Freebies in Election Manifesto: हर पार्टी को मुफ्त रेवड़ियों का ही सहारा

प्रधानमंत्री मोदी भले ही ये कहते रहे हों कि राजनीति में रेवड़ी कल्चर खत्म होना चाहिए लेकिन कर्नाटक में भाजपा सहित कांग्रेस और जेडीएस भर भर कर रेवड़िया बांटने का वादा कर रहे हैं।

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Freebies in Election Manifesto: कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने सरकार बचाने, कांग्रेस ने सरकार बनाने और जेडीएस ने दोनों राष्ट्रीय दलों का खेल खराब करने के लिए अपने-अपने घोषणा पत्रों में जमकर रेवड़ी बांटने का वादा किया है। तीनों दलों ने मुफ्त की तमाम घोषणाएं की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सभी राजनीतिक दलों ने अपने मेनीफेस्टों में जो घोषणाए की हैं अगर उन्हें सत्ता में आने पर राजनीतिक दल ईमानदारी से लागू करते हैं तो राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ सकती है।

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कांग्रेस अपनी सभी घोषणाएं पूरी करे तो राज्य के कुल बजट का लगभग एक तिहाई उस पर खर्च हो जाएगा, जो व्यवहारिक नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि सभी कार्यक्रमों को लागू करने में 50 हजार करोड़ रूपये खर्च होंगे जबकि राज्य का बजट 3 लाख करोड़ रूपये का है। जब लेखक ने आर्थिक विशेषज्ञ से दलों के घोषणा पत्रों में मुफ्त रेवड़ी कल्चर की बात की तो आर्थिक जानकारों का कहना है कि कर्नाटक कोई गरीब राज्य नहीं है। कर्नाटक का कर राजस्व कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग सत्तर फीसदी से अधिक रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में इसके 73 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।

कर्नाटक राज्य का राजस्व घाटा भी अधिक नहीं है। लेकिन चालू वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार की प्रतिबद्ध देनदारियां जैसे वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और प्रशासनिक खर्चे 60 फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान है। यह गत वित्तीय वर्ष के दौरान 55 फीसदी था। अभी कर्नाटक सरकार का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से कम है। ऐसे में सरकारों को मुफ्त की रेवड़ियों से बचना चाहिए। जानकारों का कहना है कि सरकार पर पहले ही पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दबाव है। ऐसे में नई सरकार पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा करती है तो फ्री की रेवड़ियां बांटने के लिए सरकार को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ेगा जो कर्नाटक जैसे समृद्ध राज्य के लिए ठीक नहीं होगा।

तीनों दलों की लोकलुभावन और मुफ्त रेवड़ियों की घोषणाओं की बात करे तो कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में हर परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली, परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया को हर महीने 2 हजार रुपए, बेरोजगार ग्रेजुएट को दो साल के लिए 3 हजार रुपए और डिप्लोमा होल्डर्स को 1,500 रुपए प्रति माह देने का ऐलान किया है। इसके अलावा राज्य सरकार की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा का भी वादा किया है। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवार के प्रत्येक व्यक्ति को प्रति माह 10 किलो अनाज मिलेगा। रात में ड्यूटी करने वाले पुलिस वालों को 5000 रुपये का विशेष भत्ता देने का वादा भी किया गयी है।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में मछुआरों के लिए हर साल 500 लीटर टैक्स फ्री डीजल देने और 1,000 करोड़ का सीनियर सिटिजन वेलफेयर फंड बनाने का वादा किया है। साथ में मिल्क सब्सिडी को 5 रुपए से बढ़ाकर 7 रुपए करने का भरोसा भी दिया है। भेड़-बकरी के लिए किसानों का एक लाख रुपए तक का लोन माफ कर देने और कांग्रेस सरकार बनने पर बजरंग दल जैसे संगठनों को बैन करने का वादा शामिल है।

वही कांग्रेस के घोषणा पत्र के जवाब में सोमवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भाजपा का घोषणा पत्र 'प्रजा ध्वनि' बेंगलुरू में जारी करते हुए कांग्रेस के समान ही फ्री की रेवड़ी कल्चर को अपने घोषणा पत्र में भरपूर जगह दी है।

