Uddhav Thackeray: गले पड़े उद्धव को कांग्रेस की झोली में बिठा रहे पवार

शरद पवार और उद्धव ठाकरे का मुख्य आधार मराठा वोटर हैं। उद्धव जितने कमजोर होंगे, शरद परिवार का परिवार मराठाओं की राजनीति में उतना ही मजबूत होगा।

maharashtra political crisis Sharad Pawar politics Uddhav Thackeray Congress and NCP

Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक उलटफेर की सुगबुगाहट है| उद्धव ठाकरे बेहद डरे हुए हैं। बाल ठाकरे की हिंदुत्व की राजनीति को छोड़कर शरद पवार के भरोसे वह कांग्रेस और एनसीपी के साथ गए थे। भाजपा ने शिवसेना तोड़ कर उद्धव के ही नंबर दो एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बना दिया| लेकिन यह बात अब पुरानी हो गई। अब तो सवाल यह है कि कांग्रेस और एनसीपी भी उद्धव के साथ रहेंगे या दूध से मक्खी की तरह निकाल बाहर करेंगे|

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सुगबुगाहट यह है कि बूढ़े होते शरद पवार ने अपने परिवार का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने के लिए कुछ और सोचना शुरू कर दिया है| उन्हें जब भी कुछ नया करना होता है, वह शांत रहते हैं, उनकी तरफ से सारा खेल उनके भतीजे अजित पवार और उनके ख़ास प्रफुल्ल पटेल करते हैं| और खेल हमेशा शिवसेना के साथ होता है|

पहले 2014 के चुनाव नतीजों में भाजपा की ज्यादा सीटें आने के बावजूद जब शिवसेना गठबंधन के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़ी थी, तब प्रफुल्ल पटेल ने भाजपा को बाहर से समर्थन का एलान कर दिया था| भाजपा की सरकार बन गई तो मजबूरी में शिवसेना को घुटने टेक कर भाजपा के पास जाना पड़ा था| 2019 में जब शिवसेना ने फिर भाजपा से मुख्यमंत्री की मांग रखी, तो शरद पवार ने अजीत पवार से समर्थन दिला कर भाजपा की सरकार बनवा दी|

शरद पवार का यह सब से बड़ा राजनीतिक दांव था, जब उन्होंने उद्धव को भाजपा से तोड़ कर अपने पाले में लाने के लिए अपने भतीजे को भाजपा के पास भेज दिया| शरद पवार ने तब राजनीतिक गुगली के लिए अपने भतीजे अजीत पवार के अलावा उद्धव ठाकरे के भरोसेमंद संजय राउत का इस्तेमाल किया| अजीत पवार और संजय राउत के माध्यम से उन्होंने उद्धव ठाकरे को मजबूर किया कि वह भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ आ जाए|

लेकिन अब उद्धव सरकार भी गिर चुकी है और शिवसेना भी टूट चुकी है| इस बीच उद्धव ठाकरे हिंदुत्व की विचारधारा से इतना दूर जा चुके हैं कि अपने पिता की विरासत को संभालने की कोई संभावना नहीं बची| उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद भी हिंदुत्व की विचारधारा पर बने रहने की बातें कर रहे थे, लेकिन एकनाथ शिंदे ने पिछले दिनों अपने सभी विधायकों को अयोध्या लाकर हिंदुत्व की लाईन इतनी लंबी खींच दी है कि उद्धव छटपटा कर रह गए हैं|

उद्धव ठाकरे को पता है कि हिंदुत्व की लाईन लिए बिना वह बाल ठाकरे के बनाए आधार को अपने साथ नहीं बनाए रख सकते। इसलिए वह सेकुलर गठबंधन में रहते हुए हिंदुत्व की बात करते हैं, जो किसी के गले नहीं उतरती| 16 अप्रेल को जब महाराष्ट्र विकास अघाडी नागपुर में एकता और शक्ति का प्रदर्शन कर रही थी, तो उद्धव ठाकरे ने फिर हिंदुत्व की बात की|

उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन पर हर बार आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने कांग्रेस के साथ जाकर हिंदुत्व छोड़ दिया, क्या कांग्रेस में कोई हिंदू नहीं है? लेकिन यह बात भी किसी पल्ले नहीं पड़ती, क्योंकि राहुल गांधी ने हाल ही में दिए अपने बयान में हिंदुत्व पर कई तरह के सवाल उठाए थे, तो कोई भी हिन्दू कांग्रेसी उनके खिलाफ नहीं बोला| कांग्रेस में हिन्दुओं के होने और हिन्दू हित की बात करने में बहुत फर्क है|बा

