Rahul in Rajasthan: गहलोत-पायलट का सीजफायर लंबा नहीं चलेगा
राहुल गांधी की पदयात्रा राजस्थान पहुंचने से पहले ही प्रदेश कांग्रेस की आपसी कलह फिर भड़क उठी है। राहुल और प्रियंका की इच्छा सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की है लेकिन गहलोत किसी हालत में यह होने नहीं देंगे।

Rahul in Rajasthan: कहते हैं रेगिस्तान में रेत गर्मियों में गर्म भी जल्दी होती है और सर्दियों में ठंडी भी जल्दी होती है। राजस्थान में पारा इतना गिर गया है कि माऊंट आबू में बर्फ जमने लगी है, लेकिन जैसे जैसे पारा गिर रहा है, वैसे वैसे राजस्थान की राजनीति का पारा चढ़ रहा है।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान में प्रवेश से पहले ही अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर कांग्रेस से गद्दारी का बम फोड़ दिया था। इस बम धमाके ने दस जनपथ की चूलें हिला दी थीं। क्योंकि अशोक गहलोत के खंडन के बावजूद अभी भी यही माना जाता है कि गांधी परिवार ही सचिन पायलट को सीएम बनवाना चाहता है।
इस धमाकेदार बयान के बाद राहुल गांधी ने गहलोत और पायलट दोनों को पार्टी के लिए एसेट्स कह कर सीज फायर करवाने की कोशिश की थी, लेकिन अशोक गहलोत ने राहुल गांधी के कहे का अपनी मर्जी से अर्थ निकाल कर उनकी सीजफायर की कोशिश को भी नाकाम कर दिया।
आखिर कांग्रेस के संगठन महासचिव वेणुगोपाल को जयपुर जाकर राहुल की यात्रा निकल जाने तक दोनों में सीजफायर करवाना पड़ा। वेणुगोपाल ने हाथ पैर जोड़ कर अशोक गहलोत को मनाया है। वेणुगोपाल अशोक गहलोत से बड़े नेता नहीं हैं। जिस पद पर वेणुगोपाल अब हैं, उस पद पर अशोक गहलोत पांच साल रह चुके हैं।
यह भी खबर आई कि गहलोत ने वेणुगोपाल से सख्त लहजे में बात की। इसलिए यह सीजफायर स्थाई युद्ध विराम नहीं है। वेणुगोपाल के दिल्ली लौटने से पहले ही सचिन पायलट समर्थक मीडिया ने यह कह कर अशोक गहलोत को फिर भडका दिया कि राजस्थान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का एलान हो जाएगा।
लेकिन अशोक गहलोत यह किसी हालत में नहीं होने देंगे। अव्वल तो आलाकमान अशोक गहलोत को हटाने के बार में अब सोचेगा ही नहीं। अगर सचिन पायलट के दबाव में हाईकमान ने अशोक गहलोत को हाथ पैर जोड़ कर राजी कर भी लिया, तो भी सचिन पायलट तो मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।
वैसे अगर तुलना की जाए, तो अशोक गहलोत बड़े एसेट्स हैं और सचिन पायलट छोटे एसेट्स हैं। कांग्रेस यह भी अच्छी तरह जानती है। कांग्रेस के पास अब अध्यक्ष का पद भी नहीं बचा कि वह उन्हें दिल्ली लाकर अध्यक्ष पद पर बिठा दें। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ कर वेणुगोपाल की कुर्सी पर बैठना कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस में अगर थोड़ी भी बुद्धि होगी, तो अशोक गहलोत को डिस्टर्ब नहीं करेगी।
विधानसभा चुनावों में अब सिर्फ दस महीने बाकी बचे हैं। दस महीने पहले तो चुनावी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भारतीय जनता पार्टी ने दस महीने पहले ही जन आक्रोश यात्रा शुरू कर चुनावी बिगुल बजा दिया है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा तीन दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करनी है, जेपी नड्डा ने पहली दिसंबर को ही जयपुर से जन आक्रोश यात्रा को रवाना कर दिया, जो सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी। जबकि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा तो 15 दिन में सात जिलों के सिर्फ 18 विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी।
अब राहुल की इस यात्रा को सचिन पायलट की गुर्जर सेना ने काले झंडे दिखा दिए, तो सीजफायर राहुल गांधी की मौजूदगी में टूट जाएगा और कांग्रेस में गृह युद्ध शुरू हो जाएगा। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का सबसे मुश्किल क्षेत्र है।
इस बीच राहुल गांधी की पदयात्रा राजस्थान पहुंचने से ठीक पहले कांग्रेस के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। यह संकट विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने खड़ा किया है, जिन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई है कि विधानसभा अध्यक्ष को उन 80 विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने के निर्देश दिए जाएं, जिन्होंने 25 सितंबर को इस्तीफे दिए थे।
राजेन्द्र राठौड़ का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष सरकार को बचाने में लगे हैं, इसलिए इस्तीफे मंजूर नहीं कर रहे। नियम यह है कि अगर कोई विधायक खुद विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश हो कर इस्तीफा देता है, तो अध्यक्ष के पास उसे मंजूर करने के सिवा कोई चारा नहीं होता। इन 80 विधायकों ने 25 सितंबर को न सिर्फ खुद अध्यक्ष के सरकारी आवास पर जा कर व्यक्तिगत तौर पर इस्तीफे सौंपे थे, बल्कि उनके घर पर भोज भी किया था।
राठौड़ ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि वह विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दें कि वह इस्तीफे स्वीकार करें। वैसे इस तरह की याचिकाओं पर कोर्ट जल्दी फैसला नहीं करती। महाराष्ट्र के 16 विधायकों की बर्खास्तगी पर फैसला पिछले कई महीनों से सुप्रीमकोर्ट में लटका हुआ है। राजेंद्र राठौड़ की याचिका पर हाईकोर्ट कब फैसला लेता है और क्या फैसला लेता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
इतना तय है कि कांग्रेस सरकार के सामने यह नया संकट है, जिसका सामना करने के लिए उसे तैयार रहना होगा। वह भी ऐसे समय में जब 18 दिसंबर तक राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में होगी। वह तीन दिसंबर को राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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