Nitin Desai: नितिन देसाई की आत्महत्या से सरकार और वित्तीय संस्थानों पर उठते सवाल

Nitin Desai: यह बात किसी के गले नहीं उतर रही कि फिल्म इंडस्ट्री का नामी व्यक्ति जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का गुरुभाई हो, आमिर खान, विधु विनोद चोपड़ा, आशुतोष गोवारीकर, अमिताभ बच्चन, सलमान खान से करीब से जुड़ा रहा हो, उसने 252 करोड़ रुपए का कर्ज न चुका पाने के कारण आत्महत्या कर ली हो। लेकिन ऐसा हुआ तो है। फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सेट डिजाइनर और आर्ट डायरेक्टर के तौर पर चार-चार नेशनल अवॉर्ड ले चुके नितिन चंद्रकांत देसाई के साथ यही हुआ है, जबकि करजत में 42 एकड़ में फैले उनके स्टूडियो की कीमत इससे कहीं ज्यादा ही होगी। 4 अगस्त को उनका उन्हीं के उस ड्रीम प्रोजेक्ट 'एनडी स्टूडियो' में अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसकी नीलामी की प्रक्रिया को वो रोक नहीं पा रहे थे।

अब तक मोटे तौर पर जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक 2016 में नितिन देसाई ने एक फाइनेंस फर्म एडेलविस एआरसी से 150 करोड़ रुपया उधार लिया था। उनको अपने स्टूडियो को वर्ल्ड क्लास बनाना था। बाद में 35 करोड़ रुपया और भी लिया। सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन 2020 में कोरोना वायरस फैलने से फिल्म इंडस्ट्री में दिक्कतें होनी शुरू हो गईं। वो समय से किश्तें आदि नहीं भर पा रहे थे। इसकी बड़ी वजह संभवत: कोरोना के चलते शूटिंग्स पर लगी रोक भी थी। उनका स्टूडियो रायगढ़ जिले में मुंबई से 80 किमी दूर है। कोरोना के बाद सारे प्रोडयूसर्स डर भी रहे थे, सो ज्यादा दूर की शूटिंग्स से परहेज भी कर रहे थे।

Nitin Desais case raises questions on government and financial institutions

लेकिन नितिन देसाई का खुद का मानना था कि फाइनेंस कम्पनी के कुछ अधिकारियों ने कॉन्ट्रेक्ट में ऐसी शर्तें रख दी थीं, जिनसे उनके लिए काफी मुश्किलें हो गई थीं। उनको लग रहा था कि ये लोग उनके स्टूडियो पर कब्जा करना चाहते थे। ये सारे आरोप उन 11 ऑडियो क्लिप्स में मिले हैं, जो पुलिस को उनके फोन, टेपरिकॉर्डर आदि से बरामद हुई हैं। कुल 4 नाम इन ऑडियो क्लिप्स से सामने आए हैं, जिन पर पुलिस को शक है कि इन लोगों ने नितिन देसाई पर दवाब डाला था। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम फड़नवीस ने भी ऐलान किया है कि अनैतिक दवाब की जांच करवाई जाएगी। ऑडियो क्लिप्स फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेज भी दी गई हैं।

दरअसल फाइनेंस कम्पनी इस मामले को लेकर नेशनल कम्पनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) चली गई। मुंबई की बेंच ने स्टूडियो की नीलामी का आदेश दे दिया कि जमीन बेचकर पैसा वसूला जाए। उस फैसले के खिलाफ नितिन देसाई ट्रिब्यूनल की प्रधान बेंच दिल्ली में चले गए। एक अगस्त को वहां भी उनकी याचिका खारिज हो गई तो निराश नितिन मुंबई लौटे और देर रात अपने स्टूडियो में आत्महत्या कर ली। हालांकि उनके पास सुप्रीम कोर्ट आदि जाने का विकल्प खुला था, लेकिन नितिन शायद हिम्मत हार चुके थे।

ऐसा नहीं था कि नितिन देसाई ने उपाय नहीं ढूंढे। वो सालों से शिवसेना नेता आनंद दिघे के करीबी रहे थे। आज महाराष्ट्र के सीएम शिंदे उन्हीं आनंद दिघे के शिष्य हैं, सो बात शिंदे तक भी पहुंचाई गई। कई नेताओं से उनकी बात चल रही थी। ऑडियो क्लिप से पता चला है कि वो चाहते थे उनके स्टूडियो को महाराष्ट्र सरकार अपने कब्जे में ले ले और प्रदेश की प्रतिभाओं के लिए उपयोग करे, लेकिन शायद बात बन नहीं पा रही थी।

