Election Issues: फिर से मोदी के मुद्दों पर आ गया चुनाव
अठारहवीं लोकसभा का चुनाव भी पिछले चुनाव की तरह राष्ट्रवाद के मुद्दों पर पर आकर खड़ा हो गया है। पिछले लोकसभा चुनाव के समय भाजपा के पास इतने मुद्दे नहीं थे, जितने इस बार हैं। सिर्फ एक ट्रिपल तलाक के खिलाफ बना क़ानून ही मुद्दा था, जो भाजपा के कोर वोट बैंक का मुद्दा नहीं था। इस क़ानून से हिन्दुओं को किसी तरह का कोई फायदा या नुकसान नहीं था।
अनेक चुनाव विश्लेषक ऐसा मानते हैं कि अगर पुलवामा न होता, और मोदी सरकार दो सप्ताह के अंदर पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों के कैंप पर हमला न करती तो भाजपा को बहुमत नहीं मिलता। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देश की भावनाओं को समझते होते, तो बालाकोट के सबूत नहीं मांगते।

राष्ट्र सुरक्षा और सेना के दावों से जुड़े मुद्दों पर सबूत नहीं मांगे जाते। कांग्रेस ने सबूत मांग कर सेना की क्षमता पर सवाल उठाकर बड़ी गलती की थी। घर में घुसकर मारने के डायलॉग ने मोदी को देश का इतना बड़ा हीरो बना दिया कि उनके नाम पर भाजपा 282 से बढ़कर 303 हो गई।
कांग्रेस ने उस गलती से सबक नहीं सीखा। वह इस चुनाव में लद्दाख में चीनी सेना के कब्जे का सवाल उठाकर भारतीय सेना की क्षमता पर फिर सवाल उठा रही है। हालांकि भारतीय सेना ने कांग्रेस के इन आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है, लेकिन कांग्रेस की ओर से सवाल दागा जाना जारी है।

कांग्रेस राष्ट्रवाद के प्रति देश की जनता, खासकर हिन्दुओं की भावना को नहीं समझ पा रही। अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जम्मू कश्मीर से 370 हटाए जाने वाले मुद्दे को लोकल मुद्दा बताकर सेल्फ गोल कर लिया है। राजस्थान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी यहाँ आकर (या देश में बाकी जगह पर) जम्मू कश्मीर से 370 हटाने का मुद्दा क्यों उठा रहे हैं, वह कश्मीर या जम्मू में जा कर इस मुद्दे को उठाएं।
जिस कांग्रेस ने 370 हटाए जाने का विरोध किया था, और लोकसभा में कहा था कि कश्मीर का मसला क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में है, इसलिए भारत को 370 हटाने का अधिकार ही नहीं है, जो सत्ता में आने पर दुबारा 370 लागू करने की बात कहती रहती है, वह अब उसी मुद्दे को अप्रसांगिक बता रही है।
कांग्रेस सही समय पर सही मुद्दा पहचानने की क्षमता खो चुकी है। कांग्रेस को शायद अब तक यह समझ ही नहीं आया कि जम्मू कश्मीर का अनुच्छेद 370 संविधान लागू होने के बाद से ही सारे देश का मुद्दा बना हुआ था। 370 के कारण जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं बन सका था, क्योंकि संसद से पारित कोई भी क़ानून जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होता था।
जम्मू कश्मीर के दलितों और पिछड़ों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था, बंटवारे के समय पाकिस्तान से आए लोगों को वोटिंग का अधिकार नहीं मिलता था, जम्मू कश्मीर की बेटियों को बाहर शादी करने पर प्रॉपर्टी में अधिकार नहीं मिलता था। जम्मू कश्मीर के साथ देश की जनता की भावनाएं जुडी हुई हैं, और कांग्रेस अध्यक्ष कहते हैं कि वह तो लोकल मुद्दा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान उनके डर को प्रदर्शित करता है। चुप्पी साध कर वह इस मुद्दे से बच सकते थे, लेकिन उन्होंने खुद मोदी के मुद्दे में प्राण फूंक दिए हैं। इससे पहले कश्मीर फाइल्स फिल्म का विरोध करके और फिल्म के तथ्यों को गलत बता कर कांग्रेस ने कश्मीरी पंडितों के जख्म भी हरे कर दिए थे। कांग्रेस ने सिर्फ तीस बत्तीस साल पुराने इतिहास को भी नकारने की कोशिश की।
