कोलकाता हाईकोर्ट का फैसला तब आया जब चिड़िया चुग गई खेत
Bengal OBC List: लोकसभा चुनावों के मध्य कोलकाता हाईकोर्ट के दो फैसलों ने ममता बनर्जी और उनकी सरकार को गहरे संकट में डाल दिया| पहले हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की उन सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया, जिन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेकर भर्ती किया गया था|
केन्द्रीय एजेंसियों की छापेमारी में रिश्वत के करोड़ों रूपए का कैश पकड़ा गया था| ममता बनर्जी को अपने मंत्री पार्थ चटर्जी को बर्खास्त करना पड़ा, जिनके वक्त नियुक्तियां हुई थीं और जिनके करीबियों के घरों से करोड़ों रूपए की बरामदगी हुई थी| शिक्षक नियुक्ति घोटाले में खुद मुख्यमंत्री का भतीजा और सांसद अभिषेक बनर्जी भी कटघरे में है| इसके अलावा भी तृणमूल कांग्रेस के कई नेता-कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए हैं| लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करके उन शिक्षकों की नौकरी बचा ली, जिन्होंने रिश्वत देकर और योग्य उम्मीदवारों का हक मार कर ये नौकरियां हासिल की थीं|

हाईकोर्ट ने एक अच्छा फैसला किया था, यह फैसला अगर बरकरार रहता तो रिश्वत देकर नौकरियां हासिल करने वालों में डर का वातावरण बनता कि उन्हें कभी भी नौकरी से निकाला जा सकता है| नतीजतन भ्रष्टाचार पर नकेल लगती, लेकिन सुपीमकोर्ट के फैसला पलटने से भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन मिलेगा कि एक बार रिश्वत देकर नौकरी मिल गई, तो फिर कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता| सुप्रीमकोर्ट के उस फैसले ने भ्रष्टाचार को बढावा देने का काम किया है|
अब कोलकाता हाईकोर्ट ने एक और एतिहासिक फैसला दिया है, जब उसने चोर दरवाजे से अल्पसंख्यकों को सरकारी नौकरी देने का रास्ता बंद करने की कोशिश की है| जो काम कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने अभी कुछ महीने पहले किया है कि सभी मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल करके हिन्दुओं की ओबीसी जातियों को मिलने वाले आरक्षण में सेंधमारी की है, उसे ममता बनर्जी ने 2011 में सत्ता में आने के बाद से शुरू कर दिया था|

22 जनवरी को कोलकात्ता हाईकोर्ट ने अपने एतिहासिक फैसले में 2010 के बाद 77 वर्गों को जारी किए गए सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया| जिस तरह नौकरियां रद्द होने पर सुप्रीमकोर्ट में जाने से पहले ही ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट का फैसला मानने से इंकार कर दिया था, उसी तरह इस फैसले को भी मानने से इंकार कर दिया है| ममता बनर्जी ने कहा है कि उन सभी मुस्लिम जातियों को ओबीसी का प्रमाणपत्र दिया जाना जारी रहेगा, जिन्हें उनकी सरकार ने ओबीसी में शामिल किया है|
ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट के फैसले को भारतीय जनता पार्टी का फैसला बताया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी चुनावों में मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल करके हिन्दू ओबीसी के आरक्षण कोटे में सेंधमारी का मुद्दा उठाती रही है| हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं भाजपा के देश भर के हर नेता ने इस फैसले को इंडी एलायंस के मुस्लिम तुष्टिकरण का प्रमाण बताकर हमलावर रूख अपनाया है|
लोकसभा चुनावों में आरक्षण एक बड़ा मुद्दा बना ही हुआ था| कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल वोटरों को यह कह कर डरा रहे हैं कि मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन गए तो वह संविधान बदल देंगे, और एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण खत्म कर देंगे| इसके जवाब में मोदी ने गारंटी दी है कि वह तो क्या कोई भी आरक्षण खत्म नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस सत्ता में आई तो वह हिंदुओं के ओबीसी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का सारा कोटा मुसलमानों को देगी| जिसके प्रमाण के तौर पर भाजपा ने कर्नाटक का उदाहरण भी दिया है, जहां सारी मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल कर लिया गया है|
चुनावों के दौरान ही लालू यादव ने यह कर इंडी एलायंस के इरादों की पुष्टि की थी कि सभी मुसलमानों को आरक्षण मिलना चाहिए| हाल ही में भाजपा ने राहुल गांधी के 2011 के एक भाषण का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें वह सारे मुसलमानों को आरक्षण की बात कह रहे थे| लेकिन इन सबसे ऊपर कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले ने भाजपा को बड़ा हथियार थमा दिया है, कि इंडी एलायंस के दल जहां जहां सत्ता में हैं, वहां वहां वे हिंदुओं के ओबीसी वर्ग का आरक्षण मुसलमानों को दे रहे हैं|
लेकिन ममता सरकार के मुसलमानों को ओबीसी में शामिल किए जाने के खिलाफ यह फैसला तब आया है जब चिड़िया चुग गई खेत, यानी जब देश की 428 सीटों पर चुनाव हो चुका है, और सिर्फ 115 सीटें बची हैं| लेकिन भाजपा बाकी बची 115 लोकसभा सीटों पर इस फैसले को ज्यादा से ज्यादा भुनाने में जुट गई है| हालांकि बंगाल में तो सिर्फ 17 सीटें ही बची हैं, 25 सीटों पर तो चुनाव हो चुका है|
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सारे सिस्टम को दरकिनार करके जिन 42 वर्गों को ओबीसी वर्ग में रखा, उनमें से 41 वर्ग मुस्लिम समुदाय के हैं| यह वास्तविक सामाजिक और आर्थिक आधार देखने के बजाए वोट बैंक को सामने रख कर किया गया फैसला था| ममता बनर्जी सरकार ने 2012 से लेकर 2023 तक करीब पांच लाख प्रमाण पत्र बांटे हैं| अब उनमें से कितने सरकारी नौकरी में हैं, यह आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है| लेकिन हाईकोर्ट ने उन लोगों को छूट दे दी है, जो इन प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पा चुके हैं|
अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार के पिछड़ा वर्ग आयोग पर ऊंगली उठाई है, जिसने आरक्षण को लागू करते समय संविधान के अनुच्छेद 16(4) में निर्धारित सिद्धांतों का पालन करने के बजाए टीएमसी के राजनीतिक वादों को पूरा करने के लिए अनुचित जल्दबाजी में काम किया और आरक्षण प्रणाली की अखंडता से समझौता किया|
ममता बनर्जी ने खुद की ओर से नियुक्त आयोग से मुस्लिम तुष्टिकरण का यह एक बहुत बड़ा खेल करवाया था| मुस्लिम तृणमूल कांग्रेस का मुख्य वोट बैंक हैं| तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम नेता बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध रूप से भारत में आने वाले मुसलमानों को बसाने और उनका भारतीय नागरिकता के फर्जी दस्तावेज बनाने के काम में लगे रहते हैं| भारत सरकार ने जब रोहिंग्या मुसलमानों की शिनाख्त शुरू की थी, तो उसका सबसे ज्यादा विरोध पश्चिम बंगाल में ही हुआ था|
इस फैसले से उठने वाले बुनियादी सवालों में से एक यह है कि हिंदू जाति-आधारित आरक्षण को मुस्लिम समुदायों तक क्यों बढ़ाया जाना चाहिए, जबकि मुस्लिम इस बात का दावा करते हैं कि उनके यहाँ जाति व्यवस्था है ही नहीं| भारतीय संविधान के मुताबिक़ आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए बनाया गया था| संविधान सभा ने धार्मिक आधार पर आरक्षण की मांग को बहस के बाद ठुकरा दिया था, लेकिन संविधान लागू होने के सत्तर साल बाद आरक्षण राजनीतिक तुष्टिकरण का एक हथियार बन गया है|
टीएमसी सरकार ने 2012 में क़ानून बना कर मुस्लिमों को ओबीसी आरक्षण में दावा करने की छूट देकर उनका तुष्टिकरण किया, अपना वोट बैंक पक्का किया, जबकि हिंदुओं के खिलाफ हथियार बना लिया| कायदे से देखा जाए तो कोलकाता हाईकोर्ट का फैसला उन सभी राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी है, जो संविधान की आरक्षण व्यवस्था को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए तहस नहस करने में लगे हुए हैं| सुप्रीमकोर्ट पहले भी कई बार विभिन्न सरकारों की ओर से दिए गए मुस्लिम कोटे को रद्द कर चुका है, अब देखना है कि कोलकातता हाईकोर्ट का फैसला जब सुप्रीमकोर्ट में पहुंचता है तो सुप्रीमकोर्ट का क्या रूख रहता है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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