CBI and ED: सीबीआई और ईडी की लगाम कौन कसे?
CBI and ED: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। पहले जहां शिक्षक भर्ती घोटाले में अपने एक मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंत्री पद से हटाना पड़ा था, वहीं अब राशन वितरण घोटाले में पूर्व खाद्य मंत्री और मौजूदा वन मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक की गिरफ्तारी हो गई है| एक दिन पहले जब ईडी के अधिकारी ज्योतिप्रिय मलिक के घर पर छापा मारने के बाद उन्हें साथ ले गए थे, तो ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपने विरोधियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई के दुरूपयोग का आरोप लगाया था|
पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के समय ममता बनर्जी उन्हें तुरंत मंत्री पद से हटाने को मजबूर हो गई थीं क्योंकि पार्थ की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से 22 करोड़ रूपए और एक अन्य सहयोगी के घर 28 करोड़ बरामद किए थे| दो साल पहले नारदा स्टिंग मामले में भी ममता सरकार के दो मंत्रियों सुब्रत मुखर्जी और फिरहाद हकीम को भी गिरफ्तार किया था| जब इन दोनों मंत्रियों और एक विधायक को गिरफ्तार किया गया था, तो ममता बनर्जी ने कोलकात्ता के सीबीआई दफ्तर के सामने धरना दे दिया था| तृणमूल कांग्रेस के एक बड़े और बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल को मवेशी तस्करी मामले में गिरफ्तार किया गया था|

महाराष्ट्र में जब महाविकास अघाड़ी सरकार थी, तो उसके दो मंत्रियों अनिल देशमुख और नवाब मलिक को भी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया था| दोनों उद्धव ठाकरे की सरकार में शरद पवार की एनसीपी कोटे के मंत्री थे| गिरफ्तारी के बाद भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें बर्खास्त नहीं किया था|
दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शराब घोटाले में और जेल मंत्री सत्येन्द्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग केस में लंबे समय से जेल में हैं| मनीष सिसोदिया ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद इस्तीफा दे दिया, तो मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को सत्येन्द्र जैन का भी इस्तीफा लेना पड़ा, जो जेल मंत्री होते हुए साल भर से जेल में थे| आम आदमी पार्टी के सासंद संजय सिंह भी शराब घोटाले में जेल में हैं|

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव, उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव रेलवे में नौकरी के बदले जमीन के मामले में चार्जशीटेड हैं| यह तब का मामला है जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे| कांग्रेस के बड़े नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर रिहा हैं| क्रिकेट एसोसिएशन के फंड में घोटाले में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। 2020 में ईडी ने उनकी 11.86 करोड़ की सम्पत्ति कुर्क कर ली थी|
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी, अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, लालू यादव का राष्ट्रीय जनता दल, सोनिया गांधी की कांग्रेस और फारूख अब्दुला की नेशनल कांफ्रेंस सभी छह दल इंडी एलायंस के मुख्य घटक हैं| इसलिए 26 अक्टूबर को बंगाल के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक के घर पर राशन वितरण घोटाले में और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के घर पर पेपर लीक घोटाले में ईडी ने छापे मारे तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोदी सरकार पर अपने विरोधियों के खिलाफ केन्द्रीय जांच एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगाया|
अशोक गहलोत इस बात से आग बबूला हो गए कि उनके बेटे वैभव गहलोत को भी ईडी ने सम्मन भेजा है| असल में सांसद किरोड़ी लाल मीना ने अशोक गहलोत पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए ईडी को एक शिकायत भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि काले धन को सफेद करने के लिए वैभव गहलोत की कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा है| इंडी एलायंस में एकता का प्रदर्शन करने के लिए एलायंस के लगभग सभी दलों ने भी ममता बनर्जी और गहलोत जैसे बयान दिए हैं|