रामजन्मभूमि मन्दिर को भी कांग्रेस ने खुद अपने खिलाफ चुनावी मुद्दा बनने दिया। वैसे रामजन्मभूमि का निर्माण चुनावी मुद्दा बनना ही था, लेकिन उसके प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम के बहिष्कार का बयान जारी करके कांग्रेस ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। अगर वह भी बाकी विपक्षी दलों की तरह चुप्पी साध लेती या देश भर के हिन्दुओं को शुभकामनाओं का संदेश देकर अब तक की अपनी मन्दिर निर्माण में अड़चनें डालने की गलती सुधार लेती तो उस पर हिन्दुओं का नकारात्मक प्रभाव कम पड़ता।
कांग्रेस राष्ट्र की भावना के मुद्दों को समझने में भयंकर गलती कर रही है, हालांकि 2014 का चुनाव हारने के बाद ए.के. एंटनी कमेटी ने हार का कारण पार्टी की मुस्लिम परस्ती की छवि को बताया था, लेकिन कांग्रेस ने अपनी छवि सुधारने का कोई प्रयास नहीं सीखा। 2014 के बाद 2019 हारने के बाद भी कोई सबक नहीं सीखा। कम से कम एक दर्जन कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस छोड़ते हुए रामजन्मभूमि मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा के बहिष्कार को कांग्रेस छोड़ने को कारण बता कर देश को याद दिलाया है कि कांग्रेस हिन्दू विरोधी है।
कांग्रेस ही नहीं समूचे विपक्ष के लिए राहुल गांधी ही एक ऐसे नेता है, जो नरेंद्र मोदी का विकल्प हो सकते हैं। विपक्ष का यही विकल्प उसे मोदी का विकल्प नहीं बनने दे रहा। राहुल गांधी को न भारत के संविधान की समझ न है, न भारतीय संस्कृति की समझ है, न हिन्दुओं की भावनाओं और उनको देश के बंटवारे के बाद पहुंचे दर्द का अहसास है, जिसके जख्म बंटवारे के 75 साल बाद भी ज़िंदा हैं।
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान खाली वक्त में वह इन सब विषयों पर अध्ययन कर लेते, तो वह बार बार ऐसी गलतियाँ नहीं करते, जो वह आए दिन अपने भाषणों में करते रहते हैं। राहुल अपनी नासमझी से मोदी को हमलावर होने का मौक़ा देते हैं, और उनके ही के मुद्दे मजबूत करते रहते हैं। पिछले दस साल के अनुभव से उन्हें यह समझ लेना चाहिए था कि भारत के गैर संघी, और गैर भाजपाई हिन्दुओं ने भी मोदी को अपना नेता मान लिया है।
हिन्दुओं को ऐसा लगने लगा है कि मोदी एक एक कर उन गलतियों को सुधार रहे हैं जो आज़ादी से पहले या आज़ादी के बाद मुगल, ब्रिटिश और भारतीय शासकों ने की थीं। लेकिन उन्हीं मोदी को जब राहुल गांधी मनहूस कहते हैं, तो भारत के हिन्दू आहत होते हैं। जब वह कहते हैं कि हिन्दू धर्म में एक शक्ति होती है और कांग्रेस उसी शक्ति से लड़ रही है, तो वह सनातन धर्मं पर चोट कर रहे होते हैं।
मोदी ने भले ही उनके इस बेतुके बयान को मातृशक्ति के साथ जोड़ दिया, लेकिन एक सामान्य हिन्दू उनके इस बयान को सनातन धर्म के खिलाफ मानता है, क्योंकि तमिलनाडु के द्रमुक नेताओं ने जब सनातन धर्म को कोरोना जैसी बीमारी कहा था, तो कांग्रेस ने उसके खिलाफ स्पष्ट स्टैंड नहीं लिया था।
