भाजपा की सीटें पांच राज्यों में घट रही, पांच में ही बढ़ रही
BJP Seats: महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली को छोड़कर अन्य किसी भी राज्य में इंडी एलायंस की सीट शेयरिंग नहीं हुई| इसमें कोई शंका नहीं है कि इन चारों ही राज्यों में विपक्ष ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है| दिल्ली को छोड़कर बाकी तीनों राज्यों में एनडीए की सरकारें है|
सत्रहवीं लोकसभा के आख़िरी दिनों में इन चारों राज्यों की 175 लोकसभा सीटों में से 153 सांसद एनडीए के थे| महाराष्ट्र और बिहार के 88 में से 80 सांसद एनडीए के थे| महाराष्ट्र में भाजपा 24 और शिवसेना 18 लोकसभा सीटें जीती थी, राष्ट्रवादी कांग्रेस 4, कांग्रेस एक और एक सीट पर निर्दलीय जीती थी| शिवसेना के विभाजन के बाद 13 सांसद एनडीए में रह गए थे, राष्ट्रवादी कांग्रेस में विभाजन के बाद तीन सांसद एनडीए में शामिल हो गए थे, निर्दलीय सांसद नवनीत राणा भी एनडीए में शामिल हो गई थी|

इस तरह सत्रहवीं लोकसभा के आख़िरी दिनों में महाराष्ट्र के 48 में से 41 सांसद और बिहार में 40 में से 39 सांसद एनडीए में थे, जिनमें भाजपा के 17, जेडीयू के 16 और दोनों लोक शक्ति पार्टियों के छह सांसद शामिल थे| लेकिन इन दोनों राज्यों में एनडीए को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा है| भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह भी मानते हैं कि इस बार इन दोनों राज्यों से 80 सांसद नहीं आने वाले और भाजपा के खुद भी 41 नहीं आने वाले, यह संख्या 32 से 35 तक हो सकती है| सहयोगियों की संख्या भी 39 से घट कर 25 के आसपास हो सकती है| यानी इन दोनों राज्यों में अकेले भाजपा को 6 से 9 तक सीटों का नुकसान होगा|
अमित शाह ने कबूल किया है कि बिहार और महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान और हरियाणा में भी भाजपा को 4 से 6 सीटों तक का नुकसान हो सकता है| कर्नाटक में भी 28 में से 25 की यथास्थिति बनाए रखना असंभव है, भले ही अमित शाह का दावा है कि कांग्रेस सरकार ने 35 में से सिर्फ 3 वायदे निभाए हैं और कुछ ही महीनों में उसकी साख गिर गई है| लेकिन जेडीएस से गठबंधन का भाजपा को फायदे के बजाए नुकसान हो सकता है, और वह दो से पांच सीटें कर्नाटक में भी गंवा सकती है| यानी बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक में भाजपा को 15 से 20 तक सीटों का नुकसान होगा| महाराष्ट्र और बिहार में सहयोगी दलों को भी 14-15 सीटों का नुकसान होगा| कुल मिला कर एनडीए को 29 से लेकर 35 सीटों का नुकसान इन पांच राज्यों में होगा|

उत्तर प्रदेश में 30 सीटें ऐसी हैं, जहां इंडी एलायंस के उम्मीदवारों की एनडीए से कड़ी टक्कर हुई है, यानी बाकी 50 सीटें तो पूरी तरह सुरक्षित हैं| पिछली बार एनडीए की 64 सीटें थीं और दो बाद में उपचुनाव में जीत कर 66 हो गई थी| लेकिन जिन 30 सीटों पर कड़ी टक्कर है, उनमें से अगर भाजपा आधी भी जीतती है, तो एनडीए की सीटें 65 हो जाती है, जो सत्रहवीं लोकसभा की यथास्थिति ही होगी|
अखिलेश यादव कुछ ज्यादा उम्मीद लगाए हैं, लेकिन अमित शाह की भविष्यवाणी भाजपा को 70-72 सीटों की और एनडीए को 75-76 सीटों की है| उनका आकलन समाजवादी पार्टी को तीन सीटें मिलने का और कांग्रेस को 1-2 सीटों का है| जहां तक दिल्ली का सवाल है, तो केजरीवाल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव का दावा सभी सातों सीटें जीतने का है, जबकि अमित शाह की तरह दिल्ली में भी आम धारणा है कि सातों सीटें तीसरी बार भी भाजपा जीत रही है|