ला साहेब ठाकरे ने कांग्रेस का विरोध उसकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ही किया था| उद्धव को याद करना चाहिए कि राम जन्मभूमि आन्दोलन में कांग्रेस की क्या भूमिका थी और बाला साहेब ठाकरे की क्या भूमिका थी| कांग्रेस ने तो सुप्रीमकोर्ट में यह कह कर हिंदुत्व पर ही सवाल उठा दिया था कि भगवान राम के पैदा होने का कोई प्रमाण ही नहीं है|

कहते हैं कि संगत का असर होता है। उद्धव ठाकरे अक्सर हिंदुत्व के बारे में कोई न कोई ऐसी बात कह देते हैं, जिससे बाल ठाकरे के अनुयायी उनसे दूर होते जा रहे हैं| नागपुर में ही अपने भाषण में उन्होंने आरएसएस-बीजेपी के समर्थक हिन्दुओं को गौमूत्रधारी हिन्दू कह दिया। यह वह भाषा है, जो कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दुओं के लिए इस्तेमाल करते हैं| यह बात उन्होंने इसलिए कही थी क्योंकि हाल ही में संभाजीनगर में जहां उन्होंने एक जनसभा की थी, वहां भाजपा वालों ने गौमूत्र छिड़का था|

भाजपा वाले ऐसा जानबूझकर कर रहे है ताकि बाल ठाकरे के अनुयायियों को यह संदेश जाए कि उद्धव ठाकरे मुस्लिम तुष्टिकरण वाली पार्टी के साथ जा बैठे हैं| लेकिन उद्धव ठाकरे ने कह दिया कि भाजपा नेताओं को कुछ गोमूत्र पीना भी चाहिए था, वे समझदार हो जाते| इस तरह की बातें उनकी बौखलाहट को ही जाहिर करती हैं| परंतु अब अपना वोट बैंक बचाने के लिए उद्धव ठाकरे अब पूरी तरह रक्षात्मक हो गए हैं|

शरद पवार को उद्धव ठाकरे का जितना इस्तेमाल करना था, कर लिया| उनका मकसद मराठा वोटरों को शिवसेना से छीनना था। उनका वह मकसद काफी हद तक पूरा हो चुका है| शरद पवार अब अपनी और अपने परिवार के हित की राजनीति कर रहे हैं| अजीत पवार की भाजपा नेताओं से मुलाकातें बढ़ गई हैं, तो उद्धव ठाकरे के साथ साथ संजय राउत के भी कान खड़े हुए हैं|

उन्हें लगता है कि एकनाथ शिंदे की बात सही साबित हो रही है कि शरद पवार उनका इस्तेमाल करके शिवसेना को बर्बाद करना चाहते हैं| वे दोनों भागे भागे शरद पवार के पास गए और पूछा कि क्या एनसीपी भाजपा के साथ जा रही है| वैसे तो राजनीति में कोई सच नहीं बताता, लेकिन जो बताया गया है, उसे समझना जरूरी है|

संजय राउत ने बताया है कि शरद पवार ने उनसे कहा है कि वह कभी भी भाजपा में नहीं जाएंगे| लेकिन अगला वाक्य कुछ और कहता है। शरद पवार ने कहा कि कोई व्यक्तिगत तौर पर भाजपा के साथ चला जाए, तो वह कुछ नहीं कह सकते| तो क्या व्यक्तिगत तौर पर उनका भतीजा अजित पवार और बेटी सुप्रिया सुले भी हो सकती हैं? उद्धव ठाकरे का डर यह है कि अगर शरद पवार की पार्टी के बड़े नेता भाजपा में चले जाते हैं या भाजपा सरकार को समर्थन दे देते हैं, तो एकनाथ शिंदे की सरकार और मजबूत हो जाएगी|

शरद पवार को समझना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है| शरद पवार और उद्धव ठाकरे का मुख्य आधार मराठा वोटर हैं। उद्धव जितने कमजोर होंगे, शरद परिवार का परिवार मराठाओं की राजनीति में उतना ही मजबूत होगा| खबरें इस तरह की आ रही हैं कि शरद पवार अपने परिवार के उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य के बारे में सोच रहे हैं|

शरद पवार यह भी नहीं चाहते कि उद्धव ठाकरे दुबारा भाजपा के साथ जाएं क्योंकि अगर उद्धव ठाकरे दुबारा भाजपा के साथ चले जाते हैं, तो एनडीए में पवार परिवार का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता| इसलिए वह उद्धव ठाकरे का कांग्रेस के साथ बने रहना अपने परिवार के हित में समझते हैं|

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    शरद पवार ने दिल्ली आकर जब मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाक़ात की थी, तो उन्होंने राहुल गांधी की उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात की गुहार लगाई थी, ताकि दोनों की नजदीकी बढ़ सके| शरद पवार के आग्रह पर ही 18 अप्रेल को केसी वेणुगोपाल ने मुम्बई जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात की और उन्हें संदेश दिया कि राहुल गांधी भी जल्द ही आकर उनसे मिलेंगे|

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    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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