Badaun Case: इंसान से शैतान क्यों बन गया साजिद?
Badaun Case: बदायूं में दो मासूम बच्चों की निर्ममता पूर्वक हत्या ने पूरे देश को दहला दिया है। साजिद नामक एक नौजवान ने जिस क्रूरता और बेदर्दी से दोनों बच्चों का मर्डर किया है, वह कल्पना से भी परे है।
लेकिन इस जघन्य हत्याकांड की सबसे बड़ी गुत्थी यह उलझी हुई है कि आखिर साजिद ने ऐसा किया क्यों? क्या कारण है कि वह तीन मासूमों को कत्ल करने के इरादे से पड़ोसी के घर में चला गया? क्या इसके पीछे कोई पारिवारिक दुश्मनी थी या फिर मजहबी कारण था जैसा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग माहौल बना रहे हैं?

साजिद ने दो मासूमों को मारकर तीसरे को घायल क्यों कर दिया, यह शायद अब रहस्य ही रह जाए क्योंकि पुलिस एनकाउंटर में वह खुद भी मारा जा चुका है। लेकिन इस जघन्य हत्याकांड के पीछे कोई मजहबी कारण था, पहली नजर में तो ऐसा लगता नहीं है। इसलिए इस जघन्य हत्याकांड को हिन्दुओं के खिलाफ मुस्लिमों का कत्लेआम के दृष्टिकोण से देखने का कोई तुक नजर नहीं आता।
दो मासूमों की हत्या का कारण मजहबी कारण भले न हो लेकिन इस हत्याकांड के पीछे कहीं न कहीं मजहबी परवरिश जरूर जिम्मेवार है। जिस बर्बरता से साजिद ने आयुष और अहान की हत्या की, उतनी बर्बरता के लिए मन में नफरत, क्रूरता और वहशीपन की इंतहा चाहिए होती है। यह सब उसने उस घर में किया जहां उसका रोज का आना जाना था। एक दूसरे को न सिर्फ जानते पहचानते थे बल्कि भरोसा भी करते थे।
भारत के मिस्रित समाज में हिन्दू मुस्लिम के बीच वैसा अविश्वास नहीं है जैसा कुछ लोग टीवी पर बैठकर प्रचारित करते हैं। एक जगह, एक साथ रहते हुए आप अविश्वास के साथ रह भी नहीं सकते। आखिरकार एक दूसरे पर भरोसा करना ही पड़ता है, भले ही आपकी मजहबी मान्यता ऐसा न करने की तब्लीग करती हो। विनोद और साजिद के परिवार में भी ऐसा ही विश्वास था। इसलिए साजिद उनके घर आया तो किसी को कल्पना में भी नहीं था कि वह उनके बच्चों को लेकर छत पर जा रहा है तो अब उनकी लाशें ही नीचे आयेंगी।
नीचे दोनों बच्चों की मां उसके लिए चाय बना रही थी और ऊपर छत पर वह उसी मां के दो अबोध बेटों का खून बहा रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही है कि आयुष के शरीर पर 11 तथा अहान के शरीर पर चाकू से 9 वार किये गये हैं। गला काटने के साथ ही पेट, पीठ, छाती हर ओर तेज धारदार चाकू से बहुत निर्मम तरीके से प्रहार किया गया है। परिवार के तीसरे बच्चे ने अपनी आंखों से यह सब देखा।
तीसरे बच्चे को भी शैतान साजिद ने अपना निशाना बनाना चाहा लेकिन किसी तरह से चकमा देकर वह अपनी जान बचाने में कामयाब हो गया। हालांकि चाकू से उसे भी चोट लगी है लेकिन वह खतरे से बाहर है। सोशल मीडिया पर उन दो बच्चों की लाशों की फोटो वायरल हुई हैं जो खून से लथपथ पड़ी हुई हैं। उसे देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि कभी कोई इंसान ऐसा करने की सोच भी सकता है जैसा शैतान साजिद कर गुजरा।
शायद यही कारण है कि साजिद के बाप को छोड़कर उसके परिवार में भी किसी को भी उसके एनकाउण्टर का दुख नहीं है। सबको यही लगता है कि उसने जैसा किया था उसका परिणाम उसे मिला। फिर चाहे साजिद का चाचा हो या उसकी दादी। सब यही कह रहे हैं कि उसने जो किया, बहुत गलत किया इसलिए उसके साथ जो हुआ वो सही हुआ।
परंतु सवाल तो अब भी वही बना हुआ है कि शाजिद इंसान से शैतान क्यों बन गया? उसकी बीवी बता रही है कि वह बहुत गुस्सेवाला था। उसको गुस्सा आ जाता था तो वह किसी की सुनता नहीं था। अगर यह बात मान भी लिया जाए कि उसने गुस्से में यह सब किया तो सवाल उठता है कि उस पड़ोसी के मासूम बच्चों से उसे क्या गुस्सा था जिसके घर उसका रोज आना जाना था?
कुछ स्थानीय लोगों ने मीडिया से बात करते हुए बताया है कि साजिद की कोई औलाद नहीं थी। उसके दो बच्चे हुए और दोनों जिन्दा नहीं बचे। इसलिए हो सकता है उसने टोने टोटके का सहारा लेना शुरु कर दिया हो। मुस्लिम समुदाय में टोना, टोटका, जिन्न, पीर का बड़ा चलन है। यह समुदाय इन बातों पर आंख मूंदकर भरोसा करता है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि इस्लामिक किताब कुरान में जिन्नात का जिक्र आता है। कुरान में कई आयतें जिन्नात से जुड़ी हुई हैं और एक सूरा का नाम तो सूरा जिन्न ही है।
इस्लामिक जानकार बताते हैं कि कुरान में जिन जिन्नात का जिक्र आता है वो इसी दुनिया में रहते हैं। वो इंसान को तो देख सकते हैं लेकिन इंसान उनको नहीं देख सकता। वो इंसानों के बीच रहते हैं और इंसानों को परेशान करते हैं। यही कारण है कि हिन्दुओं में टोने टोटके वालों की संख्या तो समय के साथ कम होती गयी लेकिन आज सबसे अधिक तांत्रिक, बाबा मुस्लिम समुदाय में ही मिलते हैं जो जिन्नात पर काबू का दावा करके सब समस्याओं का समाधान करने का दावा करते हैं।
दिल्ली में ही देखें तो जहां जहां मुस्लिम बस्तियां हैं वहां वहां इन मुस्लिम तांत्रिकों का बहुत बड़ा कारोबार चलता है। दिल्ली में इनके गंडे ताबीज और झाड़ फूंक का सबसे बड़ा अड्डा निजामुद्दीन में है जहां से ये पूरी दिल्ली में घूम घूमकर टोने टोटके को दूर करने, जिन्न और भूत भगाने का कारोबार करते हैं। आमदनी में बरकत चाहिए हो, घर में झगड़ों को मिटाने का उपाय करना हो या फिर मनचाहा प्यार हासिल करना हो, ये मुल्ला तांत्रिक हर मर्ज की दवा बांटते फिरते हैं।
इनके पास आनेवालों में केवल मुस्लिम ही नहीं होते बल्कि बड़ी संख्या में हिन्दू भी होते हैं जो झाड़ फूंक, टोना टोटका से निजात पाना चाहते हैं। मुख्यरूप से इनका डेरा किसी न किसी मजार या मकबरे के आसपास रहता है जहां रहकर ये अपना कारोबार चलाते हैं। जैसा कि स्थानीय लोग बता रहे हैं कि जब साजिद बच्चों की हत्या करने के बाद वहां से भागा तो उसके मुंह में खून लगा हुआ था। कुछ ने तो यहां तक बताया है कि हत्या के बाद उसने उन बच्चों का कच्चा मांस भी खाया था। संभव है कि साजिद को भी किसी बंगाली बाबा या झाड़फूंक वाले मुल्ला ने यह बताया हो अगर वह किसी मासूम का खून पीयेगा तो उसका होनेवाला बच्चा जिन्दा बच जाएगा।
साजिद इसी वजह से शैतान बन गया होगा इसे दावे से नहीं कहा जा सकता। संभव है उसके भाई जावेद के पकड़ में आने के बाद सच्चाई का पता चले लेकिन स्थानीय लोगों की आशंका को एकदम से खारिज भी नहीं किया जा सकता। आखिर जिन बच्चों के साथ वह हंसता बोलता था उसके ही कत्ल करने के पीछे और कोई कारण समझ में नहीं आता। सिर्फ अंधविश्वास, टोना टोटका ही वह कारण हो सकता है कि कोई इस तरह से हैवानियत पर उतर आये।
पुलिस को चाहिए कि स्थानीय लोगों की आशंका के मद्देनजर इस दृष्टिकोण से भी जांच करनी चाहिए। भविष्य में इस तरह की फिर कोई वारदात न हो इसलिए सबसे पहले इस समुदाय के टोना टोटका करनेवालों के खिलाफ ही अभियान चलाकर उन्हें खत्म करना चाहिए। वरना अगर स्थानीय लोगों की आशंका सही साबित हुई तो न जाने फिर कौन सा साजिद इनके बहकावे में आकर बर्बर शैतान बन जाएगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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