Welfare Schemes for Elections: चौसर मोदी की, दांव गहलोत का
जहां OPS को पुनः लागू करने एवं बिजली बिल में छूट के वादे से कांग्रेस ने हिमाचल जीता, वहीं अब गैस सिलेंडर के दामों में कमी करने का वादा करके राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में फिर जीतने की योजना है।

Welfare Schemes for Elections: सत्ता पाने के लिए कांग्रेस अब साम दाम दंड भेद की नीति अपना रही है| साम दाम दंड भेद क्या है| यह एक प्रकार की विद्या है, जिसकी सहायता से आप किसी भी विपरीत परिस्थिति या कार्य को अपने पक्ष में कर सकते है| कांग्रेस के लिए इससे ज्यादा विपरीत परिस्थिति क्या होगी कि सिर्फ दो राज्यों में उसकी सरकार बची थी| कांग्रेस मुख्यालय चलाने तक के आर्थिक स्रोत सूख गए थे| लेकिन हिमाचल में साम दाम दंड भेद की नीति कामयाब रही| अब इसी नीति को अपना कर छतीसगढ़, राजस्थान बचाने हैं और कर्नाटक, मध्यप्रदेश हथियाने हैं|

इसीलिए हिमाचल प्रदेश की हार के बाद मोदी उखड़े हुए हैं| हिमाचल प्रदेश में मोदी सरकार की जनकल्याण की वे सारी योजनाएं फेल हो गई, जिनका प्रचार पिछले आठ साल से किया जा रहा था| कांग्रेस ने सिर्फ तीन वायदे करके भाजपा को पटखनी दे दी| ये तीन वायदे हैं - पुरानी पेंशन योजना, 300 यूनिट फ्री बिजली और महिलाओं को 1500 रूपए महीने की पेंशन|
भारतीय जनता पार्टी इन योजनाओं को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने वाली योजनाएं बता कर खुल्लम खुला विरोध करती है| वह हिन्दू वोट बैंक पर इतना भरोसा करती है कि कांग्रेस के इन वायदों के बावजूद हिमाचल प्रदेश के चुनावों में जीत के प्रति आश्वस्त थी| हालांकि मोदी सरकार की उज्ज्वला योजना भी इसी श्रेणी में आती है, जिसमें बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन मुफ्त में दिए गए थे| लेकिन उसके पीछे गरीब परिवारों की महिलाओं को धुंए से मुक्ति दिलाने का बड़ा मकसद था|
अब सवाल यह खड़ा होता है कि कांग्रेस ने साम दाम दंड भेद की नीति अपना कर जैसे भारतीय जनता पार्टी से हिमाचल छीना है, उसी तरह क्या मध्यप्रदेश और कर्नाटक भी छीन सकती है| तो अगर मोदी सरकार ने आगामी बजट में जनकल्याण की कोई बड़ी योजना लागू नहीं की और इन दोनों राज्यों में पुरानी पेंशन योजना को बहाल नहीं किया, तो इसकी प्रबल संभावनाएं बन रही हैं|
हालांकि पुरानी पेंशन योजना राज्यों की आर्थिक स्थिति चौपट कर देगी, लेकिन यह भी सच है कि बाज़ार आधारित नई पेंशन योजना कारगर साबित नहीं हुई, इसलिए केंद्र और राज्यों को मिलकर कोई नया रास्ता निकालना होगा, जो पुरानी और नई पेंशन योजनाओं से अलग मध्यमार्ग हो सकता है|
पुरानी पेंशन योजना भी आज की स्थिति में कारगर नहीं है| हम हिमाचल का ही उदाहरण सामने रखते हैं, जहां कांग्रेस सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का वायदा किया है| 2021-22 में हिमाचल को 9,282 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, उसका पेंशन भुगतान 7,082 करोड़ रुपए था, जो नई पेंशन योजना के कारण उस पर बोझ नहीं था|
सोचिए, हिमाचल में पुरानी पेंशन योजना लागू होने पर सरकार की क्या हालत होगी| सारे विकास कार्य तो ठप्प हो ही जाएंगे, कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे भी नहीं बचेंगे| इसी तरह राजस्थान के कर राजस्व में पेंशन का हिस्सा पहले ही 28 गुणा से ज्यादा बढ़ चुका है| कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में एलान कर दिया है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी|
