Congress vs AAP: आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की खींचतान
आम आदमी पार्टी के नेता ने अपने लेख में लिखा है कि कांग्रेस और भाजपा का मूल चरित्र एक ही है। दोनों ही दल शिक्षा, स्वास्थ्य, भूख और रोज़गार जैसी मौलिक समस्याओं को हल करने के प्रति गंभीर नहीं है।

Congress vs AAP: आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडे ने अरविन्द केजरीवाल के एजेंडे को उजागर कर कांग्रेस को सावधान कर दिया है| अरविन्द केजरीवाल अध्यादेश के मुद्दे पर विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करने के लिए भारत भ्रमण कर रहे थे| हालांकि तब तक उन्होंने संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस से संपर्क ही नहीं किया था| इससे कांग्रेस के भीतर केजरीवाल की मंशा पर संदेह था कि उन्होंने छोटे छोटे दलों से संपर्क साधना शुरू करने से पहले उस बड़े दल से समर्थन क्यों नहीं मांगा, जिसके बिना राज्यसभा में सरकार के बिल को रोका ही नहीं जा सकता| जब मुम्बई यात्रा के दौरान शरद पवार ने केजरीवाल से कहा कि उन्हें पहले कांग्रेस से तो बात करनी चाहिए थी| तब मुम्बई से ही उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात का समय मांगा था| उसके बाद उन्होंने इस तरह के बयान देने शुरू कर दिए कि उन्हें अभी तक मिलने का समय नहीं दिया गया है। उनके इन बयानों से कांग्रेस में संदेह बढ़ने लगा|

केजरीवाल विरोधी कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने जब देखा कि विपक्षी एकता के दबाव में कांग्रेस केजरीवाल से समझौता कर सकती है, तो उन्होंने अपने हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए सार्वजनिक तौर पर विरोध शुरू कर दिया| ऐसे लोगों की रहनुमाई अजय माकन कर रहे थे, जो शीला दीक्षित सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर रहे थे| फिर शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित भी आगे आए, उसके बाद पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा सामने आए|
बाजवा ने केजरीवाल के लिए सबसे सख्त शब्दों का इस्तेमाल करके कांग्रेस हाईकमान को ही एक तरह से चेतावनी दे दी कि केजरीवाल भेड़ के भेष में भेड़िया है, जो दिल्ली, पंजाब, गुजरात और गोवा में कांग्रेस को खा गया| अपने ही नेताओं के तीखे तेवर देख कर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए अपने आप फैसला लेना मुश्किल हो गया| राहुल गांधी की विदेश यात्रा से शुरू होने से कुछ घंटे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे को इन तीनों नेताओं को बुला कर बात करनी पड़ी, इन बैठकों में राहुल गांधी भी मौजूद थे|
दिल्ली के प्रशासन पर अध्यादेश जारी होने के बाद सबसे पहले नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने केजरीवाल से मुलाक़ात करके उन्हें समर्थन का एलान किया था| मुलाक़ात के दौरान नीतीश कुमार ने खुद कहा था कि वह कांग्रेस से बात करेंगे| नीतीश ने कांग्रेस से बात की, लेकिन कांग्रेस से हुई बातचीत का कहीं खुलासा नहीं हुआ कि कांग्रेस ने क्या जवाब दिया| इसका मतलब साफ़ था कि कांग्रेस का रूख सकारात्मक नहीं था, लेकिन नकारात्मक भी नहीं था|
ऐसे में जरूरी था कि यूपीए के घटक दलों से बातचीत शुरू करने से पहले केजरीवाल खुद कांग्रेस से बात करते, लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने कांग्रेस से बात किए बिना ही यूपीए के घटक दलों के साथ मुलाक़ात के लिए यात्राएं शुरू कर दीं| इससे कांग्रेस के भीतर केजरीवाल की रणनीति पर शुरू हुए शक को अजय माकन, संदीप दीक्षित और प्रताप सिंह बाजपा ने मजबूत किया| इन तीनों की दलीलें सुनने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने केजरीवाल को मिलने का समय नहीं दिया| लेकिन जब दो जून को वाशिंगटन में राहुल गांधी से केजरीवाल के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना लागलपेट के कहा कि कांग्रेस को जितना नुकसान आम आदमी पार्टी ने पहुंचाया है, उतना किसी ने नहीं पहुंचाया|
समझदार को इशारा काफी था, और केजरीवाल समझ गए। इसलिए रांची में उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस को तय करना है कि वह देश के साथ है या मोदी के साथ है, वह भारत की 140 करोड़ जनता के साथ है या मोदी के साथ है| केजरीवाल के इस बयान से साफ़ है कि उनका इरादा कांग्रेस को साथ लेकर अध्यादेश को रुकवाना नहीं है, बल्कि वह इसे संघीय ढांचे पर प्रहार बता कर चुनावी मुद्दा बनाना चाहते हैं| संघीय ढांचे पर प्रहार के नाम पर वह यूपीए के घटक क्षेत्रीय दलों को अपने साथ लाकर कांग्रेस रहित विकल्प बनाने की कोशिशों में जुटे हैं|
