China Taiwan Conflict: क्या एक और महायुद्ध के मुहाने पर आ चुकी है दुनिया?
रुस यूक्रेन युद्ध के दौरान ही क्या दुनिया एक और महायुद्ध के मुहाने पर जा खड़ी हुई है? ताईवान के मुद्दे पर चीन और अमेरिका में जैसी तनातनी हुई है, उसे देखते हुए इससे इन्कार नहीं किया जा सकता।

China Taiwan Conflict: ताईवान के मामले में 1950 का घटनाक्रम फिर घूम कर सामने आ गया है। उस समय नार्थ कोरिया - साउथ कोरिया आपस में लड़ रहे थे। नार्थ कोरिया को मदद करने के लिए चीन ने ताईवान को अपनी सीमा में मिलाने का मिलिट्री ऑपरेशन चला दिया था। तब अमेरिका ने साउथ कोरिया को बचाने के बहाने ताईवान में अपना डेरा डाल दिया था। उस समय भी ये दोनों मिलिट्री पावर आमने- सामने थे और अब फिर युद्धक तैयारियों के साथ ताईवान मामले में एक दूसरे से लोहा लेने की हुंकार भर रहे हैं।
तब अमेरिका ने न सिर्फ ताईवान को आर्थिक और सामरिक सहयोग दिया था, बल्कि उसे अपने संरक्षण में भी ले लिया था। ताईवान की नये सिरे से सैन्य घेरेबंदी शुरु करने वाले चीन को अमेरिका ने फिर चेतावनी दी है कि बीजिंग के किसी भी दुस्साहस से निबटने के लिए उसके पास सैन्य क्षमता है। वह ताईवान को सुरक्षा देने के अपने वायदे पर कायम है।
फिर से क्यों उठा चीन ताईवान विवाद?
ताईवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच ताजा विवाद ताईवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन और अमेरिकी संसद के स्पीकर केविन मैककार्थी के बीच 5 अप्रैल को लॉस एंजिल्स में हुई बैठक है। ताईवानी राष्ट्रपति इन दिनों लैटिन अमेरिका के दौरे पर हैं। चीन ने पहले ही अमेरिका को चेताया था कि साई इंग वेन से कोई अमेरिकी राजनेता मिला तो वह बर्दाश्त नहीं करेगा। लेकिन यह बैठक हुई और चीन अपनी धमकी के अनुसार मिलिट्री कार्रवाई की झलक दिखाने में जुट गया है।
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने 8 अप्रैल को सुबह ही यह घोषणा कर दी कि उसने ताईवान द्वीप को चार दिशाओं से घेरना शुरू कर दिया है। चीन ताईवान के आसमान पर युद्ध के समय की जाने वाली गश्त और संयुक्त अभ्यास शुरू कर चुका है। ताईवान रक्षा मंत्रालय ने भी यह बयान जारी किया है कि पीएलए के 42 युद्धक विमान उसकी सीमा के आस पास उड़ते हुए देखे गए हैं। इसके अलावा चीन ने आठ युद्धपोत, मिसाइल और राकेट भी तैनात कर रखे हैं।
चीन ने अपने मुख्यपत्र ग्लोबल टाइम्स के जरिए स्पष्ट रूप से यह कहा है कि साई और मैककार्थी के बीच उकसाने वाली बैठक के जवाब में पीएलए ने यह ऑपरेशन शुरू किया है। ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि ताईवान को चारों दिशाओं से इस तरह से घेरेंगे कि यह पूरी तरह से बाकी दुनिया से कट जाए और कोई भी विदेशी इसमें प्रवेश करने में सक्षम न हो पाए। चीन का इशारा अमेरिका की ओर है। चीन अंततः ताईवान को अपने हथियार डालने पर मजबूर करना चाहता है ताकि ताइवान उसकी अधीनता स्वीकार कर ले। वह इसी मंसूबे से काम कर रहा है।
लेकिन चीन के इस मंसूबे में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका है। वाशिंगटन ने बीजिंग को चेतावनी दी है कि वह साई के अमेरिकी सांसदों के साथ मिलने को मुद्दा ना बनाए और ना ही ओवररिएक्ट के बहाने ताईवान के साथ कोई ज्यादती करे। साई पहले भी अमेरिका जा चुकी हैं और हालिया दौरा अमेरिकी नीति के अनुरूप है। यदि चीन ताईवान के आस पास अपनी सेना जमा करता है तो अमेरिका भी पीछे नहीं रहेगा।
चीन ताइवान की तनातनी का कारण
चीन-ताईवान के बीच संघर्ष की कहानी आज की नहीं है, बल्कि चीनी गृहयुद्ध से जुड़ी है। 1927 से 1950 तक चीन की राष्ट्रवादी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच जबर्दस्त आंतरिक युद्ध हुआ था। च्यांग काई-शेक के नेतृत्व में राष्ट्रवादियों ने कम्युनिस्टों को पहले तो हराकर चीन में सरकार बना ली थी, पर बाद में वे युद्ध हार गए और भागकर ताईवान द्वीप पर बस गए। ताईवान को रिपब्लिक ऑफ चाइना (आरओसी) कहा गया और 1971 तक संयुक्त राष्ट्र में एक देश के रूप में मान्यता बनाए रखी गई।
