Artificial Love: चैटबोट से इश्क, वर्चुअल डेटिंग और रोबोट बनेगा जीवनसाथी
रिश्तों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इनका भविष्य कैसा होगा, यह इस पर निर्भर करेगा कि प्यार कौन कर रहा है, न कि इस पर कि प्यार किससे किया जा रहा है। वह इसे 'सूफियाना' भी बना सकता है, 'सोफीयाना' भी।

Artificial Love: एक पुरानी सूक्ति है कि चीजें इस्तेमाल के लिए होती हैं और लोग प्यार करने के लिए। अब समस्या यह हो गयी है कि हम चीजों को प्यार करने लगे हैं और लोगों को इस्तेमाल। आने वाले दिनों में यह समस्या और अधिक विकट होने वाली है। एआई के विस्तार ने रिश्तों पर असर दिखाना शुरू कर दिया है।
अमेरिकी मार्केटिंग रिसर्च फर्म एप्सोस ने हाल ही में 32 देशों के 22,508 लोगों पर एक सर्वे किया। नतीजे चौंकाने वाले थे। 61% लोगों का मानना था कि रिश्तों का भविष्य इनके वर्तमान स्वरूप से एकदम अलग होगा। इनके मुताबिक वर्ष 2033 तक 60% लोग इसके लिए एआई चैटबोट्स का इस्तेमाल शुरू कर देंगे और 46% लोग रोबोट को साथी बना सकते हैं। सर्वे का दावा है कि अगले एक दशक के भीतर 67% लोग ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (बीआर) प्लेटफॉर्मों के माध्यम से डेटिंग और रोमांस करने लगेंगे।
रिश्तों की जटिल गुत्थियां
रिश्तों की भी बड़ी अजीब सी फितरत होती है। जरूरी नहीं कि इनके पीछे हमेशा ही कोई तर्क या नियम मौजूद हो। पिछले आठ-दस सालों में कई बार ऐसी खबरें आई हैं, जो बताती हैं कि रिश्तों का पारंपरिक स्वरूप कैसे लोगों को उबाने लगा है। इससे जुड़ी जटिलताएं और समस्याएं लोगों को विकल्पों की तरफ मुड़ने के लिए उकसा रही हैं। साथ में सामाजिक-मनोवैज्ञानिक बदलाव भी हैं। सार यह है कि जिस भविष्य की तस्वीर एप्सोस का सर्वे पेश कर रहा है, वह काफी पहले से हमारे जीवन में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
21 वीं सदी में प्रवेश करती हुई दुनिया को दो चीजों ने बहुत बदला। एक, ग्लोबलाइजेशन और दूसरी, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुई विस्मयकारी प्रगति। इसने हर तरह से दुनिया को, हमारे जीवन को प्रभावित किया। आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, भावनात्मक हर दृष्टि से। रिश्ते भी कैसे अछूते रहते। रिश्तों के अंदाज तो सभी से बदलते नजर आने लगे थे, जब मुलाकात और मोहब्बत के पारंपरिक तौर-तरीकों की जगह ऑनलाइन 'सेटिंग' और 'डेटिंग' जैसी चीजें ले रही थीं। विकल्प खुले तो लोगों की हिम्मत खुली। प्यार में, रिश्तों में नए- नए प्रयोग होने शुरू हो गए।
प्रयोगों का दौर चला तो इनमें शामिल लोगों की संख्या और मुखरता भी बढ़ने लगी। वे अपने अपारंपरिक रिश्तों के लिए वैधता की मांग करने लगे। देश में समलैंगिक समुदाय की गतिविधियां इसी का एक नमूना हैं। पहले एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी से संबंधित लोग इसे डिक्रिमनलाइज कराने के लिए संघर्ष कर रहे थे। 2018 में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इसका अनापराधीकरण किया तो कुछ ही दिनों में एक नई मांग उठने लगी। अब कम्युनिटी मेंबर्स चाहते थे कि उन्हें अपने समलिंगी साथी के साथ 'लीगल मैरिज' करने का अधिकार प्रदान किया जाए। इस प्रश्न पर कम्युनिटी और सरकार में लंबे समय से ठनी हुई है। इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को विचार के लिए एक पांच सदस्यीय पीठ को सुपुर्द किया है।
अजीबोगरीब शादियां
रिश्तों का यह कॉकटेली ट्रेंड सिर्फ मनुष्यों तक ही सीमित नहीं रहा है। बल्कि अब तो इसमें ऐसी- ऐसी चीजें शामिल हो चुकी हैं कि सुनकर आप शायद ही यकीन कर पाएं कि ऐसा भी हो सकता है।
2020 में 24 वर्षीय रशियन टीचर रेन ने 'गोर्डोन' से शादी करके सबको चौंका दिया था। अपने इस जीवनसाथी को वह 2015 में घर लाई थी। फिर उसके प्रति 'रोमांटिकली'और 'सेक्सुअली' अट्रेक्ट हो गई। पाँच साल 'गोर्डोन' के साथ 'लिव इन' में रहने के बाद रेन ने उसके साथ शादी कर ली। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या खास बात है। लेकिन क्या तब भी आप यही कहेंगे जब आपको पता चलेगा कि 'गोर्डोन' दरअसल एक ब्रीफकेस है?
