Banking Sector: क्या संकट में है बैंकिंग सेक्टर?
अडानी समूह पर उठे विवाद के बाद बैंकिंग सेक्टर की सेहत पर भी चर्चा हो रही है। लेकिन भारतीय बैंक जहां पहले के मुकाबले अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं वहीं वर्तमान बजट में किये गये प्रावधान उनके लिए बूस्टर डोज का काम करेंगे।

Banking Sector: बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए समीचीन कदमों का असर दिखने लगा है। बैंकों के मुनाफे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, वहीं बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार की खबरें चहुंओर हैं। सकल एनपीए अनुपात भी घटकर 7 साल के सबसे निचले स्तर 5% पर आ गया है और सकल गैर निष्पादित संपत्ति अनुपात के 5% से भी कम रहने का अनुमान लगाया गया है। देश के सबसे बड़े कर्जदाता बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा है कि उसकी कुल आय तीसरी तिमाही में 98,084 करोड़ रुपए रही जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 78,351 करोड़ रुपए थी। बैंक ऑफ बड़ौदा की आय में भी 74.6% का उछाल आया है तथा फंसे हुए कर्ज की स्थिति में सुधार हुआ है।
मालूम हो कि बैंकों की रीति नीति सुधारने के लिए बैंकिंग नियमन अधिनियम और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में संशोधन करने के प्रस्ताव का जिक्र वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में भी किया गया है। सरकार ने पूंजीगत व्यय 33% बढ़ाकर अवसंरचना को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2023 24 में 10 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की है। यह राशि जीडीपी के 3.3% के बराबर होता है।
इस राशि को मोटे तौर पर रेलवे, राजमार्ग और राज्यों की अवसंरचना को मजबूत करने में खर्च किया जाएगा, जिससे वैश्विक अवरोधों के बावजूद वृद्धि की रफ्तार को कायम रखने में मदद मिलेगी। पूंजीगत खर्च में वृद्धि से आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी और बैंक ऋण की रफ्तार में तेजी आएगी। क्योंकि इससे बहुत सारे उत्पादों की मांग में तेजी आएगी, लोगों की आय में बढ़ोतरी होगी और नए नए रोजगार का सृजन भी होगा। इन सभी गतिविधियों से बैंकों के कारोबार को प्रगति के पंख लग जाएंगे।
बजट में विभिन्न राज्यों में 30 कौशल विकास अंतरराष्ट्रीय केंद्रों की स्थापना करने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के वर्जन 4.0 के तहत युवाओं को कोडिंग, एआई, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, एआईओटीटी, 3D प्रिंटिंग, ड्रोन और सॉफ्ट स्किल आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा और इसके तहत आगामी 3 सालों में 47 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष तौर पर नकदी हस्तांतरण के रूप में भत्ता दिया जाएगा ताकि उन्हें प्रशिक्षण लेने में किसी तरह की आर्थिक समस्याओं का सामना न करना पड़े। प्रशिक्षण के बाद 47 लाख युवा खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, जिसके लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और अन्य ऋण योजनाओं के जरिए बैंक उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।
बैंकिंग आंकड़ों के मुताबिक बार-बार रेपो रेट बढ़ने के बावजूद बैंकों के ऋण वितरण में तेजी बरकरार है। सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि देखी जा रही है। खासकर गैर खाद्य बैंक ऋण में सालाना वृद्धि बढ़कर 15.3% तक पहुंच गई है। हालांकि ऋण वृद्धि की रफ्तार अधिक होने के कारण बैंकों पर पूंजी जुटाने का दबाव बढ़ गया है। 15 जनवरी 2023 तक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर 16.6% थी, जबकि जमा वृद्धि 10.7% ही रही। आर्थिक समीक्षा के अनुसार घटता एनपीए अनुपात, कारपोरेट क्षेत्र के मजबूत बुनियादी आधार और बढ़ती ऋण ब्याज दरों के बावजूद कारोबार में निवेश बढ़ाने के लिए ऋण की मांग और बैंक ऋण का प्रवाह अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
