Imran Khan: गिफ्ट में भी भ्रष्टाचार का खेल, इमरान खान को मिली जेल
Imran Khan: जैसे भारत में विशिष्ट जांच एजंसियों के लिए विशेष न्यायालय स्थापित किये जाते हैं वैसे ही पाकिस्तान में राजनीतिक भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनी नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) की अपनी विशेष अदालत है। इस अदालत में सरकारी भ्रष्टाचार की सुनवाई की जाती है।
इसी नैब अदालत के लंबे समय से जज हैं मोहम्मद बशीर। इन मोहम्मद बशीर के नाम यह रिकार्ड दर्ज है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पाकिस्तान के अधिकांश पूर्व प्रधानमंत्रियों को भ्रष्टाचार का दोषी करार देते हुए जेल की सजा सुनाई है। फिर वो नवाज शरीफ हों, सैय्यद युसुफ रजा गिलानी हों, शाहिद खकान अब्बासी हों या फिर अब इमरान खान हों।

बीते दो दशक का रिकार्ड देखें तो शाहबाज शरीफ को छोड़कर पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठनेवाले के खिलाफ नैब भ्रष्टाचार का केस दर्ज करता ही है, और उसकी सुनवाई मोहम्मद बशीर की इकलौती अदालत में आती ही है। इन्हीं मोहम्मद बशीर ने कुछ साल पहले दिसंबर 2018 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जब अल-अजीजिया करप्शन केस में सजा सुनाई थी तो इमरान खान ने मोहम्मद बशीर को 'हीरा जज' करार दिया था।
तब इमरान और उनकी पार्टी ने मोहम्मद बशीर की इतनी तारीफें की मानों इमरान खान के कहने पर ही नैब कोर्ट से नवाज शरीफ को सजा हुई हो। लेकिन आज उन्हीं मोहम्मद बशीर ने उसी नैब कोर्ट में जब इमरान खान और उनकी तीसरी बीवी बुशरा को भ्रष्टाचार का दोषी करार देते हुए 14-14 साल की सजा और 78-78 करोड़ का जुर्माना सुना दिया तो इमरान की पार्टी पीटीआई मोहम्मद बशीर पर थू थू करती घूम रही है।
संभवत: मोहम्मद बशीर भी इस बात को समझते थे कि इमरान खान के खिलाफ फैसला सुनाना उनके लिए कठिन होगा, इसलिए 20 जनवरी को ही उन्होंने पाकिस्तान सरकार और इस्लामाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लैटर लिखा था कि 25 जनवरी से 14 मार्च तक उन्हें छुट्टी पर भेज दिया जाए। इसके लिए उन्होंने अपनी सेहत का हवाला भी दिया था। वो 14 मार्च तक छुट्टी इसलिए चाहते थे क्योंकि 14 मार्च को ही वो रिटायर भी होनेवाले हैं।
संभवत: वह नहीं चाहते थे कि इमरान खान को सजा सुनाने के 'दोषी' बनें लेकिन न तो सरकार से उनकी छुट्टी मंजूर हुई और न ही इस्लामाबाद हाईकोर्ट से। आखिरकार 'मजबूरन' 31 जनवरी को उन्होंने इमरान खान और उनकी तीसरी बीवी के खिलाफ वह फैसला सुना दिया जिसे सुनने के बाद पीटीआई वर्करों द्वारा जज की गयी तारीफें उसके खिलाफ थू थू में बदल गयी।
इमरान खान और उनकी तीसरी बीवी बुशरा पर आरोप है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहते हुए उन्हें जो गिफ्ट मिलता था वो उसे बेचकर पैसा अपने पास रख लेते थे। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज) का आरोप है कि ऐसा करके उन्होंने पाकिस्तान के राजकीय कोषागार (तोशाखाना) को करीब 1500 से 2,000 करोड़ का नुकसान पहुंचाया है।
इनमें से जिस 'ग्राफ डॉयमंड सेट' केस में इमरान खान को नैब कोर्ट के जज मोहम्मद बशीर द्वारा सजा सुनाई गयी है उसका किस्सा जितना महत्वपूर्ण है उतना ही शर्मनाक भी। पाकिस्तान का प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान खान ने आठ बार सऊदी अरब का दौरा किया था। इन दौरों के दौरान सऊदी अरब से उन्हें कुछ न कुछ गिफ्ट भी मिलते थे। कभी सोने की एके 47 राइफल तो कभी हीरे जवाहरात के सेट।
ऐसे ही एक दौरे में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा उन्हें लंदन की ग्राफ डॉयमंड द्वारा तैयार किया गया एक हीरे का सेट दिया गया, जिसमें हीरों से जड़ी एक घड़ी, पेन और अंगूठी शामिल थी। वैसे तो ऐसे आइटम की बाजार में कोई कीमत नहीं लगती क्योंकि ये स्पेशल आर्डर पर तैयार करवाये जाते हैं। फिर भी इनमें लगे हीरे और जवाहरात से इनकी कीमत तय होती है। इस लिहाज से इस सेट की कीमत 2 अरब या 200 करोड़ पाकिस्तानी रूपये आंकी गयी थी।
