Amritpal and SGPC: अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी से नहीं टला संकट
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अमृतपाल की पत्नी किरणपाल खालिस्तान आन्दोलन से पहले से जुड़ी रही है और ब्रिटेन की एजेंसीज के रडार पर भी है।

खालिस्तान आन्दोलन का नया चेहरा अमृतपाल सिंह फरवरी महीने में देश के सामने नया संकट बन कर उभर आया था, जब उसने 23 फरवरी को पंजाब के अजनाला पुलिस स्टेशन से अपने साथी लवप्रीत सिंह को छुडा लिया था| उसने सैंकड़ों हथियारबंद लोगों के साथ अजनाला पुलिस स्टेशन पर चढ़ाई कर दी थी।

असल में पंजाब पुलिस ने उसके और उसके कुछ साथियों के खिलाफ एक केस दायर किया था, जिसपर उसने धमकी दी थी कि अगर उसके खिलाफ केस वापस नहीं लिया गया और उसके साथी लवप्रीत सिंह को रिहा नहीं किया गया तो वह अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला कर देगा| वह तीन दिन तक गुरुग्रंथ साहिब के साथ प्रचार करता हुआ अजनाला पुलिस स्टेशन पहुंचा था| तीन दिन तक वह सड़कों पर पुलिस को खुली धमकी दे रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं दिखाई थी| उसके काफिले में सैंकड़ों हथियारबंद सिख थे, जिनके हाथों में नंगी तलवारें और लोहे की छड़ें थीं।
पंजाब सरकार इतनी दब्बू साबित हुई थी कि इस हमले के बाद उसने लवप्रीत सिंह तूफ़ान के खिलाफ दायर केस ही वापस ले लिया था| इससे खालिस्तान समर्थकों के हौंसले बुलंद हो गए थे| केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से बात की और उन्हें आईबी के इनपुट से रूबरू करवाते हुए बताया था कि सीमान्त राज्य पंजाब में कितने खतरे मुहं बाए खड़े हैं|
तब जाकर केंद्र सरकार की सक्रिय भागीदारी से खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ
18 मार्च को कार्रवाई शुरू की गई| खालिस्तान समर्थकों की धरपकड़ का आपरेशन शुरू हुआ, दो दर्जन से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए| आठ लोगों पर एनएसए लगा कर उन्हें अति सुरक्षित असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेजा गया। फिर 10 अप्रेल को अमृतपाल सिंह के साथ फरार हो गए पप्पलप्रीत को भी गिरफ्तार करके डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया|
23 अप्रेल को अमृतपाल सिंह ने भी जरनैल सिंह भिंडरावाले के गांव में गुरूद्वारे से आत्मसमर्पण कर दिया| उसे भी डिब्रूगढ़ जेल भेज दिया गया| अगर हम यह समझ लें कि अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी से खालिस्तान आन्दोलन खत्म हो गया है और संकट टल गया है, तो यह पूरी तरह गलत होगा| बल्कि नया संकट खड़ा हो गया है|
इस बीच एक बड़ी घटना हो गयी है| 1984 के बाद पहली बार सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी और भारत सरकार फिर से आमने सामने आ गई है| 1984 में जब जरनैल सिंह भिंडरावाले दरबार साहिब से खालिस्तान का आन्दोलन चला रहा था, आए दिन पंजाब में आतंकवादी वारदातें हो रही थीं, तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपरेशन ब्ल्यू स्टार करके दरबार साहिब में सेना भेजी थी| इस आपरेशन में जरनैल सिंह भिंडरावाले मारा गया था|
उस समय सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी का जरनैल सिंह भिंडरावाले को पूरा समर्थन था| बाद में इंदिरा गांधी की हत्या हुई और उसके बाद देश भर में सिख विरोधी दंगे हुए, जिनमें तीन हजार से ज्यादा सिख मारे गए थे| कांग्रेस प्रायोजित इन सिख विरोधी दंगों के लिए जिम्मेदार कुछ बड़े कांग्रेसी नेता जेलों में बंद हैं, और कुछ अभी भी खुले घूम रहे हैं| जिस कारण सिखों में अभी भी आक्रोश है|
सिख दंगों के 38 साल बाद खालिस्तान आन्दोलन फिर से सिर उठा रहा है और अब यह अपने आप में बड़ी घटना है कि सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी ने अमृतपाल सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून में गिरफ्तार किए गए सभी दस खालिस्तानियों की पैरवी करने की जिम्मेदारी खुद ली है| सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के दस सदस्यों और दो वकीलों भगवंत सिंह साईका और सिमरनजीत सिंह ने 27 अप्रेल को डिब्रूगढ़ जेल में अमृतपाल सिंह समेत सभी कैदियों से मुलाक़ात की| उन्होंने वकालतनामे की कागजी कार्यवाही पूरी कर ली है|
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अमृतपाल सिंह ने एसजीपीसी के वकीलों को एक हस्तलिखित चिठ्ठी सौंपी है, जिसमें वकीलों की एक कमेटी बनाने के लिए एसजीपीसी को अधिकृत किया गया है| पंजाबी में लिखी इस चिठ्ठी में अमृतपाल सिंह ने लिखा है कि वाहे गुरु की कृपा से वह चढडी कलां में है| इसका मतलब है कि वाहे गुरु की कृपा से सब ठीक ठाक है| इसी चिठ्ठी में उसने पंजाब सरकार पर सिखों पर झूठे मुकद्दमे बनाने का आरोप भी लगाया है|
