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Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी पर सजगता और स्पष्ट नीति की आवश्यकता

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा 25 से 27 अगस्त तक 'बी-20' समिट इंडिया-2023' के आयोजन में हुई क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा ने देश भर के अर्थशास्त्र और वित्तीय क्षेत्र के विद्वानों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। इस सम्मेलन में लगभग 55 देशों के 1,500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे थे। सम्मेंलन की थीम आर.ए.आई.एस.ई. - जिम्मेदार, त्वरित, अभिनव, दीर्घकालीन और न्यायसंगत व्यवसाय था।

उल्लेखनीय बात यह हुई कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी एक चुनौती पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में अधिक से अधिक एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी ने बताया कि उन्हें लगता है कि इस बारे में एक वैश्विक ढांचा तैयार करना चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों के हितों का ख्याल रखा जाए।

Cryptocurrency

क्रिप्टोकरेंसी अब दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों की चिंता में शामिल है लेकिन अब तक इसको लेकर कोई ग्लोबल फ्रेमवर्क तैयार नहीं किया गया है। अमेरिका के कुछ राज्यों में इसे कानूनी मान्यता है, तो यूरोपीय संघ में बुनियादी रेगुलेशन विकसित कर इसे टैक्स के दायरे में लाया गया है। कनाडा ने भी क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित किया है। यूके में फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी ने इससे संबंधित नियम बनाए हैं।

भारत में क्रिप्टो करेंसी की स्थिति
क्रिप्टो करेंसी ऐंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 में पेश किया जाना था, पर इसे पेश नहीं किया जा सका। हालांकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में डिजिटल करेंसी पर टैक्स लगाने की घोषणा की, तो इसे वर्चुअल करेंसी को मान्यता के तौर पर देखा गया। अप्रैल में उनका बयान था कि जी20 के सदस्य देशों के बीच इस बात को लेकर व्यापक स्वीकार्यता है कि क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर किसी भी नए नियम को वैश्विक स्तर पर समन्वित करने की आवश्यकता है।

इन सारी बातों के बीच तथ्य यही निकल कर सामने आया कि भारत में क्रिप्टो करेंसी रेगुलेशन के अन्तर्गत अब तक नहीं आ पाया है। फिर प्रश्न यह है कि बिना किसी रेगुलेशन के इतनी भारी मात्रा में भारत के अंदर वर्चुअल करेंसी पर निवेश कैसे हो रहा? वास्तव में यहां लोग अपने जोखिम पर क्रिप्टो करेंसी में निवेश कर रहे हैं। कल को क्रिप्टो में निवेश करने वालों का सारा पैसा डूब जाए तो वे ठगी की शिकायत कर पाएंगे लेकिन निवेश करने वाले से यह प्रश्न फिर भी पूछा जाएगा कि जिस क्रिप्टो के लिए देश में कोई रेगुलेशन नहीं बना है, फिर ऐसे अंधे कुंए में आपने पैसा डुबोया क्यों?

क्रिप्टो करेंसी क्या है?
लाइटकॉइन, रिप्पल, इथेरियम यह सब क्रिप्टो करेंसियों के नाम हैं। बिटकॉइन सबसे प्रसिद्ध और पहली क्रिप्टोकरेंसी है जिसकी शुरुआत साल 2009 में हुई थी। बिटकॉइन के बाद ईटीएच या इथेरियम लोकप्रिय हुआ। यह ब्लॉकचेन पर आधारित है। फिर लाइ्टक्वाइन ने बाजार में अपनी जगह बनाई है। यहां पेमेंट और ट्रांजेक्शन की सारी प्रक्रिया में लगने वाले कम समय ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। अब वर्ल्डकॉइन के जरिये क्रिप्टो करेंसी में एक बार फिर जान फूंकने की कोशिश की जा रही है

क्रिप्टो के संबंध में भारतीय समाज में अभी अधिक जागरूकता नहीं है। लोग इसके संबंध में नहीं जानते या फिर बहुत कम जानते हैं। यह एक डिजिटल करेंसी हैं, जिसमें सुरक्षित वर्चुअल लेनदेन के लिए क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिप्टो करेंसी अभी एक सीमित वर्ग के बीच ही लोकप्रिय है। आम भारतीय समाज क्रिप्टो में लेन देन से अभी बाहर है। इसकी बड़ी वजह यह है कि क्रिप्टोकरेंसी को किसी केंद्रीय एंजेंसी या फिर रेगुलेटिंग अथॉरिटी द्वारा जारी नहीं किया जाता है। इसलिए वह समाज का विश्वास अभी ठीक तरह से अर्जित नहीं कर पाया है।

क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम है जिसमें ट्रांसजेक्शन बैंक वैरिफाई नहीं करता है। जिसके पास क्रिप्टो करेंसी है, वह कभी भी किसी को भी पेमेंट कर सकता है। यहां करेंसी को अपनी जेब में रखने की आवश्यकता नहीं होती। यहां जब भी कोई लेन देन होता है तो यह फंड ट्रांसफर एक सार्वजनिक बहीखाता में दर्ज हो जाता है। जिसे ब्लॉकचेन कहा जाता है। क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल वॉलेट में स्टोर किया जाता है।