कांग्रेस शासित जिन दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दस महीने बाद चुनाव है, वहां कांग्रेस पहले ही पुरानी पेंशन योजना का दांव खेल चुकी है| इसलिए सरकारी कर्मचारी उसके पाले में जा चुके हैं, जो जीत का पहला पड़ाव होता है| इसलिए हिमाचल के बाद भाजपा राजस्थान और छतीसगढ़ में भी मात खाने को तैयार रहे| जैसे हिमाचल में तीन मुद्दों ने कांग्रेस को सत्ता दिला दी थी, वैसे ही इन दोनों राज्यों में भी कुछ मुद्दे और जोड़े जाएंगे|
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही अशोक गहलोत ने पहली अप्रेल से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 500 रूपए में गैस सिलेंडर देने का एलान किया है| योजना को फरवरी में पेश होने वाले बजट में शामिल किया जाएगा| राहुल गांधी ने बाकायदा ट्विट करके अशोक गहलोत को बधाई दी और योजना की तारीफ़ की। उन्होंने मोदी के नाम संदेश में यह भी लिखा कि इस तरह की जनकल्याण योजनाएं बनाइए, सिर्फ 15 परिवारों के कल्याण की योजनाएं मत बनाइए|
राहुल गांधी अपने भाषणों में बार बार जनकल्याण की योजनाओं और कुछ परिवारों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं की तुलना कर रहे हैं| अब जब राहुल गांधी ने गहलोत की योजना की तारीफ़ की है, तो यह छतीसगढ़, झारखंड सरकारों और कर्नाटक, मध्यप्रदेश की कांग्रेस कमेटियों को संदेश भी है कि चुनावी वायदे के तौर पर इस स्कीम को शामिल करें|
अब अशोक गहलोत की गैस सिलेंडर योजना का गणित समझिए| मोदी सरकार की उज्ज्वला योजना कैसे चुनाव वाले राज्यों में कांग्रेस के लिए फायदे की योजना बनने जा रही है| मोदी सरकार ने 2016 में उज्जवला योजना को लागू किया था, जिसका भाजपा को 2017 के उतर प्रदेश, उत्तराखंड विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों में लाभ मिला|
2021 तक 8 करोड़ 30 लाख परिवारों को फ्री गैस कनेक्शन दिए जा चुके थे| अगस्त 21 में इस योजना को आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों के लिए भी खोल दिया गया| इस समय उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या 30 करोड़ हो चुकी है| लेकिन इसी बीच खबरें आने लगी थीं कि गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी बंद होने के बाद उज्जवला योजना के अंतर्गत बांटे गए 70 फीसदी गैस सिलेंडर दुबारा नहीं भरवाए गए| यह एक तरह से इस योजना की विफलता थी, क्योंकि गैस सिलेंडर कबाड़ बन गए थे| मई 2022 में मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना को प्रभावी बनाने के लिए हर गैस सिलेंडर पर 200 रूपए की सब्सिडी का एलान किया| इसके बाद दुबारा गैस सिलेंडर भरवाने वालों की तादाद बढ़ गई है|
अब केंद्र सरकार की इस योजना और सब्सिडी के बावजूद कांग्रेस को इसी योजना का कैसे लाभ मिलेगा, इस गणित को समझिए| राजस्थान उन पांच राज्यों में से है, जहां केंद्र सरकार की इस योजना के लाभार्थी सबसे ज्यादा हैं| राजस्थान में लाभार्थियों की संख्या 67 लाख से बढ़ कर 1 करोड़ 31 लाख 36 हजार 591 हो चुकी है| हर परिवार में तीन वोटर भी हों, तो कम से कम 4 करोड़ वोटर समझिए | गैस सिलेंडर 1040 रूपए का है, इसमें 200 रूपए की सब्सिडी केंद्र सरकार की है, 340 रूपए की सब्सिडी और देकर गहलोत उज्जवला स्कीम के चार करोड़ वोटरों पर हाथ साफ कर लेंगे| भले ही राज्य पर 4500 करोड़ का नया बोझ पड जाएगा|
उज्ज्वला योजना के मध्यप्रदेश में 1,47,23,864, कर्नाटक में 1,31,39,063 और छतीसगढ़ में 57,14,798 लाभार्थी हैं| मोदी सरकार की योजना कांग्रेस को वोट दिलाएंगी| इसे कहते हैं हाथ की सफाई, जो कांग्रेस को जादूगर अशोक गहलोत ने सिखा दी है|
यह भी पढ़ें: Old Pension Scheme पर क्या है विवाद, जानिए नयी और पुरानी पेंशन योजना में अंतर
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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