Lok Sabha Election results 2019: "खूब लड़ी मर्दानी यह तो अमेठी की स्मृति ईरानी है"

Recommended Video

    Smriti Irani Biography | Smriti Irani Political Career | Smriti Irani Family | वनइंडिया हिंदी

    लखनऊ। राहुल गांंधी अमेठी हार गए। इसका एहसास तो था पर शायद विश्वास नहीं था। यह उत्तर की राजनीति में सबसे बड़ा उलटफेर है। उत्तर प्रदेश की सत्ता से काफी पहले बाहर हो चुकी कांग्रेस अब प्रदेश की राजनीति से भी बहार होने की कगार पर है। कांग्रेस की राजनीति के “सुपरस्टार” राहुल को हराने वाली बीजेपी की स्मृति ईरानी की इस जीत पर दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ बिलकुल सटीक बैठतीं हैं- कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों। यहाँ तो सुराख नहीं कांग्रेस का पूरा किला ही ढह गया। स्मृति ने अमेठी में राहुल गाँधी को 55120 वोटों से हराया। अब लोग कहा रहे हैं खूब लड़ी मर्दानी यह तो अमेठी की स्मृति ईरानी है।

    ‘हू इज स्मृति ईरानी?’

    ‘हू इज स्मृति ईरानी?’

    वही स्मृति ईरानी जिनपर चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी ने टिप्पणी की थी - हू इज स्मृति ईरानी? इस तरह की भाषा से प्रियंका का घमंड ही झलकता दिखा। अब लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आ चुके हैं। इसमें प्रियंका के घमंड को भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ तोड़ दिया है। इस महाविजय ने उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश को एक नई राजनीतिक दिशा दे दी है। उत्तर प्रदेश में जिस तरह से कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन को जनता ने नकारा है उससे साफ़ हो गया है कि प्रदेश में अब जाति और बहुत हद तक धर्म आधारित वोटबैंक की राजनीति का समय ख़त्म होने को है। अमेठी की जनता ने जता दिया है कि अब राजनीति में वही टिकेगा जो उनके लिए काम करेगा। अमेठी की जनता अपने वोट की कीमत जानती है, वोट उसे ही मिलेगा जो उनके वोट की कीमत चुकाएगा। लोगों ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भावनात्मक भाषण नहीं बल्कि अब काम बोलता है।

    सिर्फ चुनावी मौसम में टर्राने से नहीं चलेगा

    सिर्फ चुनावी मौसम में टर्राने से नहीं चलेगा

    अमेठी की जीत से यह भी साफ़ हो गया है कि जनता के प्रतिनिधि को जनता के बीच रहना होगा। यानी नेताओं को समझ लेना चाहिए कि जिस क्षेत्र में राजनीति करनी है उस क्षेत्र के वासी बनिए प्रवासी नहीं। स्मृति ईरानी ने 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी अमेठी और वहां की जनता को नहीं छोड़ा। बार बार वहां जाकर लोगों की समस्याओं को दूर करने की कोशिश की। अमेठी की जनता ने सिर्फ चुनावी मौसम में टर्राने और बरसने की राजनीति को नकार दिया है।

    जनता पर भरोसा करें

    जनता पर भरोसा करें

    जितना भरोसा आप जनता पर करेंगे, उतना ही भरोसा जनता आप पर जनता करेगी। अमेठी की जनता ने राहुल गाँधी को यही सबक सिखाया है। संदेश स्पष्ट है -अपनी जनता पर भरोसा करें और हार-जीत नहीं बल्कि अपने क्षेत्र के लिए काम करना सीखें। जैसे ही राहुल ने अमेठी के साथ केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भी नामांकन किया उसी दिन से उन्होंने अमेठी की जनता के विश्वास को कम कर दिया और उन्हें वायनाड की जीत की कीमत अमेठी की हार से चुकानी पड़ी है।

    अमेठी की धरती हिलने का संकेत पढ़ न सके राहुल

    अमेठी की धरती हिलने का संकेत पढ़ न सके राहुल

    लगता है राहुल गाँधी पिछले लोक सभा चुनाव के संकेतों को पढ़ नहीं सके। 2014 में अमेठी से राहुल गाँधी जीत तो गए थे लेकिन उनकी जीत का अंतर काफी घटकर एक लाख के आसपास रह गया था। इसके बाद अमेठी की धरती हिलने का एक और खतरनाक संकेत 2017 के विधान सभा चुनावों में मिला था। अमेठी लोकसभा सीट में 5 विधानसभा सीटे आती हैं। इनमें 4 विधानसभा सीटें तिलोई, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज सीट अमेठी जिले की हैं जबकि सलोन विधानसभा सीट रायबरेली जिले में पड़ती है । 2017 के विधानसभा चुनाव में 5 सीटों में से 4 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी जबकि एक सीट पर एसपी को जीत मिली थी । 2017 के विधानसभा चुनाव परिणामों से ही राहुल को संभल जाना था। लेकिन राहुल यहाँ की जनता के मूड को भांप नहीं सके या फिर अति आत्मविश्वास में इसकी अनदेखी की और नतीजा सामने है।

    कांग्रेस का एक रिकार्ड टूटा

    कांग्रेस का एक रिकार्ड टूटा

    इसके साथ ही अमेठी में कांग्रेस का एक रिकार्ड टूटा और बीजेपी का एक रिकार्ड बना। अमेठी लोकसभा सीट का यह रिकॉर्ड रहा है कि 2019 के पहले तक गांधी परिवार का कोई भी नेता अमेठी सीट पर हारा नहीं था। इस बार रिकॉर्ड टूट गया। अमेठी लोकसभा सीट के वजूद में आने के बाद से केवल 1977 और 98-99 में ही यहाँ से गैर कांग्रेसी प्रत्याशी को जीत हासिल हुई थी। लेकिन तब अमेठी से गाँधी परिवार का कोई सदस्य मैदान में नहीं था । हार के बाद राहुल गाँधी ने बीजेपी और नरेन्द्र मोदी को जीत की बधाई दी और कहा बीजेपी और कांग्रेस में कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं बल्कि या दो विचारधाराओं की जंग है जो आगे भी जारी रहेगी। उम्मीद है राहुल गाँधी हार से सबक ले अब विचारधाराओं की इस जंग में व्यक्तिगत हमला करने से बचेंगे ।

    (इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+