BJP Candidates: जीत की चाह में भाजपा ने किनारे किए अपने ही नियम
BJP Candidates: 9 अक्टूबर की दोपहर 12 बजे चुनाव आयोग जब राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के लिए तारीखों का ऐलान कर रहा था, ठीक उसी समय भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के उम्मीदवारों की सूची टाइप हो रही थी। दोपहर को भाजपा ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए 162 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इसमें राजस्थान की पहली सूची में 41, मध्य प्रदेश की चौथी सूची में 57 और छत्तीसगढ़ की दूसरी सूची में 64 उम्मीदवारों के नाम हैं। बचे हुए नाम भारतीय जनता पार्टी जल्द जारी कर सकती है।
राजस्थान की पहली सूची देखकर लगता है कि टिकट बंटवारे में किसी की नहीं चली, सिर्फ भाजपा हाईकमान की चली है। राजस्थान में 41 सीटों में से 29 पर नए प्रत्याशी उतारकर पार्टी ने साफ कर दिया कि कोई लिहाज नहीं होगा। राजस्थान में ऐसी कुल 19 सीटें हैं, जहां पर तीन बार से पार्टी हार रही है। इसमें 11 सीटों पर पहली सूची में टिकट दिया गया है। इन पर उन प्रत्याशियों को उतारा गया है, जो इस बार कड़ी टक्कर दे सकते हैं। राजस्थान में सांसद नरेंन्द्र कुमार को मंडावा से, किरोड़ी लाल मीणा को सवाई माधोपुर से, बाबा बालकनाथ को तिजारा से, भागीरथ चौधरी को किशनगढ़ से, राज्यवर्धन सिंह राठौर को झोटवाड़ा से, दिया कुमारी को विद्याधर नगर से और देवजी पटेल को सांचोर से टिकट दिया गया है।

टिकट बंटवारे में वसुंधरा राजे को न पूरी तवज्जो दी गई है और न नजरअंदाज किया गया है। कई सीटों पर राजे समर्थकों को टिकट मिले हैं, कुछ जगहों पर टिकट कटे भी हैं। किरोड़ी लाल मीणा, शुभकरण चौधरी, बबलू चौधरी जैसे उम्मीदवार वसुंधरा के समर्थक माने जाते हैं। वहीं, उनके बड़े समर्थकों में गिने जाने वाले राजपाल सिंह शेखावत, कालूलाल गुर्जर जैसे नेताओं का टिकट कट गया है। खुद वंसुधरा राजे का नाम पहली सूची में नहीं है। लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमण सिंह का नाम घोषित होने के बाद इस बात की संभावना है कि अगली सूची में वसुंधरा का नाम आ सकता है।
सात में से तीन सांसदों ने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। ऐसे में जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन राठौर के लिए कांग्रेस सरकार के कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया को झोटवाड़ा से हराना आसान नहीं होगा। तिजारा से बाबा बालकनाथ की जीत आसान है, वहीं सांचौर से देवजी पटेल की परीक्षा होगी। विद्याधर सीट से तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री नरपत राजवी की जगह सांसद दिया कुमारी को टिकट देकर भाजपा ने यह सुनिश्चित किया है कि दिया कुमारी को किसी तरह की चुनौती न मिले।
लाल डायरी के कारण चर्चा में आए राजेन्द्र गुढा के लिए भाजपा ने सीट नहीं छोड़ी। भाजपा ने यहां से विधायक रह चुके शुभकरण चौधरी को मौका दिया है। तिजारा से बाबा बालकनाथ को उतारकर भाजपा ने राजस्थान की पहली सूची में हिन्दुत्व का पूरा संदेश देने की कोशिश भी की है। वहीं, 41 सीटों में से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को मौका नहीं दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में 200 सीटों में से मात्र एक मुस्लिम यूनुस खान को टोंक सीट से उतारा था। सचिन पायलट के कारण 2018 में गुर्जर समाज से झटका खा चुकी भाजपा ने इस बार इस वोट बैंक को फिर से साधने के लिए गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवाई कर चुके कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला को टिकट देकर चौंका दिया है।