क्रिप्टोकरेंसी यूनिट को तैयार करने की प्रक्रिया को माइनिंग कहा जाता है, जिसमें कॉइन जनरेट करने के लिए कॉम्पलिकेटेड मैथमैटिकल प्रोब्लम को सॉल्व किया जाता है, जिसके लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी एजेंट की मदद से बेची जाती है, जहां सावधानी रखने की आवश्यकता है। क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के लिए एक्सचेंज भी एक अच्छा विकल्प है। ये एक्सचेंज क्रिप्टोकरेंसी और वॉलेट स्टोरेज के विकल्प देते हैं। क्रिप्टो को संभालने और खर्च के लिए क्रिप्टोग्राफिक वॉलेट का इस्तेमाल किया जाता है।

क्रिप्टोकरेंसी की चुनौतियां कम नहीं
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से कई गुणा लाभ का झांसा देकर साइबर ठग लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। फर्जी वेबसाइट या लोगो द्वारा क्रिप्टोकरेंसी के जरिये लोगों को पैसा निवेश करने और उससे 50 फीसदी से ज्यादा की गारंटी या एक वर्ष में राशि को दोगुना होने का लालच दिया जाता है। ऐसे ज्यादातर मामलों में लोग खुद ही ठगी के शिकार होते है। मतलब साईबर ठग व्यक्तियों को अच्छे रिटर्न या पैसा डबल करने का लालच देते हैं और पैसा निवेश करने वाला यह भी नहीं सोचता कि उसके साथ ठगी भी हो सकती है। वह खुद ही अपना पैसा ठगों को हस्तांतरित कर देता है।

क्रिप्टो करेंसी से जुड़े अपराधी टेलीग्राम पर अधिक सक्रिय हैं। साईबर ठगी का एक तरीका यह भी देखने को मिला कि कुछ आसान से ऑनलाइन टास्क दिए गए और उन्हें पूरा करने वालों को बताया गया कि आपने इस टास्क को पूरा करके दो लाख या पांच लाख रुपए की वर्चुअल करेंसी कमा ली है। अब इसको पाने के लिए कुछ पैसा कंपनी के खाते में डालना होगा। इस तरह दो लाख, पांच लाख पाने के चक्कर में लोग हजारों रुपए डूबो लेते हैं। इस संबंध में साइबर पुलिस के पास बहुत अधिक शिकायतें आ रही थी, इसलिए साइबर पुलिस द्वारा एडवाइजरी भी जारी की गई है।

बिटक्वाइन के बाद वर्ल्डकॉइन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम मेधा की दुनिया से लेकर क्रिप्टो करेंसी की दुनिया तक में इन दिनों सबसे अधिक वर्ल्डकॉइन की चर्चा हो रही है। वर्ल्डकॉइन ने जापान, इंडिया और यूके समेत दुनियाभर के कई देशों में लोगों की आंखें स्कैन करके, उनकी डिजिटल आईडी बनाकर उन्हें 25 मुफ्त वर्ल्ड कॉइन दे रही है। वर्ल्डकॉइन भी एक क्रिप्टो करेंसी है। टूल फॉर ह्यूमैनिटी नामक कंपनी अपनी इस परियोजना के अन्तर्गत वर्ल्डकॉइन को लोकप्रिय बनाने की मुहिम में जुटी है, जो भारत समेत 20 देशों में लॉन्च हुई है। इसके सह-संस्थापक चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपेनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन हैं। इसे वैश्विक स्तर पर एक वर्चुअल आईडी विकसित करने का प्रयास बताया जा रहा है।

एक वेबसाइट पर प्रकाशित खबर के अनुसार दिल्ली के सेक्टर 16 मेट्रो स्टेशन के अंदर वर्ल्ड कॉइन के बारे में लोगों को पिछले दिनों बताया गया। उनकी आंखें स्कैन करके, मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करवाया गया। फिर मोबाईल पर ही डिजिटल आईडी बनाकर उसमें वर्ल्डकॉइन डाले गए। बदले में उनसे कोई पैसा नहीं लिया गया। जिनके मोबाइल में एप डाउनलोड है, उन्हें यह आश्वासन भी मिला कि वे बाद में वर्ल्डकॉइन को भारतीय मुद्रा में बदल पाएंगे।

स्पष्ट नीति की दरकार
वर्ल्डकॉइन को लेकर इतनी सारी खबरों के बावजूद क्रिप्टो को लेकर विश्वास से कुछ नहीं कहा जा सकता, जब तक भारत सरकार की तरफ से इसे मान्यता नहीं मिल जाती और सरकार की तरफ से कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया जाता। 2023 के बीते आठ महीनों को ही लें तो क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बड़ी तादाद में धोखाधड़ी के मामले हुए हैं, इसलिए लोगों को सावधान रहकर काम करने की जरूरत है।

बिटक्वाइन से लेकर वर्ल्डकॉइन तक के सफर में डाटा की हैकिंग से जुड़े प्रश्न को दरकिनार नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में जहां निवेशकों को सावधान और एजेंसियों को सतर्क होने की जरूरत है, वहीं भारत सरकार को जल्द से जल्द आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स और वर्चुअल करेंसी से जुड़ी स्पष्ट नीतियां बनानी होंगी। जब प्रधानमंत्री मोदी खुद ये कह चुके हैं कि इस बारै में वैश्विक नीति की आवश्यकता है तब इस दिशा में निश्चय ही भारत की ओर से पहल होने की दरकार है।

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