प्रस्तुत बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के लिए नई कर्ज गारंटी योजना शुरु होनी है, जिसके तहत देश में मौजूद 84 हजार से अधिक स्टार्टअप के लिए 1 अप्रैल 2023 एमएसएमई को दो लाख करोड़ रुपए तक का ऋण दिया जाना है। पूर्व में इमरजेंसी क्रेडिट लिंक गारंटी स्कीम योजना से एमएसएमई क्षेत्र को बहुत ज्यादा फायदा हुआ था। देश में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां है, जिनमें 13 करोड़ से अधिक लोग काम करते हैं। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र का देश की जीडीपी में लगभग 35% का योगदान होता है।
हालिया ऋण वृद्धि की गति में तेजी मुख्य तौर पर छोटे ऋणों और आवास ऋणों में आई तेजी के कारण संभव हो सकी है। आवासीय मांग बढ़ने से निवेश में आगे और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवंटन लगभग 70% बढ़ाते हुए 79000 करोड रुपए से अधिक का कर दिया गया है। इस गुणात्मक वृद्धि से बैंकों के कारोबार में निश्चित रूप से इजाफा होगा और बैंकों की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इसी तरह कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण की मांग को सरकार के रियायती संस्थागत कर्ज से मदद मिलेगी। बजट में कृषि एवं सम्बन्धित कार्यों के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के ऋण वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले बजट में यह लक्ष्य 18.52 लाख करोड़ ही था। कृषि क्षेत्र के लिए अलग से एक कोष बनाने की बात कही गई है क्योंकि कोरोना काल और उसके बाद भी कृषि क्षेत्र ने विकास की गति को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि मनरेगा के बजट में 33% की कटौती की गई है, लेकिन मनरेगा के मद में कटौती के बावजूद कृषि से जुड़े बजट प्रावधानों के कारण बैंकिंग कारोबार में वृद्धि होने का अनुमान प्रमुख औद्योगिक संगठनों ने लगाया है।
परंपरागत हस्तशिल्प कारीगरों के लिए पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना के जरिए वित्तीय समर्थन की बात कही गई है। इसके तहत उत्पादन बढ़ाने और विपणन की गति में तेजी लाने की भी बात प्रमुखता से कही गई है। मछली पालन के लिए 6 हजार करोड़ रुपए की रियायती ऋण योजना शुरू की जाएगी, जिससे ऋण की मांग में वृद्धि होगी और यह सब काम बैंकों की आर्थिक रफ्तार को तेज करेगा।
वर्तमान मूल्य पर जीडीपी वृद्धि दर वर्ष 2023-24 में 11% रहने का अनुमान लगाया गया है। इस अनुमान को इससे भी बल मिलता है कि राजकोषीय घाटा 6.4% से घटाकर अगले साल 5.9% पर लाने की बात बजट में प्रमुखता से कही गई है। राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए गैर कर राजस्व में वृद्धि से सरकार को राहत मिली है। क्योंकि दूरसंचार और पेट्रोलियम क्षेत्र से इस समय सरकार को अच्छी कमाई हो रही है। वही, विनिवेश से भी 51 हजार करोड़ रूपए जुटाने का अनुमान किया गया है।
ध्यान रहे कुल बजट व्यय के एक रुपये में 34 पैसे उधार लेने का लक्ष्य तय किया गया है। फिलहाल आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए उधारी लेने की जरूरत है, इसलिए उधारी को नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। देश में बैंकिंग कारोबार को रफ्तार मिलना आवश्यक है। मौजूदा बजट से इस रफ्तार को पंख लग सकते हैं जिससे विकास को भी बल मिलेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले और अधिक मजबूती से खड़ी रहेगी।
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उम्मीद की जानी चाहिए कि कड़े और बड़े राजकोषीय संतुलन की हिमायती केंद्र की सरकार ने रोजगार और नौकरिया पैदा करने के उद्देश्य से प्रमुख क्षेत्रों में जो पूंजीगत खर्च का आंकड़ा बढ़ाया है उसका माकूल इस्तेमाल होता है तो विभिन्न मोर्चों पर कामयाबी मिलेगी और बैंकों के कारोबार भी अबाध गति से चलते रहेंगे।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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