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The Bastar Story: केरला स्टोरी के बाद अब द बस्तर स्टोरी की बारी

The Bastar Story: नक्सलियों पर यूं तो कई फिल्में बनी हैं, लेकिन चाहे वो प्रकाश झा की 'चक्रव्यूह' हो या फिर हाल ही में आई विशाल भारद्वाज के बेटे की मूवी 'कुत्ते'। लेकिन हर मूवी में मुख्य पात्रों को नक्सली क्यों बनना पड़ा जैसी सुहानूभूति या उनकी भी जंग एकदम गलत नहीं है, ये दिखाया जाता रहा है।

'कुत्ते' मूवी के एक सीन में तो थाने पर हमला करके नक्सलियों की नेता कोंकणा सेन शर्मा पुलिसवाले को एक कहानी सुनाती है कि "जंगल का राजा शेर शिकार के लिए बकरी और कुत्ते की मदद लेता है। बकरी उसके कहने पर शिकार के तीन बराबर के हिस्से करती है, इसे देख शेर गुस्से में बकरी को खा जाता है और फिर कुत्ते से हिस्से करने को बोलता है।

After Kerala Story, now the turn of the bastar story movie

डरकर कुत्ता सारा शिकार उसे देकर खुद बकरी का बचा खुचा मांस खाकर ही खुश हो जाता है"। आखिर में कोंकणा उस पुलिस वाले को बोलती है, "हम हैं वो बकरी, और तुम हो वो कुत्ते और शेर है तुम सबका मालिक"।

यहां बिना लागलपेट के साफ समझ में आता है कि 'सबका मालिक' से मतलब मोदी से ही है। विशाल भारद्वाज की फिल्में तो यूं भी माओवाद के महिमामंडन के लिए जानी जाती रही हैं। बेटे ने भी वही किया, लेकिन बदले माहौल में दर्शकों ने पसंद नहीं किया और फिल्म बुरी तरह पिटी।

ऐसा ही हाल बस्तर में शहीद हुए 76 सीआरपीएफ जवानों पर बनी पहली मूवी का हुआ था। नाम था 'चक्रव्यूह' जिसे बनाया था प्रकाश झा ने। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे आईपीएस ऑफिसर आदिल खान (अर्जुन रामपाल) अपने दोस्त कबीर (अभय देयोल) को नक्सली राजन (मनोज बाजपेयी) के गैंग में घुसा देता है, और नक्सलियों के खिलाफ कई ऑपरेशंस को अंजाम देता है।

इस फिल्म में बाद में एक नक्सली लड़की के जरिए उनकी लड़ाई को सुहानूभूति का जामा पहनाकर अभय का हृदय परिवर्तन दिखाया जाता है। ऐसे में ना तो मूवी के साथ न्याय हुआ और ना ही बलिदान हुए 76 सीआरपीएफ जवानों के साथ। ओमपुरी के रूप में कोबाड़ गांधी का नक्सलियों को मार्गदर्शक का रोल दिखाकर प्रकाश झा ने साफ कर दिया कि नक्सलियों से उनकी भी सुहानूभूति है।

लेकिन 'बस्तर: द नक्सल स्टोरी' के टीजर ने साफ कर दिया है कि नक्सलियों से कोई सुहानूभूति नहीं होगी। सीधे जवानों की शहादत, उनकी मौत का जश्न मनाने वाले छात्र नेताओं, छात्र संगठनों, उनको बौद्धिक खुराक देने वाले वामपंथी बुद्धिजीवियों पर निशाना होगी कि कैसे 76 जवान देश के लिए मारे जाते हैं और उनकी शहादत पर गम की बजाय जेएनयू में खुशी का जश्न मनाया जाता है।

इस टीजर में अभी तक बस एक किरदार ही लांच किया गया है और वो हैं 'द केरला स्टोरी' की भी नायिका रही अदा शर्मा। उस मूवी में वो लगातार पीड़िता की भूमिका में डरी सहमी रहीं तो इस मूवी के टीजर में उनके तेवर व पद (आईपीएस नीरजा माधवन) बता रहा है कि इस बार दमदार रोल में होंगी।

