कोरोना वैक्सीनेशन: गलत सूचनाएं भी हैं वायरस, इसका भी हो एक वैक्सीन
कोरोना वैक्सीनेशन: कोरोना की तरह ही गलत सूचनाएं भी वायरस की तरह होती है, यह भी वायरस की तरह तेजी से फैलती हैं और यहां तक कि गलत जानकारियां जान को भी जोखिम में डाल सकती हैं। ईरान में कोरोना महामारी के शुरूआती समय में जहरीला मेथानाल पीने से सैंकड़ों लोगों की जान चली गई। बाद में पता चला कि ईरान के लोगों बीच यह बात फैल गई कि मेथानाल से कोविड19 संक्रमण का इलाज संभव है। संक्रमण काल के दौरान ऐसी गलत और झूठी जानकारियों की संख्या तेजी से बढ़ गई। लोगों को ऐसी भ्रामक और गलत सूचनाओं के प्रभाव से बचाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को प्रमाणिक जानकारी के साथ आगे आना पड़ा।

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बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए सामूहिक टीकाकरण अभियान को भी इस तरह की गलत और झूठी जानकारियों के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से लाखों बच्चों को स्वास्थ्य का जोखिम उठाना पड़ा। तब और आज के समय में सूचना की व्यापकता और सूचनाओं के परिवेश में काफी बदलाव आ गया है। कोरोना संक्रमण काल के समय पूरा विश्व इंटरनेट के माध्यम से जुड़ा हुआ था, वायरस के बारे में अधिकतर लोग अंजान थे, किसी को भी इसके स्वरूप और प्रभाव के बारे में पता नहीं था। विश्वभर में बहुत से लोग वायरस के बारे में जानना चाहते थे जबकि कुछ लोग डरे भी हुए थे, ऐसे समय में वायरस के बारे में झूठी और गलत सूचनाओं की जैसे बाढ़ आ गई और अविश्वसनीयता का स्तर और बढ़ गया। अब जबकि कोरोना महामारी से मुकाबला करने के लिए सरकार सामूहिक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है एक बार फिर अफवाहों और झूठी सूचनाओं को फैलाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि कोरोना को हराने के लिए धरातल स्तर पर शुरू की गई कोशिश के बहुत पहले ही इस बात का दुष्प्रचार किया जाने लगा कि वैक्सीन के जरिए शरीर में एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी, जिससे हमारी व्यक्तिगत बायोलॉजिकल सूचनाएं चोरी की जा सकती हैं। अब कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद लगभग सच साबित होने वाली है, तो सोशल मीडिया पर इस पर बात गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है कि कोरोना वैक्सीन को बनाने के लिए जिस एमआरएनए तकनीक का प्रयोग किया गया है उससे कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्ति का डीएनए बदल जाएगा। जब तक टीकाकरण कार्यक्रम व्यापक स्तर पर सही समय से शुरू नहीं हो जाता, तब तक इस तरह के सिद्धांतों का प्रसार होता रहेगा और यह आम लोगों की वैक्सीन लगवाने के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता रहेगा।

वैक्सीन के बारे में ऐसी भ्रांतियों को दूर करने के लिए जरूरी है कि वैज्ञानिक और प्रमाणिक सूचनाओं के आधार पर सही जानकारी विशेषज्ञों द्वारा सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए, जिससे परिजन, रिश्तेदार और सामाजिक समूहों में वैक्सीन के बारे में सही धारणा बन सके और वह वैक्सीन के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होकर वैक्सीन लगवाने का निर्णय ले सकें। लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वैक्सीन के अंदर क्या है, इसे कैसे लगाया जाएगा और यह शरीर में किस तरह काम करेगी? वैक्सीन लगवाने के बाद किस तरह का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा होगा और उन्हें कैसे ठीक किया जा सकेगा? कोविड19 वैक्सीन की सभी को दो डोज लेनी होगी इसलिए कोरोना वैक्सीन लगवाने को सिर्फ एक दिन की घटना या आयोजन के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोरोना वैक्सीन लगवाने की यात्रा व्यक्ति द्वारा पंजीकरण करवाने और वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर में इम्यूनिटी विकसित होने तक होगी। इसलिए इसे एक दिन की कहानी नहीं कहा जा सकता। कोरोना वैक्सीन पर लोगों का अधिक विश्वास तब बढ़ेगा जब पहले चरण में वैक्सीन के दोनों शॉर्ट लेने वाले लाभार्थी सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफार्म पर अपने अच्छे अनुभव शेयर करेंगे। उसके पहले सही सूचनाओं का सही विस्तार ही इस कार्य में अहम भूमिका अदा करेगा, जिससे लोगों में वैक्सीन की गुणवत्ता और सुरक्षा बारे में विश्वास बढ़ाया जा सके। सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अकेले सरकार तक सीमित नहीं है।

