इंडिया गेट से: परसेप्शन की जंग में भाजपा पर भारी केजरीवाल
दिल्ली में केजरीवाल और भाजपा की लड़ाई अब और तेज हो गई है। सच यह है कि केजरीवाल शराब घोटाले से ध्यान भटकाने में कामयाब हो गए हैं। इस बात का एहसास भारतीय जनता पार्टी को गया है, इसलिए भाजपा के सांसद प्रवेश वर्मा ने सार्वजनिक तौर पर यह कबूल किया है कि केजरीवाल ध्यान भटकाने में कामयाब रहे। इसके लिए उन्होंने केजरीवाल को बधाई भी दी है। केजरीवाल में एक खासियत है कि वह आने वाले खतरे को पहले ही भांप लेते हैं, और जब तक ख़तरा आता है, वह उस से निपटने की रणनीति बना चुके होते हैं।

जब चीफ सक्रेटरी ने उप राज्यपाल को भेजी फाईल में शराब घोटाले की आशंका व्यक्त की, तो इस से पहले कि जांच शुरू होती, केजरीवाल ने रणनीति बना ली। उन्होंने सीबीआई की कार्रवाई से पहले ही दिल्ली की स्कूली शिक्षा के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय अखबारों में प्रचारित करवा लिया। उन्होंने मुद्दा बना दिया कि जब सारी दुनिया उनकी शिक्षा नीति की तारीफ़ कर रही है, तब मोदी सरकार सीबीआई, ईडी के छापे मरवा कर विकास के कार्यों को रोक रही है।
मोदी और उनके सिपाहसलारों को शायद अब यह समझ आ गया होगा कि मीडिया को दिए गए सरकारी विज्ञापनों की क्या अहमियत होती है। घोषित भाजपा विरोधी मीडिया तो केजरीवाल के साथ है ही, दिल्ली सरकार के विज्ञापनों ने भी मीडिया का मुहं उनकी तरफ मोड़ दिया है। केजरीवाल की भ्रष्टाचार पर आधारित विफल शराब नीति पर सवाल उठाने की बजाए, दिल्ली के मीडिया ने वही प्रचारित किया, जो केजरीवाल और सिसोदिया बोल रहे थे।
एक समय था, जब भाजपा को अपने सोशल मीडिया नेटवर्क पर घमंड था। लेकिन मैनस्ट्रीम मीडिया और केजरीवाल के सोशल मीडिया मैनेजमेंट ने उस पर विजय पा ली है। भाजपा शराब घोटाले को लेकर हमले दर हमले करती रही, लेकिन मीडिया शिक्षा और स्वास्थ्य की ढाल बना कर खड़ा हो गया। भाजपा सही तथ्यों के साथ केजरीवाल की बनाई शिक्षा और स्वास्थ्य नीति को भी बेनकाब नहीं कर सकी, वरना ये दोनों नीतियाँ केजरीवाल के भ्रष्टाचार में ढाल नही बनती।
इसी दौरान केजरीवाल यह हवा बनाने में भी कामयाब रहे कि भाजपा खरीद फरोख्त से उन की सरकार गिराना चाहती है। सिसोदिया और चार विधायकों ने खरीद फरोख्त का आरोप भी लगा दिया। फिर विधायकों की बैठक, गांधी समाधि पर धरना और विधानसभा में बहुमत साबित करने का नाटक कर के केजरीवाल ने जनता को भी विशवास दिला दिया कि उन्होंने भाजपा का षड्यंत्र नाकाम कर दिया। दिल्ली की जनता ने यह मान भी लिया कि भाजपा ऐसा कर रही होगी। क्योंकि भाजपा ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में सरकारें गिराकर अपनी यही छवि बना ली है।
पहले दौर में हार के बाद अब दूसरे दौर की ज़ुबानी जंग शुरू हो गई है। केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी को छह राज्यों की सरकार गिराने वाला सीरियल कीलर बता कर हमलावर रूख अपना लिया है। केजरीवाल ने दोहरी जंग का एलान कर दिया है, एक तरफ वह भाजपा को निशाने पर लेंगे, तो दूसरी तरफ उपराज्यपाल के खिलाफ भी जंग का बिगुल बजा दिया है। केजरीवाल को पता है कि भाजपा उन के खिलाफ उपराज्यपाल का जम कर इस्तेमाल करेगी। इस लिए जैसे ही उपराज्यपाल ने केजरीवाल के साईन के बिना राजभवन पहुंची 47 फाईलों को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने वापस भेजा,
केजरीवाल ने उपराज्यपाल विजय सक्सेना को ही भ्रष्टाचारी बताते हुए उन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधानसभा में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने उप राज्यपाल के खिलाफ रात भर गिटार और ढोलक बजा कर धरना दिया।
पहली जंग में हार के बाद भाजपा ने एक बार फिर उप राज्यपाल के कंधे पर बंदूक रख दी है। दिल्ली के सभी छह सांसदों ने उप राज्यपाल से मुलाक़ात कर के सिसोदिया, केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और उन चार विधायकों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है, जिन्होंने भाजपा पर विधायकों को 20-20 करोड़ रूपए के ऑफर देने का आरोप लगाया है।
इस चिठ्ठी में रिश्वत की पेशकश करने वालों को भी ढूंढ कर भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून में गिरफ्तार करने की मांग है। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके, वैसे भाजपा के सांसदों ने कहा कि दूध का दूध और शराब की शराब हो सके। भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून के मुताबिक़ रिश्वत देने और लेने वाले दोनों अपराधी होते हैं। इसलिए भाजपा इस मांग से यह साबित करना चाहती है कि भाजपा ने विधायकों की खरीद फरोख्त की कोई कोशिश नहीं की, केजरीवाल और सिसोदिया झूठ बोल रहे हैं। उप राज्यपाल को भी अब केजरीवाल से सीधी लड़ाई में गुरेज नहीं होगा। वह मुकद्दमा दायर करने की सिफारिश कर भी देंगे, लेकिन इस से होगा कुछ नहीं।
जब तक सीबीआई सिसोदिया के खिलाफ शराब घोटाले और स्कूलों के निर्माण में हुए घोटाले के सबूत ले कर सामने नहीं आती, कुछ नहीं होगा। फिलहाल शराब घोटाले की जांच सुस्त गति से चल रही है और केजरीवाल ने बुधवार को कह दिया कि सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है। अब आप सीबीआई से बयान दिलवाते रहिए कि उसकी जांच अभी जारी है। केजरीवाल ने तो शराब नीति पर अन्ना हजारे की आपत्ति को भी यह कह कर हवा में उड़ा दिया कि वह भाजपा का मोहरा बन गए हैं। अन्ना हजारे ने शराब नीति पर अपनी आपत्ति दायर करते हुए बयान दिया था , और चिठ्ठी लिखी तो केजरीवाल ने दो टूक कहा कि भाजपा जैसे आतंकवाद के मुद्दे पर कुमार विशवास को उठा लाई थी, वैसे अब अन्ना हजारे को उठा लाई है।
कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि भाजपा धन और डंडे की ताकत का इस्तेमाल करने में तो आगे है लेकिन चापलूसों को पार्टी में महत्त्व देते रहने से उसके पास अब ऐसे योग्य नेताओं का अभाव दिख रहा है जो केजरीवाल जैसे काइयाँ नेता की कुटिलता की काट खोज सकें।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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