठन सिमी के भी इस्लामिक सर्कल ऑफ नार्थ अमेरिका से ताल्लुक हैं। अमेरिका में एक और भारत विरोधी संगठन है इंडियन अमेरिकन मुस्लिम कौंसिल, यह संस्था अमेरिका में भारत के खिलाफ लाबिंग का काम करती है। 2013 में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब इस संस्था ने अमेरिका के धार्मिक आज़ादी वाले आयोग में भारत के खिलाफ लाबिंग करने के लिए एक लाबिंग फर्म को 55 हजार डालर अदा किए थे। इसकी वेबसाईट पर हर रोज भारत के किसी न किसी कोने की ऐसी खबर प्रसारित की जाती है, जिसमें दर्शाया गया होता है कि भारत में मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है ।

राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के कार्यक्रमों के आयोजकों में इस संस्था से जुड़े मिन्हाज का नाम भी है।राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान उनके कार्यक्रमों के आयोजकों के बारे में यह खोजपूर्ण काम अमेरिका की एक प्राइवेट जांच एजेंसी "डिसइन्फो लैब" ने किया है, जिसने राहुल गांधी के अमेरिका पहुंचते ही ट्विटर हेंडल पर सारी जानकारी साझा कर दी। अब आप अंदाज लगा सकते हैं कि राहुल गांधी ने अपने पहले तीन दिन के भाषणों में भारत के मुसलमानों के मानवाधिकारों को लेकर इतनी बातें क्यों की हैं। उनका कोई भी भाषण, किसी भी सवाल का जवाब मुस्लिम के बिना खत्म नहीं हो रहा, वह मुस्लिम के साथ दलित को जोड़कर भारत में मुस्लिम दलित वोटबैंक के समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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    यहां तक कि पहली जून को वाशिंगटन डी. सी. के नेशनल प्रेस क्लब में जब उनसे पूछा गया कि आप हिंदू पार्टी भाजपा का विरोध करते हुए धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन में हैं? तो राहुल गांधी ने कहा कि ''मुस्लिम लीग पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, मुस्लिम लीग के बारे में कुछ भी गैर-धर्मनिरपेक्ष नहीं है|'' भारतीय जनता पार्टी ने उनके इस बयान पर हैरानी प्रकट की है कि जिस पार्टी के नाम में ही मुस्लिम है, वह सेक्युलर कैसी हो सकती है।

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