बदले माहौल में निर्माता विपुल शाह और निर्देशक सुदीप्तो सेन ने ये फॉर्मूला निकाला है कि कम बजट में बिना किसी बड़े हीरो के ऐसा विषय उठाया जाए जो विवादित हो, दक्षिणपंथियों के दिल के करीब हो और किसी ने भी उसे इस तरह से सीधे हमले के रूप में न उठाया हो। हालांकि ये काफी हिम्मत का काम भी है, क्योंकि 'द केरला स्टोरी' से कट्टर मुस्लिमों और 'बस्तर: द नक्सल स्टोरी' के जरिए वामपंथियों और नक्सलियों के निशाने पर उनका आना तय है।

घटना कुछ इस प्रकार है कि 6 अप्रैल 2010 को भाजपा के स्थापना दिवस पर बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ जवानों पर घातक हमला करके 76 जवानों को मार दिया गया था। शायद इसीलिए सुदीप्तो सेन और विपुल शाह ने जून 2023 में जब अपनी इस मूवी का ऐलान किया था तब इसकी रिलीज की तारीख 5 अप्रैल रखी थी। यानी इस हत्याकांड की बरसी से ठीक एक दिन पहले। लेकिन अब जो टीजर जारी किया गया है उसमें फिल्म की रिलीज की तारीख 15 मार्च यानी 20 दिन पहले कर दी गई है। शायद इमोशनल तारीख 5 अप्रैल चुनने से बेहतर उन्हें चुनावी माहौल में 20 दिन पहले रिलीज ज्यादा फायदे की लगी होगी।

ऐसे में अब भी विपुल-सुदीप्तो ने अदा शर्मा के अलावा कोई बड़ा स्टार नहीं लिया है। यशपाल शर्मा, राइमा सेन, शिल्पा शुक्ला, अनंग्सा विश्वास और गोपाल सिंह जैसे नाम साथ में होंगे। या तो उनको अपनी कहानी पर जरुरत से ज्यादा भरोसा है, या फिर 'वैक्सीन स्टोरी' की तरह विवेक अग्निहोत्री वाला अति आत्मविश्वास। हालांकि आम लोगों को 76 जवानों, जेएनयू का जश्न आदि अभी तक याद है। न्यूज चैनल्स भूलने नहीं देते। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि नया क्या होगा?

पिछले साल पोस्टर में निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा था कि 'छिपा हुआ सच जो देश में तूफान लेकर आएगा'। इसके बाद उन्होंने यह भी बताया था कि 'एक दिलचस्प सच्ची घटना देखने के लिए तैयार हो जाइए जो आपको हैरान कर देगी'। सुदीप्तो सेन का भी दावा है कि उन्होंने कई साल बस्तर जाकर रिसर्च किया है। इससे ऐसा लगता है कि फिल्म के जरिए वो जमीनी सच्चाई दिखाने की कोशिश करेंगे। यह कोशिश कितनी सफल होती है यह तो बॉक्स आफिस कलेक्शन ही बतायेगा।

'द केरला स्टोरी' ने बेहद कम बजट में 300 करोड़ की कमाई की थी। ऐसे में विपुल-सुदीप्तो की जोड़ी ने जिन तेवरों के साथ द बस्तर स्टोरी का टीजर लांच किया है, उससे लगता है, इससे भी ज्यादा उम्मीदें उन्हें 'बस्तर' के साथ होंगी। हालांकि ये भी माना जा रहा है कि कहानी केवल एक दंतेवाड़ा घटना की ही नहीं होगी बल्कि नक्सलवाद की शुरूआत से लेकर अर्बन नक्सल पर भी बात होगी। ऐसे में सुदीप्तो सेन के लिए ये मूवी बड़ी चुनौती है, क्योंकि अगर ये मूवी नहीं चली तो उन पर वन फिल्म वंडर का टैग लग जाएगा और अगली मूवी के लिए प्रोडयूसर मिलना भी मुश्किल होगा। शायद इसीलिए टीजर में ही खौफनाक डॉयलॉग जारी किया गया है कि "इन वामपंथियों को सड़क पर खड़ा करके सरेआम गोली मार दूंगी, फिर चाहे फांसी चढ़ा देना"।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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