Opposition Abuses Modi: चुनावों में अपशब्दों का प्रयोग क्या जरूरी हो गया है?
Opposition Abuses Modi: कांग्रेस का हर नेता हर चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगा है। जब जब कोई नई गाली निकाली जाती है, तब तब लोग पुरानी बातें भी याद करते हैं।

कांग्रेस में भीतर ही भीतर एक मंथन चल रहा है कि अगर विपक्षी दलों को राहुल गांधी के नाम पर एतराज है, तो प्रियंका वाड्रा का नाम आगे किया जाए। यह सुझाव बुरा नहीं है, कांग्रेस के नेता प्रियंका वाड्रा को एक दशक से तुरुप का पत्ता बताते रहे हैं, शायद अब यह तुरुप का पत्ता चलने का वक्त आ गया है। लेकिन शायद कांग्रेसी खुद भूल गए हैं कि यह तुरुप का पत्ता वे पहले चल चुके हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह फीलर फैंका गया था कि प्रियंका वाड्रा कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा होंगी। तब एक पत्रकार ने उनसे ही पूछ लिया था कि कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, तो उन्होंने कहा था कि मेरे सिवा कोई और दिखता है क्या ? यह खुद उनकी तरफ से जनता में फैंका गया फीलर था, लेकिन जब कोई रिस्पांस नहीं मिला तो उन्होंने कुछ दिन बाद खुद कह दिया था कि वह तो मजाक कर रहीं थी। वह मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार नहीं है| तो यह तुरुप का पत्ता चला जा चुका है।

एक समय था जब प्रियंका कांग्रेस में सक्रिय नहीं थी, और राहुल गांधी राजनीति में पिट रहे थे, तो कांग्रेस के नेता और कांग्रेस समर्थक मीडिया उन्हें कांग्रेस का तुरुप का पत्ता बताया करते थे। अब जब प्रियंका वाड्रा पिछले पांच साल से कांग्रेस में सक्रिय है, लोगों ने प्रियंका को देख सुन लिया है। अब लोग राहुल और प्रियंका की तुलना करते हैं, तो राहुल को बेहतर पाते हैं।
राहुल गांधी पन्द्रह साल से राजनीति में है, और उन्होंने काफी कुछ सीखा है। हालांकि अपने विरोधियों के बारे में किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, इसमें दोनों उन्नीस बीस ही हैं। राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के लिए खून का दलाल, चौकीदार चोर और सारे मोदी चोर कह कर अपना नाम कमा चुके हैं। चोकीदार चोर के मुद्दे पर तो उन्हें सुप्रीमकोर्ट से माफी भी मांगनी पड़ी थी, जब उन्होंने सुप्रीमकोर्ट के हवाले से मोदी को चौकीदार चोर कहा था। बाद में सारे मोदी चोर कह कर बुरी तरह फंस गए हैं और अब अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।
गालीगलौज कांग्रेस की भाषा में शामिल हो चुका है। हालांकि यह उनकी पारिवारिक विरासत नहीं है, क्योंकि वे खुद को फिरोज गांधी के वारिस नहीं मानते, खुद को नेहरू और इंदिरा परिवार के वारिस मानते हैं, इसलिए उस परिवार से उनकी तुलना करनी चाहिए। नेहरू और इंदिरा गांधी ने अपने विरोधियों के लिए गालीगलौज की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया था। गालीगलौज की भाषा सोनिया गांधी से शुरू हुई, जिनकी परवरिश इटली में हुई है।
सोनिया गांधी ने सिर्फ नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। 2002 के दंगों पर बिना किसी अदालत का फैसला आए सोनिया गांधी ने उन्हें मौत का सौदागर कह दिया था, जबकि किसी हत्यारे को भी तब तक हत्यारा नहीं कह सकते, जब तक उस पर आरोप साबित न हो जाए। इससे पहले सोनिया गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। संसद सत्र के सत्रावसान पर प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता का भाषण हुआ करता था, उसे इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि विपक्ष की नेता के नाते समापन भाषण की मर्यादा भी सोनिया गांधी ने तोड़ दी थी।
