Imran Khan: तोशाखाना तो बहाना है, इमरान को चुनाव से दूर हटाना है
Imran Khan: पाकिस्तान में सरकारी खजाने को तोशाखाना कहते हैं और उस तोशाखाना से सामान गायब करने या नियमों के विरुद्ध जाकर तोहफों को हथिया लेने के पहले आरोपी नहीं है इमरान खान। नवाज शरीफ से लेकर आसिफ जरदारी तक पर भी इस तरह के कई आरोप हैं। पर सजा इमरान खान को हुई तो इसका एक ही मतलब है कि मौजूदा हुकूमत और फौज किसी तरह से अगले चुनाव में तहरीक ए इंसाफ पार्टी और उसके चेयरमैन इमरान खान को बाहर रखना चाहती है।
इमरान खान को तोशाखाना मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई है, इसका मतलब है कि वह अगले पांच साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते। पर यह खेल मौजूदा सरकार के लिए इतना आसान नहीं होगा। पाकिस्तान की ऊंची अदालतों से इमरान खान कई बार अपना बचाव कराते रहे हैं और उम्मीद है कि इस बार भी इस्लामाबाद हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट से उनको राहत मिल जाएगी। चीफ जस्टिस उमर अता बांदियाल को उनका संरक्षक ऐसे ही नहीं कहा जाता।

वैसे, तोशाखाना का मामला है बड़ा दिलचस्प। प्रधानमंत्री के नाते विदेशों से इमरान खान को जो भी तोहफे मिलते, घर में बैठी उनकी बेगम बुशरा बीवी उसको ठिकाने लगा देती। पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार तोहफे सरकारी तोशाखाना में जमा होने की बजाए सीधे प्रधानमंत्री आवास में आते और बुशरा बीवी तय करती कि किसको खजाने में जमा करना है और किसे अपने पास रख लेना है। फिर नियमों की खानापूर्ति की जाती। बुशरा बीवी की दोस्त फराह गोगी तोहफे को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने जाती और सीधे कैश बैग में भरकर स्पेशल विमान से लेकर आती थी। तब न सेना उनसे पूछती थी और न कोई अन्य सरकारी महकमा।
तोशाखाना का सबसे बड़ा घोटाला तब सामने आया जब दुबई के एक व्यापारी उमर फारूक जहूर ने यह दावा किया कि इमरान खान को सउदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जो हीरो से जड़ित घड़ी दी थी, उसे उन्होंने 20 लाख डॉलर में इमरान खान से खरीद लिया है। उसने उस तोहफे को बकायदा अपने घर से लाइव जीओ टीवी को दिखाया। जहूर ने उस हीरे जड़ी घड़ी का बाजार में अंतरराष्ट्रीय मूल्य कई गुणा अधिक बताया था। लेकिन इमरान खान ने यह दावा किया था कि उनके लोगों ने वह घड़ी तोशाखाना से खरीद कर यहीं एक स्थानीय दुकानदार को बेच कर नियमानुसार 20 प्रतिशत पैसा जमा करा दिया था। इस घोटाले के बाद तो तोशाखाना से मंगाये और गायब किए सामानों की लंबी फेहरिस्त आ गई। उनमें कुछ जेवर, एक सोने की परत वाली पिस्तौल, करतार साहिब रूट के उद्घाटन के समय सिखों द्वारा दिए गए सोने के कलश इत्यादि तोशाखाना से गायब हुई चीजों में शामिल मिले।
इमरान खान के खिलाफ तोशाखाना केस इस्लामाबाद हाई कोर्ट में पहले दर्ज कराया गया। पर इस्लामाबाद हाइकोर्ट ने निचली अदालत से केस की सुनवाई के लिए कहा और लगभग डेढ साल बाद अब सेशन कोर्ट ने इमरान को सजा सुनाया है।
भ्रष्टाचार के मामलों में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्रियों के जेल जाने का इतिहास बहुत लंबा है। इमरान खान से पहले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, बेनजीर भुट्टो, शाहिद खक्कान अब्बासी, जुल्फिकार अली भुट्टो और हुसैन शाहिद सुहरावर्दी भी जेल जा चुके हैं। पर इनमें से सभी बाद में ऊपरी अदालत से बरी भी कर दिए गए। इसलिए इमरान खान को भी तोशाखाना मामले में जमानत मिल जाएगी और समय के साथ केस भी खत्म होने की संभावना है। पर इमरान फिलहाल केसों से निजात नहीं पा सकेंगे। क्योंकि उन पर केवल तोशाखाना का केस ही नहीं है। जज को धमकाने से लेकर सेना के खिलाफ विद्रोह पैदा करने तक का मामला चल रहा है। इस समय उन पर 180 मुकदमें चल रहे हैं, जिनमें से किसी न किसी मुकद्दमें में रोज ही उनकी पेशी होती है।
