BJP Plan: हरियाणा महाराष्ट्र के चुनाव लोकसभा के साथ?
BJP Plan: भारतीय जनता पार्टी में गंभीरता से विचार हो रहा है कि क्या हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभाओं के चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ करवाना बेहतर रहेगा या नहीं| 16 से 18 फरवरी तक भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक दिल्ली में हो रही है|

अगर भाजपा ने इन दोनों राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ करवाने का मन बनाया तो इस बैठक में एलान हो जाएगा, क्योंकि लोकसभा चुनावों की घोषणा मार्च के दूसरे हफ्ते में होने वाली है|
2019 में आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही हुए| हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभाओं के चुनाव भी 2024 में होने हैं| सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार को 30 सितंबर तक जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव करवाने के निर्देश भी दिए हुए हैं| पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी एक देश एक चुनाव की संभावनाओं पर विचार कर रही है|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल कहीं न कहीं होने वालों चुनावों से छुटकारा पाने के लिए एक देश एक चुनाव के जबर्दस्त पैरवीकार हैं| इसीलिए उन्होंने यह कमेटी बनाई है। कमेटी ने 15 जनवरी तक आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं| एक देश एक चुनाव के रास्ते में कई रुकावटें है, राजनीतिक दलों का सहमत होना असंभव सा लगता है| इसके अलावा एक देश एक चुनाव के लिए कई संविधान संशोधन भी करने पड़ेंगे| इसी हफ्ते कमेटी ने खुलासा किया है कि उसे आम जनता से पांच हजार से ज्यादा सुझाव मिल चुके हैं|
ज्यादातर विपक्षी दल एक देश एक चुनाव पर सहमत नहीं हैं| कुछेक दलों ने जरुर लचीला रूख अपनाया है| जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को लगता हैं कि आज की परिस्थितियों में एक साथ चुनाव करवाने का भाजपा को फायदा होगा, क्योंकि उसे मोदी के चेहरे का लोकसभा के साथ साथ विधानसभाओं में भी फायदा होगा| रामनाथ कोविंद कमेटी राजनीतिक दलों से भी उनकी राय पूछ रही है| दो दिन पहले ममता बनर्जी ने कमेटी को भेजी अपनी चार पेज की चिठ्ठी में एक देश एक चुनाव का विरोध किया है|
ऐसी संभावना कम है कि 2029 में भी एक देश एक चुनाव पर देश में सहमति बन पाएगी| इसलिए राजनीतिक तौर पर एक विचार यह चल रहा है कि क्या पांच साल में सिर्फ दो बार चुनावों पर कोई सहमति बन सकती है क्या| प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ करवा कर अपनी ओर से यह पहल कर सकते हैं| महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के सामने बड़ी चुनौती है, लोकसभा के साथ ही चुनाव करवा कर मोदी के नाम पर चुनाव जीतना थोड़ा आसान हो सकता है|
कांग्रेस को भी आशंका है कि भारतीय जनता पार्टी ऐसा दांव खेल सकती है| इसलिए कांग्रेस ने इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने का काम सुनील कनुगोलू को सौंप दिया है| 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की टीम में काम कर चुके सुनील कनुगोलू पिछले दो साल से कांग्रेस के साथ काम कर रहे हैं| हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की जीत के पीछे सुनील कनुगोलू की रणनीति बताई जाती है|
इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस ने उन्हें चुनाव प्रबन्धन का काम सौंपा था| उन्होंने कांग्रेस को वे मुद्दे पहचान कर दिए, जो उसे जीत दिलाने में सहायक हो सकते हैं| छत्तीसगढ़ को लेकर कांग्रेस जरूरत से ज्यादा आश्वस्त थी, इसलिए कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बाद सुनील कनुगोलू को राजस्थान, मध्यप्रदेश और तेलंगाना भेजा गया था| कमलनाथ उन्हें लेकर पहले बहुत उत्साहित थे, लेकिन कुछ दिन बाद ही न कमलनाथ को उनका काम जंचा, न ही अशोक गहलोत को| दोनों का व्यवहार देख कर सुनील कनुगोलू ने सारा ध्यान तेलंगाना में लगाना शुरू कर दिया था|
राजस्थान, मध्यप्रदेश हारने और तेलंगाना जीतने के बाद कांग्रेस हाईकमान की नजर में सुनील कनुगोलू की साख बढ़ी है| उन्हें कांग्रेस की टास्क-2024 टीम का हिस्सा बनाया गया था, लेकिन कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस को लोकसभा चुनावों से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है। वह विधानसभाओं को जीत कर राज्यों में अपनी सरकारें बनाने की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहती है।
अभी उसकी सिर्फ तीन राज्यों में सरकारें हैं और इन तीनों राज्यों में सुनील कनुगोलू रणनीतिकार थे। इसलिए उन्हें हरियाणा और महाराष्ट्र की जिम्मेदारी दी गई है। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस इंडी एलायंस के साथ मिलकर लड़ेगी| महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे के साथ सीटों का बंटवारा होना है, तो हरियाणा में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से दस में से तीन लोकसभा सीटें माँगी है| अगर इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनावों के साथ हुए तो कांग्रेस को महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे के अलावा हरियाणा में केजरीवाल के साथ भी सीटों का बंटवारा करना होगा|
पिछले दो सालों में अगर कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जीते हैं, राजस्थान और मध्यप्रदेश गंवाए भी हैं| भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ और राजस्थान जीते हैं, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश गंवाए भी हैं| इसलिए हरियाणा और महाराष्ट्र को बचाए रखना भाजपा के लिए बहुत जरूरी है|
भाजपा ने पिछले एक दशक में इन दोनों ही राज्यों में बड़ी सफलता हासिल की थी| लेकिन 2014 में हरियाणा जीतने के बाद 2019 में बहुमत हासिल नहीं कर पाई। जेजेपी के साथ चुनाव बाद के गठबंधन से मुख्यमंत्री पद पर कब्ज़ा होने के बावजूद हरियाणा में भाजपा की हालत बहुत मज़बूत नहीं लग रही है।
महाराष्ट्र में पिछले साल जून में शिवसेना में दोफ़ाड़ होने के बाद सरकार तो बन गई, लेकिन नए नेतृत्व के साथ शिवसेना का आधार कितना बचा है, उसका टेस्ट होना अभी बाकी है| शिव सेना विभाजन के बाद उथल पुथल का माहौल है| जिसके चलते महाविकास अघाड़ी के घटक तौर पर कांग्रेस को इन दोनों राज्यों में नई शुरुआत के लिए बढ़िया अवसर दिखाई दे रहा है|
2024 में लोकसभा चुनावों के साथ सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ ओडिशा में भी चुनाव होगा, जहां मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल का दबदबा है| कांग्रेस और भाजपा वहां दूसरे और तीसरे नंबर की पार्टियां है, लेकिन बीजू जनता दल के नेता नवीन पटनायक की ज्यादा उम्र हो जाने के कारण भाजपा अपने लिए अवसर मानती है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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