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Palestine: फिलिस्तीनी आतंकियों के साथ कांग्रेस का रिश्ता है बहुत पुराना

Palestine: 1948 में जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ब्रिटिश कब्जे वाले क्षेत्र में से इजरायल को 44 प्रतिशत और फिलिस्तीन को 46 प्रतिशत जमीन देने का फैसला किया और बाकी दस प्रतिशत जमीन यूएनओ ने अपने पास रखी तो कुल तेरह देशों ने इजरायल को जमीन देने का विरोध किया था| इनमें 12 देश तो इस्लामिक थे, तेरहवां देश जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाला भारत था| इसलिए कांग्रेस का हमेशा से फिलिस्तीन के प्रति उदार रुख रहा है, और वह इस हद तक है कि हमास की आतंकवादी वारदातों का भी कांग्रेस मूक समर्थन करती है, जैसे इस बार भी 9 अक्टूबर की कांग्रेस कार्यसमिति में किया गया|

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जानते थे कि पास किए गए प्रस्ताव से कांग्रेस को मुश्किल होगी, क्योंकि उसमें संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से घोषित आतंकी संगठन हमास की ओर से इजरायली नागरिकों पर किए गए हमले की निंदा नहीं की गई थी| फैसला यही हुआ था कि यह प्रस्ताव मीडिया को नहीं दिया जाएगा, लेकिन यह लीक हो गया| अब कांग्रेस में इस बात का पछतावा है कि प्रस्ताव की भाषा फिलिस्तीन और भारत के मुस्लिम कट्टरपंथियों को सामने रख कर क्यों की गई|

israel Palestine: Congress relationship with Palestinian terrorists is very old

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा और पी. चिदंबरम के स्पष्टीकरणों से स्थिति को संभालने की कोशिश की गई है| इन दोनों ने कहा है कि जयराम रमेश के पूर्व के बयान और प्रस्ताव को मिलाकर देखना चाहिए| लेकिन सच यह है कि कांग्रेस कार्यसमिति ने जयराम रमेश के स्टैंड को अस्वीकार कर दिया था, जिन्होंने प्रधानमंत्री के बयान के तुरंत बाद हमास के इजरायल पर आतंकी हमले की निंदा की थी|

लेकिन कांग्रेस की यह दुविधा आज़ादी से पहले की है| वह भारत के मुस्लिम कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए भारत के दीर्घकालीन हितों की बलि देती रही है| 1919 में भारतीय मुसलमानों की ओर से तुर्की के खलीफा को हटाए जाने के खिलाफ चलाए गए खिलाफत आन्दोलन का भी गांधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस ने समर्थन कर दिया था, जिसका नतीजा भारत में फैली सांप्रदायिक हिंसा में हजारों हिन्दुओं को अपनी जान गवां कर भुगतना पड़ा था|

israel Palestine: Congress relationship with Palestinian terrorists is very old

अनेक इतिहासकारों का मत है कि कांग्रेस ने भारत में अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए 1947 में भारत पाक बंटवारे के बाद धार्मिक आधार पर आबादी का ट्रांसफर नहीं होने दिया, जिसका नतीजा आज़ादी के बाद भी भारत को अनेक साम्प्रदायिक दंगों में भुगतना पड़ा है| हिन्दू बहुल भारत में मुस्लिम कट्टरपंथियों का दबाव कांग्रेस पर स्पष्ट दिख रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमास के आतंकी हमले के बाद इजरायल के साथ खड़े होने का बयान दिया| भारत में मुस्लिम समुदाय द्वारा कहीं भी हमास की निंदा नहीं की गई, अलबत्ता आतंकवाद का शिकार हुए इजरायल के साथ हमदर्दी की बजाए फिलिस्तीन के साथ प्रतिबद्धता के बयान और भाषण हुए|

इस्लामिक देश पाकिस्तान में इजरायल पर हुए आतंकी हमले का समर्थन हो, फिलिस्तीन के प्रति हमदर्दी हो, यह बात तो समझ में आती है, लेकिन भारत में भी जगह जगह फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाए गए| जम्मू कश्मीर, पश्चिमी बंगाल, केरल और उत्तर प्रदेश में जगह जगह इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन और भड़काऊ भाषण हुए| सात अक्टूबर की इन्हीं घटनाओं का असर दो दिन बाद हुई कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव पर दिखा, जब जयराम रमेश के स्टैंड को दरकिनार कर फिलिस्तीन पर कांग्रेस के पुराने स्टैंड को दोहराया गया| चुनावों को नजदीक आता देख कांग्रेस ने भी मुस्लिम कट्टरपंथियों का साथ दिया| शशी थरूर ने तो बाकायदा इंटरव्यू दे कर कांग्रेस के प्रस्ताव की तारीफ़ की|

कांग्रेस पार्टी शुरू से फिलिस्तीन की जमीन इजरायल से वापस दिलाने की बात तो करती आ रही है, जबकि खुद भारत की युद्ध में हथियाई गई जम्मू कश्मीर की जमीन पाकिस्तान से वापस लेने की हिम्मत किसी कांग्रेसी सरकार की नहीं हुई| इस्लामिक देशों की मीटिंग में यासिर अराफात ने खुल कर कहा था कि जम्मू कश्मीर पर भारत ने कब्जा किया हुआ है| उसने यह भी कहा था कि पाकिस्तान अगर कहेगा, तो हम जम्मू कश्मीर को भारत के कब्जे से मुक्त करवाने के लिए लड़ाके भेजने को तैयार हैं|

उसी यासिर अराफात और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाईजेशन को 1975 में इंदिरा गांधी ने फिलिस्तीन का कानूनी प्रतिनिधि मान लिया| 1980 में दुबारा सत्ता में आने के बाद इंदिरा गांधी ने फिलिस्तीन का दूतावास बनवा दिया और उसी साल भारत में हुए गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन में भी यासिर अराफात को निमंत्रित भी किया गया, उनका भाषण भी करवाया गया| जबकि 1988 में अपनी आजादी की घोषणा करने से पहले फिलिस्तीन नाम का कोई देश ही नहीं था| आज भी एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में फिलिस्तीन का अस्तित्व विवादों में है।

जिस अंतरराष्ट्रीय आतंकी यासिर अराफात ने जम्मू कश्मीर को भारत से मुक्त करवाने के लिए लड़ाके भेजने की बात कही, उस आतंकी को इंदिरा गांधी ने अपना भाई बना लिया था| जिस फिलिस्तीन लिबरेशन संगठन ने 1988 में फिलिस्तीन को राष्ट्र घोषित किया, वह तो इजरायल पर हमला करने वाले आतंकियों का गिरोह था, जो समय समय पर इजरायल पर आतंकी हमला करते रहते थे|

1988 में जब फिलिस्तीन ने स्वयं को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया, तो फिलिस्तीन को मान्यता देने वाला भारत पहला देश था| राजीव गांधी की सरकार ने फिलिस्तीन को मान्यता दी थी| यही नहीं राजीव गांधी ने आतंकी यासिर अराफात को नेहरू शान्ति पुरस्कार भी दिया। उसी आतंकी को राजीव गांधी सरकार ने एक बोईंग विमान भी गिफ्ट किया था| जबकि उस समय 103 देशों ने यासिर अराफात को भगौड़ा और वांछित आतंकी घोषित किया हुआ था, उस पर 2000 हत्याओं के मुकद्दमे दर्ज थे और वह छह विमानों के अपहरण मामलों में आरोपी था|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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