Bangladesh: चीन और अमेरिका का बांग्लादेश में बढ़ता दखल, भारत के लिए गहरी चिंता

Bangladesh: बांग्लादेश में होने वाला संसदीय चुनाव चीन और अमेरिका दोनों के लिए जोर आजमाइश का खेल बनता जा रहा है। अमेरिका खुलेआम शेख हसीना की सरकार को बार बार यह धमकी दे रहा है कि यदि अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनाव बिना किसी हिंसा के नहीं हुए तो वाशिंगटन ढाका के लिए अपनी नीतियां कड़ी कर सकता है। अमरीका वीजा से संबंधित चेतावनी पहले ही जारी कर चुका है कि चुनाव में गड़बड़ी करने वालों को अमरीका आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अब बांग्लादेश में अमेरिका के राजदूत पीटर हास ने ढाका में मुख्य चुनाव आयुक्त काजी हबीबुल से मिलने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को यह सलाह दी है कि वह विपक्षी दल बीएनपी और जमात ए इस्लामी के साथ बैठक करें और चुनाव के अनुकूल माहौल बनाए। इस पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने बहुत ही कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जिस तरह से हालत वहां बिगड़ रहे हैं, उससे इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं बांग्लादेश में मिलिट्री शासन न लागू हो जाए।

interference of China and America in Bangladesh deep concern for India

शेख हसीना अमेरिकी दखल से काफी परेशान हैं। प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने अमेरिका को जवाब इन कड़े शब्दों में दिया है - 'वह विपक्ष के साथ तभी बातचीत करेंगी जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ बातचीत के लिए बैठेंगे।' जाहिर है इन शब्दों में उन्होंने यही संकेत दिया कि अमेरिका उनको कोई निर्देश न दे। इसके आगे हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के लोग हत्यारों से कोई बातचीत नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव होगा और तय समय पर होगा। प्रधानमंत्री ने बीएनपी पर आरोप लगाया है कि यह पार्टी चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने पर तुली हुई है।

भारत के लिए यह स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। चीन और अमेरिका का बांग्लादेश में दखल यदि आगे और बढ़ता है तो भारत के लिए मूकदर्शक बने रहना संभव नहीं होगा। भारत के लिए सिर्फ पड़ोसी मुल्क का मामला नहीं है, बल्कि सामरिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बांग्लादेश में एक स्वतंत्र किन्तु लिबरल सरकार का होना जरूरी है। यदि यहाँ भी कोई मजहबी और शरिया लागू करने वाली सरकार आती है या फिर कोई मिलिट्री विद्रोह होता है तो वहां रह रहे लगभग डेढ़ करोड़ हिन्दुओं के लिए भी चिंता बढ़ सकती है।

पिछले कुछ सालों में शेख हसीना का झुकाव चीन की तरफ बढ़ा है। बीजिंग ने शेख हसीना की सरकार के साथ मिलकर कई परियोजनाएं शुरू की है। बांग्लादेश निवेश विकास प्राधिकरण (बीडा) के आकड़ों के अनुसार कम से कम 15 चीनी कंपनियां बांग्लादेश में प्रत्यक्ष निवेश लेकर आई हैं। इसके अलावा, पिछले साल 1.5 अरब डॉलर के एफडीआई प्रस्ताव भी आये थे। बांग्लादेश बैंक के आंकड़े कहते हैं कि देश में चीन से एफडीआई की वार्षिक वृद्धि 13.5% रही। 2015 में चीन से प्राप्त निवेश सिर्फ 56 मिलियन डॉलर का था, अब 12 गुना बढ़ गया है।

दूसरी तरफ अमेरिका शेख हसीना को लोकतंत्र का दुश्मन बता रहा है। इसी साल सितम्बर में न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि अपने 14 वर्षों के कार्यकाल में शेख हसीना ने पुलिस, सेना और अदालतों तक पर कब्ज़ा कर लिया है। हर जगह उन्होंने अपने वफादारों को भर दिया है और उन्हें यह बता भी दिया है कि उनके नियमों का पालन न करने के परिणाम क्या होंगे। हसीना ने संस्थाओं का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए किया है - उनके निशाने पर कलाकार, पत्रकार, कार्यकर्ता और यहां तक कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस भी शामिल हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक दुश्मनों के खिलाफ प्रतिशोध का गहरा और व्यक्तिगत अभियान चलाया है ।

2023 में बांग्लादेश ने चीन के लिए अपने सभी दरवाजे खोल दिए। दोनों देश के बीच उड़ानें बढ़ रही हैं। आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ शुरू हो रही हैं। अधिक संख्या में चीनी बांग्लादेश आ रहे हैं और अधिक बांग्लादेशी चीन जा रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 23 अगस्त, 2023 को जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर मिले थे। वहां जो मुख्य बातें हुई उनमें जिनपिंग का शेख हसीना को यह आश्वासन भी था कि बीजिंग बाहरी हस्तक्षेप से बांग्लादेश को बचाएगा।

बांग्लादेश अब चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में भी सहयोगी है। बांग्लादेश के लिए चीन का यह आश्वासन वाशिंगटन की इस धमकी को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है कि यदि इस साल के अंत में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और पारदर्शी नहीं हुए तो उसकी कीमत शेख हसीना की सरकार को चुकानी पड़ेगी।

भारत की दुविधा यह है कि जिस शेख हसीना को अमेरिका टारगेट कर रहा है, उनका समर्थन भारत करता रहा है। भारत ने शेख हसीना का विश्वास जीतने के लिए काफी निवेश भी किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के साथ संबंधों को एक नया आयाम दिया है। श्रीलंका, भूटान, पाकिस्तान नेपाल और मालदीव में चीन काफी हद तक अपनी जड़ें जमा चुका है। यदि बांग्लादेश भी उसके प्रभाव में आता है तो भारत के लिए पड़ोसी मुल्कों से ही चुनौतियां मिलनी शुरू हो जाएंगी।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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