लेकिन 1971 में जब संयुक्त राष्ट्र ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता दी तो ताईवान को राष्ट्र की बजाय सिर्फ़ एक संप्रभु राज्य के रूप में माना गया। चीन ने वन नेशन की पॉलिसी अपनाई और सभी देशों को यह चेतावनी दे दी कि चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाला कोई भी देश ताईवान के साथ अलग से संबंध नहीं रखेगा। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों के आरओसी अर्थात ताईवान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखा है।
ताईवान लगातार चीन के संभावित हमले से बचने के लिए अमेरिकी रक्षा सहयोग पर निर्भर है। अभी मार्च में ही अमेरिकी कांग्रेस ने 619 मिलियन डॉलर के रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। इसके तहत ताईवान को 200 एंटी एयरक्राफ्ट एयर टू एयर मिसाइल, 100 एजीएम 88 बी मिसाइल और रेडार सिस्टम मिलने वाले हैं। ये सिस्टम पहले से मौजूद अमेरिकन फाइटर प्लेन एफ 16 के साथ काम करेंगे।
ताईवान की तरक्की और चीन की चाहत
दरअसल चीन के लिए ताईवान केवल साम्राज्यिक मिशन नहीं है, बल्कि ताईवान के बिना चीन के आर्थिक सुपरपॉवर बनने का सपना पूरा होना मुश्किल है। यह बात अमेरिका और उसके सहयोगी जानते हैं। इसलिए वाशिंगटन के साथ जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस मजबूती से खड़े हैं। यह उनकी रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि चीन ने ताईवान पर कब्जा कर लिया, तो इन देशों के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। प्रशांत क्षेत्र में चीन सर्वशक्तिमान हो जाएगा। सोलोमन द्वीप समूह पर चीन की गतिविधियों को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है। वहां चीन ने एक विशाल समुद्री नौसेना का निर्माण कर रखा है।
केवल सामरिक ही नहीं, ताईवान को चीन से बचाए रखने के पीछे अमेरिका और मित्र देशों के आर्थिक हित भी जुड़े हुए हैं। अगर चीन ताईवान पर कब्जा कर एशिया पर हावी हो जाता है तो उसका वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग आधे हिस्से पर नियंत्रण स्थापित हो सकता है। तब बीजिंग यह सुनिश्चित कर सकता है कि चीन दुनिया का सबसे अमीर, आर्थिक रूप से सबसे सुरक्षित और सबसे प्रभावशाली देश है, जो अमेरिका कभी नहीं चाहेगा।
कितनी सही है महायुद्ध की आशंका?
ताईवान पर कब्जा करके जहां चीन आर्थिक और सामरिक महाशक्ति बनना चाहता है वहीं अमेरिका किसी भी कीमत पर ऐसा होने नहीं देना चाहता। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि आज नहीं तो कल ताईवान के मुद्दे पर दोनों के बीच महायुद्ध होना तय है। जिस दिन ऐसा होगा, उस दिन संसार की सामरिक और कूटनीतिक में क्या उठापटक होगी वह तब देखा जाएगा लेकिन तैयारियां दोनों ओर से हो रही हैं।
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भले ही आज ताईवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच युद्ध न हो, पर दोनों पक्ष युद्ध की तैयारियों में पूरी तरह जुटे हुए हैं। हाल ही में एक अमेरिकी फोर स्टार जनरल माइक मिन्हान ने अपने अधिकारियों को मेमो भेजकर आगाह किया कि अगले दो साल में चीन के साथ युद्ध होना संभावित है। इसके लिए उन्हें लक्ष्य बनाकर तैयारी करनी चाहिए। चीन के लिए भी 2024 में अमेरिका और ताईवान दोनों के खिलाफ अभियान छेड़ना आसान होगा क्योंकि तब दोनों देशों में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे होंगे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पास ताईवान पर आगे बढ़ने का अवसर होगा। इसलिए जो सैन्य साजोसामान का मोबलाइजेशन हो रहा है वह आज की न सही, भविष्य में युद्ध की आहट जरूर दे रहा है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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