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इंडिया गेट से: लेटर बम से हिल गया कांग्रेस मुख्यालय, डेलिगेट्स की सूची होगी जाहिर

कांग्रेस के अध्यक्ष को ले कर अभी तस्वीर साफ़ नहीं हुई है। राहुल गांधी इस पर अभी भी चुप्पी साधे हुए हैं। 'भारत जोड़ो' यात्रा के दौरान शुक्रवार को एक पत्रकार ने उनसे इस संबंध में सवाल पूछा तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा- ''मैं अध्यक्ष बनूंगा या नहीं बनूंगा, चुनाव होने पर स्पष्ट हो जाएगा. तब तक इंतजार करिये. अगर मैं चुनाव में खड़ा नहीं हुआ तो मुझसे पूछिएगा, मैं आपके सवाल का जवाब दूंगा।'' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अपना फैसला स्पष्ट रूप से कर चुके हैं कि उन्हें क्या करना है।

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    Rahul Gandhi

    वैसे इस का मतलब तो यही निकलता है कि वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। आगे चल कर क्या होगा, नहीं कहा जा सकता। यानी सस्पेंस बरकरार है। शशि थरूर ने पिछले दिनों कहा था कि गांधी परिवार का कोई सदस्य अध्यक्ष नहीं बनेगा। उनकी जानकारी कितनी पुष्ट है, यह नहीं कहा जा सकता। क्योंकि वह भी तो आखिर उस जी-23 ग्रुप के सदस्य हैं, जो गांधी परिवार की आँख की किरकिरी बना हुआ है।

    इस बीच अशोक गहलोत का नाम अध्यक्ष पद के लिए चल रहा है, लेकिन वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते। वह गांधी परिवार पर ही जोर दे रहे हैं । अब मुकुल वासनिक का नाम चर्चा में है। यह तय है कि अगर राहुल गांधी नहीं मानते हैं तो चुनाव में घमासान होगा।

    घमासान का संकेत तो वोटर सूची को गोपनीय रखे जाने पर ही हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि कई दशक से प्रदेश डेलीगेट्स का चुनाव होने के बजाए नामांकन होता रहा है, और बंद कमरे में बनाई गई सूची को काफी हद तक गोपनीय रखा जाता है।

    इस बार भी उसे गोपनीय रखने की हर संभव कोशिश की गई। यहाँ तक कि कांग्रेस के भीतर से जिस किसी ने सवाल उठाया उस का चुनाव अधिकारी मधुसूदन मिस्त्री ने मजाक उड़ाया। सबसे पहले कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में आनंद शर्मा ने इस बारे में सवाल उठाया था। इस पर मिस्त्री ने आनन्द शर्मा को टका सा जवाब दिया था कि जैसे पहले चुनाव होते रहे हैं, उसी तरह इस बार भी होगा।

    इसके बाद मनीष तिवारी ने भी आंनद शर्मा के सुर में सुर मिलाया। कांग्रेस अध्यक्ष के प्रस्तावित चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीक़े से कराने के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने ट्विटर पर मधुसूदन मिस्त्री को टैग करते हुए पूछा कि जब पार्टी की मतदाता सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ही नहीं है, तो यह चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र कैसे हो सकता है? लेकिन वही टका सा जवाब। फिर शशि थरूर ने मिस्त्री को चिठ्ठी लिख कर डेलिगेट्स की सूची सार्वजनिक करने की मांग की। जिस पर मिस्त्री ने साफ इनकार कर दिया था। चुनाव अधिकारी की यह जिद्द आश्चर्यजनक थी क्योंकि जो भी चुनाव लड़ना चाहता है, उसे अपने नामांकन में दस डेलिगेट्स के साइन करवाने होते हैं, जब उम्मीदवार को डेलिगेट्स की सूची ही नहीं दी जाएगी तो वह नामांकन कैसे करेगा।

    मिस्त्री की ना नुकर पर कांग्रेस अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बाहर के लोग भी सवाल उठाने लगे तो इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय विचार विमर्श हुआ। कांग्रेस को डर यह था कि सूची सार्वजनिक कर दी गई, तो उस में कई खामियां निकल आएंगी।

