CVC Report: सरकारी कर्मचारियों में बढ़ गयी भ्रष्टाचार की रफ्तार
CVC Report: केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की सालाना रिपोर्ट ने देश में भ्रष्टाचार के मामलों पर जो आंकड़े जारी किए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी लंबी खिंचने वाली है। भले ही इस देश में एक दशक पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ इतना बड़ा आंदोलन हो चुका हो, सरकारी काम काज में तकनीकी का प्रयोग बढ़ा हो लेकिन सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार कम होने की जगह बढ़ता ही चला गया है।
कर्मचारी अपना अधिकार मानते हैं ऊपर की कमाई को
उपन्यासकार प्रेमचंद की कहानी 'नमक का दारोगा' 1925 में लिखी गई थी। इस कहानी के मुख्य पात्र बंशीधर के पिता उसे रिश्वत के संबंध में समझाते हुए कहते हैं - "नौकरी कैसी भी हो कर लेना, बस यह देखना कि तनख्वाह कितनी मिल रही है। नौकरी ऐसी ढूंढना, जिसमें ऊपरी कमाई हो, क्योंकि महीने की तनख्वाह से घर की जरूरतें पूरी नहीं हो सकती। ऊपरी आय भगवान का आशीर्वाद है, जिससे जिंदगी के हर शौक पूरे किए जा सकते हैं और इसी से बरकत भी होती है।"

जब मुंशी प्रेमचंद सौ साल पहले भ्रष्टाचार के इस शिष्टाचार पर लिख रहे थे तो इसका अर्थ है कि सरकारी व्यवस्था में यह रोग नया नहीं है। लेकिन चिंता की बात यह है कि समय के साथ यह बढ़ता गया और संगठित भी हुआ है। हाल में जारी की गयी सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले साल भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा शिकायतें केंद्रीय गृह मंत्रालय के कर्मचारियों के खिलाफ आईं। इसके बाद रेलवे और बैंक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते साल केंद्र सरकार के विभागों और संगठनों में सभी कैटेगरी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कुल एक लाख 15 हजार 203 शिकायतें मिली हैं। इनमें से 29 हजार 766 अभी भी लंबित बताई जा रही हैं।
सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में मामलों के निपटारे में हो रहे विलंब को लेकर कुछ तकनीकी व व्यावहारिक वजहें गिनाई हैं, लेकिन देश की जनता को व्यावहारिक कठिनाइयों से कुछ अधिक लेना देना नहीं होता। उसे तो परिणाम चाहिए। उसने बहुमत से एक सरकार चुनी है और इस विश्वास के साथ वे सरकार चुन कर लाए हैं कि यह देश से भ्रष्टाचार खत्म करने वाली सरकार बनेगी। अब सीवीसी की नई रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के जो आंकड़े सामने आएं हैं, वह कहीं न कहीं सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ केन्द्र सरकार की कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति की ओर भी इशारा कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार का मुद्दा है गंभीर
भ्रष्टाचार का मुद्दा इसलिए भी भारत के लिए गंभीर है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की वजह से पूरी दुनिया भारत के हर कदम को उम्मीदों के साथ देख रही है। भारत ने विकास के विभिन्न मानकों विज्ञान, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, परिवहन जैसे सभी क्षेत्रों में पिछले नौ सालों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सीवीसी की भ्रष्टाचार पर आई रिपोर्ट के परिप्रेक्ष्य में भी बात करें तो भ्रष्टाचार के मामले में भी प्रधानमंत्री मोदी की निजी छवि एकदम साफ है। लेकिन केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों के अधिकारी व कर्मचारी अगर भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं, तो सवाल तो सरकार पर ही उठेगा न?
