कम होते निवेश के बीच बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री, लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं
Online Games: बीते सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सात ई-स्पोर्ट्स गेमर्स से मुलाकात कर सबको चौंका दिया। इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्मों पर करीब पांच करोड़ फॉलोअर्स रखने वाले इन युवा गेमर्स और गेम डेवलपर्स से प्रधानमंत्री की इस अकस्मात मुलाकात के बहुत सारे राजनीतिक, आर्थिक और भावनात्मक अर्थ निकाले जा सकते हैं।
लेकिन अगर हम आर्थिक पक्ष की बात करें तो मुलाकात ऐसे दौर में हुई है, जब कुछ ही दिन पहले एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें भारतीय गेमिंग इंडस्ट्री में निवेशकों की घटती रुचि का संकेत दिया गया था। भारत में वर्ष 2019 गेमिंग उद्योग अपने चरम पर था। कोरोना के दौर में इसमें और अधिक उफान आया। लेकिन, मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन की इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि यह उफान बहुत लंबे समय तक नहीं टिक सका।

बेशक, वर्ष 2021 में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री में करीब 4,150 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। लेकिन, बाद के दो वर्षों में इसमें बहुत ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। 2021 की तुलना में इंडस्ट्री 2022 में 52% गिरावट के साथ लगभग 1988 करोड़ रूपए और 2023 में 77% गिरावट के साथ सिर्फ 506 करोड़ रूपए का ही निवेश हासिल कर सकी। यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि बीते एक-डेढ़ साल में निवेश ही नहीं, बल्कि गेमिंग पर यूजर्स द्वारा किए जाने वाले खर्च में भी काफी कमी आई है।
इसके बावजूद, करीब 49 करोड़ गेमर्स की मौजूदगी वाली, यह एक ऐसी इंडस्ट्री है, जिसका बाजार घटते निवेश के बावजूद लगातार फल-फूल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2023 में 16,428 करोड़ रुपए की आंकी गई देशी गेमिंग इंडस्ट्री अगले पॉंच सालों में करीब 33,243 करोड़ रूपए की हो जाएगी। ऐसे में इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। इससे जुड़े आंकड़े विस्मित करने वाले हैं।
गेमिंग इंडस्ट्री अब सिर्फ टाइमपास करने वाले गेमर्स तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि करीब तीन से चार लाख गेमर्स ऐसे भी हैं, जो प्रोफेशनल या सेमीप्रोफेशनल की श्रेणी में आते हैं और गेमिंग के इनामी मुकाबलों में नियमित रूप से हिस्सा लेते हैं। इन नेशनल-इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में लीग ऑफ लीजेंड्स, काउंटर-स्ट्राइक, ग्लोबल ऑफेंसिव, डौटा 2, ओवर वाच, फोर्टनाइट, एपेक्स, ईएसएल इंडिया प्रीमियरशिप, पीएमसीओ और पीएमपीएल आदि प्रमुख हैं, जिनकी इनामी राशि 50 लाख से 221 करोड़ रूपए तक है।
करोड़ों की दर्शक संख्या के साथ इन टूर्नामेंट्स को प्रायोजकों और विज्ञापनदाताओं से खासी बड़ी आमदनी होती है। इस क्रेज ने देश में सितारों की एक नई नस्ल खड़ी कर दी है। तीर्थ मेहता, नमन माथुर, हरप्रीत सिंह सैनी, अमीन बिन हफीज, पीयूष बाजपेई, करण देसाई, अदिति विनायक, अनुराग नौटियाल ऐसे ही कुछ चैंपियन गेमिंग स्टार हैं, जो अपने चाहने वालों के बीच मोर्टल, द मिनी फ्रिज, मिस्ट्रेस ऑफ ऐसेज, 8 बिट ठग जैसे विचित्र नामों से मशहूर हैं। तीर्थ और नमन उन सात लोगों में थे, जिनसे पीएम ने पिछले सप्ताह भेंट की थी।