इस प्रक्रिया के लिए जाने माने अभिनेताओं, शैक्षणिक स्तर के वरिष्ठजन, शोधार्थी, समाजसेवी संगठन कारपोरेट हाउस, निजी संस्थान के अधिकारी, वैक्सीन निर्माताओं सहित ऐसे संभ्रांत लोगों को भी आगे आना चाहिए, जो व्यापक रूप से आम लोगों से जुड़े हैं। इसका फायदा यह होगा कि आम लोगों के बीच इस बात का संदेश जाएगा कि कोरोना टीकाकरण के लिए पूरा देश एकजुट हो गया है और हर वर्ग के लोग इस मिशन को सफल बनाने के लिए प्रयासरत हैं। सरकार को इस बावत सभी लोगों को यह संदेश या एसएमएस भेजना चाहिए कि वैक्सीन लगवाना या न लगवाना स्वैच्छिक निर्णय हो सकता है लेकिन अपने साथ ही अपने परिजनों की सेहत की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें कोरोना का वैक्सीन अवश्य लगवाना चाहिए। कोरोना वैक्सीन लगवाने का निर्णय एक जिम्मेदारी भरा निर्णय होना चाहिए न कि किसी के द्वारा जोर जबरदस्ती से स्वीकार कराया गया निर्णय। इस तरह का प्रयास वैक्सीन कार्यक्रम को भ्रामक जानकारी के जरिए हत्तोसाहित करने की योजना को भी विफल करेगा।

पोलियो उन्मूलन अभियान को भी सफल बनाने के लिए धार्मिक, सामाजिक और समाज के संभ्रात लोगों की सहायता ली गई। धर्मगुरूओं को पोलियो अभियान में शामिल करने के बाद पोलियो अभियान के बारे में अधिक से अधिक लोगों तक न सिर्फ विश्वसनीय जानकारी पहुंचाई गई बल्कि इस अभियान ने बड़ी संख्या में लोगों का विश्वास जीता। देश के धर्मगुरू आधुनिक और वैज्ञानिक सोच के पक्षधर हैं। ऐसे चहेरों को विशेष अभियान में शामिल किया जा चाहिए, जिससे कोरोना वैक्सीन के प्रति सामाजिक लामबंदी (सोशल मोबलाइजेशन) की जा सके।
इस तरह की सामाजिक लामबंदी से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों तक वैक्सीन की सही जानकारियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुख्यधारा के सामाचार पत्र और सोशल प्लेटफार्म पर विश्वसीय लोगों द्वारा जारी संदेश के बाद ही कोरोना वैक्सीन लगवाने निर्णय लेगी। वरिष्ठ वैज्ञानिक और वैक्सीन विशेषज्ञों को मेनस्ट्रीम समाचार माध्यमों के जरिए वैक्सीन की सुरक्षा और गुणवत्ता के बारे में जानकारी देनी चाहिए, जिससे टीकाकरण के बारे में लोग स्पष्ट निर्णय ले सकें। औद्योगिक घरानों को भी इसका हिस्सा बनना चाहिए, उन्हें अपने कर्मचारियों के माध्यम से कोरोना वैक्सीन की सही जानकारी मॉस मीडिया और समाचार चैनल तक पहुंचाने में सहभागिता निभानी चाहिए।

करोड़ों लोगों का टीकाकरण करने के इस विशाल अभियान के लिए सरकार को कड़ा निगरानी तंत्र भी विकसित करना होगा, जिससे नकारात्मक सूचनाओं के प्रसार पर नजर रखी जा सके, ब्लॉक और जिला स्तर के स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी अधिक सख्त की जानी चाहिए और ऐसी किसी भी विपरित या अप्रिय घटना की सूचना नजदीकी के स्वास्थ्य अधिकारी को देनी चाहिए। केन्द्र और राज्य स्तर पर सरकार वैक्सीन के संरक्षण के लिए कोल्ड चेन और संरक्षण केन्द्र तैयार कर रही है। सुरक्षित और प्रभावित टीकाकरण के लिए यह बेहद चुनौतीपूर्ण भी है। मानव संसाधन और प्रबंधन की तैयारियों के बावजूद कोरोना टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए देश के राजनेताओं को अपनी व्यक्तिगत विचारधारा और आदर्श से ऊपर उठकर एक साथ आगे आना होगा। ऐसे अवसर अमूमन कम मिलते मिलते हैं जबकि किसी राष्ट्रीय स्तर के सामूहिक स्वास्थ्य सेवा टीकाकरण कार्यक्रम के लिए सभी पार्टी के राजनेताओं को एक साथ मिलकर आवाज उठाने का मौका मिले। यदि ऐसा होता है तो यह केवल महामारी के लिए ही नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र के लिए भी गौरव की बात होगी।
(लेखक जेवीआर प्रसाद राव, भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव हैं.)












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