Digvijay Singh: संघ विरोध के बहाने कांग्रेस की दुर्गति कर रहे दिग्विजय सिंह
Digvijay Singh: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरु गोलवलकर के विरुद्ध विषवमन करते हुए कांग्रेस को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पूर्व अचंभित करते हुए पशोपेश में धकेल दिया है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना, किसानों के लिए राहत पैकेज, वनवासी समाज की चिंताओं, समान नागरिक संहिता, वर्तमान भाजपा सरकार के विरुद्ध असंतोष जैसे मुद्दों पर विधानसभा चुनाव में उतरने को तैयार कांग्रेस को दिग्विजय सिंह के बयान से झटका लगा है क्योंकि अब प्रदेश में सर्वाधिक मजबूत संघ परिवार और भाजपा के संगठन की दोहरी चुनौती से उसे जूझना पड़ रहा है।
संघ परिवार और भाजपा नेतृत्व का कहना है कि बोल भले ही दिग्विजय सिंह के हों किन्तु संघ पर द्वेषपूर्ण मिथ्या आरोप लगाने की नीति कांग्रेस की है जिसे वे लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। हालाँकि देर-सवेर कांग्रेस इसे दिग्विजय सिंह की निजी सोच बताकर इस विवाद से पल्ला झाड़ लेगी किन्तु संघ पर झूठे आरोप लगाने से उसके चुनावी मुद्दे अवश्य प्रभावित होंगे। इससे पूर्व दिग्विजय सिंह ने 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में संघ का हाथ बताकर सनसनी फैला दी थी। उस कालखंड में उनके द्वारा पोषित 'हिंदू आतंकवाद' का झूठ प्रतिवर्ष 26/11 को सोशल मीडिया पर पूरी दुनिया में ट्रेंड होता है। कांग्रेस पर मुस्लिम परस्त राजनीति का जो ठप्पा लगा है उसके मूल में कहीं न कहीं दिग्विजय सिंह का हिंदुत्व और संघ के प्रति दुर्भावनावश आरोप पूर्ण रवैया है जिसे समग्र हिंदू समाज की अस्मिता से जोड़ दिया गया है।

चूंकि संघ हिन्दू समाज के बृहत्तर वर्ग तक पहुंच बना चुका है अतः दिग्विजय सिंह जब भी संघ पर आरोप मढ़ते हैं, उसे हिंदू समाज पर हमला माना जाता है। कांग्रेस की यही सबसे बड़ी दुविधा है क्योंकि सत्ता से लंबे समय से दूर पार्टी जब भी 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का सहारा लेकर जनता के बीच जाती है, दिग्विजय सिंह तथा उनके जैसे अन्य पार्टी नेता हिंदुत्व के प्रतीक बन चुके संघ पर निशाना साधकर अपनी ही पार्टी के प्रयासों की हवा निकाल देते हैं।
क्या ट्वीट किया था दिग्विजय सिंह ने?
दिग्विजय सिंह ने गुरूजी का चित्र ट्विटर पर साझा करते हुए एक काल्पनिक कथन लिख दिया कि एम एस गोलवलकर ने अपनी पुस्तक 'we and our nationhood identified' में स्पष्ट लिखा है कि जब भी सत्ता हाथ लगे तो सबसे पहले सरकार की धन संपत्ति, राज्यों की जमीन और जंगल अपने दो तीन विश्वसनीय धनी लोगों को सौंप दें। 95% जनता को भिखारी बना दें, उसके बाद सात जन्मों तक सत्ता हाथ से नहीं जाएगी।
इसी चित्र में गोलवलकर के चित्र के साथ दूसरा झूठ यह लिखा है कि 'मैं सारी जिंदगी अंग्रेजों की गुलामी करने के लिए तैयार हूँ लेकिन जो दलित, पिछड़ों और मुसलमानों को बराबरी का अधिकार देती हो ऐसी आजादी मुझे नहीं चाहिए।' हालांकि इस सरासर झूठे और आपत्तिजनक ट्वीट के चलते दिग्विजय सिंह पर इंदौर, राजगढ़, गुना और उज्जैन में एफआईआर दायर हो चुकी है तथा प्रदेश के अन्य शहरों में भी स्वयंसेवक उन पर भावनाएं भड़काने का मुकदमा दर्ज करवा रहे हैं। आश्चर्य इस बात का भी है कि दिग्विजय सिंह ने इतने पर भी अभी तक झूठा ट्वीट हटाया नहीं है बल्कि वे माफी मांगने के बजाय संघ के प्रति और अधिक आक्रामक होकर झूठ फ़ैलाने में लग गए हैं।
दिग्विजय सिंह का आरोप कितना सही-कितना गलत और क्यों?