पांच राज्यों में भाजपा को 15 से 20 तक सीटों का नुकसान साफ़ दिखाई दे रहा है| तो 303 की यथास्थिति बनाए रखने के लिए इस नुकसान की भरपाई कहां से होगी| भाजपा के पास पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम में कम से कम एक-एक सीट बढ़ने का फीडबैक है| इसके अलावा भाजपा कम से कम पांच-छह सीटों की भरपाई उत्तर प्रदेश से करने के प्रति आश्वस्त है| यानि नुकसान 15 से 20 तक का और भरपाई सिर्फ 9-10 सीटों की|
उत्तर प्रदेश में पांच छह सीटें बढने की भाजपा की उम्मीद अतिश्योक्ति नहीं है| उसके दो बड़े कारण है, पहला कारण तो जनकल्याण की योजनाओं का जमीन पर क्रियान्वयन और गुंडाराज की समाप्ति है, जबकि दूसरा कारण बहुजन समाज पार्टी का सभी 80 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करना है, जिनमें से 23 उम्मीदवार मुस्लिम हैं, जिसने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गेम प्लान चौपट कर दिया है| भाजपा गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, गोवा के अलावा केंद्र शासित लद्दाख और चंडीगढ़ में यथास्थिति की उम्मीद लगाए है|
इसके बावजूद बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक में होने वाले नुकसान की भरपाई इन राज्यों से नहीं होती| फिर वे कौन से राज्य हैं, जहां भाजपा की सीटें बढ़ रही हैं, और जिनके भरोसे वह अपनी सीटें 350 से ज्यादा होने और एनडीए की सीटें 400 होने का दावा कर रही है| भाजपा का उड़ीसा, बंगाल, पूर्वोत्तर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में सीटें बढने का दावा है, और भाजपा के विरोधी भी मान रहे हैं कि इन चारों राज्यों और पूर्वोत्तर में भाजपा की सीटें बढ़ रही हैं|
इन चारों राज्यों में से दो राज्यों पश्चिम बंगाल, उड़ीसा में क्षेत्रीय दलों की सरकारे हैं| इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस का लगभग सफाया हो चुका है और भाजपा क्षेत्रीय दलों के विकल्प के रूप में उभर रही है| ये दोनों ही राज्य भाजपा के टार्गेट पर हैं, अब तक वह दूसरे नंबर की पार्टी है और इस बार लक्ष्य पहले नंबर की पार्टी बनाना और दोनों राज्यों में अपनी सरकार बनाना है|
उड़ीसा में पिछली भाजपा ने 21 में से 8 सीटें जीती थी, जबकि बीजू जनता दल ने 12 और कांग्रेस ने एक सीट जीती थी| पश्चिम बंगाल में भाजपा 18, तृणमूल कांग्रेस 22 और कांग्रेस 2 सीटों पर जीती थी| उड़ीसा में भाजपा का टार्गेट लोकसभा की 15 से 17 सीटें जीतने का है, और बंगाल में 25 से 30 सीटें जीतने का टार्गेट है| यानी दोनों राज्यों में कम से कम सात सात सीटों की बढ़ोतरी, उड़ीसा में 8 से बढ़कर कम से कम 15 और बंगाल में 18 से बढ़कर कम से कम 25 सीटें| अगर उड़ीसा में 17 और बंगाल में 30 तक सीटें नहीं भी आती हैं, और भाजपा दोनों राज्यों में सात सात सीटें बढ़ा लेती है, तो बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा और कर्नाटक में होने वाले नुकसान की भरपाई उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और बंगाल से हो जाएगी|
तेलंगाना में हाल तक क्षेत्रीय दल की सरकार थी, इस बार कांग्रेस के साथ भाजपा की लगभग आमने सामने की टक्कर बनी है| भारत राष्ट्र समिति नरेंद्र मोदी के परिवारवादी पार्टियों के खिलाफ हमले का शिकार होने वाली पहली पार्टी है, जिस का अंत होता दिख रहा है| हालांकि इसका फायदा कांग्रेस को हुआ है| पिछले दस साल से भारत राष्ट्र समिति के संस्थापक के. चन्द्रशेखर राव की सरकार थी, हाल ही के विधानसभा चुनावों में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा| लोकसभा चुनावों में उनका पूरा सफाया होने वाला है|
तेलंगाना में पिछली बार भारत राष्ट्र समिति 9, भाजपा 4, कांग्रेस 3 और एक सीट ओवेसी जीते थे| इस बार भारत राष्ट्र समिति एक सीट जीत ले तो बड़ी बात होगी, जबकि ओवेसी की जीत पक्की है| फायदा भाजपा और कांग्रेस दोनों को होगा| आदिलाबाद, चेवेल्ला, करीमनगर, मलकागिरी, निजामाबाद, सिकंदराबाद सीटें भाजपा की पक्की है, जबकि खम्मम, महबूबाबाद, नगरकर्नूल, नलगोंडा और पेद्दापल्ली कांग्रेस की पक्की सीटें हैं| भोंगीर, महबूबनगर, वारंगल और जहीराबाद में कांग्रेस और भाजपा में कड़ी टक्कर है, इनमें कांग्रेस का पलड़ा सिर्फ वारंगल में भारी है| जबकि भारत राष्ट्र समिति सिर्फ मेढक में कांग्रेस और भाजपा के साथ तिकोने मुकाबले में है| हालांकि अमित शाह ने पार्टी फीडबैक के अनुसार दस सीटें जीतने का दावा किया है, लेकिन भाजपा आठ से नौ सीटें जीत सकती है|
आंध्र प्रदेश का मुकाबला भी कम दिलचस्प नहीं है। भाजपा वहां तेलुगु देशम और जनसेना पार्टी के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ी है| लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव भी हो रहे हैं, भाजपा लोकसभा की छह और विधानसभा की दस सीटों पर चुनाव लड़ रही है| भाजपा को आंध्र प्रदेश में चार सीटों के अलावा केरल और तमिलनाडु में कम से कम एक एक सीट जीतने की पूरी उम्मीद है|
इन तीनों राज्यों से पिछली बार भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी| तो कुल मिला कर भाजपा को अगर मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल में कोई नुकसान नहीं हुआ, तो उसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और असम में जितनी भी सीटें बढ़ेंगी, वही उसका फायदा होगा| अनुमानत यह फायदा 10 सीटों का है, यानी भाजपा 290 से 315 के बीच कहीं रहेगी|
सहयोगी दलों में उत्तर प्रदेश में तो पाँचों सीटें जीत सकते हैं, बिहार में जेडीयू और अन्य सहयोगी 23 सीटें लड़ रहे हैं, वे 15 तक जीत सकते हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी 18 सीटें लड़ रही हैं, वे 8 तक जीत सकती हैं| आंध्र प्रदेश में टीडीपी और जनसेना पार्टी 15-16 सीटें जीत सकती हैं| तमिलनाडु में एनडीए के पार्टनर तीन-चार सीटें जीत सकते है और पूर्वोत्तर में भी पांच छह सीटें जीत सकते हैं| तो कुल मिलाकर सहयोगी पिछली बार का 50 का आंकडा बरकरार रख सकते हैं|
नरेंद्र मोदी खुद के फीडबैक और अमित शाह के फीडबैक के भरोसे आश्वस्त हैं कि वह हैट्रिक लगा रहे हैं| अमित शाह ने चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन दावे के साथ कहा कि 16 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में भाजपा क्लीन स्वीप करेगी, यानी विपक्ष पर झाडू फेर देगी| हालांकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी शायद अब यह दावा नहीं करते कि भाजपा 370 पार हो जाएगी और एनडीए 400 पार हो जाएगा|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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