मौजूदा हुकूमत को इमरान खान को जेल में डालने से दो मतलब सधते हैं। जेल में रहकर इमरान खान रोजाना मीडिया में नहीं आ सकते जिससे चुनाव में उनकी भागीदारी खत्म या कम की जा सकती है। दूसरा, खुद इमरान को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने के फैसलों को कुछ दिन और बरकरार रखकर उनको भी चुनावी समर से दूर किया जा सकता है। पाकिस्तान में चुनाव कायदे से अक्टूबर या नवंबर में होने चाहिए, पर फिलहाल इसमें देरी होती दिखाई दे रही है, क्योंकि मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नये वोटर लिस्ट के हिसाब से चुनाव कराए जाने का ऐलान किया है जिसको तैयार करने में कम से कम चार पांच महीने का समय मिल जाएगा।
पाकिस्तान में चुनाव हमेशा एक केयरटेकर सरकार की देखरेख में किया जाता है। इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मौजूदा सरकार 9 अगस्त को काम काज छोड़ कर एक निगरा सेटअप को सत्ता सौंप सकती है। निगरा यानी कामचलाऊ सरकार की जिम्मेदारी जिसे भी दी जाएगी, उसकी पहली कोशिश तब तक चुनाव टालने की होगी, जब तक कि इमरान खान को एक दो और मामले में सजा नहीं हो जाती और यह निश्चित नहीं कर लिया जाता कि खान और उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा। इस फैसले में फौज की भी सहमति है।
9 मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के विरोध में तहरीक ए इंसाफ द्वारा सेना के प्रतिष्ठानों पर हमले किए जाने के बाद से सेना इमरान खान को निबटाने में लगी हुई है। उस दिन के सभी आरोपियों को आर्मी कोर्ट में मुकदमा चलाने का फैसला फौज और सरकार ने कर लिया है। इमरान खान के खिलाफ भी आर्मी कोर्ट में मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन इसमें अभी चीफ जस्टिस बांदियाल अडंगा लगाए हुए हैं। वह सामान्य नागरिकों के मामले आर्मी कोर्ट में चलाए जाने के खिलाफ हैं और यह ऐलान कर चुके हैं कि वह सेना को ऐसा करने से रोकेंगे।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और तमाम इनके सहयोगी इस इंतजार में हैं बांदियाल की सुप्रीम कोर्ट से बिदाई हो तो फिर इस मामले में तेजी लाई जाए। बांदियाल का कार्यकाल 16 सितंबर तक है। उसके बाद जस्टिस काजी फैज ईसा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने वाले हैं। जस्टिस ईसा का इमरान खान के साथ पहले से ही एक द्वंद्व चल रहा है। प्रधानमंत्री रहते इमरान खान ने जस्टिस ईसा और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चलवाया था। जस्टिस ईसा ने भी इमरान खान की लंदन स्थित प्रापर्टी के बारे में तमाम जानकारियां दी थी और यह आरोप लगाया था कि वे सारी संपत्तियां ब्लैक मनी से खरीदी गई हैं। इसलिए यह तय माना जा रहा है कि जो सहुलियतें मौजूदा चीफ जस्टिस बांदियाल के रहते इमरान खान को मिल रही हैं वे काजी फैज ईसा के समय नहीं मिल सकती।
पाकिस्तान के मौजूदा हुक्मरानों ने इस बात की भी तैयारी कर ली है, यदि इमरान खान को निबटाने में देरी भी हो तो भी पाकिस्तान के शासन प्रशासन का काम काज प्रभावित ना हो। एक अलग विधेयक लाकर निगरा हुकूमत को वे तमाम अधिकार दे दिए गए हैं जो एक नियमित सरकार के पास होते हैं। यानी उनको सभी प्रकार के आर्थिक व प्रशासनिक फैसले लेने के लिए अधिकार संपन्न कर दिया गया है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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