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Monsoon: बाड़मेर में बाढ़ का गम तो बलिया में गर्मी का सितम

जून के महीने में राजस्थान के बाड़मेर, जालौर चुरु जिलों से वैसी खबरें नहीं आती जैसी इस बार आयी हैं। इस महीने में राजस्थान के इन रेतीले इलाकों से 48 से 49 डिग्रीवाली गर्मी के प्रकोप की खबरें आती हैं। लेकिन इस बार बढ़ती गर्

जून के महीने में राजस्थान के बाड़मेर, जालौर चुरु जिलों से वैसी खबरें नहीं आती जैसी इस बार आयी हैं। इस महीने में राजस्थान के इन रेतीले इलाकों से 48 से 49 डिग्रीवाली गर्मी के प्रकोप की खबरें आती हैं। लेकिन इस बार बढ़ती गर्मी या हीटवेव की खबर आने की बजाय बाड़मेर से बाढ़ की खबर आयी। चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के गुजरात के तटीय इलाकों से टकराने का असर यह हुआ कि राजस्थान के इन रेतीले इलाकों में बारिश का 25 साल पुराना रिकार्ड टूट गया।

बाड़मेर में सालाना औसत 11 इंच बारिश होती है। लेकिन 16 जून की रात से शुरु हुई तूफानी बारिश में ही 8 इंच वर्षा हो गयी। यानी साल भर में जितना पानी बाड़मेर में गिरता था उसका तीन चौथाई पानी दो दिन में ही बरस गया। पानी को प्राणों से अधिक सहेजने वाला यह जिला अचानक बरसे इस पानी को सहेज नहीं पाया और बाड़मेर की कई तहसीलों में बाढ़ के हालात पैदा हो गये। बाड़मेर शहर की कई कालोनियां जलमग्न हो गयीं। कुछ कुछ ऐसे ही हालात जालोर के कई इलाकों में बन गये।

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लेकिन गर्मी और हीटवेव की खबरें उस पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिसा से आयीं जहां जून के दूसरे पखवाड़े में भारी बारिश की खबरें आती थीं। इस साल मानसून लगभग एक सप्ताह की देरी से आगे बढ़ रहा है। इसकी सबसे बुरी मार पड़ी है पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार पर। इस साल इस इलाके में गर्मी की तपिश ने कहर बरपाया है। बीते बीस पच्चीस दिनों से दिन का औसत तापमान 43 से 44 डिग्री और रात का तापमान 29-32 डिग्री के बीच चल रहा है। यह असामान्य तपिश है। आमतौर पर इस इलाके में ऐसी चरम गर्मी का समय आठ से दस दिन रहता है जिसे दस तपा कहा जाता है। 10 जून के आसपास बिहार के कुछ हिस्सों में मानसूनी बारिश की शुरुआत हो जाती है जो अगले पांच से सात दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश पहुंच जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है।

मई के आखिर से जो पारा चढ़ा तो फिर उतरने का नाम ही नहीं लिया। लू और सूरज की तपिश ने लोगों को बेहाल कर दिया और ठीक उसी समय में 15 से 18 जून को लोगों के मरने की खबरें आनी शुरु हो गयी जब बाड़मेर में बाढ़ की खबर आ रही थी। 19 जून को आखिरी आंकड़ा यह है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक ही जिले बलिया में 68 लोगों के मारे जाने की खबर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग अलग जिलों में हीट वेव से अब तक सवा सौ से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 68 मौतें अकेले यूपी के बलिया जिले में हुई हैं जबकि 42 मौतें (18 जून तक) बिहार के अलग अलग अस्पतालों से आयी हैं।

हमेशा की तरह इन मौतों में वे आंकड़े शामिल नहीं है जिनका रिकार्ड सरकारी अस्पताल के पास नहीं है। जो खबरें सुनाई पड़ रही हैं उसके मुताबिक बलिया से लेकर प्रतापगढ़ अमेठी तक हीट वेव का प्रकोप जारी है और 'हर जिले में गर्मी के प्रकोप से लोगों की मौतें' हुई हैं। ऐसे में गर्मी से होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा क्या है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हां, 17 जून को गर्मी से मौत की खबर आने के बाद यूपी प्रशासन जरूरत हरकत में आया और सबसे पहले बलिया जिला अस्पताल के उस मेडिकल सुपरिटेंडेंट को ही हटा दिया जिन्होंने गर्मी से मौतों का आंकड़ा सार्वजनिक किया था।

बलिया जिला कलेक्टर बयान दे रहे हैं कि मेडिकल सुपरिटेडेंट ने गलत आंकड़े प्रस्तुत किये और उसमें उन मौतों को शामिल कर लिया जो किसी और बीमारी से पीड़ित थे। लेकिन बलिया के जिला कलेक्टर यह बताना भूल गये कि हीट वेव का असर सबसे ज्यादा बूढ़े, बीमार और कमजोर लोगों पर ही होता है। खैर, बाढ़ का कहर हो या गर्मी का सितम, हमारे यहां प्रशासन इसी तरह से आपदा प्रबंधन करता है। उसका सारा जोर नुकसान कम करने की बजाय नुकसान को कम दिखाने पर रहता है।

यूपी के योगी प्रशासन ने भी आनन फानन में बैठक की और प्रशासन को गर्मी से निपटने का निर्देश जारी कर दिया। प्रशासन भी आनन फानन में गर्मी कम करने में जुट गया जिसका एक उदाहरण बलिया जिला कलेक्टर का बयान और मेडिकल सुपरिटेडेंट की बर्खास्तगी है। 18 जून को विशेषज्ञों की दो सदस्यीय टीम भी बलिया पहुंची जिसने हीट वेव के शिकार लोगों की जांच रिपोर्ट इकट्ठा की। इसके अलावा खबर ये भी है कि मुख्यमंत्री ने यूपी के उर्जा मंत्री एके शर्मा की भी 'क्लास' ली है क्योंकि यूपी के जिन इलाकों में गर्मी बढ़ी उन इलाकों में बिजली भी गुल हो गयी। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के उन ग्रामीण इलाकों में एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति बहुत बुरी तरह चरमराई हुई है जहां गर्मी का कहर सबसे अधिक है।

इस बीच मौसम वैज्ञानिक बाड़मेर की बारिश और यूपी बिहार की तपिश को जहां अल नीनों का असर बता रहे हैं वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजनीतिक सवालों का जवाब देने से बचने के लिए "गर्मी बहुत है" की चादर ओढ़ ली है। लेकिन जो नुकसान होना था वह तो हो चुका। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 जून तक दक्षिण, पूरब और उत्तर को मिलाकर जितनी बारिश होनी चाहिए थी उसमें 60 से 80 प्रतिशत की कमी हो गयी है। बिपरजॉय ने अपने जॉय में सब उलट पलट दिया है। जहां बारिश सबसे बाद में होती थी वहां सबसे पहले हो गयी और जहां जून के पहले और दूसरे पखवाड़े में होती थी वहां आसमान से आग बरस रही है।

इस आग की बारिश में जिनकी जान जानी थी, चली गयी। राहत की बात बस इतनी है कि सोमवार 19 जून को मानसून की बारिश बिहार के किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जिलों में प्रविष्ट हो गयी। कुछ जगहों पर हल्की तो कुछ जगहों पर सामान्य बारिश होने का समाचार है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में बिहार ही नहीं बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश की बौछार पड़ेगी। मौसम विभाग द्वारा 20 जून की रात से ही तापमान में गिरावट का अनुमान भी लगाया जा रहा है।

उस बलिया में भी मौसम आज से बदल जाने की उम्मीद है जहां गर्मी की तपिश से सर्वाधिक मौतों का समाचार आया है। अर्थात गर्मी का यह सितम दो चार दिनों में थम जाएगा। लेकिन जो नहीं थमेगा वह धरती के वातावरण में होने वाला निरंतर बदलाव। औद्योगिक विकास से धरती के समूचे पारिस्थितिकी तंत्र में जो बदलाव आ रहा है उसका असर अनचाही गर्मी या अपनेक्षित बारिश के रूप में सामने आ रहा है। कभी बाड़मेर में तो कभी बेंगलुरु में। इन बदलावों को स्थाई रूप से रोकने के लिए सरकारों को जो 'विकास विरोधी उपाय' करना है फिलहाल वह उनके एजंडे में ही नहीं है।

तब तक जन सामान्य चाहे तो मौसम की मार पड़ने पर इंद्रदेव की आराधना जरूर कर सकता है क्योंकि प्राचीन काल से ही मौसम की मार का एक उपचार आस्था को भी बनाया जाता रहा है। ऐसे में भारत के वो लोग जो नियतिवादी हैं और सबकुछ सह जाने का साहस रखते हैं, वो यह कहां समझ पाते हैं कि उनके ऊपर मौसम की जो मार पड़ रही है उसके पीछे बीसवीं सदी की विकासवादी मानसिकता छिपी है। जब प्रकृति के साथ मनुष्य असामान्य व्यवहार करेगा तो प्रकृति मनुष्य के साथ सामान्य व्यवहार कैसे कर सकती है? हम प्रकृति को देते हैं, प्रकृति वही हमें सूद समेत वापस लौटा देती है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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