भ्रष्टाचार का प्रश्न वर्तमान समय में इसलिए समीचीन है क्योंकि मनमोहन सिंह की सरकार को सत्ता से बाहर करने में भ्रष्टाचार के मुद्दे ने अहम भूमिका निभाई थी। वैसे यूपीए सरकार में हुए भ्रष्टाचार और सीवीसी द्वारा जारी आंकड़ों के भ्रष्टाचार के बीच अंतर है। अंतर यह कि मनमोहन सिंह सरकार के मंत्री सीधे सीधे पिछली सरकार में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए थे। सीवीसी द्वारा जारी रिपोर्ट में इस सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं, जिनका निपटारा आयोग जल्द से जल्द करने में लगा हुआ है।
अब रिपोर्ट सामने आ जाने के बाद विपक्ष को एक मुद्दा मिला है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। इस वर्ष के अंत में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और फिर 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। लोकसभा चुनाव के लिए सरकार के पास एक साल का समय है। जब सीवीसी अगले साल सालाना रिपोर्ट जारी करे तो परिणाम में सरकार का भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस दिखना चाहिए। यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि भारत ने अगले तीन-चार वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य रखा है।
केंद्र सरकार के सभी विभागों और संगठनों के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की कुल 1 लाख 15 हजार 203 शिकायतें मिली थीं। इसमें सबसे ज्यादा 46 हजार 643 शिकायतें गृह मंत्रालय की थीं। कुल शिकायतों में से 85 हजार 437 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है। रेलवे के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की 10 हजार 580 और बैंक कर्मचारियों के खिलाफ 8 हजार 129 शिकायतें मिली थीं। 4 हजार 710 शिकायतें आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, दिल्ली शहरी कला आयोग सहित हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड के कर्मचारियों के खिलाफ थीं।
सीबीआई को भी सरकारी मंजूरी का इंतजार
वार्षिक रिपोर्ट में भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगने वाले सीबीआई के अनुरोध का भी जिक्र है। सीबीआई के 500 से अधिक अनुरोध विभिन्न सरकारी विभागों में लंबित हैं। इनमें 272 अनुरोध ऐसे हैं, जो तीन महीने से अधिक समय से लंबित हैं। सीबीआई को भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी का इंतजार है। सरकारी विभागों को भ्रष्ट अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगने वाले अनुरोधों पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होता है। हालांकि इस तरह के मामलों में एक महीने का अतिरिक्त समय अटार्नी जनरल या उनके कार्यालय में किसी अन्य अधिकारी के साथ परामर्श के नाम पर लिया जाना कानून सम्मत है। इस तरह विभाग द्वारा सीबीआई को मंजूरी देने में चार महीने का समय लिया जा सकता है।
मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगने वाले सीबीआइ के अनुरोध की बात की जाए तो कुल 525 लंबित अनुरोधों में से सबसे अधिक 167 पत्र वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग के पास, 41 महाराष्ट्र सरकार के पास और 31-31 अनुरोध वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग, कोयला एवं खनन मंत्रालय के पास लंबित हैं। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर, 2022 तक हिमाचल प्रदेश सरकार के पास 25, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकारों के पास 23-23 और रेल मंत्रालय के पास 22 अनुरोध पत्र मंजूरी के इंतजार में पड़े हुए हैं।
सीवीसी भी सुस्त
सीवीसी के पास जब भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर कोई आता है, फिर आयोग की तरफ से एक मुख्य सतर्कता अधिकारी नियुक्त किया जाता है। अधिकारी को मामले की जांच करने के लिए तीन महीने का समय दिया जाता है। इन तीनों महीनों में अधिकारी संस्था या व्यक्ति की जांच करता है और मामले का निपटारा करता है। जांच के दौरान नियुक्त अधिकारी संस्थान से अलग होकर काम करते है।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, दिल्ली शहरी कला आयोग सहित हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड के 577 मामले तीन महीने से अधिक पुराने हैं। रेलवे से जुड़े 78 मामले तीन महीने से अधिक पुराने हैं। इसी प्रकार गृह मंत्रालय से जुड़ी 19 हजार 198 शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन महीने से ज्यादा समय से निपटारा नहीं हुआ है।
सीवीसी को प्राप्त हुई 1 लाख 15 हजार 203 शिकायतों में से 29 हजार 766 शिकायतें अभी भी पेंडिंग में हैं, जिसमें 22 हजार 34 शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन महीने से ज्यादा वक्त से निपटारा नहीं हुआ है। सीवीसी को भी अपने काम काज को पहले से अधिक गंभीरता से लेना चाहिए। तीन महीने से अधिक समय से पेंडिंग पड़े 22 हजार मामले उसकी कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहे हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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