Caste Census: जातीय जनगणना पर लालू नीतीश के एजेंडे में फंसे राहुल

Caste Census: कांग्रेस ने अपने पूरे इतिहास को कूड़ेदान में फेंक कर जाति आधारित जनगणना को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला कर लिया है| पहले 16 सितंबर को हैदराबाद की कांग्रेस कार्यसमिति में जातीय जनगणना करवाने का प्रस्ताव पास किया गया| बाद में 9 अक्टूबर को दिल्ली की कार्यसमिति में जाति आधारित जनगणना को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया गया| इस बीच राहुल गांधी ने कई मंचों पर घोषित कर दिया था कि जाति आधारित जनगणना और उसके बाद जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का फार्मूला तय किया जाएगा|

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेताओं ने चुनावों के बाद सत्ता में आने पर जाति आधारित जनगणना का वादा 9 अक्टूबर की कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले ही करना शुरू कर दिया था| राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो एक कदम आगे बढ़कर कार्यसमिति की बैठक से कुछ घंटे पहले 8 अक्टूबर को जाति आधारित सर्वे का नोटिफिकेशन भी जारी करवा दिया|

Caste Census: Rahul gandhi stuck in Lalu Nitishs agenda on caste census

हालांकि 9 अक्टूबर को जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक चल रही थी, तब चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के चुनावों की घोषणा कर दी, और अब आचार संहिता लग जाने के बाद यह नोटिफिकेशन सिर्फ चुनावी मुद्दा बन कर ही रहेगा, जैसे दूसरे राज्यों में चुनावी मुद्दा होगा| कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में माना कि 2018 के चुनाव तक चली उनकी पिछली सरकार ने 2014-15 में जाति आधारित सर्वे करवा कर उसकी रिपोर्ट अलमारी में बंद करवा दी थी, उसे अब जारी किया जाएगा|

कांग्रेस ने जब जाति आधारित जनगणना का राग अलापना शुरू किया था, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस में अब सोचने समझने वाले नेता नहीं रहे, इसलिए कांग्रेस ने नीतियाँ बनाने का काम आऊटसोर्स करना शुरू कर दिया है| उनके कहने का मतलब यह था कि हिन्दू समाज को जातियों में विभाजित करने का फार्मूला कांग्रेस ने लालू यादव और नीतीश कुमार से उधार लिया है, जो 1989 से ही जाति आधारित राजनीति कर रहे हैं| लालू यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव जैसे नेताओं के दबाव में ही वी.पी. सिंह सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करके इन सब नेताओं के हाथ में जातिवादी राजनीति का हथियार सौंपा था| जबकि कांग्रेस ने ऐसी किसी भी रणनीति और नीति का हमेशा विरोध किया, जो देश और समाज को जाति या धर्म के आधार पर टुकड़ों में बांटती हो|

Caste Census: Rahul gandhi stuck in Lalu Nitishs agenda on caste census

अंग्रेजों ने जब 1931 में जाति आधारित जनगणना करवाई थी, तो कांग्रेस और महात्मा गांधी ने इस तर्क के साथ जाति आधारित जनगणना का विरोध किया था कि इससे समाज का तानाबाना बिगड़ जाएगा| 1931 के जनगणना के बाद देश को धर्म के नाम पर बंटवारे की जो मुहिम मुस्लिम लीग ने शुरू की थी, उसका भी कांग्रेस ने विरोध किया था| मुस्लिम लीग ने जनगणना के आंकड़ों के हिसाब से पंजाब, सिंध, ब्लूचिस्तान, नार्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और बंगाल को अलग देश बनाने की मांग शुरू कर दी थी|