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाने के बाद आम आदमी पार्टी क्षेत्रीय दलों को अपने पीछे खड़ा करके देश के सामने गैर कांग्रेस गैर भाजपा विकल्प बनाने की रणनीति पर काम कर रही है| केजरीवाल जब क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मुलाक़ात करने निकले हुए थे, उसी समय दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडे ने एक लेख लिख कर आम आदमी पार्टी की मंशा जाहिर कर दी| उन्होंने इस लेख में लिखा कि कर्नाटक के नतीजे को इस तरह पेश किया जा रहा है कि जैसे कांग्रेस ही भाजपा का विकल्प है, लेकिन यह सच नहीं है| कर्नाटक के मुसलमानों ने भाजपा को हराने के लिए एकजुट हो कर जेडीएस के बजाए कांग्रेस को वोट दिया, इसलिए कांग्रेस जीत गई, लेकिन कांग्रेस भाजपा के वोट बैंक में सेंध नहीं लगा पाई| जबकि पंजाब में जालन्धर लोकसभा उपचुनाव का नतीजा बताता है कि देश ने कांग्रेस को ठुकरा कर आम आदमी पार्टी को भाजपा के विकल्प के रूप में चुना है| इसलिए कर्नाटक के चुनाव नतीजे के बाद से जो यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है कि विपक्षी एकता का केंद्र स्थल कांग्रेस ही है, इसमें कोई दम नहीं है|
इस लेख में आम आदमी पार्टी के विधायक ने यह भी लिखा है कि किसी अन्य राजनीतिक दल के पास विकास का वैसा विजन नहीं है, जैसा आम आदमी पार्टी के पास है| जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो उसने चुनावी फायदे के लिए आम आदमी पार्टी की कुछ सफल गारंटियों की नकल की, लेकिन उन्हें पूरा करने की कोई ठोस कार्ययोजना दिखाई नहीं देती| वह लिखते हैं कि वादे पूरा करने की गारंटी तो सिर्फ केजरीवाल मॉडल ही दे सकता है, क्योंकि ठोस वित्तीय प्रबंधन की कला और टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और पंजाब में अपनी क्षमता साबित भी की है| जबकि कर्नाटक के नतीजे के बाद मीडिया का एक तबका ऐसा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है कि कांग्रेस ही भाजपा को टक्कर देने वाली एकमात्र राजनीतिक पार्टी है और विपक्षी ख़ेमे में राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के एकमात्र योग्य उम्मीदवार हैं, जबकि सच्चाई यह है कि कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को मजबूरी में वोट दिया है|
वह आगे लिखते हैं कि कांग्रेस और भाजपा का मूल चरित्र एक ही है| दोनों ही दल शिक्षा, स्वास्थ्य, भूख और रोज़गार जैसी मौलिक समस्याओं को हल करने के प्रति गंभीर नहीं है| इन दोनों ही पार्टियों ने क्रोनी कैपिटलिज़्म को बढ़ावा दिया है| जबकि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में भी सुशासन का विशिष्ट मॉडल भी पेश किया है| मोदी के अश्वमेध को रोकने का काम निश्चित रूप से क्षेत्रीय पार्टियां ही कर रही हैं, लेकिन वे क्षेत्रीय आकांक्षाओं का ही प्रतिनिधित्व करती हैं| भारत का नेतृत्व एकमात्र वही दल कर सकता है, जिसके मुद्दे राष्ट्रीय हों, जिसकी सोच समग्र भारतीय चेतना का प्रतिनिधित्व करती हो और जो शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और सुरक्षा जैसे मुद्दों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को समझता हो| ऐसे में भाजपा का ईमानदार विकल्प कांग्रेस नहीं हो सकती है| भाजपा को हटाकर कांग्रेस को ले आना यानी, 'फैन्टा' को हटाकर 'कोक' ले आने जैसा है, जबकि देश की सेहत के लिए दोनों ही हानिकारक हैं|
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हेंडल से दिलीप पांडे के लेख को शेयर किया है| इससे आम आदमी पार्टी की मंशा जाहिर होती है कि राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाने के बाद वह कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्षी एकता में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं रखती, बल्कि कांग्रेस के सहयोगी दलों को कांग्रेस से तोड़कर अपने नेतृत्व में नया गठबंधन खड़ा करना चाहती है, जो गैर कांग्रेस गैर भाजपा दलों को अपने साथ जोड़ कर भाजपा का विकल्प बन सके| क्योंकि यह लेख केजरीवाल की क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मुलाकातों के दौरान लिखा गया है, इसलिए केजरीवाल की मेल मुलाकातों के छिपे हुए मकसद को भी उजागर करता है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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