ठीक चुनावों के वक्त ब्रिटेन के गार्डियन अखबार ने दुश्मन के घर में घुस कर मारने वाले मोदी के बयान की पुष्टि करके विपक्ष की नींद वैसे ही हराम कर दी है, जैसे पिछले लोकसभा चुनाव के समय बालाकोट में घुसकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकाने नष्ट करने की घटना ने की थी।
यह एक ऐसी खबर है जिसने हर भारतीय का सीना फुलाकर 56 इंच का कर दिया है। पिछले एक साल से दुनिया भर में भारत पर आरोप लग रहा था कि वह दूसरे देशों में घुस घुस कर भारत के दुश्मनों की हत्याएं करवा रहा है। अमेरिका और कनाडा की सरकारों ने भी भारत पर आरोप लगाया था।
अमेरिका ने खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश का आरोप लगाया था। कनाडा ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निझर की हत्या का आरोप लगाया था। भारत ने इन सभी आरोपों का खंडन किया था।
लेकिन अब जब इंग्लैण्ड के अखबार गार्डियन ने पाकिस्तान के हवाले से उन 20 इस्लामिक और खालिस्तानी आतंकियों की लिस्ट छापी है, जिनकी पिछले तीन साल में पाकिस्तान में हत्या हुई है, तो भारत में हर कोई फूला नही समा रहा। भारत सरकार भले ही इसका खंडन करे, भारत का हर नागरिक इस खबर को सच मानता है और इसे मोदी की घर में घुसकर मारने वाली नीति का नतीजा बता रहा है।
दुनिया भर के मानवतावादी चिल्ला रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर राहुल गांधी चुप हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि उनके यह आरोप लगाने से मोदी की जय जयकार शुरू हो जाएगी। भारत आधिकारिक तौर पर इन आरोपों का खंडन करता रहा है, लेकिन अब रक्षामंत्री राजनाथ के बाद योगी आदित्यनाथ ने भी गार्डियन के हवाले से इन आरोपों की पुष्टि कर दी है।
गार्डियन ने चुनाव के वक्त ऐसा काम कर दिया है कि राजनाथ सिंह और योगी फूले नहीं समा रहे। राजनाथ सिंह से जब पूछा गया कि विदेशी अखबार ने आरोप लगाया है कि भारत ने पाकिस्तान में घुस कर आतंकवादी मारे हैं, तो उन्होंने कहा कि यह भारत का हक है कि अगर कोई भारत में घुसकर आतंकवादी वारदातें करके जाएगा, तो भारत पाकिस्तान में घुसकर मारेगा।
छह अप्रेल को योगी आदित्यनाथ ने तो मोदी की मौजूदगी में गार्डियन की खबर का हवाला देकर कह दिया कि हम तो दुश्मन को उसके घर में घुस कर मारते हैं। नरेंद्र मोदी कुछ नहीं बोले, वह कुछ नहीं बोलेंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री हैं और भारत सरकार इन आरोपों का खंडन करती है, बिलकुल वैसे ही जैसे पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बांग्लादेश बनाने का खंडन करती है। लेकिन कांग्रेस बड़े फक्र से कहती है कि इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए।
अब भारत सरकार भले ही खंडन करती रहे, लेकिन भाजपा के नेता चुनावों में गर्व से कहेंगे कि यह मोदी है, जो पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारता है। विपक्ष के न चाहते हुए भी पुलवामा जैसा मुद्दा इस चुनाव में भी मिल गया है। राहुल गांधी बालाकोट की तरह सबूत भी नहीं मांग सकते, क्योंकि सरकार तो खंडन कर रही है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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