इंडिया गेट से: केजरीवाल के जाल में फंस गये पढ़े लिखे हरदीप पुरी
तेरा मेरा क्या रिश्ता क्या? ला इलाह इलल्लाह। यानि मुसलमान का मुसलमान से रिश्ता इस्लाम का है, बाकी सारे काफिर हैं। यह नारा नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ प्रदर्शनों के समय खूब लगा था। घुसपैठिये बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों का इसीलिए भारतीय मुसलमान खुल कर समर्थन करता है। अनपढ़ मुसलमान उसके समर्थन में रैलियाँ करता है, और पढ़ा लिखा मुसलमान उनके समर्थन में टीवी पर डिबेट करता है।

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उनका विरोध इसी बात को लेकर था कि जब आप पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए हिन्दुओं सिखों, जैनों, बौद्धों, ईसाईयों को प्राथमिकता से भारत की नागरिकता दे रहे हो तो म्यांमार में सताए गए रोहिंग्या मुसलमानों को भी भारत की नागरिकता दो। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत बाकी गैर भाजपा दल भी वोट बैंक के चलते इस मांग का समर्थन करते हैं।
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने रोहिंग्या मुसलमान घुसपैठियों को शरणार्थी का दर्जा देने की बात कह कर "ला इलाह इलल्लाह" के नारे को फिर बुलंद कर दिया है। टीवी चैनलों पर बहस में आने वाले भारत के मुसलमानों ने एक बार फिर रोहिंग्या मुसलमानों को भारत की नागरिकता देने का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया है।
हरदीप पुरी के एक ट्विट ने आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल में ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सरकार में भी हड़कंप मचा दिया। गृह मंत्रालय को तुरंत एक बयान जारी करके मोदी सरकार की रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में अपनी पुरानी घोषणा दोहरानी पड़ी कि उन्हें वापस भेजा जाएगा।
हरदीप पुरी ने 17 अगस्त को सुबह साढ़े सात बजे जो ट्विट किया, उसमें उन्होंने कहा था- "भारत ने हमेशा उन लोगों का स्वागत किया है जिन्होंने देश में शरण मांगी। एक ऐतिहासिक फैसले में सभी रोहिंग्या शरणार्थियों को दिल्ली के बक्करवाला इलाके में स्थित फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्हें मूलभूत सुविधाएं यूएनएचसीआर (शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की ओर से जारी) परिचय पत्र और दिल्ली पुलिस की चौबीसों घंटे सुरक्षा मुहैया की जाएगी। भारत संयुक्त राष्ट्र के रिफ्यूजी कन्वेंशन 1951 को मानता है और रंग, धर्म और जाति के बिना जिसे भी जरूरत है उसे शरण देता है।"
असल में यह बात 16 अगस्त को दोपहर 3.42 बजे से शुरू हुई थी, जब एएनआई के पत्रकार सौरभ त्रिवेदी ने एक अधिकारी के हवाले से खबर दी थी कि टेंटों में रह रहे करीब 1100 रोहिंग्या को जल्द ही सभी सुविधाओं से सम्पन्न फ्लैटों में शिफ्ट किया जाएगा और उन्हें चौबीस घंटे सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी।
यह खबर केजरीवाल सरकार ने प्लांट की थी, क्योंकि कुछ दिन पहले केजरीवाल सरकार ने इस तरह की एक चिठ्ठी केंद्र सरकार को लिखी थी। केन्द्रीय आवास मंत्री हरदीप पुरी ने बिना अपने मंत्रालय से चेक किए इस खबर को ट्वीट करते हुए यह डींग हांक दी कि मोदी सरकार रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों को बसाने जा रही है।
हरदीप पुरी ने दो ट्विट किए थे। ऊपर जिक्र किए गए ट्विट के अलावा उन्होंने दूसरे ट्विट में लिखा था- "लोगों को बेहद निराशा होगी, जिन्होंने भारत की शरणार्थी नीति को नागरिकता संशोधन क़ानून से साथ जोड़ कर अफवाहें उड़ाईं थीं। भारत संयुक्त राष्ट्र की 1951 की शरणार्थी कन्वेंशन को मानता है और उसका सम्मान करता है। रंग या धर्म के भेदभाव के बिना सबको शरण देता है।" हरदीप पुरी का यह विचार और उनका ट्वीट भारत सरकार और संघ परिवार की घोषित नीति के खिलाफ है।