अब इमरान खान ने किया यह कि अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए इस गिफ्ट सेट को दुबई में बेच दिया। 2022 में जब इस बात का खुलासा हुआ तो पाकिस्तान में इमरान खान बुरी तरह घिर गये। इसका कारण इसका मंहगे होने से अधिक इसे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा दिया जाना था क्योंकि सऊदी अरब को पाकिस्तानी अपना माई बाप समझते हैं। तिस पर जिस घड़ी को दुबई के ब्लैक मार्केट में बेचने की बात सामने आ रही थी उस पर काबा की फोटो बनी हुई थी। इस लिहाज से यह मंहगी भी थी और पवित्र भी जिसे इमरान खान ने पैसे के लालच में बेच दिया था।
1974 से पाकिस्तान में जो तोशाखाना एक्ट काम कर रहा है उसमें नियम है कि अगर कोई सरकारी पदाधिकारी विदेश में कोई मंहगा गिफ्ट पाता है तो उसे सरकारी खजाने में जमा कराना होता है। अगर वह उसे अपने पास रखना चाहता है तो 2022 से पहले उस गिफ्ट का 20 प्रतिशत पैसा देकर अपने पास रख सकता है। अक्टूबर 2022 में सरकार द्वारा ये नियम बनाया गया कि अब ऐसा करने के लिए सरकारी खजाने में 50 प्रतिशत रकम जमा करानी होगी।
लेकिन सरकार के नियम से कैसे खेला जाता है इसे इमरान खान के इस केस से समझा जा सकता है। सऊदी क्राउन प्रिंस द्वारा दी गयी इस घड़ी के सेट की कीमत निकालने के लिए उन्होंने इस्लामाबाद की एक घड़ी रिपेयर करनेवाली दुकान से कीमत लगवा ली। क्योंकि यह मामला अक्टूबर 2022 से पहले का था इसलिए इस कीमत के आधार पर 20 प्रतिशत सरकारी खजाने में जमा करवा दिया तथा लगभग 200 करोड़ की कीमत वाले उस गिफ्ट सेट को दुबई के ब्लैक मार्केट में बेच दिया।
यह खबर जब सामने आयी तो न केवल पाकिस्तान बल्कि सऊदी अरब का सिर भी शर्म से झुक गया। आखिर किस देश का शासक ऐसा होगा जो इतनी गिरी हरकत करेगा कि मित्र देश से मिले किसी मंहगे गिफ्ट को न खुद रखे, न सरकारी खजाने में जमा कराये बल्कि ब्लैक मार्केट में बेचकर पैसा वसूल ले?
बहरहाल, मोहम्मद बिन सलमान की हीरे वाली घड़ी बेचना इमरान को इतना भारी पड़ा है कि इसी मामले में उनकी सरकार गयी, उनकी नेशनल एसेम्बली की सदस्यता गयी और अब इसी मामले में 14 साल की जेल भी हो गयी है। नैब कोर्ट में इमरान खान ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों का कोई खास बचाव भी नहीं किया है।
इमरान भी मानते हैं कि आरोप तो सही हैं लेकिन गिफ्ट की जो वैल्यूएशन बताई जा रही है वह गलत है। अर्थात उनको अपने किये पर कोई पछतावा नहीं बल्कि उन्हें लगता है कि रकम बढ़ा चढ़ाकर बतायी गयी है। उनकी ओर से वकीलों ने अपनी दलील देने के बजाय सुनवाई को अधिक से अधिक लंबा खींचने पर अधिक जोर दिया। कुछ ऐसा ही हाल ऑफिशियल सिक्रेट एक्ट लीक करने के मामले में भी हुआ जिसमें इमरान खान ने सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दावा किया था कि अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि उनकी सरकार गिराये जाने का प्रयास चल रहा है।
अब इन दोनों ही मामलों में इमरान खान को कुल 24 साल की जेल हो चुकी है। 10 साल और 14 साल। स्वाभाविक है पाकिस्तान में 8 फरवरी को नेशनल असेम्बली का इलेक्शन है इसलिए उनकी सजा को बहुत से लोग इस इलेक्शन से जोड़कर देखेंगे। कुछ हद तक ये बात सही भी है लेकिन असल मुद्दा तो पड़ोसी देश के लीडर्स के चरित्र का है।
अपने इसी भ्रष्ट चरित्र के बूते पर वहां के नेता भारत को चुनौती देते रहते हैं और हम उन्हें महत्व भी देने लगते हैं। भ्रष्टाचार के जिस निम्न कोटि के आरोप में इमरान खान को जेल हुई है वह एक मुल्क के तौर पर पाकिस्तान के लीडरों के पतन की भी कहानी है। ऐसे चरित्रहीन भ्रष्ट नेताओं से भरे पाकिस्तान से भारत रिश्ता भी रखे तो क्या हासिल कर लेगा?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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