Messi wins World Cup: अर्जेंटीना के लिए मेसी ने विश्व कप भी जीता और दुनिया का दिल भी
करोड़ों लोगों के पसंदीदा फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी अपने लंबे कैरियर में अनेक टूर्नामेंट जीत चुके थे, लेकिन अपने देश अर्जेंटीना के लिए विश्व कप जीतने की उनकी अधूरी इच्छा कतर में पूरी हो गयी।

Messi wins World Cup: फुटबॉल के सुपर स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेसी पिछले पांच वर्ल्डकप से जिस जीत का सपना देख रहे थे, वह सपना उनकी ही कप्तानी में 18 दिसंबर 2022 को कतर में खेले गए फीफा फुटबॉल विश्वकप के फाइनल में पूरा हुआ। खेल की दुनिया में जो जीता वही सिकन्दर का नियम चलता है। 90 मिनट के इस खेल में जो टीम सामूहिक रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ देती है वह जीतती है। कतर विश्वकप फाइनल में मेसी के नेतृत्व में अर्जेंटीना ने एक टीम के रूप में बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि अब फुटबॉल की दुनिया की वही सिंकदर है।
विश्व विजेता बना अर्जेंटीना अपना पहला मुकाबला ही सऊदी अरब से दो के मुकाबले एक गोल से हार गया था। पूरा अर्जेंटीना शोक में डूब गया था। मेसी की आलोचना से अर्जेंटीना के अखबार रंग गए थे। मेसी ने हार के बाद अपने देशवासियों से अपनी टीम पर भरोसा रखने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था "पहला मुकाबला हारने से अर्जेंटीना के लिए सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। हम पहला मैच हारे हैैं। हम इस विश्वकप का फाइनल जीतकर विश्वकप अर्जेंटीना लाने की पूरी कोशिश करेंगे।" मेसी ने वादा निभाया और फाइनल में फ्रांस को हराकर अर्जेंटीना को फुटबॉल का विश्व विजेता बना दिया।
पूरा अर्जेंटीना और मेसी के दुनियाभर के प्रशंसक उनकी ओर उम्मीदों से देख रहे थे और मेसी ने उन्हें निराश नहीं किया। मेस्सी ने अपने खेल पर और अपनी टीम पर पूरा भरोसा बनाए रखा। मेस्सी ने अपने साथी खिलाडियों से कहा था, अपना सर्वश्रेष्ठ अपने देश को देने का समय है। जरा सा चूके तो चार साल पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
लियोनेल मेसी एक शानदार खिलाड़ी होने के साथ एक बेहतरीन इंसान भी है। मेसी ने हमेशा टीम भावना का प्रदर्शन किया है। कई मौक़ों पर ख़ुद को पीछे रखकर दूसरों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने अनेक मर्तबा पेनल्टी किसी और को सौंप दी है। कभी-कभी तो तब जब वो हैट्रिक पूरी करने वाले थे, उन्होंने ख़ाली गोलपोस्ट सामने होने के बावजूद किसी और को गेंद पास कर दी है ताकि वो साथी खिलाड़ी भी स्कोरशीट पर आ सके। टीम के हित में उन्होंने सेंटर-फ़ॉरवर्ड की भूमिका छोड़कर मिडफ़ील्ड में खेलने से भी परहेज़ नहीं किया है। आज अगर मेसी दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय फुटबॉलर हैं तो उसके पीछे उनकी अलौकिक प्रतिभा का जितना हाथ है, उतनी ही उनके स्वभाव की विनम्रता, उदारता और सदाशयता की भी भूमिका है।
फुटबॉल का नया बादशाह अर्जेंटीना 36 साल बाद विश्वकप चैंपियन बना है। फुटबॉल का वह शिखर जिसे सभी देश और सभी खिलाड़ी छूना चाहते हैं, आखिरकार अर्जेंटीना ने मेसी के करिश्माई खेल और टीम वर्क की बदौलत छू लिया। फीफा वर्ल्डकप के बेहद रोमाचंकारी फाइनल मैच में अर्जेटीना ने फुल टाइम तक 3-3 से बराबरी रहने के बाद पेनल्टी शूटआउट में 4 के मुकाबले 2 गोल से फ्रांस के लगातार दो बार विश्वकप जीतने के सपने को चकनाचूर कर दिया। फ्रांस के लिए उसके स्टार खिलाड़ी एमबापे की हैट्रिक भी काम नहीं आ सकी।
मेस्सी ने फुल टाइम में दो और फिर पेनल्टी शूटआउट में एक गोल दागकर अपनी टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेसी ने पहला गोल 23 वें मिनट पर पेनल्टी के दम पर किया। दूसरा गोल अर्जेंटीना के लिए एंजेल डि मारिया ने 36 वें मिनट पर किया। फ्रांस पर पहले ही हाफ में दो गोल की बढ़त के बाद लग रहा था कि अब मैच में औपचारिकता शेष है और अर्जेंटीना की जीत तय है लेकिन फ्रांस के स्टार खिलाड़ी एमबापे ने 80 वें और 81 वें मिनट में लगातार दो गोल कर मुकाबला बराबरी पर ला खड़ा किया। फुल टाइम में बराबरी पर छूटा मैच अतिरिक्त समय में गया। पहले 15 मिनट में कोई गोल नहीं हुआ लेकिन अगले 15 मिनट में मेसी ने गोल दागकर अर्जेंटीना को 3-2 से बढ़त दिलवाई। फिर एमबापे ने पेनल्टी से गोल कर मैच को 3-3 की बराबरी पर ला दिया। आखिरकार मैच पेनल्टी शूटआउट पर गया जिसमें अपने गोलकीपर मार्टिनेज के शानदार बचाव के कारण अर्जेंटीना जीत गया।