जहां तक मघ्य प्रदेेश की बात है तो शिवराज सिंह चौहान के चुनाव लड़ने या न लड़ने के बीच भाजपा ने चौथी सूची में शिवराज का नाम घोषित कर संकेत दे दिए हैं कि वह मुख्यमंत्री की दौड़ में बने हुए हैं। मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के 24 मंत्रियों को टिकट दिए गए हैं, जबकि अभी चार कैबिनेट और पांच राज्यमंत्री के नाम घोषित नहीं हुए है। सिंधिया समर्थक मंत्री ओपीएस भदौरिया, सुरेश धाकड़, बृजेन्द्र सिंह यादव, महेन्द्र सिंह सिसोदिया पर फिलहाल तलवार लटकी है। ज्योतिरादित्य के साथ भाजपा में आए 8 विधायकों को टिकट दिया गया है। मध्य प्रदेश में 57 नामों में 5 महिला और 52 पुरूष है।
मध्य प्रदेश में भाजपा अब तक 73 फीसदी मंत्रियों को मैदान में उतार चुकी है। मध्य प्रदेश को लेकर कहा जा सकता है कि हाईकमान ने शिवराज, महाराज और नाराज को टिकट देकर सबको साधने की कोशिश की है। मध्य प्रदेश में चाचा भतीजा को भी टिकट मिल गया है। भोपाल मध्य से पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह को और उनके भतीजे मौजूदा विधायक विक्रम सिंह को सतना जिले की रामपुर बघेलान सीट से टिकट दे दिया गया है।
छत्तीसगढ की बात करें तो भाजपा हाईकमान ने दो सूची मिलाकर कुल चार सांसदोे को विधानसभा चुनाव में उतारा है। छत्तीसगढ में सांसद और केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह को भरतपुर सोनहट से, गोमती साय को पत्थलगांव से और बिलासपुर के सांसद के साथ प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव को लोरमी से टिकट दिया गया है। छत्तीसगढ में 11 विधायको को रिपीट किया गया है। डमररूधर पुजारी का टिकट कटना आश्चर्यचकित करने वाला फैसला है। छत्तीसगढ में ओबीसी को साधने के लिए साहू और कुर्मी समाज को पूरी तवज्जो मिली है। अब तक घोषित 85 सीटों में से पार्टी ने ओबीसी समाज के 29 प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जिसमें साहू समाज के 10 और 8 कुर्मी समाज के हैं। प्रदेश अध्यक्ष और सांसद अरूण साव भी साहू समुदाय से आते हैं।
छत्तीसगढ़ में भाजपा ने 2018 में चुनाव हारे 15 उम्मीदवारों को भी टिकट दिया और 27 नए चेहरों को भी मैदान में उतारा है। पार्टी ने पांच सीटों अंबिकापुर, बेलतरा, बेमेतरा, कसडोल और पंडरिया के प्रत्याशी घोषित नहीं किए है। छत्तीसगढ़ में अब तक घोषित 85 टिकटों मे से 14 महिलाओं को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। 85 में से 43 उम्मीदवार ऐसे हैं जो पहली बार चुनाव मैदान में उतरेंगे। भाजपा ने छत्तीसगढ़ से 79 साल के ननकीराम कंवर को फिर से रामपुर से मैदान में उतारा है। उनकी जीत सुनिश्चित मान रही भाजपा ने उम्र को नजरअंदाज कर दिया है। छत्तीसगढ के हीरो अनुज शर्मा को भाजपा ने घरसीवा से चुनावी मैदान में उतारा है। यहां से ब्राह्मण को साधने की कोशिश की गई है। छत्तीसगढ में भाजपा ने दो पूर्व आईएएस को भी टिकट दिया है।
जूदेव परिवार से आने वाले प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को कोटा से और संयोगिता सिंह जूदेव को चंद्रपुर से मौका दिया गया है। वहीं मुख्यमंत्री रमन सिंह के भांजे विक्रम सिंह को खैरागढ से टिकट दिया गया है। 2018 में कांग्रेस ने बस्तर की 11 और सरगुजा की सभी 14 सीटें जीतकर एकतरफा बढ़त बनाई थी। इस कारण भाजपा ने इन सीटों पर चुनौती पेश करनेवाले उम्मीदवार उतारे हैं।
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को टिकट देकर भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि दोनों मुख्यमंत्री की दौड़ में बने हुए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा ने अपने हैवीवेट नेताओं को उतारकर यह जताने की कोशिश भी की है कि सभी कार्यकर्ता हैं और कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन सकता है।
अभी तक घोषित उम्मीदवारों की सूची देखकर एक बात साफ है कि भाजपा ने टिकट देने के लिए अपने ही बनाये हुए किसी भी अघोषित नियम का पालन नहीं किया है। परिवारवाद, भ्रष्टाचार के आरोपी, दूसरे दलोें से आए नेताओं, बगावत कर अपने ही उम्मीदवारों को हराने वाले, 80 साल के उम्र के करीब पहुचने वाले नेताओं को भी टिकट देकर बताया है कि सिर्फ जीतना ही फिलहाल भाजपा के लक्ष्य में शामिल है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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