सोनिया गांधी की यह परंपरा कांग्रेस में दिन दुगनी रात चौगुनी प्रगति कर रही है। कांग्रेस का हर नेता हर चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगा है। जब जब कोई नई गाली निकाली जाती है, तब तब लोग पुरानी बातें भी याद करते हैं। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को जहरीला सांप कह दिया। इससे पहले गुजरात विधानसभा के चुनाव में उन्होंने मोदी को रावण कह दिया था।
नरेंद्र मोदी विपक्षी नेताओं की बदजुबानी को भुनाने का मौक़ा क्यूं चूकें, सो वह हर बार उस मौके को भुनाते हैं। इस बार भी कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में उन्होंने बताया कि कांग्रेसियों ने उन्हें अब तक 91 गालियां निकाली हैं। कांग्रेस को हर चुनाव में मोदी के बारे अपशब्द कहना भारी पड़ता है। लेकिन अपनी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखती। कांग्रेस के नेता नरेंद्र मोदी को गालियां देना बंद नहीं कर रहे। हालांकि कई बार झेंप मिटाने के लिए कह देते है कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था। जैसे अभी नरेंद्र मोदी को जहरीला सांप कहने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने सफाई दी कि उन्होंने भाजपा को जहरीला सांप कहा था, मोदी को नहीं। जबकि भाषण में उन्होंने साफ़ साफ़ मोदी को जहरीला सांप कहा था।
अब मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक ने नरेंद्र मोदी को नालायक बेटा कह दिया है। इसका सन्दर्भ यह है कि नरेंद्र मोदी ने एक बार बंजारों की रैली में कहा था कि बनारस का बेटा दिल्ली में बैठा है, वह उनके हितों की रक्षा करेगा। हालांकि नरेंद्र मोदी ने बनारस से बंजारा की अजीब तुकबन्दी करके खुद को बंजारा कह दिया था। अब उसी सन्दर्भ में प्रियांक खड़गे ने नरेंद्र मोदी को नालायक बेटा कह दिया, क्योंकि उन्होंने बंजारों के लिए कुछ नहीं किया। लेकिन जहरीला सांप के बाद अब यह नया विवाद शुरू हो गया है।
प्रियंका वाड्रा तो उन सबसे आगे निकल गई हैं। उन्होंने कह दिया है कि नरेंद्र मोदी गाली खाना सीख लें, क्योंकि कांग्रेसी उन्हें गाली देना बंद नहीं करेंगे। कर्नाटक की ही एक जनसभा में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान की खिल्ली उड़ाई है कि कांग्रेस उन्हें गालियां निकालती है। प्रियंका वाड्रा ने कहा कि नरेंद्र मोदी 91 गालियों की लिस्ट लिए घूम रहे हैं, जबकि सार्वजनिक जीवन में गालियां खाने की हिम्मत रखनी चाहिए।
इतना ही नहीं, आगे उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी मेरे भाई से कुछ सीखें, जो दस साल से सारे देश से गालियां खा रहा है, लेकिन अभी भी राजनीति में डटा हुआ है। अब वह अपने भाई की हिम्मत की दाद दे रही थी या उनकी भी खिल्ली उड़ा रही थी, यह समझने वाली बात है। अपने भाई की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा भाई देश की खातिर गोली खाने को भी तैयार है, उनके सारे परिवार ने गोलियां खाई। लेकिन नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो आपके सामने आते हैं और रोते हैं कि उन्हें गालियां दी जा रही हैं। वह आपका दुख सुनने के बजाय अपना दुःख बताते हैं। उनके इस बयान से भाई बहन की राजनीतिक परिपक्वता का अंदाज लगाना थोड़ा मुश्किल है कि कौन उन्नीस है और कौन बीस।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications