Manoj Bajpayee Movie: 'आश्रम' के बाद अब 'आसाराम' को सजा दिलाने वाले वकील पर मूवी
प्रकाश झा ने जब राम रहीम पर आश्रम वेब सीरीज बनायी थी तो उसको बहुत अच्छा रिस्पांस मिला था। अब आसाराम केस को लेकर ओटीटी पर मनोज बाजपेई अभिनीत एक मूवी रिलीज होने जा रही है जिसका नाम है "सिर्फ एक बंदा काफी है।"

Manoj Bajpayee Movie: प्रकाश झा ने 2020 में जब आश्रम वेब सीरीज के पहले सीजन का प्रसारण किया तब न राम रहीम के भक्तों ने कोई कानूनी दांव पेंच अपनाया और न ही समाज में से किसी ने इसका विरोध किया। 28 एपिसोड में इसके अब तक तीन सीजन आ चुके हैं। इस वेब सीरीज में संभवत: विवाद से ही बचने के लिए प्रकाश झा ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया और मिलते जुलते नामों से ही सीरीज बनायी।
लेकिन आसाराम केस पर आधारित नयी मूवी ने इससे आगे जाने का प्रयास किया है। जी5 पर रिलीज होने जा रही इस मूवी में सीधे तौर पर आसाराम को सजा दिलानेवाले वकील का नाम लिया गया है और उन्हीं को मुख्य चरित्र में रखा गया है। मनोज बाजपेयी इस मूवी में उसी वकील की भूमिका में हैं जो एक ऐसी नाबालिग लड़की का केस लड़ते हैं, जिसने एक बड़े बाबा पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। आसाराम के ट्रस्ट ने फिल्म के निर्माताओं को लीगल नोटिस भेजकर फिल्म रोकने की मांग की है।
इस मूवी का ट्रेलर और इसको दिये गये लीगल नोटिस की खबर देखकर मन में सबसे पहले जो सवाल आता है, वो ये कि ये मूवी 'सिर्फ एक बंदा काफी है' थिएटर्स में रिलीज क्यों नही हुई? और क्यों नेटफ्लिक्स, अमेजन, हॉट स्टार जैसे नामचीन ओटीटी प्लेटफॉर्म की बजाय जी5 जैसे अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही है? एक सम्भावना हो सकती है कि जी5 ने इसमें ज्यादा कमाई के मौके देखते हुए निर्माताओं को इतनी कीमत दे दी हो कि उन्होंने थिएटर्स व नेटफ्लिक्स आदि पर वरीयता देते हुए जी5 को राइट्स बेच दिए हों।
लेकिन फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट के सूत्र बता रहे हैं कि इस फिल्म को लेकर थिएटर्स मालिकों के मन में खौफ था कि कहीं आसाराम के भक्त तोड़फोड़ ना मचा दें। या कहीं कोर्ट से स्टे ऑर्डर लाकर फिल्म ना रुकवा दें। कुछ सरकारें भी रोक लगा सकती हैं जैसे द केरला स्टोरी पर लगाया गया है। लीगल केसों का ही डर सभी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को था। वैसे भी जी5 इसलिए थोड़ा अलग है क्योंकि वो अप्रत्यक्ष रूप से ही सही एक मीडिया ग्रुप से जुड़ा हुआ है। जी न्यूज और WION जैसे राष्ट्रीय न्यूज चैनल ही नहीं, तमाम क्षेत्रीय चैनल्स भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। तभी जो लीगल नोटिस भेजा गया है, उसमें जी5 को वादी बनाने से अभी परहेज बरता गया है।
'सिर्फ एक बंदा काफी है' का ट्रेलर यूं भी साफ बताता है कि ये आसाराम के ही बहुचर्चित पॉक्सो केस की कहानी है। आसाराम के अंदाज और लुक में प्रवचन देता हुआ कलाकार ट्रेलर में साफ दिखता है। आसाराम के ही अंदाज में वह बोल भी रहा है, वह लड़की भी उसी केस की पीड़िता वाले आरोप ही लगाती इस ट्रेलर में दिख रही है। और सबसे खास बात मनोज बाजपेयी ने जिस वकील का रोल किया है, उसका नाम पीसी सोलंकी है। वही वकील जिसने तमाम धमकियां और दवाब झेलकर तीन साल तक केस लड़ा और आसाराम को सजा दिलवाई।
निर्माताओं का कहना है कि हमने तो उस वकील पीसी सोलंकी से उनकी बायोग्राफी बनाने के राइट्स खरीदे हैं, हमने तो मूवी उनकी जिंदगी पर बनाई है। जो कहानी उन्होंने बताई वैसे ही पात्र लिए गए हैं। हम किसी बाबा की जिंदगी पर फिल्म नहीं बना रहे, बल्कि फिल्म का नाम ही बता रहा है कि ये उस वकील की बायोग्राफिकल मूवी है। इस केस में कितना कुछ झेला है पीसी सोलंकी ने। कोर्ट में गवाह को चाकू घोंप दिया गया, रिश्तेदारों से दवाब डलवाया गया, पांच साल के बेटे को लेकर मन में तमाम डर थे, लेकिन स्कूल वालों ने उनको भरोसा दिलाया, उनके पिता ने कहा कि बेटा केस से पीछे हटकर अन्याय मत होने देना। वो सब इस मूवी में दिखाया जाएगा।
इससे पहले ऐसा ही मोर्चा आसाराम के लोगों ने मशहूर पब्लिकेशन हाउस हार्पर कॉलिंस के खिलाफ खोला था। वजह थी वहां से छपने वाली एक किताब, 'Gunning For the Godman: The True Story Behind Asaram Bapu's Conviction'. इस किताब को अजय लाम्बा (आईपीएस) और संजीव माथुर ने लिखा था। अजय लाम्बा उन दिनों जोधपुर में तैनात थे। वो केस की एक एक रग से वाकिफ थे। 2020 में पांच सितम्बर को इस किताब के अनावरण के लिए एक भव्य कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन उससे एक दिन पहले ही निचली अदालत में आसाराम के लोगों ने इस किताब के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगाने का आदेश लेकर हार्पर कॉलिंस और लेखकों के लिए दिक्कत पैदा कर दी।
हालांकि हाईकोर्ट ने प्रकाशक और लेखकों के हित में निचली अदालत का फैसला पलट दिया और कहा कि जब लेखकों ने एक-एक लाइन तथ्यों के आधार पर लिखी है, तब इसे कैसे गलत कहा जा सकता है। जज ने आसाराम के लोगों की तरफ से कही गई हर दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अब ये किताब कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध है।
''सिर्फ एक बंदा काफी है'' को सीधे तौर पर आसाराम के खिलाफ ही बनाया गया है। मूवी में वकील का नाम वही रखना जो असल जिंदगी में है, साफ इशारा करता है कि मूवी के निर्माता पूरा मूड बनाकर मैदान में उतरे हैं। वो भी ऐसे दौर में जब आसाराम के भक्त थोड़े बैकफुट पर हैं। बावजूद इसके आसाराम ट्रस्ट का फिल्म निर्माताओं को लीगल नोटिस भेजना यह बताता है कि उन्होंने हार नहीं मानी है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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