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Om Prakash Rajbhar: कांशीराम से मोदी तक, रंग बदलती रही है ओमप्रकाश राजभर की राजनीति

Om Prakash Rajbhar: राजनीतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से लगाए जा रहे कयासों को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने सही साबित करते हुए एक बार फिर भाजपा का सहयोगी दल बनने का फैसला कर लिया है। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ओमप्रकाश राजभर का एनडीए का दामन थामना काफी अहम माना जा रहा है। जातीय दिग्गजों को साधकर भाजपा अब अपने पुराने वोट बैंक को साधने की कोशिश और एनडीए का दायरा बढ़ाने की कोशिश में जुट गई है। ओमप्रकाश राजभर इसमें बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। राजभर ने एनडीए का हिस्सा होने के बाद कहा कि हमने 2024 का चुनाव एक साथ लड़ने का फैसला किया है और हम 18 जुलाई को दिल्ली में एनडीए की बैठक में शामिल होंगे।

ओमप्रकाश राजभर ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत कांशीराम के साथ की थी। 1981 में कांशीराम से जुड़े और बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। हालांकि, भदोही जिले का नाम संत कबीर नगर रखे जाने पर मायावती के साथ विवाद होने पर 2001 में ओपी राजभर ने मायावती से अलग होकर भारतीय समाज पार्टी का गठन किया लेकिन उनकी पार्टी कुछ खास नहीं कर सकी। जहूराबाद सीट से राजभर तो जीतते रहे, लेकिन वोट कटवा के रूप में पहचाने जाने लगे। बाद में उन्होंने अपनी पार्टी को पिछड़ा वर्ग से जोड़ने के लिए महाराजा सुहेलदेव के नाम को जोड़कर पार्टी का नाम सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी रख दिया।

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यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में पहली बार ओमप्रकाश राजभर और भाजपा के बीच गठबंधन हुआ था। इस गठबंधन के पीछे भी अमित शाह की भूमिका अहम थी। सुभासपा ने 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन करके आठ सीटों पर लड़ा था। इनमें चार पर सुभासपा ने जीत हासिल की थी। मार्च 2017 में यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया था। हालांकि, योगी सरकार में मंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी बढ़ गई और भाजपा से मतभेद भी बढ़ गए। इसके बाद से राजभर पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाकर योगी आदित्यनाथ सरकार की लगातार आलोचना करते रहे।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सुभासपा द्वारा लड़ी गई सभी 39 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी लेकिन उसके उम्मीदवार पूर्वांचल की कई सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए भाजपा उम्मीदवारों की हार का कारण भी बने थे। चुनाव के नतीजे आने के एक दिन बाद 20 मई, 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजभर को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। हालांकि राजभर दावा करते हैं कि उन्होंने 6 मई, 2019 को खुद योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया और प्रदेश की सत्ता से योगी आदित्यनाथ सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा किया। लेकिन दावे हवा में ही रह गये और चुनाव परिणाम मन मुताबिक नहीं आया तो फिर समाजवादी पार्टी से अलग हो गए। अब एक बार फिर ओमप्रकाश राजभर की एनडीए में वापसी हो गई है।

ओम प्रकाश राजभर के उस दिन से ही भाजपा के साथ जाने की चर्चा शुरू हो गई थी, जब 13 जून को वाराणसी में उनके बेटे अरुण राजभर के विवाह का आशीर्वाद समारोह था। इस समारोह में उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर राजभर को बधाई दी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सलाहकार अवनीश अवस्थी के हाथों शुभकामना संदेश भिजवाया था। इस समारोह में भाजपा नेताओं के साथ जिस तरह से गर्मजोशी राजभर ने दिखाई उसके बाद राजभर के भाजपा के साथ जाने की चर्चा शुरू हो गई थी। उसके दो दिन बाद 15 जून की देर रात वाराणसी सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ राजभर की बंद कमरे में हुई मुलाकात में तय हो गया था कि सुभासपा जल्द ही भाजपा का दामन थामेगी।

