योग पुनर्जागरण के युग पतंजलि: परमहंस माधवदास बाबा
योग शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने की प्राचीन भारतीय विद्या है। हड़प्पा कालीन सभ्यता में भी योगमुद्रा में बैठे सन्यासी का प्रमाण मिलना सर्वविदित है। योग कितना प्राचीन है इसका ठीक ठीक अनुमान भी हम नहीं लगा सकते। लेकिन सदियों तक कंदराओं, गुफाओं और मठों तक सिमटा रहनेवाला योग बीसवीं सदी में अचानक से जन सामान्य के बीच कैसे पहुंच गया? वो कौन था जिसने कंदराओं और गुफाओं से निकालकर उसे जन सामान्य के बीच पहुंचाया?

आज के युग में योग को जन सामान्य तक पहुंचाने का काम किया परमहंस माधवदास ने, जिन्हें लोग बंगाली बाबा के नाम से भी जानते हैं। बंगाली बाबा का जन्म बंगाल के एक मुखोपाध्याय परिवार में वर्ष 1798 ईस्वी में हुआ था। 23 साल की उम्र तक वो पारिवारिक जीवन में रहे और पढाई के बाद वकालत शुरु की। लेकिन इस काम में उनका मन नहीं लगा। जल्द ही वो अध्यात्म मार्ग की ओर बढ गये। योग व अध्यात्म की विभिन्न परंपराओं को समझने के लिए हिमालय की ओर चले गये और लंबे समय तक हिमालय के विभिन्न हिस्सों में घूमते रहे। इसी दौरान उन्हें योग की शिक्षा-दीक्षा मिली।
करीब 35 साल हिमालय में गुजारने के बाद 12 साल तक एक गुफा में रहकर एकांतिक साधना की। इसके बाद 1869 में वो सामान्य साधु समाज के बीच वापस लौट आये। 1881 में उन्हें वृन्दावन में साधु समाज का प्रमुख नियुक्त किया गया। लेकिन साधु समाज के बीच चल रही इन गतिविधियों से माधवदास बाबा संतुष्ट नहीं थे। वो जनसमान्य के कष्टों को कम करने के लिए आतुर थे। 1880 में वो गुजरात आ गये और यहीं रहकर योग वेदान्त की शिक्षा शुरु कर दी।
अपने जीवन के उत्तरार्ध में जब वो स्वयं 118 साल के थे तब 1916 में वो मुंबई एक वार्ता करने आये थे। यहीं पर उनकी मुलाकात मणिभाई हरिभाई देसाई से हुई जो उस समय मुंबई विश्वविद्यालय में पढते थे। परमहंस माधवदास बाबा ने उन्हें योग शिक्षा के लिए चुना और इस तरह माधवदास बाबा से दो साल प्रशिक्षण लेने के बाद मणिभाई देसाई ने मुंबई में पहला योग इंस्टीट्यूट शुरु किया 1918 में। जिस समय यह योग इंस्टीट्यूट शुरु हुआ उस समय दादाभाई नौरोजी ने मुंबई में अपना एक खाली घर उन्हें दे दिया था जहां वो योग पर शोध अध्ययन और प्रशिक्षण का काम करते थे।
परमहंस माधवदास बाबा कहते थे कि योग हिमालय की गुफाओं में सदियों से सुरक्षित रहा है लेकिन अब समय आ गया है कि इसे जन सामान्य के बीच पहुंचाया जाए। ऐसा करने के लिए उन्होंने मणिभाई देसाई (योगेन्द्र जी) को शोध द्वारा योग की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए कहा। परमहंस माधवदास बाबा ने कहा कि ये विज्ञान का युग है और जो बात विज्ञान से प्रमाणित नहीं होगी उसे कोई स्वीकार नहीं करेगा। इसलिए उन्होंने योग को आध्यात्मिक अनुभूति का विषय नहीं बल्कि शारीरिक और मानसिक लाभ का विषय माना। इसलिए योग पुनर्जागरण के युग पतंजलि माधवदास बाबा के प्रथम शिष्य मणिभाई देसाई ने योग पर मुंबई के अलावा अमेरिका में रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किया।
मणिभाई देसाई के अलावा माधवदास बाबा के एक और शिष्य हुए जगन्नाथ गुणे। परमहंस माधवदास बाबा से योग की शिक्षा लेने के बाद जगन्नाथ गुणे ने मुंबई के ही पास लोनावाला में दूसरा योग रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाया 1924 में। जगन्नाथ गुणे बाद में कुवलयानंद के नाम से जाने गये और लोनावाला का उनका रिसर्च इंस्टीट्यूट आज कैवल्यधाम के नाम से जाना जाता है।
दोनों ही रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बंगाली बाबा के निर्देशानुसार योग को गुफाओं से निकालकर लैबोरेटरी का सब्जेक्ट बनाया। व्यापक स्तर पर विभिन्न रोगों पर योग के प्रभाव का शोध किया गया। तब से लेकर आज तक योग के शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर लगातार शोध हो रहे हैं। उन्हीं शोध का नतीजा है कि पूरी दुनिया ने माना है कि योग का शरीर और मन पर सकारात्मक असर होता है। आज योग के नाम दुनिया का एक दिन (21 जून) निर्धारित हो गया है। लेकिन आज यह यह सब कुछ न होता अगर बंगाली बाबा न होते। कंदराओं और साधु समाज से योग को बाहर लाकर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करनेवाले परमहंस माधवदास आधुनिक युग में योग का पुनर्जागरण करके 1921 में शरीर छोड़कर परमतत्व में विलीन हो गये।
यह भी पढ़ें: International Yoga Day 2022: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई? जानें सबकुछ
(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)
-
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार -
Who is Aryaman Birla Wife: RCB के नए चेयरमैन आर्यमन बिड़ला की पत्नी कौन है? Virat Kohli की टीम के बने बॉस












Click it and Unblock the Notifications