इसी बीच बिहार में त्रिवेणी संघ यादव, कोईरी और कुर्मी जातियों का गठबंधन भी राजनीतिक हलचल मचाए हुए था| जाति की आबादी के आधार पर दबदबे की लड़ाई में कांग्रेस को बड़े खतरे की आहट दिखाई दी| इसलिए कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाया कि वह 1941 की जनगणना जाति आधारित न करे| दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1941 की आधी अधूरी जनगणना हुई, जाति आधारित जनगणना हुई थी, लेकिन कांग्रेस के दबाव में जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी नहीं किए गए|

आज जो नारा राहुल गांधी लगा रहे हैं, वह पहले डॉ. अम्बेडकर और बाद में कांशीराम लगा चुके है, लेकिन दोनों ही बार कांग्रेस ने इस नारे का विरोध किया था| आज़ादी के बाद डॉ. अम्बेडकर ने जब यह कहा कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए, तो जवाहर लाल नेहरू ने 1951 में यह कहते हुए जाति आधारित जनगणना करवाने से इंकार कर दिया था कि इससे समाज में बिखराव हो जाएगा|

इसके बाद जवाहरलाल नेहरू ने योजनाबद्ध तरीके से अंबेडकर को 1952 का लोकसभा चुनाव हरवाया, फिर 1953 का उपचुनाव भी हरवाया| जवाहर लाल नेहरू ने मंत्रीमंडल के भीतर से दबाव पड़ने पर ओबीसी जातियों की पहचान के लिए काका कालेलकर आयोग बनाया था| इस आयोग ने 1955 में दी अपनी रिपोर्ट में 2399 पिछड़ी जातियों की पहचान की| लेकिन जवाहर लाल नेहरू ने रिपोर्ट में खामियां बताकर सिफारिश की फाईल कूड़ेदान में फेंक दी| इसका कारण यह था कि कांग्रेस का आधार अगड़ी जातियों, दलितों, आदिवासियों और मुस्लिमों में था| उसने बहुसंख्यक पिछड़ी जातियों की कभी परवाह ही नहीं की|

मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर कांग्रेसी सरकार ने 1978 में पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के लिए मंडल आयोग का गठन किया था| जनता पार्टी की इस सरकार में भाजपा (जनसंघ के रूप में) भी शामिल थी| 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार वापस आ गई, मंडल आयोग ने अपनी सिफारिशें इंदिरा गांधी सरकार को सौंपी थी| तो उन्होंने पिछड़ी जातियों को आरक्षण की सिफारिश वाली मंडल आयोग की फाईल कूड़ेदान में फेंक दी|

1990 में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू कर रहे थे, तो राजीव गांधी ने मंडल कमीशन की ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाली सिफारिशों को लागू करने का विरोध किया था| जबकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उस समय उन्हें समझाया था कि आरक्षण का विरोध कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित होगा| वही हुआ भी, उत्तर प्रदेश और बिहार में जाति आधारित राजनीति के चलते कांग्रेस का वर्चस्व खत्म हो गया| पिछड़ों में सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाले यादवों ने इन दोनों ही राज्यों में उन्हें आरक्षण दिलाने वाले अपने जातीय नेताओं के हाथ में सत्ता की बागडोर सौंप दी|

जिस कांग्रेस ने देश को एकजुट रखने के लिए जाति आधारित राजनीति का हमेशा विरोध किया, सत्ता गवां कर भी विरोध जारी रखा, वही कांग्रेस अब उन्हीं जातिवादी नेताओं के चंगुल में फंस कर जाति आधारित जनगणना को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है| जाति आधारित जनगणना का मकसद यह है कि 1931 की जनगणना के आधार पर 1990 में दिया गया 27 प्रतिशत आरक्षण का कोटा, उनकी मौजूदा जनसंख्या के आधार पर बढ़ना चाहिए|