दसअसल 2022 के विधानसभा चुनाव में राजभर मतदाताओं के प्रभाव वाले आजमगढ़, आंबेडकरनगर, गाजीपुर, बलिया, बस्ती जैसे जिलों में भाजपा के खराब प्रदर्शन ने पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजभर से हाथ मिलाने को मजबूर किया है। भाजपा का आंकलन है कि राजभर समाज का एकमुश्त वोट मिलने पर 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की घोसी, गाजीपुर, जौनपुर, लालगंज, श्रावस्ती और आजमगढ़ सीट पर फायदा मिलेगा।

जब ओमप्रकाश राजभर भाजपा से दूर हो गये तो भाजपा ने उनकी काट ढूंढने की भरसक कोशिश किया परन्तु बात नहीं बनी। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी ने राजभर समाज के पौराणिक शख्सियत राजा सुहेलदेव का बहराइच में भव्य स्मारक बनवाने के साथ आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण की घोषणा भी की थी। इसके अलावा अप्रैल में भाजपा ने आजमगढ़ के रामसूरत राजभर को विधान परिषद सदस्य मनोनीत कराया। वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से विधायक अनिल राजभर को सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में जगह दी गई।

इससे पहले पूर्वांचल के राजभर मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा ने मार्च, 2018 में बलिया जिले के नेता सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजा था। लेकिन भाजपा के इन तमाम प्रयासों के बाद भी ये नेता अपने समाज को भाजपा के साथ जोड़ने में सफल नहीं हुए जैसी भाजपा को उम्मीद थी। भाजपा के इन राजभर नेताओं का अपने समाज में वह प्रभाव नहीं रहा जैसा ओमप्रकाश राजभर का अपने समाज पर है।

पूर्वी यूपी के 21 जिलों में कुल 27 लोकसभा सीटें हैं जो भाजपा के मिशन- 2024 के लिहाज से काफी अहम हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पूर्वी यूपी की आज़मगढ़, घोसी, जौनपुर, लालगंज और गाजीपुर लोकसभा सीट हार गई थी। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए उप-चुनाव में भाजपा ने आजमगढ़ संसदीय सीट पर जीत दर्ज कर पूर्वी यूपी में अपना प्रभाव बढ़ाया है। लेकिन वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा के लिए पूर्वी यूपी की हारी हुई सीटों को जीतने के साथ जीती सीटों को बचाए रखने की भी चुनौती होगी। इस कारण भाजपा पूर्वी यूपी की जातियों में अपना जनाधार बढ़ाने की भरसक कोशिश में जुटी है।

इसी क्रम में भाजपा की नजर पूर्वी यूपी की राजभर जाति में जनाधार रखने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर जम गई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में मछलीशहर सीट पर भाजपा ने मात्र 181 वोटों से जीत हासिल की थी जबकि इस सीट पर सुभासपा को 11,223 वोट मिले थे। स्वाभाविक है सुभासपा को साथ लाकर ऐसे कम मार्जिन वाली सीटों पर भी जीत सुनिश्चित करना चाहती है। जानकारों के मुताबिक राजभर समाज का एकमुश्त वोट मिलने पर भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की घोसी, गाजीपुर, जौनपुर, लालगंज, श्रावस्ती और आजमगढ़ सीट पर फायदा हो सकता है।

बहरहाल, अमित शाह से मुलाकात के बाद दावा किया जा रहा है कि ओमप्रकाश राजभर द्वारा यूपी की 3 और बिहार की एक लोकसभा सीट की मांग की गई है। वो घोसी और चंदौली सीट पर दावा कर रहे हैं। खबर है कि गाजीपुर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव में उनके बेटे अरुण राजभर को भाजपा मैदान में उतार सकती है। इसके साथ ही राजभर को योगी कैबिनेट में भी जगह मिल सकती है। फिलहाल इन तमाम कयासों से जुड़े सवाल पर फिलहाल न भाजपा कुछ कहने को तैयार है न राजभर।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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