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Karnataka CM Selection: गांधी परिवार ने कर्नाटक में नहीं की मनमानी

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए डी के शिवकुमार ने न केवल संगठन को मजबूत किया, बल्कि चुनावों में अपने बलबूते अथाह खर्च भी किया। लेकिन विधायकों का बहुमत सिद्दारमैया के साथ होने के कारण गांधी परिवार को भी झुकना पड़ा।

Karnataka CM Selection Gandhi family bow down as majority of MLAs were with Siddaramaiah

Karnataka CM Selection: कांग्रेस ने जिस तरह सिद्दारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया है, उससे एक बात साबित हुई है कि गांधी परिवार ने मनमानी नहीं की| जिस दिन कांग्रेस के तीन पर्यवेक्षक बेंगलुरु में कांग्रेस हाईकमान को अधिकृत किए जाने का प्रस्ताव पास करवाने गए थे, उस दिन कांग्रेस विधायकों की राय ली गई थी| वह कोई ज़ुबानी राय नहीं थी, बल्कि सभी विधायकों से कहा गया था कि वे एक पर्ची पर अपनी पसंद का नाम लिखें| डीके शिव कुमार के पक्ष में 45 वोट पड़े थे, जबकि सिद्दारमैया के पक्ष में 85 वोट पड़े थे, बाकी पांच ने फैसला हाईकमान पर छोड़ा था। इसके अलावा तीन निर्दलियों ने कहा था कि वे कैसी भी परिस्थिति में समर्थन करेंगे| लोकतंत्र में यही सही तरीका है| गांधी परिवार डीके शिवकुमार को मुख्यमन्त्री बनवाना चाहता था, क्योंकि चुनाव जितवाने में उनकी अहम भूमिका थी|

Karnataka CM Selection Gandhi family bow down as majority of MLAs were with Siddaramaiah

चार साल पहले जब कांग्रेस जेडीएस की साझा सरकार गिरी थी, उसी दिन डीके शिवकुमार ने सोनिया गांधी से वायदा किया था कि वह कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनवा कर दिखाएंगे| प्रदेश अध्यक्ष के नाते उन्होंने सिर्फ संगठनात्मक भूमिका नहीं निभाई, बल्कि अपनी जेब से पैसा लगा कर कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया है|

कांग्रेस हाईकमान के पास चुनाव में खर्च करने के लिए कुछ नहीं बचा था| डीके शिवकुमार ने भरपूर खर्च किया है, इसलिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उनका पहला हक बनता भी था| लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने विधायकों के फैसले को सिर आंखों पर रखा| कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जब सारी स्थिति सोनिया गांधी के सामने रखी, तो सोनिया गांधी ने भी उन्हें यही कहा कि विधायकों की राय के मुताबिक़ ही फैसला होना चाहिए|

कांग्रेस ने सबसे बड़ा सबक पंजाब से सीखा है| बैठे ठाले नवजोत सिंह सिद्धू के दबाव में अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया, जबकि उनके पास विधायकों का समर्थन था| फिर जब मुख्यमंत्री बदलने का फैसला हुआ, तो विधायकों की राय सुनील जाखड़ के पक्ष में थी, गांधी परिवार ने सिद्धू और अंबिका सोनी के दबाव में उन्हें इसलिए मुख्यमंत्री नही बनाया, क्योंकि वह हिन्दू हैं| फिर जो हुआ वह सबके सामने हैं। कांग्रेस बुरी तरह हार गई|

इतना ही नहीं, कांग्रेस हाईकमान की मनमानी के कारण अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ दोनों ही आज भारतीय जनता पार्टी में हैं| पंजाब जैसी ही गलती गांधी परिवार 25 सितंबर 2022 को राजस्थान में करने वाला था, जब सचिन पायलट के पास विधायकों का समर्थन नहीं होने के बावजूद राहुल और प्रियंका उन्हें मुख्यमंत्री बनवाने पर आमादा थे| सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए राहुल और प्रियंका ने बहुत पापड़ बेले थे। पहले उदयपुर के कांग्रेस शिविर में एक व्यक्ति एक पद का प्रस्ताव पास करवाया गया। फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनवाने की रणनीति बनाई गई, ताकि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली करें, तो वह सचिन पायलट को सौंपी जा सके|

गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नामांकन होने से पहले ही राहुल गांधी ने नया नेता चुनने के लिए पर्यवेक्षक भेज दिए थे| कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने बाकायदा कांग्रेस विधायकों पर दबाव बनाया था कि वे गहलोत के विकल्प के रूप में सचिन पायलट का नाम लें| लेकिन विधायकों ने स्पीकर को इस्तीफे सौंप पर यह सार्वजनिक कर दिया कि सचिन पायलट के पास बहुमत नहीं है|

अगर वह सारा नाटक सचिन पायलट के लिए नहीं किया होता, और गांधी परिवार बहुमत के आधार पर नया मुख्यमंत्री चुनने देता, तब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद छोड़ देते| लेकिन यह सिर्फ सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनवाने का एक नाटक था| वरना कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद भी मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता कैसे बने हुए हैं| अब कहां गया एक व्यक्ति एक पद?

कांग्रेस ने पंजाब के बाद राजस्थान से भी सबक लिया हुआ है कि दिल्ली की सल्तनत अब कमजोर हो चुकी है, कांग्रेस के विधायक गांधी परिवार की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेंगे| इसी सबक का ही नतीजा है कि 1200 करोड़ रूपए की सम्पत्ति और वोक्कालिंगा समुदाय का समर्थन होने और चुनावों में पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री नहीं बन पाए|

अगर डीके शिवकुमार अपनी ही पार्टी के विधायकों पर भी कुछ पैसा लगा देते, तो वह मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन वह गांधी परिवार की तरफ से निश्चिन्त हो कर बैठे थे कि वह उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाएगा| जब वह किसी से नहीं मान रहे थे, तो आखिर बुधवार रात को सोनिया गांधी ने उन्हें फोन करके मनाया| बुधवार रात दो बजे तक मान-मनौवल चलती रही| दो बजे के बाद खबर आई कि डीके शिवकुमार मान गए हैं|

सोनिया गांधी के मनाने पर डीके शिवकुमार मान गए थे, तो मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक और फच्चर फंसा दिया। वह एक दलित उप मुख्यमंत्री भी बनवाना चाहते थे| इस पर बात फिर बिगड़ गई, डीके शिवकुमार ने कहा कि वह तभी उपमुख्यमंत्री बनेंगे, जब सिर्फ वही एक उपमुख्यमंत्री हों| मल्लिकार्जुन खड़गे को झुकना पड़ा| इन दोनों घटनाओं से फिर साबित हुआ कि मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के कागजी अध्यक्ष हैं| बड़े फैसले गांधी परिवार ही कर रहा है|

2018 के राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद की स्थिति याद कीजिए| छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के सामने टीएस सिंहदेव दावेदार थे| तीनों मुख्यमंत्रियों का फैसला गांधी परिवार ने ही किया था| बघेल के ढाई साल पूरे होने के बाद टीएस सिंहदेव ने बहुत शोर मचाया कि उनके साथ ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनाने का वादा हुआ था। वह अपने विधायकों के साथ दिल्ली भी आ धमके थे, लेकिन जब दाल नहीं गली, तो वह शांत हो कर बैठ गए|

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया दावेदार थे| कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर किनारे हो रहे ज्योतिरादित्य ने अपने विधायकों के साथ बगावत करके सरकार ही गिरा दी| राजस्थान में अशोक गहलोत के सामने सचिन पायलट दावेदार थे| सचिन पायलट ने भी बगावत करने की कोशिश की, लेकिन अशोक गहलोत ने न सिर्फ उनकी बगावत फेल कर दी, बल्कि उनकी ऐसी मिट्टी पलीत की कि न वह उप मुख्यमंत्री रहे, न प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष| अब वह अपने कपड़े फाड़ते हुए सडकों की ख़ाक छान रहे हैं| उनके पास अपनी पार्टी बनाने के सिवा कोई चारा नहीं बचा|

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    अब बिलकुल वैसा ही वायदा डीके शिवकुमार के साथ हुआ है कि दो साल सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री रहने दीजिए, फिर उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा| उन्हें आश्वासन दिया गया है कि सिद्दारमैया उसी तरह रिटायर हो जाएंगे, जैसे नरेंद्र मोदी ने येदियुरप्पा को करवाया था| क्या ऐसा हो पाएगा? क्या ऐसा पहले कभी हो पाया है?

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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