अगर ऐसा ही है, तो फिर नागरिकता संशोधन क़ानून में इन तीनों देशों में सताए गए मुसलमानों को भी प्राथमिकता के आधार पर नागरिकता का जिक्र होता। नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रही पत्रकार सबा नकवी ने हरदीप पुरी के ट्विट के तुरंत बाद एक ट्विट कर के मोदी सरकार को बधाई दी।
हरदीप पुरी ने घुसपैठियों के बारे में मोदी सरकार की नीति का ही विरोध नहीं किया है बल्कि तथ्यों के विपरीत बातें भी रखी हैं। वह विदेश सेवा में अधिकारी रहे हैं। फिर भी उन्हें इतना भी नहीं पता कि भारत ने 1951 के संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी कन्वेंशन पर दस्तखत नहीं किए थे, आज भी नहीं किए हैं। भारत ने इस लिए दस्तखत नहीं किए क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के इस प्रोटोकाल में यह भी कहा गया है कि कोई भी देश किसी अन्य देश में सताए गए शरणार्थी को उसके देश में जबरदस्ती वापस नहीं भेजेगा। पाकिस्तान, बांग्लादेश और मलेशिया ने भी संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी कन्वेंशन पर दस्तखत नहीं किए।
भारत का सबको पनाह देने का इतिहास रहा है लेकिन पनाह उसे दी जाती है, जो पनाह मांगे। बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमान रात के अँधेरे में अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। वे शरणार्थी कैसे हो सकते हैं? भारत सरकार की नीति बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को वापस उनके देशों में भेजने की है। इसीलिए जब तक उन्हें वापस भेजने का बन्दोबस्त नहीं हो जाता, तब तक उनको पकड़ कर डिटेंशन सेंटर में रखने का प्रावधान है| नागरिकता रजिस्टर पर विवाद के समय असम में डिटेंशन सेंटर बनाए जाने की खबरें भी आईं थी।
हरदीप पुरी के ट्विट पर पानी डालने के लिए गृह मंत्रालय ने जो स्पष्टीकरण दिया है, उसमें यही कहा गया है कि दिल्ली सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को उनके कैंपों से किसी अन्य जगह शिफ्ट करना चाहती थी, लेकिन केंद्र सरकार ने उसके आग्रह को स्वीकार नहीं किया है। दिल्ली सरकार को उनके कैंपों को डिटेंशन सेंटर घोषित करने को कहा था, उसने अभी तक यह भी नहीं किया है।
असल में अब एक चिठ्ठी सामने आ गई है, जिसमें केजरीवाल सरकार ने एनडीएमसी को रोहिंग्या मुसलमानों को मुफ्त बिजली पानी के अलावा फ्लैट मुहैया करवाने को कहा था। भारत के मुसलमान और अनेक राजनीतिक दल उन्हें शरणार्थी का दर्जा देने को उनका मानवीय अधिकार बताते नहीं थकते। संयुक्त राष्ट्र के जिस प्रोटोकाल पर भारत ने दस्तखत नहीं किए हैं, उसमें भी लिखा है कि किसी देश में शरण पाना शरणार्थियों का अधिकार नहीं होगा।
हरदीप पुरी अपने कालेज के दिनों में विद्यार्थी परिषद के सदस्य रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ते समय वह अरुण जेटली के भी करीब थे, जो उस समय डीयू छात्र संघ के अध्यक्ष थे। रिटायरमेंट के बाद हरदीप पुरी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और मोदी के ब्यूरोक्रेट प्रेम के कारण मंत्री भी बन गये। हालांकि अरुण जेटली यह खबर सुन कर खुद हैरान हो गए थे, जब हरदीप पुरी ने उन्हें बताया था कि उन्हें शपथ लेने का न्योता मिला है।
पुरी विद्यार्थी परिषद में जरुर रहे, डिप्लोमेट रहे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा में रचे बसे नहीं हैं। हैरानी है कि नागरिकता संशोधन क़ानून का विवाद उनके सामने हुआ, फिर भी वह भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और घुसपैठियों की समस्या को नहीं समझ पाए और पूरे संघ परिवार की फजीहत करवा दी।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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