    सोनिया गांधी के चुनाव के समय जब सूची जारी हुई थी, तो कई मृतकों के नाम पाए गए थे। इस के अलावा कुछ वे नाम भी थे, जो कांग्रेस छोड़ चुके थे। अब शशि थरूर की रहनुमाई में पांच सांसदों ने मधुसूदन मिस्त्री को चिठ्ठी लिख कर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा दिया। शशि थरूर की चिठ्ठी पर मनीष तिवारी, कार्ति चिदंबरम, प्रद्युत बारदोलोई और अब्दुल खालिक के दस्तखत थे। ये सभी अलग अलग प्रदेशों से हैं।

    इस चिठ्ठी से कांग्रेस नेतृव में खलबली मच गई, क्योंकि जो भी अध्यक्ष चुना जाएगा, उस के निर्वाचन पर सवाल उठ सकता है और यह मामला चुनाव आयोग की दहलीज पर जा सकता है। राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनाव पार्टी के संविधान के मुताबिक़ होने चाहिए, अगर उस में खामी पाई जाती है तो चुनाव आयोग सुनवाई कर के फैसला दे सकता है।

    अब मधुसूदन मिस्त्री ने घुटने टेकते हुए कहा है कि जो भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहता है वह अपने प्रदेश कार्यालय में जा कर डेलीगेट्स के नाम देख सकता है। अगर कोई अलग प्रदेशों के दस डेलिगेट्स के साईन करवाना चाहता है, तो वह दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय आ कर देश भर के सभी लगभग 9000 डेलीगेट्स की सूची देख सकता है। अधिसूचना से दो दिन पहले यानि 20 सितंबर से यह सूची कांग्रेस मुख्यालय में उपलब्ध होगी।

    कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में पीसीसी के सदस्य वोट करते हैं, जिन की संख्या 9000 के आसपास होती है। जबकि कांग्रेस कार्यसमिति के लिए एआईसीसी के सदस्य वोट करते हैं, जिनकी संख्या 1500 के आसपास है। कायदे से पीसीसी डेलीगेट्स का चुनाव ब्लाक और जिला स्तर पर और एआईसीसी डेलीगेट्स का चुनाव राज्य स्तर पर होना चाहिए लेकिन लंबे समय से पीसीसी और एआईसीसी सदस्यों की सूची बड़े नेता ही बैठ कर बना लेते हैं, और आपस में ही रेवड़ियां बाँट लेते हैं।

    आनन्द शर्मा और मनीष मनीष तिवारी कांग्रेस में हो रहे गोलमाल से पहले से ही परिचित हैं। इसलिए मिस्त्री ने उन्हें वही कोरा सा जवाब दिया था कि जैसे पहले सूचियाँ बनती थीं, वैसे ही बनेंगी। इस के बाद मनीष तिवारी ने मांग की थी कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए ज़रूरी है कि मतदाताओं के नाम और पते कांग्रेस की वेबसाइट पर पारदर्शी तरीक़े से प्रकाशित किए जाएं।

    हालांकि यह सूची वेबसाईट पर नहीं डाली गई है , लेकिन मधुसूदन मिस्त्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अध्यक्ष पद के लिए जो भी नामांकन करना चाहेगा वह सूची देख सकेगा और जो भी नामांकन दाखिल करेगा, उसे भी वो सूची उपलब्ध कराई जाएगी।

    चुनाव के लिए अधिसूचना 22 सिंतबर को जारी की जाएगी। नामांकन 24 सितंबर से 30 सितंबर तक सुबह 11 बजे से 3 बजे शाम तक दाखिल किए जा सकेंगे। सभी नामांकन पत्रों के जाँच के बाद उम्मीदवारों की सूची 1 अक्टूबर को जारी कर दी जाएगी।

    नामांकन वापस लेने की तारीख 8 अक्टूबर दोपहर 3 बजे तक है। चुनाव के लिए वोट 17 अक्टूबर को होना है। वोटों की गिनती 19 अक्टूबर को होगी। लेकिन अगर एक ही नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस में रहता है तो 8 अक्टूबर को भी कांग्रेस के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जा सकती है।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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