अव्वल तो दिग्विजय सिंह ने गुरूजी की जिस पुस्तक 'we and our nationhood identified' का हवाला दिया है वह गुरूजी ने लिखी ही नहीं है। गुरूजी की पुस्तक का नाम 'we and our nationhood defined' है। इससे यह साफ होता है कि दिग्विजय सिंह ने फेक न्यूज की फैक्ट्री का "राजा साहब" बनने की ठान ली है। हालांकि उनका झूठ बेनकाब हो गया है किन्तु बड़ा प्रश्न यह है कि एक अनुभवी राजनेता को आखिर ऐसा झूठ प्रचारित करने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी?
दरअसल, देश में समान नागरिक संहिता का मुद्दा बहस के केंद्र में है और दिग्विजय सिंह यह जानते हैं कि देश-प्रदेश का बहुसंख्यक समाज इसके लागू होने के पक्ष में है। यदि यह लागू हुआ तो मुस्लिम समाज की प्रतिक्रिया के अलावा वनवासी समाज में भी विरोध के स्वर उठ सकते हैं। चूंकि वनवासी समाज में षड्यंत्र के तहत समान नागरिक संहिता के नाम पर भ्रम उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है किन्तु संघ परिवार के वनवासियों के बीच शैक्षणिक-सामाजिक कार्यों से कांग्रेस, वामपंथी दलों, सिविल सोसायटी, ईसाई मिशनरी, इस्लाम के प्रचार-प्रसार के मंसूबों पर पानी फिर रहा है अतः संघ को ही बदनाम करके वनवासी समाज के बीच उसकी छवि मलिन कर उन्हें दिग्भ्रमित करने की मंशा है। मध्य प्रदेश, जहां डेढ़ करोड़ से अधिक वनवासी जनसंख्या है, वहां चुनावी वर्ष में यदि वनवासी समाज में पैठ बना चुके संघ के विरोध में माहौल बनता है तो यह कांग्रेस के लिए मुफीद हो सकता है।
इसके अलावा हाल ही में सीधी में कथित भाजपा कार्यकर्ता केदार शुक्ला द्वारा दलित युवक पर पेशाब करने का जो वीडियो वायरल हुआ, उससे भी दिग्विजय सिंह को दलितों-पिछड़ों के पक्ष में बोलने का और संघ पर आरोप लगाने का अवसर दे दिया है। यह दीगर है कि इस अपमानजनक कांड के बाद प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने डैमेज कंट्रोल किया है किन्तु दिग्विजय सिंह इस मुद्दे को संघ की दलित-पिछड़ा विरोधी मानसिकता के रूप में स्थापित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने गुरू गोलवलकर पर झूठे आरोप लगाएं हैं जिनका संघ परिवार में अत्यन्त सम्मान है।
दिग्विजय सिंह जिन गुरू गोलवलकर के विरुद्ध जो आरोप लगा रहे हैं, उनका जीवन इसके ठीक उलट रहा है। गुरूजी के समस्त भाषणों, बौद्धिकों, वक्तव्यों में समाज में व्याप्त ऊँच-नीच का प्रबल विरोध रहा है। सामाजिक समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुजी की प्रेरणा से वनवासी कल्याण आश्रम, विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ जैसे अनेक संगठन प्रारंभ हुए जिन्होंने हिंदू समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। खैर, यहाँ प्रश्न गुरूजी के योगदान का नहीं है। प्रश्न है कि दिग्विजय सिंह ने जिस सोच के चलते गुरूजी के बहाने संघ को घेरने की चेष्टा की है, क्या इससे कांग्रेस को फायदा होगा?
बीते कुछ दशकों की राजनीति देखें तो संघ पर आरोप लगाने से दिग्विजय सिंह सहित राहुल गांधी और कांग्रेस को नुकसान ही अधिक हुआ है। राहुल गांधी तो "महात्मा गांधी की हत्या में संघ का हाथ" के अपने बयान के चलते मानहानि के मुकदमे का सामना कर रहे हैं। यही सूरत अब दिग्विजय सिंह के साथ बनती दिख रही है। इस पूरे प्रकरण में क़ानून अपना काम करेगा किंतु मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को दिग्विजय सिंह के बयान से निश्चित रूप से नुकसान उठाना पड़ेगा और पूरा चुनाव अब संघ विचार के इर्द-गिर्द हो जाएगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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