इस क्षेत्र में निहित अपार संभावनाओं के मद्दे नजर भारत सरकार ई-स्पोर्ट्स को बहुत संजीदगी से ले रही है। ई-स्पोर्ट्स को एक वैधानिक खेल विधा के रूप में मान्यता देने के लिए मुख्य धारा के खेल आयोजनों में शामिल किए जाने की कवायदें शुरू हो चुकी हैं। सरकार और खेल प्राधिकरणों द्वारा ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और इसे मुख्यधारा में लाने के लिए अनेक स्तर पर पहल की गई हैं। इन्हें राष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थानों में एक उभरती हुई खेल गतिविधि के तौर पर शामिल किए जाने पर विचार चल रहा है।
हो सकता है कि आने वाले वर्षों में बहुत सारे शीर्ष खेल आयोजनों में ई-स्पोर्ट्स भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते नजर आएं। राज्य सरकारें भी इस मामले में पीछे नहीं हैं और ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बना रही हैं। तेलंगाना सरकार ने हाल ही में ई-स्पोर्ट्स को एक खेल के रूप में मान्यता दी है और इसके विकास के लिए कदम उठा रही है।
भारत सरकार इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। साथ ही इस इंडस्ट्री का अबाध विकास सुनिश्चित करने के लिए इसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता, खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा, सट्टेबाजी से बचाव आदि चीजों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
बीते हफ्ते की मुलाकात में प्रधानमंत्री ने इन गेम डेवलपर्स से एक और महत्वपूर्ण बात कही थी। वह यह कि भारतीय क्रिएटर्स, पश्चिमी शूटिंग गेम्स के बजाए ऐसे गेम्स रचें जो जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता जैसे वास्तविक जीवन से जुड़े मुद्दों का समाधान प्रस्तुत करने वाले हों। इसमें कोई संदेह नहीं कि गेमिंग का खेलने वाले की सोच पर काफी गहरा असर पड़ता है।
ऐसे में यदि हमारे डेवलपर्स ऐसे गेम बनाते हैं, जो लोगों को कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करें तो इससे समाज में काफी सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। जैसे कि शिक्षा और कौशल विकास, डिसीजन मेकिंग, टीम भावना, समावेशी समाज, सामुदायिकता की भावना को बढ़ावा देने, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसरों के सृजन, मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहन, तनाव से छुटकारा, सहयोग भावना के विकास, पर्यावरण चेतना जैसे लक्ष्यों को हासिल करने में ई-स्पोर्ट्स काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
हालांकि पर्यावरण और जलवायु परिर्वतन जैसे मुद्दों को लेकर ई-स्पोर्ट्स की भूमिका को लेकर विरोधाभास की स्थिति सामने आ सकती है। क्योंकि अगर इस इंडस्ट्री के एनवायर्नमेंट फुट प्रिंट की बात करें तो ये कुछ कम दोषी नहीं प्रतीत होते। गेमिंग कंप्यूटर, सर्वर और इससे संबंधित अन्य उपकरणों के संचालन से ऊर्जा की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ता है।
इसके अलावा, गेमिंग की बढ़ती लोकप्रियता से इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) भंडार में भी बढ़ोत्तरी होती है, जिसे अगर ठीक से प्रबंधित न किया जाए तो यह पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा, डेटा केंद्रों और क्लाउड कंप्यूटिंग पर गेमिंग इंडस्ट्री की निर्भरता भी इसके समग्र कार्बन पदचिह्न को बढ़ाती है।
ऐसे में इसके प्रसार और प्रसार के साथ बढ़ते जोखिमों के बीच संतुलन बिठाना बहुत जरूरी है। सस्टेनिबिलिटी को प्राथमिकता देना और ईको-फ्रेंडली उपायों को लागू करना इसका समाधान हो सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि इसमें ई-कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा, ऊर्जा सक्षमता पर जोर जैसी बातों को अपनाने में भी इसी उत्साह का परिचय दिया जाए, जिसे हम पिछले कुछ अर्से से ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदमों में देख रहे हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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