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Save Girls: छेड़खानी का शिकार बनती बहन बेटियां

Save Girls: पूरा देश जब भाई बहन के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षा बंधन मना रहा है तब उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के गांव खीरी में एक बहन अपने भाई की हत्या का मातम मना रही है। वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उस भाई ने उसकी लाज बचाने की कोशिश की तो शोहदों ने उसके भाई की हत्या कर दी।

सोमवार को स्कूल में पहले कुछ लड़कों ने उस लड़की के साथ छेड़खानी की जिसका विरोध उसी स्कूल में पढ़ने वाले उसके चचेरे भाई ने किया। जिन लड़कों ने छेड़खानी की थी, स्कूल से निकलने के बाद उन्हीं लड़कों ने भाई- बहन दोनों को घेर लिया और बहन के साथ फिर से छेड़खानी करने लगे। पीड़ित लड़की के अनुसार उसे पकड़ कर खींचने की कोशिश की गई जिसमें उसे काफी चोट भी आई। उसके भाई सत्यम शर्मा ने जब उन मनचलों को रोकने की कोशिश की तो उन्होंने उसे इतना पीटा कि वह अधमरा हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

crime against girls molestation cases need to take step to protect girls

लड़के मुस्लिम समुदाय से थे इसलिए प्रशासन भी खुलकर कुछ कहने या कार्रवाई करने से बच रहा है। भाई के शव के पास बिलखती बहन चीख-चीख कर दोषियों के नाम ले रही थी और कारण बता रही थी पर प्रशासन छेड़खानी को सिरे से खारिज़ कर "आपसी रंजिश" का हवाला देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा था। हालांकि मीडिया में इस खबर के आने के बाद थाना प्रभारी को लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है।

प्रशासन ने तीन नाबालिग सहित पांच लोगों को सत्यम शर्मा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार भी कर लिया है लेकिन शोहदों या मनचलों द्वारा छेड़खानी की घटनाएं आये दिन की बात हो गयी हैं। खीरी में जहां स्कूल है वहां पहुंचने के लिए तुर्कपुरवा बस्ती से गुजरना पड़ता है। स्कूल के प्रिंसिपल तक यह मान रहे हैं कि वहां से गुजरते हुए लड़कियां अपना सिर नीचे कर लेती हैं। नाबालिग लड़कियों को भद्दे भद्दे इशारे किये जाते हैं। उन पर फब्तियां कसी जाती हैं।

प्रयागराज की घटना इस ओर इंगित करती है कि अब तो शैक्षणिक संस्थान भी छेड़खानी के ऐसे मामलों के हब बनते जा रहे हैं। कुछ सालों पहले बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के कैंपस में गर्ल्स होस्टल के सामने भी लड़कों द्वारा किये भद्दे इशारे और क्रियाएँ चर्चा में आई थी। यह बेटियों का दुर्भाग्य ही है कि ऐसी घटनाएं सिर्फ चर्चा में ही आती हैं। इन पर खूब शोर गुल होता है, राजनैतिक उठा पटक होती है, पर समस्या का समाधान हमेशा बेनतीजा रहता है।

2022 में लोकल सर्किल्स नामक एक एजेंसी के सर्वे के अनुसार भारत में 29% महिलाएं जीवन में एक से ज्यादा बार छेड़छाड़ का शिकार बनती हैं। विदित हो यह सर्वे मुख्यरूप से परिवारजनों का था जहाँ छेड़छाड़ की घटनाओं की जानकारी परिवार को पता थी। असल आंकड़ा इससे कहीं और आगे है।

महिलाओं के साथ यौन सम्बन्धी अपमान जनक दुर्घटनाएं एक बड़े आंकड़े की ओर ले जाती हैं। NCRB के अनुसार देश में हर घंटे महिलाओं व लड़कियों के साथ लगभग 60 घटनाएं होती हैं। NCW को 2022 में महिलाओं से छेड़छाड़ के अपराध के संबंध में 2,523 शिकायतें प्राप्त हुईं। सिर्फ दिल्ली मेट्रो में छेड़छाड़ की घटना को देखें तो एक आरटीआई के अनुसार 2021 के मुकाबले 2022 में मामले 80% बढ़े हैं और 2023 मार्च तक ये आंकड़े बढ़ते गए हैं।

