Madhya Pradesh Women: लाड़ली बहना, मुझे ही 'आशीर्वाद' देना

Madhya Pradesh Women: मध्य प्रदेश में क्या महिलाएं ही तय करेंगी कि अगली सरकार किसकी होगी? इस सवाल की वजह है मध्यप्रदेश का चुनावी मैदान, जिसके दोनों प्रमुख सेनापति महिलाओं को ही लुभाने की दौड़ में शामिल हो गए हैं। इसकी शुरूआत 10 जून को राज्य की संस्कारधानी के रूप में मशहूर जबलपुर के गैरीसन मैदान से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की तो अगले दिन उनके जवाब के रूप में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इसी शहर से अपना चुनावी अभियान शुरू किया।

शिवराज ने अपनी महत्वाकांक्षी 'लाड़ली बहना योजना' शुरू की तो अगले दिन प्रियंका गांधी ने कमलनाथ के उन वादों को एक बार फिर दोहराया, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने डेढ़ हजार रूपए और पांच सौ रूपए में गैस का सिलिंडर देने का वादा है। कांग्रेस महासचिव एक कदम आगे बढ़ गईं, उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा भी कर डाला।

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सवाल यह है कि आखिर महिलाओं पर ही राज्य के दोनों दल क्यों मेहरबान नजर आ रहे हैं? दरअसल राज्य में महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 52 फीसद है, यानी पुरूषों की तुलना में करीब चार फीसद ज्यादा। यहां याद कर लेना चाहिए कि चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में करीब पांच करोड़ 39 लाख वोटर हैं। दोनों दलों की ओर से महिलाओं पर दांव लगाने की दूसरी वजह महिला वोटरों का बदलता वोटिंग ट्रेंड है। महिलाएं अपने घर के पुरूषों, पति या पिता की सोच और आदेश के मुताबिक उनकी पसंदीदा पार्टी और मतदाता को वोट बीते दिनों में देती थीं। अब ऐसा नहीं होता।

अब महिलाएं अपने ढंग से सोचती हैं और अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट देती हैं। इसका उदाहरण हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के चुनाव हैं। जहां महिला मतदाताओं ने अपने ढंग से वोट डाला, अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को चुना। कुछ इसी अंदाज में शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस दोनों ही महिलाओं को ही लुभाने की कोशिश कर रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने जिस लाड़ली बहना योजना की शुरूआत की, उसके हिसाब से राज्य की करीब एक करोड़ बीस लाख महिलाओं को प्रति महीने एक हजार रूपए मिलना शुरू हो गया है। इस योजना के तहत 23 से 60 साल की उम्र वाली करीब सवा करोड़ महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनके खातों को जांचने के लिए योजना शुरू होने के तीन दिन पहले एक रूपए डाला गया था। इनमें से करीब पांच लाख खातों में पैसे नहीं पहुंचे, लेकिन जिन एक करोड़ 20 लाख खातों में एक रूपये का सफल ट्रांजेक्शन हुआ, उनमें पैसे भेजे जा चुके हैं। इस योजना के तहत उन महिलाओं को चुना गया है, जिनके परिवार के पास पांच एकड़ से कम जमीन है और जिनके परिवार की सालाना आमदनी ढाई लाख से कम है।

कर्नाटक और हिमाचल में मुफ्त सुविधाएं देने के वायदे की बुनियाद पर कांग्रेस ने सत्ता में वापसी कर ली है। कांग्रेस इससे जहां उत्साहित है, वहीं बीजेपी मुश्किल महसूस कर रही है। उसी के जवाब में शिवराज ने लाड़ली बहना योजना की शुरूआत की। हालांकि उनके सामने चुनौती कांग्रेस की डेढ़ हजार रूपए मासिक देने का वादा है। शायद जबलपुर में ही अगले दिन होने वाली प्रियंका की रैली और उसके असर की आशंका रही कि गैरीसन मैदान में बने भव्य मंच पर पहुंचने के बाद शिवराज ने लाड़ली बहना योजना का दायरा बढ़ाने का ऐलान कर दिया। इसके तहत उन्होंने सुविधाएं पाने के लिए महिलाओं की उम्र सीमा का दायरा 23 से घटाकर 21 कर दिया। बशर्तें कि उनकी शादी हो गई हो।

इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले वे धन का इंतजाम करेंगे और इस रकम को बढ़ाकर पहले साढ़े बारह सौ महीना करेंगे। फिर धन का इंतजाम करेंगे और इस रकम को और बढ़ाकर 1750 रूपए प्रति महीना करेंगे। फिर धन का इंतजाम हुआ तो इसे बढ़ाकर तीन हजार कर देंगे। यानी कांग्रेस के वायदे से दो गुना का इंतजाम। फिलहाल इस योजना के लिए शिवराज सरकार ने आठ हजार करोड़ का इंतजाम किया है। इसकी घोषणा शिवराज सरकार ने बजट के दौरान ही की थी।

शिवराज के इस वायदे को कांग्रेस के वायदे का जवाब माना जा रहा है। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बीडी शर्मा का कहना है कि शिवराज की इस घोषणा से उनके वोट बैंक में दस फीसद की बढ़ोत्तरी हो गई है। सरकारी योजनाओं की राह में सबसे बड़ी बाधा उनकी जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच पाना रही है। शायद इसी का ध्यान रखते हुए मध्य प्रदेश के करीब 32 हजार मतदान केंद्रों पर शिवराज की घोषणा को सीधे दिखाने-सुनाने का इंतजाम प्रदेश भाजपा ने किया था जो कुल 64 हजार मतदान केन्द्रो का आधा बैठता है।

आज का वोटर चमक-दमक से भी प्रभावित होता है। मध्य प्रदेश में वोटरों को अपने पाले में करने के लिए चमक-दमक का भी इस्तेमाल शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की बंदिशों की सीमा में चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ही पार्टियों की ओर से यह चमक-दमक खूब दिखेगी। शिवराज ने जबलपुर में धूमधड़ाके के साथ योजना की शुरूआत की, महिलाओं के पांव पखारे, उनके पांव छूए। जबलपुर से निकलने के पहले उन्होंने अपनी पूर्ववर्ती उमा भारती का आशीर्वाद लिया।

माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को इस बार एंटी इनकंबैंसी का सामना करना पड़ेगा। फिर कांग्रेस के वायदे भी बीजेपी पर भारी पड़ेंगे। लेकिन ऐसा सोचते वक्त एक तथ्य भुला दिया जाता है। कांग्रेस जहां वादा कर रही है, वहीं भाजपा अपनी सरकार के जरिए चुनावों तक तकरीबन हर जरूरतमंद महिला तक पांच हजार रूपए पहुंचा चुकी होगी।

किसी-किसी परिवार में दो या तीन महिलाएं भी इस योजना के तहत रजिस्टर्ड हैं। ऐसे में अंदाज लगाना आसान होगा कि जिस परिवार में पांच, दस या पंद्रह हजार रूपए पहुंचेंगे तो उस परिवार की सोच क्या होगी? निश्चित तौर पर उस परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा। अगर योजना के तहत रजिस्टर्ड सवा करोड़ महिलाओं की तुलना में साठ प्रतिशत ने भी शिवराज सरकार के प्रति सहानुभूति दिखाई तो यह संख्या 75 लाख होती है। यानी बीजेपी के खाते में थोक में इतने वोट आएंगे। इससे स्पष्ट है कि बीजेपी को चुनावी मैदान में फायदा हो सकता है। इसी फायदे पर बीजेपी की निगाह है।

यह ठीक है कि बीजेपी में भी सबकुछ ठीक नहीं है, लेकिन कांग्रेस में भी सबकुछ अच्छा नहीं है। जबलपुर में 11 जून को हुई प्रियंका गांधी की रैली में राज्य के दस साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को ना सिर्फ बोलने से रोक दिया गया, बल्कि उन्हें मंच पर पिछली कतार में बैठाया गया। जबकि विधायकों तक को बोलने का मौका दिया गया। तो क्या यह मान लिया जाए कि कांग्रेस कुछ ज्यादा उत्साह में आ गई है? उसे ऐसा लग रहा है कि सत्ता बस उससे चंद कदम दूर है? और इसीलिए गुटबाजी दिखनी शुरू हो गयी है?

अगर अंदरूनी तौर पर ऐसा है तो फिर बीजेपी के लिए चुनावी राह आसान हो सकती है। क्योंकि बीजेपी को भी लगता है कि अगर सत्ता गई तो उसकी हालत राज्य में सांगठनिक तौर पर कमजोर हो सकती है। बहरहाल चाहे जो हो, पीतांबरा मां और रानी रूपमती की धरती पर इस बार नारी शक्ति ही तय करेंगी कि अगले पांच साल के लिए राज्य की कमान किसके हाथ होगी।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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