Drone in India: ड्रोन की उड़ान से आसमान छूने की तैयारी
ड्रोन की उड़ान आसमान छूने की तैयारी में हैं। लेकिन, सवाल यह है कि क्या हम इनके लिए तैयार है? सच तो यही है कि ड्रोन भी उसी तकनीकी क्रांति का एक हिस्सा है, जिसे रोकना न तो संभव है, न ही समझदारी।

Drone in India: इसी हफ्ते भारतीय सेना ने लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और सर्विलांस बढ़ाने के लिए करीब 2,000 ड्रोन का ऑर्डर दिया है। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेनाओं के बीच झड़प के बाद इसकी काफी जरूरत महसूस की जा रही थी।
सेना द्वारा मिले आर्डर की खबर ड्रोन को लेकर अब तक की संभवत: सबसे बड़ी खबर है। अभी दो हफ्ते पहले ही, भारतीय तटरक्षक बल ने भी समुद्री सीमाओं की निगरानी और अपनी ताकत बढाने के लिए दस मल्टीकॉप्टर ड्रोन के लिए अनुबंध किया है। आईसीजी का इरादा अगले दो सालों में इस संख्या को सौ तक पहुंचाने का है। रक्षा ही नहीं, बल्कि सरकार के दूसरे करीब एक दर्जन मंत्रालय भी ड्रोन को अपनाने की तैयारी में हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ानी हो या आपात स्थिति में कहीं मदद पहुँचानी हो, कीटनाशकों या फर्टिलाइजरों का छिड़काव करना हो या पॉलीनेशन, एरियल वीडियोग्राफी करनी हो या जंगलों की छानबीन... छोटा सा ड्रोन, बहुत सारे क्षेत्रों में बड़े काम की चीज साबित हो रहा है।
अच्छे-बुरे दोनों कामों में इस्तेमाल
ड्रोन का इस्तेमाल, अच्छे और बुरे, दोनों तरह के कामों में किया जा रहा है। आये दिन अखबारों में आप हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के भीतर मंडराते नजर आने वाले ड्रोनों की खबरें पढ़ते होंगे। तो कई बार तस्करों द्वारा नशीले पदार्थों को गंतव्य तक पहुंचाने में ड्रोनों का इस्तेमाल करने, ड्रोन कैमरों से लोगों की निजता के हनन से जुड़ी खबरें भी आपको मिलती होंगी। ऐसी खबरें सुनकर कोई ताज्जुब नहीं कि आप ड्रोन की बजाय इसे ड्रोनासुर कहना ज्यादा पसंद करें।
अब थोड़ा सकारात्मक होकर सोचते हैं। फर्ज कीजिये कि आप किसी प्राकृतिक आपदा से ग्रस्त इलाके में फँस गये हैं। जहाँ दूर-दूर तक सम्पर्क का कोई जरिया नहीं, मदद की कोई उम्मीद नहीं। तभी वहाँ कुछ ड्रोन आसमान में मंडराते नजर आने लगते हैं और ऊपर से राहत सामग्री के पैकेट गिराने लग जाते हैं। ऐसे में आपको यही ड्रोन देवदूतों सरीखे नजर आने लगेंगे।
यही ड्रोन की हकीकत है कि आप इन्हें लेकर किसी निश्चित नतीजे पर नहीं पहुँच सकते, जिसके आधार पर आप इनके लगातार बढ़ते क्रेज को सही या गलत ठहरा सकें। आप एक दिन राजस्थान के श्रीगंगानगर में ड्रोन से अफीम के पैकेट गिराये जाने की ख़बर सुनते हैं, दूसरे दिन झारखंड के कोडरमा में पुलिस द्वारा ड्रोन की मदद से बारह एकड़ में फैली अफीम की खेती का पता कर उसे नष्ट करने की । कभी आपको हिमाचल प्रदेश के चंबा में ड्रोन देवदारों की कटाई रोकते नजर आतें हैं, कभी मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रतिबंधित चीनी मांझे का इस्तेमाल करने वाले पतंगबाजों पर नज़र रखते हुए और कभी लोगों की जासूसी करने में इस्तेमाल होते हुए। ऐसी परस्पर विरोधी सूचनाओं के बीच अनिर्णय की स्थिति स्वाभाविक ही है।
लेकिन सरकार ड्रोन की आवश्यकता, बढ़ती लोकप्रियता और भविष्य की संभावनाओं को लेकर न अनिर्णय की स्थिति में है ना अनिश्चय की। वह ड्रोन के उपयोग और कारोबार, दोनों को भरपूर बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए लगातार काफी प्रयास भी कर रही है।