पूरी दुनिया बेहद रोमांचित करने वाले इस फाइनल मैच को सांसे थामें देख रही थी। अर्जेंटीना के चैपियन बनने के साथ ही 20 साल बाद फुटबॉल की ट्रॉफी यूरोप से बाहर चली गई। यूरोप के दबदबे और एकाधिकार को 2002 में लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील के बाद 2022 में अर्जेंटीना ने तोड़ा है। यूरोपीयन देशों को हमेशा फुटबॉल विश्वकप का सबसे बड़ा दावेदार माना जाता है क्योंकि यहां फुटबाल घर घर खेला जाता है। फुटबाल में यूरोप के दबदबे की प्रमुख वजहों में ज्यादातर खिलाड़ियों का यूरोप के क्लबों से खेलना है। हालांकि लियोनल मेसी, लुईस सुआरेज, मार्सेलो, नेमार, हिगुअन, डी मिराया जैसे बड़े लैटिन अमेरिकी खिलाड़ी यूरोपियन लीग में खेलते हैं लेकिन टीम के रूप में लैटिन अमेरिकी देश यूरोप के दबदबे को कम करने में बहुत अधिक सफल नहीं रहे हैं।
दूसरा एक प्रमुख कारण यह है कि लैटिन अमेरिकी देश एक स्टार खिलाड़ी पर अधिक निर्भर रहते हैं। ब्राजील नेमार पर, अर्जेंटीना मेसी और ऊरुग्वे की टीम लुईस सुआरेज के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। वहीं यूरोपीय देश की टीमें एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर कम और टीम के सामूहिक प्रदर्शन के कारण अपना दबदबा बना लेती हैं। तीसरा प्रमुख कारण स्पोर्ट्स साइंस और रिसर्च के मामले में भी यूरोप लैटिन अमेरिका से काफी आगे है। यूरोपियन देशों में फुटबॉल से जुड़े कई रिसर्च सेंटर हैं। इस पर हर साल कराेड़ों डॉलर खर्च हो रहे हैं। खिलाड़ियों की डाइट से लेकर उनके खेल को बेहतर करने के लिए रिसर्च हो रहे हैं। वहीं लैटिन अमेरिकी देश रिसर्च के मामले में यूरोप से काफी पीछे हैं। यूरोप में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी लैटिन अमेरिकी देशों से कहीं ज्यादा हैं।
कतर में खेला गया फीफा वर्ल्डकप का यह तीसरा फाइनल था जिसका नतीजा पेनल्टी शूटआउट से निकला। इससे पहले 1994 और 2006 में विश्वकप फाइनल का परिणाम पेनल्टी शूटआउट से निकला था। कतर में आयोजित हुआ 2022 का यह फीफा विश्वकप इस बात केे लिए भी याद रखा जाएगा कि कतर के इस विश्वकप में कुल 172 गोल हुए जो किसी भी वर्ल्डकप के इतिहास में किए गए सबसे ज्यादा गोल हैं। 1998 और 2004 में 171 गोल हुए थे।
अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी 2 गोल्डन बॉल के साथ विश्वकप मे सबसे ज्यादा गोल्डन बॉल जीतने वाले खिलाड़ी बन गए, वहीं फ्रांस के महज 23 साल के एमबापे 12 वर्ल्डकप गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी। फाइनल में हैट्रिक बनाने वाले एमबापे इतिहास के दूसरे खिलाड़ी बन गए। एमबापे के पास अभी 3 और विश्वकप खेलने का समय है। एमबापे ऐसा ही खेलते रहे तो फुटबॉल इतिहास के सबसे सफलतम खिलाड़ी बन सकते हैं। इतनी छोटी उम्र में ही एमबापे 4 गोल के साथ वर्ल्डकप फाइनल में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं।
अब तक फुटबॉल के 22 वर्ल्डकप हुए हैं। 12 बार यूरोप के सिर्फ 5 देश जीते। जर्मनी 4 बार, इटली 4 बार, फ्रांस 2 बार, इंग्लैड और स्पेन 1 बार। लैटिन अमेरिका देश कुल 10 बार चैपियन बने हैं। ब्राजील 5 बार, अर्जेंटीना 3 बार और उरूग्वे 2 बार। इस हिसाब से देखे तो अब तक ब्राजील ही सबसे ज्यादा बार चैपियन रहा। लेकिन 2002 के बाद ब्राजील कामयाब नहीं हो पाया है। लेकिन कतर में अर्जेंटीना की जीत से फीफा विश्वकप यूरोप का दबदबा तोड़ते हुए फिर एक बार लैटिन अमेरिका चला गया है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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