ऐसी ही हैरान कर देने वाली, चौंकाने वाली कहानियां जर्मनी की सारा रोडो व मिशेल कोबके, ब्रिटेन की पास्कल सेलिक, अमेरिका की किटेन के सेरा, फ्रांस की लिली और कजाखिस्तान के यूरो तोलोच्को की हैं। इन्होंने क्रमश: रिकी ( एक टॉय एरोप्लेन) व शत्ज ( 40 टन वजन वाला 737-800 बोइंग जेट), डुवेर (एक कंबल), गुलाबी रंग (पिंक), इनमूवेटर (रोबोट) और मार्गो, लूना, लोला ( तीनों मानवाकार गुड़ियाएं) से शादी की है या करना चाहते हैं।
नए दौर ने रिश्तों को इतना ज्यादा जटिल बना दिया है कि उनकी गुत्थियां सुलझाते - सुलझाते आप खुद ही उलझकर रह जाएंगे। ऐसे ही अजीबोगरीब प्रेम और विवाह करने वाली की एक कैटेगरी 'सोलोगेमिस्ट' की है। ये वे लोग होते हैं जो खुद से ही विवाह कर लेते हैं। आपने भारत की पहली सोलोगामिस्ट क्षमा बिंदु और धारावाहिक पवित्र रिश्ता की कनिष्का सोनी की शादी के बारे में तो खबरों में सुना ही होगा जिन्होंने पिछले साल जून और अगस्त में खुद से ही शादी करने की घोषणा कर लोगों को सोचने को मजबूर कर दिया था। और विदेशों में तो यह काफी पहले से हो रहा है।
ब्रिगटन, इंग्लैंड की सोफी टेनर ने 2015 में अपने आप से शादी की थी। दो साल बाद ही उसने खुद से 'बेवफाई' करते हुए एक पुरुष से प्रेम संबंध स्थापित कर लिए। 5 लाख से ज्यादा इंस्टा फॉलोअर वाली सोफी मौरी तो अपनी ब्रिटिश हमनाम से भी ज्यादा अधीर निकली। उसने इसी साल 20 फरवरी को स्वयं से विवाह रचाया और 24 घंटे के भीतर ही खुद को तलाक भी दे दिया।
टेक्नॉलाजी से मोहब्बत और उसी से शादी
कुछ साल से सेक्स बोट्स की काफी चर्चा हो रही है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो मौका मिलने पर इंसान की बजाए रोबोट के साथ प्रेम/ विवाह / या यौन संबंध बनाने को लेकर बहुत रोमांचित और उत्साहित हैं और इसे खुलकर स्वीकार भी करते हैं।
2018 में अकिहिको कोदो नाम के एक जापानी ने हतसुने मिकु नाम की एक कम्प्यूटर जनित पॉप सिंगर से शादी की थी। हालांकि चार साल के भीतर ही उसका मोहभंग हो गया। पिछले साल उसने मीडिया को बताया था कि वह ' मिकु' से कनेक्ट करने में कठिनाई महसूस कर रहा है।
फिर भी 'इमोशनल कनेक्शन' और 'सेक्सुअल अट्रेक्शन' के इस नए दौर में किसी भी चीज से 'कनेक्ट' और 'अट्रेक्ट' हुआ जा सकता है। अगर कोई दिन रात आईफोन की सीरी या फिर अमेजॉन की एलेक्सा से बात कर रहा है तो उसका उनके प्रति अट्रेक्ट होना स्वाभाविक हो जाता है। वैसे भी ज्यादातर लोग रिश्तों को भ्रम ही मानते हैं। ऐसे में कुछ लोग भ्रम से ही रिश्ता बना लेते हैं।
एआई के लगातार विस्तार और उसमें हो रहे नए-नए इनोवेशंस ने इस भ्रम को इतना बड़ा कर दिया है कि वास्तविकता उसके सामने बौनी नजर आने लगी है। अब हमें प्रेम के लिए किसी मूर्त वस्तु या व्यक्ति की आवश्यकता नहीं रही है। हम एक ख्याल से भी प्रेम करते रह सकते हैं।
2013 में प्रदर्शित निर्देशक स्पाइक जोन्ज की फिल्म 'हर' इसका बेहतरीन चित्रण है। फिल्म का नायक थियोडोर अपने कार्यों में सहायता के लिए दुनिया के पहले एडवांस्ड एआई ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में विज्ञापित 'ओएस 1' को खरीदता है। वो कृत्रिम मेधा ही नहीं बल्कि कृत्रिम चेतना से भी युक्त है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम के पीछे एक आवाज है सामंथा। सामंथा के साथ वक्त गुजारते हुए, उससे बातें करते हुए थियोडोर उससे प्यार करने लगता है।
एक दशक पहले फिल्म में दिखाई गई, निकट भविष्य की यह काल्पनिक तस्वीर अगले एक दशक में वास्तविकता में बदलती नजर आने लगी है। एप्सोस का सर्वे इस ट्रेंड की पुष्टि करता है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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