1931 की जनगणना में ओबीसी 52 प्रतिशत थे, उसी आधार पर 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था| जैसे अब बिहार की जातीय जनगणना ओबीसी 27.7 प्रतिशत, अति पिछड़े 36.1 प्रतिशत निकले हैं, यानि उनकी कुल संख्या 63.8 प्रतिशत है| लेकिन इन आंकड़ों में मुस्लिम भी है, बिहार में 17.7 प्रतिशत मुस्लिम हैं, और इन 17.7 प्रतिशत में से 70 प्रतिशत पिछड़े हैं, जिन्हें पिछड़ों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है|

जाति आधारित जनगणना या ओबीसी के लिए आरक्षण बढाना कभी भी कांग्रेस और राहुल गांधी के एजेंडे पर नहीं था| असल में पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने मोदी सरनेम पर विवादास्पद टिप्पणी की थी, इसे भाजपा ने उन्हें ओबीसी विरोधी नेता के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया| अदालत ने इसी आधार पर उन्हें दो साल कैद की सजा सुनाई थी, जिसमें कहा गया था कि सभी मोदियों को चोर कह कर उन्होंने ओबीसी समाज का अपमान किया है| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ओबीसी समाज हैं|

राहुल गांधी के कन्विक्शन पर सुप्रीमकोर्ट ने रोक जरुर लगाई है, उन्हें बरी नहीं किया है| ओबीसी समाज के अपमान का दाग अभी भी उनके चेहरे पर चिपका हुआ है| इसलिए जब इंडी एलायंस की मुम्बई बैठक में लालू यादव और नीइश कुमार ने जाति आधारित जनगणना को इंडी एलायंस के एजेंडे पर रखने का प्रस्ताव रखा, तो एलायंस में विरोध के बावजूद राहुल गांधी ने इसे लपक लिया|

कम से कम चार नेताओं के विरोध के बावजूद पहले इसे को-आर्डिनेशन कमेटी से पास करवा कर इंडी एलायंस का एजेंडा घोषित कर दिया, और बाद में कांग्रेस ने इसे अपने एजेंडे पर ले लिया| 9 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद जब राहुल गांधी से पूछा गया कि क्या जाति आधारित जनगणना पर इंडी एलायंस में सहमति है, तो उन्होंने कहा कि दो-चार दल अगर इसके खिलाफ भी होंगे, तो कोई फर्क नहीं पड़ता, कांग्रेस फासीवादी पार्टी नहीं है|

सवाल यह है कि क्या चुनावों में जाति आधारित जनगणना का कांग्रेस और जाति आधारित अन्य राजनीतिक दलों का कार्ड भाजपा पर भारी पड़ेगा| क्या पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिला 44 प्रतिशत पिछड़ों का समर्थन घट जाएगा| दूसरा सवाल यह है कि अगर चुनावों में जाति आधारित जनगणना का मुद्दा हावी हो जाता है, तो उसका फायदा कांग्रेस को होगा या जाति आधारित उन राजनीतिक दलों को होगा, जिन्होंने कांग्रेस को जाति आधारित जनगणना को मुद्दा बनाने को मजबूर किया|

पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी देवेगौडा ने एनडीए में शामिल होने के बाद एक इंटरव्यू में कहा है कि कांग्रेस उन्हीं जाति आधारित राजनीतिक दलों के जाल में फंस गई है, जिन्होंने जाति आधारित राजनीति करके कांग्रेस को कमजोर किया| अब इसका मतलब तो यही है कि कांग्रेस को नहीं, उन्हीं दलों को ही फायदा होगा, जो अब तक ओबीसी की राजनीति करते आए हैं|

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी नजर में गरीब और अमीर दो ही जातियां है, कोई ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया भी गरीब हो सकता है, और कोई ओबीसी, दलित और आदिवासी भी अमीर हो सकता है| इसलिए उन्होंने आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण दिया और उनकी सरकार ने पिछले साढ़े नौ साल में बिना किसी भेदभाव के सबके विकास के लिए नीतियाँ बनाई, जिसका लाभ सभी जातियों और धर्मों के गरीबों को मिला और वे इसी नीति पर चलते रहेंगे|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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