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में बीपीएल परिवार को प्रतिदिन आधा लीटर नंदिनी दूध और युगादी, गणेश चतुर्थी और दीपावली पर 3 गैस सिलेंडर मुफ्त देने की घोषणा के साथ राज्य के दस लाख बेघर लोगों को रहने के लिए मकान, महिला, एससी-एसटी घरों के लिए 5 साल का दस हजार रुपए फिक्सड डिपॉजिट करने, सीनियर सिटिजन के लिए हर साल मुफ्त हेल्थ चेकअप की सुविधा, मुफ्त भोजन के लिए अटल आहार केंद्र खोलने, महिलाओं के लिए फ्री बस पास, बेट्टा कुरबा, सिद्दी, तलवारा और परिवारा समुदाय को आदिवासी सूची में शामिल करने, पीएफआई और अन्य जिहादी संगठनों पर बैन लगाने, कर्नाटक में एनआरसी लागू करने, देव यात्रा तिरुपति, अयोध्या, काशी, रामेश्वरम, कोल्हापुर, सबरीमाला और केदारनाथ जाने के लिए गरीब परिवारों को 25 हजार रुपए की मदद देने, वोक्कालिग्गा और लिंगायत के लिए आरक्षण दो-दो प्रतिशत बढ़ाने का वादा किया गया है।

जेडीएस के घोषणा पत्र की बात करें तो देवगौड़ा ने अपनी पार्टी के घोषणा पत्र में किसानों के लिए "रैयत बंधु" नाम से एक योजना की बात कही है, जिसमें हर महीने कृषि श्रमिक परिवारों को 2,000 रुपये देने का वादा किया गया है। इसके साथ ही किसान युवकों से शादी करने वाली लड़कियों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने, गर्भवती महिलाओं के लिए छह महीने के लिए 6,000 रुपये, 'स्त्री शक्ति' स्वयं सहायता समूहों के लिए ऋण माफी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए पेंशन, ऑटो चालकों के लिए 2,000 रुपये प्रति माह, महिलाओं के लिए 2,000 रुपये के साथ पंजीकृत निजी सुरक्षा गार्ड और सीएम राहत कोष के तहत दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए 25 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।

इसके अलावा जेडीएस ने स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त साइकिल योजना, उच्च शिक्षा में पढ़ रही लड़कियों के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर, 30 लाख बेघरों के लिए आवास और एक साल में 5 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त में देने और विधवाओं की पेशन को बढ़ाकर 900 रूपये से 2500 रुपये करने का वादा किया है।

इसके साथ ही पूर्व पीएम देवेगौड़ा की पार्टी ने निजी क्षेत्र की कंपनियों में कन्नाडिगा को नौकरियों देने के लिए आरक्षण कानून लाने और साथ ही पार्टी ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मुफ्त उच्च शिक्षा प्रदान करने का वादा किया है। जेडीएस ने किसानों को प्रति एकड़ 10,000 रुपये की सब्सिडी देने, खेतिहर मजदूरों के लिए 2,000 रुपये मासिक भत्ता, देने का वादा किया है।

कांग्रेस और जेडीएस दोनों ने मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए खासतौर पर घोषणा की है कि अगर वो चुनाव बाद सत्ता हासिल करते हैं तो मुस्लिमों को 4 फीसदी आरक्षण पहली ही कैबिनेट बैठक में फिर से बहाल कर देंगे। इसके साथ ही जेडीएस ने कन्नाडिगा अस्मिता का हवाला देते हुए यह वादा भी किया है कि अगर उनकी सरकार बनेगी तो वह गुजरात के आणंद सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (अमूल) को सूबे के बाहर का रास्ता दिखा देगी और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) के नंदिनी ब्रांड को बतौर कन्नडिगा पूरे देश में पहचान बनाने के लिए काम करेगी।

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    तीनों पार्टीयों के घोषणा पत्र जारी होने के बाद फ्री की रेवड़ियां देने का वादा जनता को कितना रास आता है, इसके लिए 13 मई तक इंतजार करना होगा। लेकिन राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र से एक बात साफ है कि तीनों दल सत्ता में आने के लिए हर तरह का प्रलोभन और लालच मतदाताओं को देने में एक दूसरे से होड़ कर रहे हैं।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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