कच्छ में जाकर लगान के गांव का सेट तैयार करना, 1942 लव स्टोरी के लिए करजत में डलहौजी जैसे हिल स्टेशन को बसाना, केबीसी का मशहूर सेट तैयार करना, जोधा अकबर का शानदार किला भी अपने स्टूडियों में तैयार करना ऐसी सैकड़ों फिल्में और सीरियल हैं, जो नितिन देसाई के काम के बिना अधूरे हैं। आप अभी भी नेटफ्लिक्स पर लगान की मेकिंग में कड़ी धूप के बीच नितिन देसाई को सेट पर मेहनत करते देख सकते हैं। रायगढ़ के चौक गांव में उनका स्टूडियो बनने के बाद से ही आस पास के 20 गांवों के युवाओं की तो ऐश ही हो गई थी। ना जाने कितने नितिन के यहां नौकरी कर रहे थे। कितने ही गांव वाले कभी भी नितिन से पैसे उधार ले जाते थे। कइयों को तो बेटी की शादी में भी मदद की। आज नितिन देसाई की आत्महत्या से वो सब भी हैरत में हैं।

फिल्मी दुनिया में फाइनेंशियल क्राइसिस के चलते आत्महत्या कोई नई बात नहीं है। ये फिल्मी दुनियां का काला सच है। जैसे ही नाम और दाम मिलने लगते हैं, लोग हवा में उड़ने लगते हैं। वो अपनों के लिए ही सेलेब्रिटी बन जाते हैं। टीवी मीडिया उन्हें टीआरपी के लिए जरुरत से ज्यादा भाव देने लगती है। लेकिन उनका यही बढ़ा हुआ भाव फिल्मी दुनिया के पुरोधाओं को अच्छे नहीं लगते और वो उन्हें छोड़कर फिर से किसी नए चेहरे पर दांव लगाने लगते हैं। इसलिए फर्श से अर्श तक पहुंचकर फिर से फर्श पर आने की यहां सैकड़ों घटनाएं हैं।

जैसे ही आप खुद को सुपरमैन समझकर चादर से जरूरत से ज्यादा पैर फैलाने लगते हो, वित्तीय संकट उत्पन्न होने लगता है। वैसे भी एक बार सेलेब्रिटी बनते ही, आपके रहन सहन का खर्च एकदम से कई गुना बढ़ जाता है। आप फ्लाइट से कम नहीं चल सकते, आप फाइव स्टार से कम होटल में नहीं रुक सकते, कम से कम एप्पल का फोन और मर्सिडीज कार से चलना जरुरी है, सेक्रेट्री या मैनेजर तो होना ही चाहिए, अरमानी का सूट या रॉलेक्स की घड़ी तो आपकी यूनीफॉर्म में शामिल हो जाता है। लेकिन ये सब जरूरतें पूरी करते करते आप सड़क पर आ जाते हैं, या फिर लोग मजाक बनाने लगते हैं। कई केसों में नतीजा सुसाइड के तौर पर सामने आता है। वित्तीय संकट के समय रिश्ते भी धोखा देने लगते हैं तो तनाव की डबल डोज हो जाती है।

ऐसे में सवाल सरकार और व्यवस्था पर भी उठता है कि दिखावे मात्र को फिल्म क्षेत्र को इंडस्ट्री घोषित कर दिया गया लेकिन सस्ते और आसान शर्तों वाले कर्ज का कोई प्रावधान नहीं किया गया। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई कि कोरोना के दौरान जो इतने बड़े बड़े नुकसान प्रोडक्शन हाउसेज को हुए हैं, और उसी के चलते इंडस्ट्री से जुड़े नितिन देसाई जैसे विशेषज्ञों को हो रहे हैं, वो इस वित्तीय संकट और मानसिक संकट से कैसे उबरें? केन्द्र और राज्य दोनों सरकारों पर ये सवाल उठते हैं और उन्हें ही इंडस्ट्री के बाकी लोगों को कैसे बचाया जाए, इस बारे में कदम उठाने होंगे। सोचिए जब इतने सितारों और नेताओं के सम्पर्क में रहने वाला नामी व्यक्ति हताशा में आ सकता है तो बाकी सब का क्या होगा?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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