Lok Sabha Elections: 2024 के चुनाव में भाजपा दायरा बढ़ाएगी, कांग्रेस घटाएगी
कांग्रेस ने 2014 में 464 और 2019 में 421 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इस बार उसने मीडिया को लीक की गई खबर में कहा कि उसने 291 सीटों पर अकेले और 85 सीटों पर गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस ने उन 85 सीटों का ब्योरा भी लीक किया था, जो वह सहयोगी दलों से मांग रही है, लेकिन उन 291 सीटों का ब्योरा नहीं दिया, जो वह बिना गठबंधन के कांग्रेस प्रभाव वाले राज्यों में लड़ेगी।
जबकि सच्चाई यह है कि वह सूची सिर्फ 254 सीटों की है, और 254 में से भी इंडी एलायंस का एक सहयोगी 5 सीटें मांग रहा है। बाकी सहयोगियों की ओर से कांग्रेस प्रभाव वाले राज्यों से सीटें मांगने की सूची अभी सामने नहीं आई है।

जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है, उससे साफ़ हो रहा है कि कांग्रेस का लक्ष्य 52 सीटों से बढ़ कर किसी तरह 100 तक सीटें हासिल करना ही है। तमिलनाडु, बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पंजाब और दिल्ली के अलावा लद्दाख और लक्षद्वीप में सहयोगी दलों से गठबंधन होना है। इन नौ राज्यों और दो केंद्र शासित क्षेत्रों की 289 लोकसभा सीटें है|
देश में बाकी सिर्फ 254 लोकसभा सीटें बचती हैं, न कि 291, जिन पर वह अकेले चुनाव लड़ेगी। ये 254 सीटें है- मध्यप्रदेश-29, कर्नाटक-28, गुजरात-26, आंध्र प्रदेश-25, राजस्थान-25, ओड़िसा-21, केरल-20, तेलंगाना-17, असम 14, छत्तीसगढ़-11, हरियाणा-10, उत्तराखंड-5, हिमाचल-4, अरुणाचल-2, गोवा-2, मणिपुर-2, मेघालय-2, त्रिपुरा-2 मिजोरम-1, नागालैंड-1, सिक्किम-1 और इसके अलावा पुडूचेरी, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन दीव की छह सीटें।

इन 254 सीटों पर वह किसी से गठबंधन नहीं करना चाहती क्योंकि उड़ीसा, आंध्र और तेलंगाना को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में उसका भाजपा से सीधा मुकाबला है। इन तीनों राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियां न इंडी एलायंस में शामिल हैं, न एनडीए में शामिल हैं। अपने सहयोगियों से कांग्रेस 10 सीटें तमिलनाडु में द्रमुक से, 9 सीटें बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से, 25 सीटें महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार से, 9 सीटें बिहार में आरजेडी और जेडीयू से, 15 सीटें उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से, 2 सीटें जम्मू कश्मीर और लद्दाख में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी से, 10 सीटें पंजाब में आम आदमी पार्टी से और 5 सीटें दिल्ली में आम आदमी पार्टी से मांग रही है।
माँगी गई इन 85 सीटों में से कांग्रेस को मुश्किल से 54-55 सीटें मिलेंगी। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने 8 जनवरी को कांग्रेस की पांच सदस्यीय समिति के साथ हुई बैठक में हरियाणा से 3 और गुजरात, गोवा से एक एक सीट कांग्रेस से मांग रखी है। कांग्रेस को ये पांच सीटें भी आम आदमी पार्टी को देनी पड़ सकती है। यानी वह अपने राज्यों में लड़ी जाने वाली 254 सीटों में से पांच आम आदमी पार्टी को देगी और उसे सहयोगी दल कुल मिलाकर 54-55 सीटें अपने प्रभाव वाले राज्यों में देंगे। तो कुल मिलाकर कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा 303-304 सीटों पर चुनाव लड़ पाएगी।
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के बावजूद अपनी लड़ने वाली सीटों को लगातार बढा रही है। भाजपा का गठन 1980 में जनता पार्टी से टूट कर हुआ था। यह पूर्ववर्ती जनसंघ का नया अवतार था, जिसने आपातकाल के बाद खुद का जनता पार्टी में विलय कर लिया था। 1984 में पहली बार चुनाव में उतरते हुए भाजपा 229 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी और सिर्फ 2 लोकसभा सीटें जीती थी। यह चुनाव इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बन चुके थे, उनके प्रति सहानुभूति में विपक्ष के बड़े बड़े नेता चुनाव हार गए थे। कांग्रेस को 414 लोकसभा सीटें मिलीं थी|
1988 में रामजन्मभूमि का आन्दोलन शुरू हो चुका था, भाजपा ने रामजन्मभूमि आन्दोलन का समर्थन किया, जिसका उसे फायदा मिला और 1989 के चुनाव में वह 225 सीटें लड़कर 85 लोकसभा सीटें जीत गई। 1991 में 471 सीटें लड़कर 120, 1996 में 471 सीटें लड़ कर 161, 1998 में गठबंधन के साथ 288 सीटें लड़कर 182, 1999 में 339 सीटें लड़कर 182 सीटें जीती।
2004 में गठबंधन कमजोर हुआ तो 364 सीटें लड़कर 138, 2009 में गठबंधन और कमजोर हुआ तो 433 सीटें लड़कर 116, लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट किए जाने के बाद भाजपा 428 सीटें लड़कर 284 और 2019 में 436 सीटें लड़कर 303 सीटें जीत गईं। उसे रिकार्ड तोड़ 37.76 प्रतिशत वोट मिला। भाजपा के 13 सहयोगियों को भी 52 सीटें और एनडीए को कुल मिलाकर 45 प्रतिशत वोट मिला। जबकि कांग्रेस भाजपा से लगभग आधे 19.66 प्रतिशत वोट शेयर पर निपट कर सिर्फ 52 सीटें हासिल कर पाई।
भारतीय जनता पार्टी 2024 में गठबंधन के हिसाब से थोड़ा कमजोर है। बिहार में जेडीयू, पंजाब में अकाली दल, तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक, और महाराष्ट्र में पुरानी शिवसेना भाजपा के साथ गठबंधन में नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी गठबंधन में शामिल हुई है, राम दास अठावले की आरपीआई पहले से गठबंधन में है।
इसके अलावा कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौडा की पार्टी जनता दल सेक्यूलर एनडीए में शामिल हुई है, जो 28 में से चार सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भारतीय जनता पार्टी इस बार कम से कम 460 सीटों पर चुनाव लड़ने और अपना वोट शेयर बढाने की रणनीति पर काम कर रही है।
सार्वजनिक तौर पर भाजपा का लक्ष्य 400 पार का है। भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र में अपने सहयोगियों को 48 में से 15 से 20 तक सीटें लड़ने को देगी और बाकी 28 पर खुद चुनाव लड़ेगी। बिहार में 10 सीटें अपने सहयोगियों को देगी जबकि बाकी 30 खुद लड़ेगी। इसका मतलब यह है कि भाजपा 2019 में लड़ी गई 436 सीटों के मुकाबले कम से कम 460 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
आंध्र, तेलंगाना और तमिलनाडु में भी ज्यादा सीटें लड़ेगी और पंजाब में अगर अकाली दल से समझौता हुआ तब भी वह 13 में 5 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और समझौता न हुआ, तब तो सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा का लक्ष्य पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल और तेलंगाना में अपनी सीटें बढाना और कुल मिलाकर देश भर में 40 प्रतिशत वोट हासिल करना है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications