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इस बार चाय पर नहीं, मोदी की चिट्ठी पर चर्चा

Modi Letter: लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देशवासियों को 'परिवारजन' के संबोधन के साथ मतदान के लिए लिखी चिट्ठी के बाद अब तीसरे चरण के मतदान के ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा सहित एनडीए के सभी उम्मीदवारों के नाम व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर कांग्रेस के मंसूबों के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने तथा चुनाव में विपक्षी गठबंधन को सबक सिखाने की सलाह दी है।

इस क्रम में प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम क्षणों में भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए अपने भरोसेमंद राजनीतिक साथी अमित शाह को लिखे पत्र में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए विपक्षी दलों पर आक्रामक होने का अनुरोध किया है। इसे लेकर चर्चा जोरों पर है कि आखिर माजरा क्या है?

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मालूम हो कि इंटरनेट, गूगल जैसी अनेक डिजिटल सुविधा आने के बाद चिट्ठियों की अनूठी दुनिया के तौर तरीकों में काफी बदलाव आया है, लेकिन इसकी तासीर जस की तस है। जहां तक चुनावी चिटि्ठयों का सवाल है तो इसकी भी फेहरिस्त लंबी है। देश के पहले आम चुनाव में मोरारजी देसाई और डॉ भीमराव अंबेडकर ने मतदाताओं को पत्र लिखकर उनके पक्ष में मतदान करने का अनुरोध किया था। हालांकि तब मुंबई की जनता ने दोनों नेताओं के अनुरोध को ठुकरा दिया था।

आचार्य नरेंद्र देव ने भी चुनाव में सहयोग के लिए अयोध्या की जनता को व्यक्तिगत पत्र लिखा था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 1977 के आम चुनाव में संपूर्ण क्रांति का नारा देते हुए देश की आम जनता के नाम पत्र लिखा था। उस पत्र का व्यापक असर हुआ और उत्तर भारत से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।

चुनावी पत्रों के मामले में सबसे मौजूं उदाहरण हेमवती नंदन बहुगुणा के पत्रों का है। वर्ष 1980 के आम चुनाव में कांग्रेस (ई) सरकार की वापसी के बाद किसी मुद्दे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और हेमवती नंदन बहुगुणा के बीच असहमति बढ़ गई थी। बहुगुणा ने कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। सन 1982 में गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव घोषित हुआ तो बहुगुणा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद गए।

बहुगुणा की लोकप्रियता से दिल्ली की सरकार घबराई हुई थी। गढ़वाल का उप चुनाव इसी घबराहट में दो बार टाला गया, लेकिन जब तीसरी बार चुनाव संपन्न हुआ और परिणाम आया तो सत्ताधारी दल की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र मोहन सिंह नेगी की करारी हार हुई। हेमवती नंदन बहुगुणा 29 हजार से अधिक मतों से गढ़वाल यूपी का चुनाव जीत गए।

लेकिन 2 साल बाद ही वर्ष 1984 के आम चुनाव में जब हेमवती नंदन बहुगुणा ने इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ते हुए एक बार फिर मतदाताओं को पांच लाख चिट्ठियां भेजी तो चुनाव हार गये। राजीव गांधी के कहने पर चुनाव में उतरे अमिताभ बच्चन के स्टारडम के आगे बहुगुणा का यह नुस्खा काम नहीं आया। उस चुनाव में अमिताभ बच्चन को कुल पड़े मतों का 67.1% मत प्राप्त हुआ जबकि बहुगुणा को केवल 20.8 प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए।

बहुगुणा प्रकरण के लंबे समय बाद इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने अमित शाह सहित सभी प्रत्याशियों के नाम जो चिट्ठी लिखी है उसमें मतदाताओं से सीधा संवाद करते हुए अपने प्रत्याशियों की उपलब्धियां गिनाई हैं। सभी प्रत्याशियों के नाम लिखी गयी चिट्ठी में प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया है कि यह चुनाव साधारण नहीं है। मोदी द्वारा लिखी चिट्ठी के मुताबिक "यह चुनाव हमारे वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का एक सुनहरा अवसर है। यह चुनाव पांच- छह दशकों के कांग्रेस के शासनकाल में हमारे परिवार और परिवार के बुजुर्गों ने जो कष्ट सहे हैं, उनसे मुक्ति पाने का अहम क्षण है।"

