चुनाव आयोग के फैसले से विपक्ष बम-बम पर बीजेपी के तरकश में और भी हैं ‘तीर’
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने सेना के प्रतीक चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाने की घोषणा होते ही गैर बीजेपी खेमे में उत्साह दिख रहा है। यह बात बताती है कि पाकिस्तान के बालाकोट में एअर स्ट्राइक के बाद देश का विपक्ष कितना असुरक्षित महसूस कर रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि चुनाव आयोग का यह छोटा सा फैसला बीजेपी पर कितना बड़ा असर करने वाला है।

चुनाव आयोग के फैसले के बाद बीजेपी के लिए जो इसके मायने है उस पर गौर करें। अब वैसे पोस्टर देखने को नहीं मिलेंगे जिन पर अभिनन्दन होंगे और बीजेपी के नेता उनका अभिनन्दन कर रहे होंगे। पुलवामा या एअर स्ट्राइक की तस्वीरें चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं होंगी। 'सेना पर सवाल' के बहाने विपक्ष को सवालों के कठघरे में खड़ी कर रही होगी बीजेपी, लेकिन टेक्स्ट के साथ इमेज यानी तस्वीर देखने को नहीं मिलेगी।
अभिनन्दन का चुनाव में अब नहीं हो सकेगा 'अभिनन्दन'
हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। विपक्ष उन तस्वीरों को चुनाव में भुना सकता है जिसमें शहीदों की अर्थी के सामने बीजेपी के नेता मुस्कुराते या खिलखिलाते दिख रहे थे। मगर, बीजेपी वह तस्वीर नहीं दिखा पाएगी जिसमें राजनाथ सिंह शहीदों को कंधा दे रहे थे। शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि देने पटना में रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं गये, यह बात विपक्ष उठा सकता है। वहीं, जेडीयू वह तस्वीर नहीं दिखा सकता कि कुछ दिन बाद ही सही नीतीश कुमार ने बेगूसराय जाकर शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि दे आए थे।
चाहे बीजेपी हो या विपक्ष- उनके पास एक और तरीका है सेना के शौर्य को राजनीति में अपने पक्ष में भुनाने का। यह तरीका है शहीद हुए जवानों के निकटतम रिश्तेदार को टिकट देना। यह ऐसा तरीका है जिसके सामने विरोधी चित हो जाएंगे। मगर, ऐसा करना इतना आसान भी नहीं है। किसी का टिकट काटकर किसी को देना आज के जमाने में राजनीतिक दलों के लिए तगड़ी चुनौती है। मगर, शहीद के रिश्तेदार को टिकट देने के बाद सेना या सेना के प्रतीक चिन्ह के राजनीतिक इस्तेमाल के लिए कई विकल्प खुल जाते हैं।
एफ-16 का मलबा, सिद्धू-बाजवा की तस्वीर भी 'बिकेगी'
बीजेपी के लिए एक सम्भावना और रहेगी। वह पाकिस्तानी एफ-16 विमान के मलबे को दिखाकर भी वोट मांग सकती है। यह मलबा चुनाव आयोग के निर्देश का उल्लंघन नहीं करेगा, जबकि 'घर में घुसकर मारने' के साथ ऐसी तस्वीर खूब जमेगी। बीजेपी नवजोत सिंह सिद्धू और पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष बाजवा की गले मिलती तस्वीर को भी अपने लिए पोस्टर बना सकती है।
ऐसी सम्भावनाएं कांग्रेस समेत विपक्ष के पास भी है। नरेंद्र मोदी का नवाज शरीफ के घर दावत वाली तस्वीर बीजेपी को मुंह चिढ़ाती लग सकती है। वहीं, पठानकोट हमले के बाद एनआईए की जांच में पाकिस्तान की सरकार या सेना का हाथ नहीं होने और नॉन स्टेट एक्टर्स की भूमिका होने की बात को भी विपक्ष हाईलाइट कर सकता है।
बालाकोट हमले का विजुअल्स बीजेपी के लिए है ट्रम्पकार्ड
सवाल ये है कि क्या चुनाव आयोग के निर्देश से होने वाले नुकसान की बीजेपी किस तरह भरपाई करेगी।तो बीजेपी का अगला कदम क्या होगा? बीजेपी का अगला कदम बालाकोट हमले की तस्वीर और विजुअल्स सार्वजनिक करना होगा। ऐसा करने से चुनाव आयोग मोदी सरकार को रोक नहीं सकता। विपक्ष के पास भी कोई चारा नहीं होगा।
बीजेपी बालाकोट हमले के विजुअल्स वाला ट्रम्प कार्ड कब खेलेगी, इस पर उसका थिंकटैंक जरूर विचार कर रहा होगा। अगर इसमें देरी की गयी तो जो सेना, विजय, शौर्य, पराक्रम जैसी शब्दावलियों ने 2019 के महाभारत से पहले बीजेपी के शौर्य का वातावरण बनाया है उसकी लड़ी न टूट जाए।
अगर रणनीति में एक और एअरस्ट्राइक जैसी चीज होगी, तो निश्चित रूप से बालाकोट हमले का विजुअल्स पहले आ जाएगा। ताकि एक लड़ी दूसरे से लड़ी से जुड़ती चली जाए और धमाकों की सीरीज़ से दिवाली के जश्न सा मौहाल पैदा हो। इसी माहौल में चुनाव के सारे चरण निकल जाएं।
चुनाव आयोग की ओर से सेना के प्रतीक चिन्हों के इस्तेमाल पर रोक की ख़बर से चुनाव के दौरान नये-नये प्रयोग और रणनीतियां देखने को मिल सकती हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इसके लिए इनोवेशन को तैयार बैठे हैं। मगर, चुनौतीपूर्ण घड़ी है। सत्ता पक्ष के लिए इस चुनौती की घड़ी का मुकाबला करना थोड़ा आसान दिखता है, लेकिन विपक्ष के लिए चुनाव आयोग के नये दिशा निर्देश के बाद भी चुनौती कम होती नहीं दिख रही है।
(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)












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