Kochi Blast: केरल में आतंकवादी हमला या घृणा फैलाने वाली सोच के खिलाफ विस्फोट?

Kochi Blast: केरल के कोच्चि शहर से सटे कलमासरी के जामरा कन्वेन्शन सेन्टर में रविवार को हुए बम विस्फोट ने एक अजीबो गरीब स्थिति पैदा कर दी है। इसे क्या कहा जाए? एक आतंकवादी हमला या फिर घृणा फैलाने वाली सोच पर एक हमला? जो कुछ हुआ वह हिंसा और आतंकवाद की श्रेणी में ही रखा जाएगा लेकिन बम विस्फोट करके तीन की हत्या और 40 लोगों को घायल करनेवाला जब सामने आया तो यह सवाल पैदा हो गया कि क्या इसे आतंकवादी हमला कहा जाएगा?

कलमासरी के कन्वेशन सेन्टर में बम विस्फोट की अफरा तफरी में देश भर की सुरक्षा एजंसियां अलर्ट हो गयीं। गृहमंत्री तक ने राज्य के मुख्यमंत्री से तत्काल बात की। एनएसजी की एक टीम सबूतों को इकट्ठा करने केरल रवाना हो गयी। आतंकवादी गतिविधियों की जांच करनेवाली एनआईए ने केरल जाने की तैयारी शुरु कर दी। देश के संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी। मुंबई में रहनेवाले यहूदियों की सुरक्षा का रिव्यू शुरु हो गया। नागपुर के आरएसएस हेडक्वार्टर में भी सुरक्षा को रिव्यू किया गया।

Kochi Blast: Terrorist attack in Kerala or blast against hateful thinking?

यह सब इसलिए क्योंकि केरल में जिस दिन बम विस्फोट हुआ उसके ठीक एक दिन पहले हमास के एक लीडर खालिद मशाल ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए केरल के ही मलप्पुरम में जमात ए इस्लामी से जुड़े मुसलमानों को संबोधित किया था। जिन पर हमला हुआ था वो क्रिश्चियनों का ऐसा सेक्ट है जो यहूदी देवता यहोवा को मानते हैं। इसीलिए राज्य के डीजीपी शेख दरवेश ने न केवल तत्काल एसआईटी गठन की घोषणा कर दी बल्कि "नफरत फैलानेवालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई" की चेतावनी भी जारी कर दी।

लेकिन पुलिस और केन्द्रीय एजंसियां अभी अपनी जांच को आगे बढातीं और आरोपी तक पहुंचती इसके पहले ही सोशल मीडिया पर डोमिनिक मार्टिन नामक एक ईसाई व्यक्ति सोशल मीडिया पर प्रस्तुत हो गया जिसने दावा किया कि यह बम विस्फोट उसने किया है। सोशल मीडिया पर न सिर्फ उसने अपनी स्वीकारोक्ति का वीडियो पोस्ट किया बल्कि पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया। जो पुलिस और सुरक्षा एजंसियां देशभर में एलर्ट जारी कर रही थीं, एकबारगी इस स्वीकारोक्ति और समर्पण से हतप्रभ रह गयीं। अब भी उन्हें भरोसा ही नहीं हो रहा है कि ऐसी आतंकी वारदात को अंजाम देनेवाला व्यक्ति स्वयं न केवल वारदात को स्वीकार कर लेगा बल्कि पुलिस के सामने समर्पण भी कर देगा।

इसलिए पुलिस और सुरक्षा एजंसियां बाकी पहलुओं पर भी जांच कर रही हैं कि क्या उसकी स्वीकारोक्ति विश्वास करने योग्य है भी या नहीं। खैर, आईईडी ब्लास्ट की जिस तकनीकी का इस्तेमाल इस विस्फोट में किया गया है उसे कोई एक व्यक्ति अकेले दम पर तैयार कर ले और वारदात को अंजाम भी दे दे, ये थोड़ा अविश्वसनीय ही लगता है। लेकिन अब क्योंकि कोई इसकी जिम्मेवारी भी ले रहा है और ऐसा करने के पीछे अपना तर्क भी दे रहा है तो उस पर अविश्वास करने का कारण भी किसी को नजर नहीं आ रहा है।

कलमासरी के कन्वेन्शन सेन्टर में जिस समय विस्फोट हुआ वहां क्रिश्चियनों के एक सेक्ट यहोवावादियों का तीन दिवसीय सम्मेलन चल रहा था। डोमिनिक मार्टिन खुद भी लंबे समय से इस सेक्ट से जुड़ा हुआ है इसलिए वह उनकी शिक्षाओं और मान्यताओं से भलि भांति परिचित है। इसलिए सोशल मीडिया पर अपना जो वीडियो जारी किया उसमें उसने स्वीकार किया कि "यहोवावादियों की जो शिक्षाएं है वह देशद्रोह जैसी हैं। वह समाज और राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं है। उनकी मान्यताएं और शिक्षाएं नौजवानों को पथभ्रष्ट करनेवाली हैं।"

अपने वीडियो में डोमिनिक मार्टिन बताता है कि "छह साल पहले मुझे एहसास हुआ कि यह संगठन गलत रास्ते पर है और उनकी शिक्षाएं राष्ट्र-विरोधी हैं। मैंने उनसे कई बार इसे ठीक करने के लिए कहा। हालांकि, वे ऐसा करने के लिए कभी तैयार नहीं थे।" डोमिनिक का कहना है कि "वे जो सिखाते हैं वह यह है कि इस दुनिया में हर कोई नष्ट हो जाएगा, और सिर्फ वे बचे रहेंगे। ऐसे में हमें उस संगठन के बारे में क्या करना चाहिए जो 850 करोड़ लोगों के खत्म होने की कामना करता है? मुझे कोई रास्ता नहीं मिल सका। मैंने इस गलत विचारधारा का जवाब देने का फैसला किया क्योंकि मैं इसके बारे में पूरी तरह से जागरूक हूं।''

डोमिनक मार्टिन अपने वीडियो संदेश में आगे कहता है कि "इस देश में रहते हुए, वे यहां के सभी लोगों को वेश्या और डूम्ड (जिनका विनाश होना तय है) कहकर अपमानित करते हैं। वे अपने लोगों से कहते हैं कि वे दूसरों से हाथ न मिलाएं, और उनके साथ खाना न खाएं। मुझे एहसास हुआ कि यह एक गलत विचारधारा थी। समूह वयस्कों को वोट न देने और सैन्य सेवाओं में शामिल होने से परहेज करने के लिए कहता है। यदि आप इस प्रकार के संगठनों को नियंत्रित नहीं कर रहे हैं जो खतरनाक विचार फैला रहे हैं, तो मेरे जैसे लोगों को अपनी जान का बलिदान देना होगा।" शायद इसीलिए उसने आईडी विस्फोट के जरिए उस कन्वेंशन सेन्टर को खत्म कर देने का प्लान बनाया था जहां लगभग दो हजार यहोवावादी इकट्ठा थे।

मार्टिन की इस स्वीकारोक्ति के बाद सवाल यह पैदा होता है कि उसने जो कुछ भी किया वह शासकीय और मानवीय आधार पर पूरी तरह गलत है लेकिन उसने यह क्यों किया। क्या उसने यह अपराध देश और समाज के खिलाफ गलत मंशा रखनेवाले लोगों को खत्म करने के लिए किया? उसकी बातों से लगता है कि उसे उन लोगों से नफरत है जो समाज में नफरत फैला रहे हैं और अपने संप्रदाय के नाम पर देश में घृणित विचार को फैला रहे हैं। अब मुश्किल यह है कि उसे आतंकवादी कहा जाए या ऐसा नासमझ जो अपने देश के खिलाफ गलत सोच रखनेवाले लोगों को अपने बूते पर सजा देना चाहता था?

खैर, इसके आगे सुरक्षा बलों और न्याय व्यवस्था को मिलकर उसका अपराध सिद्ध करना होगा और सजा भी सुनिश्चित करनी होगी। लेकिन उसकी स्वीकारोक्ति ने कुछ सवाल तो पैदा कर ही दिए हैं। अगर उसे यहोवावादियों की विचारधारा गलत लग रही थी तो उसने बम विस्फोट करने की बजाय न्याय व्यवस्था का रास्ता क्यों नहीं चुना? वह उनके खिलाफ न्यायिक लड़ाई भी लड़ सकता था लेकिन उसने जो रास्ता चुना वह रास्ता आतंक का है। उसके विस्फोट में जो बेगुनाह लोग मारे गये उनको समझा बुझाकर भी तो इस संगठन से अलग किया जा सकता था। बम विस्फोट की बजाय वह उस संगठन के खिलाफ वैचारिक अभियान चलाता तो क्या उसे सफलता नहीं मिलती?

मार्टिन इस बात को नहीं समझ सका कि वह जो कर रहा है उसके पीछे उसकी मंशा भले ही ठीक हो लेकिन उसका कार्य आतंकवादी वारदात ही कही जाएगी। लेकिन जब मार्टिन अपना बलिदान देने के लिए आगे आ ही गया तो उस पर होनेवाली कार्रवाई और मिलने वाली सजा का शायद ही उस पर कोई असर हो।

इसी बात ने इस पूरे घटनाक्रम को बहुत अजीबो गरीब मोड़ दे दिया है। किसी के भी मन में यह सवाल भी उठ सकता है कि असल दोषी कौन है? वो यहोवावादी जो ओल्ड टेस्टामेन्ट में वर्णित यहूदी ईश्वर को अपना साक्षी मानकर अपने आपको ही धरती का सच्चा उत्तराधिकारी मानते हैं या फिर वह मार्टिन जो ऐसी सोच के विरोध में बम विस्फोट कर बैठता है?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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