स्त्री अस्मिता को हाशिये पर रखना लगता है समाज के लिए अब स्वीकृत है जबकि महिलाएं ऐसी घटनाओं को "छोटा बलात्कार" की संज्ञा देती हैं। प्रयागराज की घटना अपने आप में न पहली घटना है और न आखिरी होगी। मानव जाति की याददाश्त भी अजीब है, जो ऐसे घावों को झटके से बिसरा देती है। घाव को ना रिसने देती है ना टीस महसूस करती है।

2020 का निकिता तोमर केस भला किस स्त्री के जेहन से उतरा होगा जहाँ तौसीफ नाम के सिरफिरे ने भरी दोपहरी में कॉलेज के सामने उसे गोली मार दी थी। फरीदाबाद का यह केस इसलिए भी समझना चाहिए क्योंकि इस मामले में 2018 में एक एफआईआर पहले से दर्ज थी। तौसीफ ने निकिता का अपहरण कर तीन दिन उसे बंदी बनाकर रखा था फिर परिवार के अनुसार राजनैतिक दबाव में केस वापस करा दिया गया। इसका अंजाम क्या हुआ? स्टॉकिंग की परिणीति निकिता की हत्या के रूप में हुई।

2020 का ही गाजियाबाद में घटित शेरू खान केस भी यही बताता है कि छेड़छाड़ का विरोध मौत तक कितनी आसानी से लेकर चला जाता है। 21 साल के इस तथाकथित टिक टॉक इंफ्लुएंसर ने 19 साल की नैना कौर को उसकी शादी के हफ्ते भर पहले मौत के घाट उतार दिया। नैना उसके शादी के प्रस्ताव से इंकार कर चुकी थी। वह शेरू के पीछा किये जाने से परेशान थी। उसके परिवार ने उसका विवाह भी तय कर दिया था पर उसके विवाह से पहले ही शेरू ने भरे बाजार में उसकी हत्या कर दी।

अभी 28 अगस्त को झारखंड की अंकिता की पहली बरसी थी। वही अंकिता जिसे 2022 में शाहरुख हुसैन ने उसी के कमरे में तब पेट्रोल डालकर जला दिया था, जब वह सो रही थी। इसका कारण वही मानसिकता थी जिसमें लड़की उसके एकतरफा प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा रही थी। फेहरिस्त बहुत लंबी है। देखने समझने में किसी का पीछा करना, कोई भद्दा इशारा कर देना, कोई कॉमेंट पास करना, यहाँ- वहाँ हाथ लगा देना, रेल, बस में जान बूझ कर धक्के दे देना, कोई बड़ी बात नहीं लगती। पर कई मामले इतना आगे बढ जाते हैं जहाँ तेज़ाब फेंक दिया जाता है, सरेआम चाकू मार दिया जाता है, गोली मार दी जाती है, बलात्कार कर दिया जाता है। यह सब ना भी किये जाए तो ऐसे मानसिक आघात दे दिए जाते हैं जिससे स्त्री कभी उबर ही नहीं पाती है।

छेड़खानी से तंग आकर आये दिन लड़कियाँ आत्महत्या कर रही हैं। कई तो घर पर इस भय से नहीं बताती कि कहीं घरवाले उसे ही दोषी ना मान लें कि जरूर तुमने छूट दी होगी या कुछ नहीं तो लड़कियों के कपड़ों पर भी बात अटका दी जाती है। कई लड़कियां इसलिए मौन रह जाती हैं कि उनका घर से निकलना और पढ़ाई बंद करा दी जाएगी। समुदाय विशेष के मनचलों द्वारा परेशान किये जाने पर ज्यादातर लड़कियां इसलिए चुप रह जाती हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

ऐसे में बहन बेटियों को भयमुक्त करने से भी ज्यादा जरूरी है बेटों को अनुशासित करना और नारी का सम्मान करना सिखाना। जिन समुदायों में ये समस्या सर्वाधिक दिखती है उन समुदायों को न केवल समाज के स्तर पर बल्कि प्रशासन के स्तर पर भी चिन्हित करके विशेष निगरानी करने की जरूरत है। आज ऐसी घटनाओं के लिए कानूनी उपाय मौजूद हैं। इसलिए प्रशासन को ऐसे मामलों में टालमटोल करने की बजाय सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि मामला लड़की या उसके परिवार में किसी की हत्या तक न पहुंचे।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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