चिट्ठियों में आगे लिखा है, "भाजपा को मिलने वाला हर वोट एक मजबूत सरकार बनाने और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने के प्रयास को गति देने वाला मत है। मैं आपसे कांग्रेस पार्टी और उसके इंडी अलायंस के विभाजनकारी और भेदभावपूर्ण उद्देश्यों के विरुद्ध मतदाताओं को जागरूक करने का आग्रह करता हूं।"

कांग्रेस अब यह मानकर चल रही है कि मोदी कोई अपराजेय नेता नहीं है। कांग्रेस की नजर में अब भारत जोड़ो यात्रा के दो चरणों के साथ राहुल गांधी का कद इतना बढ़ गया है कि वह उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है। कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ अपने अभियान में यह नारा गढ़ा है कि "दक्षिण में साफ और उत्तर में हाफ।" लेकिन मोदी भी मंजे हुए नेता हैं और इस खेल से पूरी तरह वाकिफ हैं।

इसलिए अबकी बार 400 पार के नारे के साथ मोदी और अमित शाह की जोड़ी तीसरे कार्यकाल का दावा तो कर रही है, लेकिन एक अनजाने भय के कारण कांग्रेस के प्रति और कड़ा रुख अख्तियार करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को प्रेरित कर रही है।
नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी, ममता बनर्जी के अलग सुर के बाद नाम मात्र के लिए बचे इंडिया गठबंधन के बीच अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के बाद बीजेपी को चिंता नहीं होनी चाहिए थी। लेकिन राहुल गांधी जब से हाथ में संविधान लेकर चुनावी रैलियां करने लगे हैं, भाजपा की चिंता बढ़ती जा रही है।

राहुल गांधी ने ट्विटर पर कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों और नेताओं से अनुरोध किया है कि वह जहां भी जाए पवित्र संविधान को अपने साथ जरूर रखें और गांव-गांव गली-गली ऐलान कर दें कि जब तक कांग्रेस है दुनिया की कोई ताकत भारत से उसका संविधान छीन नहीं सकती। हाल के दिनों में यह दिखा है कि कांग्रेस ने संविधान को आगे कर जब भी सरकार का विरोध किया है बीजेपी बचाव की मुद्रा में आ जाती है। अभी हाल ही में सोनिया गांधी ने दिल्ली के राजघाट पर कांग्रेस के सत्याग्रह के दौरान संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया था। उसके बाद प्रधानमंत्री की ओर से एक रैली में सफाई दी गई कि बाबा साहब के संविधान को कोई खतरा नहीं है।

लेकिन सवाल यह है कि मोदी की लोकप्रियता चरम पर है और जहां-जहां बीजेपी की सरकार है डबल इंजन के फायदे बताए जा रहे हैं। देश की ताकत घर में घुसकर मारने वाले नए भारत के रूप में पेश की जा रही है, इसके बाद भी दिक्कत आ रही है? मोदी की चिट्ठी में बूथ लेवल पर कांग्रेस को टार्गेट करने की सलाह दी जा रही है, यानी कुछ ना कुछ आशंका जरूर है। लेकिन क्या?

बीते दो चुनाव के नतीजे को देखें तो मालूम होता है कि देश में जहां भी क्षेत्रीय दल मजबूत स्थिति में हैं, बीजेपी के प्रदर्शन पर काफी असर पड़ता है। यानी 2024 में भी बीजेपी का नंबर क्षेत्रीय दलों के चुनावी प्रदर्शन पर ही निर्भर करता है। पूरे देश में 243 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी का क्षेत्रीय राजनीतिक दलों से सीधा मुकाबला है। कांग्रेस की तुलना में बीजेपी के लिए क्षेत्रीय दलों से मुकाबला ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

ऐसे में बीजेपी को कांग्रेस के खिलाफ मेहनत करने के बजाय क्षेत्रीय दलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था। लेकिन पहले दौर के मतदान के बाद भाजपा के रणनीतिकारों का अत्यधिक चौकन्ना हो जाना तथा प्रमुख विपक्षी पार्टी के खिलाफ अति आक्रामक रुख अपनाने की राय से लोगों के कान खड़े होना स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर चिट्ठी भेजी है। देखना यह है कि लोग चिट्ठी का मजमून बांच कर काम पर लग जाते हैं अथवा लिफाफे को बाद में खोलेंगे कहकर किनारे रख देते हैं।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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