'वारिस पंजाब दे' के मुखिया अमृतपाल सिंह से पंजाब पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार पूछताछ करने में जुटी हुई है, लेकिन उन्हें कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। अभी तक अमृतपाल ने किसी तरह का कोई खुलासा नहीं किया, फंडिंग के स्रोतों का खुलासा करने से भी इंकार कर दिया है| हां अगर पुलिस सूत्रों पर विश्वास किया जाए, तो उसने इतना जरुर कहा है कि अगर उसे छोड़ दिया जाएगा तो वह अपराध की सीमा को पार नहीं करेगा, यानी संविधान के दायरे में रह कर काम करेगा और पंजाब में नशे की समस्या से लड़ने में सरकार की मदद कर सकता है|
डिब्रूगढ़ जेल में जिन दस खालिस्तान समर्थकों को कैद रखा गया है, उनमें से दो अमृतपाल सिंह के रिश्तेदार हैं| सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी सब से पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एनएसए को चुनौती देने जा रही है| सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी का कहना है कि सिखों की गिरफ्तारी सिर्फ जालन्धर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव को प्रभावित करने के लिए की गई है|
जेल में बंद सभी दस खालिस्तानियों के रिश्तेदारों की उनसे मुलाक़ात करवाने के सारे इंतजाम भी सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी कर रही है| 27 अप्रेल को आठ खालिस्तानियों के परिजन एसजीपीसी टीम के साथ गए थे और 4 मई को अमृतपाल सिंह की पत्नी किरणपाल कौर और दलजीत सिंह कलसी की पत्नी नीरू कलसी ने भी जेल में अपने अपने पति के साथ मुलाक़ात की| नीरू कलसी के साथ उसका बेटा सिमरपाल सिंह भी था| अब तक सभी दस खालिस्तानियों के परिजन उनसे मुलाक़ात कर चुके हैं|
अमृतपाल सिंह की पत्नी किरणपाल कौर ने लाल चूडा पहने हुए अपने पति से मुलाक़ात की| इन दोनों की शादी 10 फरवरी को ही हुई थी, हालांकि दोनों दो साल से एक दूसरे को जानते थे| अमृतपाल सिंह के आत्म समर्पण से पहले किरणपाल कौर ने इंग्लैण्ड जाने की कोशिश की थी, वह इंग्लैण्ड की नागरिक हैं, और शादी करने के लिए ही भारत आई थी| लेकिन पंजाब पुलिस ने उसे अमृतसर एयरपोर्ट पर रोक लिया था|
किरणपाल कौर के बारे में भी भारत की गुप्तचर एजेंसियों का कहना है कि वह खालिस्तान समर्थक संगठन बब्बर खालसा की सक्रिय सदस्य है| इसलिए जब अमृतपाल सिंह और किरणपाल कौर की शादी हुई, तो सामने से फोटो नहीं खींचने दी गई थी, ताकि उसकी पहचान न हो सके| इंटरनेट पर शादी के जितने भी फोटो उपलब्ध हैं, उनमें दोनों के चेहरे साथ नहीं है| पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि अमृतपाल सिंह को डर था कि उसकी पत्नी को उसके अतीत या आतंकवादी संगठन के साथ उसके संबंधों से लिंक के कारण पहचाना जा सकता है, इसलिए किसी को किरणदीप की फोटो खींचने की इजाजत नहीं थी|
पुलिस का दावा यह भी है कि किरणदीप शादी से पहले अमृतपाल सिंह की अध्यक्षता वाली डब्ल्यू.पी.डी. के लिए पैसों का मैनेजमेंट और अरेंजमेंट करती थी| यहां तक कि वह 2020 में वह ब्रिटेन में पुलिस के राडार पर आ गई थी| 18 मार्च को अमृतपाल के फरार होने के बाद उनके पिता तरसेम सिंह और मां बलविंदर सिंह तो मीडियाकर्मियों से लगातार बात कर रहे थे, लेकिन किरणदीप कौर कभी भी सामने नहीं आई थी, जबकी वह उसी घर में मौजूद थी|
22 मार्च को एक महिला पुलिस अधिकारी सहित दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अमृतपाल की पत्नी से पूछताछ करने उसके घर गए थे| हालांकि किरणदीप कौर से 'पूछताछ' के बारे में न तो पुलिस ने और न ही अमृतपाल के माता-पिता ने मीडिया के सामने कोई खुलासा किया था| सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना है कि किरणपाल भी खालिस्तान आन्दोलन की दृष्टि से खतरनाक साबित हो सकती है|
लेकिन सब से बड़ी समस्या सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी का खालिस्तान समर्थकों की कानूनी लड़ाई लड़ना है| सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी पर हमेशा से अकाली दल का कब्जा रहा है, और जब भी अकाली दल सत्ता से बाहर रहा है, खालिस्तान आन्दोलन पनपने लगता है| अब अकाली दल लगातार दूसरी बार सत्ता से बाहर है, और खालिस्तान आन्दोलन बड़े पैमाने पर सिर उठा रहा है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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