बढ़ रहा है ड्रोन का देशी बाजार
फिलहाल ड्रोन के मामले में भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं तो बहुत खराब भी नहीं कही जा सकती है। हाल ही में अमेरिका में कंज्यूमर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन द्वारा जारी इंटरनेशनल इनोवेशन स्कोरकार्ड में भारत शीर्ष बीस देशों में 7वें स्थान पर है। इस सर्वे में कुल 70 देशों को शामिल किया गया था।
भारत में ड्रोन स्टार्टअप्स की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। इस समय देश में दो सौ से अधिक स्टार्टअप ड्रोन डेवलपमेंट, मैनुफैक्चरिंग और संबंधित सेवाओं से जुड़े हैं।
माना जा रहा है कि 2027 तक भारत में लगभग पांच लाख प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों की जरूरत होगी। हमारे यहाँ जिस तेजी से ड्रोन लोकप्रिय हो रहे हैं, उसे देखते हुए कयास लगाये जा रहे हैं कि वर्ष 2030 तक भारत, अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा ड्रोन बाजार बन जायेगा। देखने में छोटा सा नजर आने वाले ड्रोन का वैश्विक ड्रोन उद्योग करीब तीस अरब डॉलर का है। इसमें भारत की भागीदारी 2.2 अरब डॉलर, यानि करीब सात प्रतिशत है।
सरकार देश को विश्व का ड्रोन हब बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले दो सालों में पचास अरब डॉलर का निवेश हासिल करने के लिए कृतसंकल्प है। इसके लिए उसने प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव स्कीम के अंतर्गत एक अरब डॉलर की राशि आवंटित की है।
क्या हैं कानून और नियम
भारत में वर्तमान में पांच तरह के ड्रोन प्रचलन में हैं। 250 ग्रा. वजन तक के नैनो ड्रोन, 2 किलो वजन तक के माइक्रो ड्रोन, 2 से 25 किलो तक भार वाले स्मॉल ड्रोन, 25 से 150 किलो तक वजन वाले मीडियम ड्रोन और 150 किलो से अधिक भार वाले बिग ड्रोन ।
नैनो या माइक्रो ड्रोन उड़ाने के लिए किसी लाइसेंस या औपचारिक अनुमति की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, इससे ऊपर की श्रेणी वाले ड्रोन उड़ाने के लिए एक यूआईडी (विशिष्ट पहचान संख्या) आवश्यक है। इस यूआईडी के लिए भारत सरकार की डिजीटल स्काई वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इसी वेबसाइट पर भारत में ड्रोन उड़ाने संबंधी नियमों की जानकारी व एक इंटरेक्टिव एयरस्पेस मैप भी उपलब्ध है। मैप आपको ग्रीन, येलो और रेड जोन के बारे में बताता है ताकि आप जान सकें कि कौन कौन सी जगह 'फ्लाई जोन' या 'नो फ़्लाई जोन' के दायरे में आती हैं।
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ड्रोन की उड़ान आसमान छूने की तैयारी में हैं। लेकिन, सवाल यह है कि क्या हम इनके लिए तैयार है? सच तो यही है कि ड्रोन भी उसी तकनीकी क्रांति का एक हिस्सा है, जिसे रोकना न तो संभव है, न ही समझदारी। अलबत्ता, इसके उपयोग में सावधानी जरूर बरती जा सकती है। और यह तभी संभव है जब इनकी निगरानी और नियंत्रण का तंत्र भी इतना ही सस्ता, सुलभ और सुगम हो, जितना इनका परिचालन है। ऐसा हो पाये, तभी ड्रोन के संभावित खतरों और दुरुपयोग की आशंकाओं से बचा जा सकेगा।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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