विपक्ष पिछले कई सालों से आरोप लगाता रहा है कि जबसे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, सीबीआई और ईडी ने विरोधी दलों को निशाना बनाया हुआ है| इस संबंध में आंकड़े भी बताए जाते हैं कि 2014 के बाद नेताओं के ख़िलाफ़ ईडी के इस्तेमाल में चार गुना बढ़ोतरी हुई है| यह भी कि जिन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई हुई, उनमें से 95 प्रतिशत विपक्ष के नेता हैं|
इंडी एलायंस बनाने से पहले 13 राजनीतिक दलों में इस बात पर सहमति हुई थी कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कर रही केन्द्रीय एजेंसियों का मिलजुल कर मुकाबला करना चाहिए| इसलिए 24 मार्च को इन 13 दलों की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका डाली थी| याचिका में कहा गया था कि जब से केंद्र में एनडीए की सरकार बनी है, ईडी और सीबीआई ने जितने नेताओं पर कार्रवाई की है, उनमें से 95 प्रतिशत मामले विपक्षी दलों के नेताओं से संबंधित हैं|
याचिका में मांग यह थी कि इन एजेंसियों को गाईड लाईन जारी की जानी चाहिए, क्योंकि सरकार उनका राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है| याचिका में बताया गया था कि 2004 से 2014 के बीच 72 राजनेताओं के खिलाफ सीबीआई ने जांच की थी| जिनमें से 60 प्रतिशत से भी कम (43) विपक्षी पार्टियों से संबंधित थे| लेकिन मोदी सरकार में यह आंकड़ा 95 प्रतिशत के पार जा चुका है|
विपक्षी पार्टियों ने कोर्ट में कहा कि ईडी की रेड एक प्रताड़ना के टूल के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है| मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 2013-2014 में 209 केस रजिस्टर्ड थे, 2020-21 में इनकी संख्या 981 हो गई थी और 2021-22 में 1180 पहुंच गई| मजेदार बात यह है कि इस याचिका में यह भी कहा गया था कि याचिकाकर्ता विपक्षी पार्टियों को भी 45 प्रतिशत वोट मिले थे| यह बड़ी बेतुकी याचिका थी, जिसे सुप्रीमकोर्ट ने पहली ही सुनवाई में खारिज कर दिया था|
अब जब चुनावों से पहले ईडी और सीबीआई ने कार्रवाई तेज की है, तो विपक्ष में हड़कंप कुछ ज्यादा है| वे मोदी पर हमलावर हो रहे हैं, सभी विपक्षी दलों ने इन दोनों एजेंसियों के राजनीतिक दुरूपयोग के फिर आरोप लगाए हैं| सुप्रीमकोर्ट में वे मात खा चुके हैं, अब वे चुनाव आयोग जाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि चुनावों के दौरान सीबीआई ईडी के हाथ पांव बांधे जा सकें|
अशोक गहलोत ने तो यहां तक कहा कि जहां जहां चुनाव होते हैं, वहां वहां ईडी का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है| यह चुनाव आयोग में दस्तक देने का संकेत है| लेकिन चुनाव आयोग के पास ऐसी ताकत ही नहीं कि वह केन्द्रीय जांच एजेंसियों पर कोई पाबंदी लगा सके| दूसरी तरफ सरकार के बचाव में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दावा किया है कि ईडी ने 9 साल में 5,906 केस रजिस्टर्ड किए हैं, जिसमें सिर्फ 3 प्रतिशत केस ही राजनीतिक लोगों से संबंधित हैं| इसलिए यह कहना आधारहीन है कि ईडी सिर्फ राजनीतिक लोगों पर ही कार्रवाई करती है|
शेखावत ने अशोक गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इस बात का दोषारोपण करते हैं कि ईडी की कार्रवाई उन्हीं प्रदेशों में होती है जहां चुनाव होने वाले हैं और विपक्षी नेताओं को टारगेट करके ईडी की कार्रवाई की जाती है तो उन्हें यह बताना चाहिए कि अब से पहले जितने ईडी के मामले हुए हैं, उनमें से कितनी कार्रवाई में अदालत से राहत मिली है? अगर सरकार के प्रभाव में एजेंसी ने काम किया होता, तो निश्चित तौर पर अदालत ने हस्तक्षेप कर ऐसे नेताओं को राहत प्रदान की होती|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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