Adipurush Review: नयी तकनीकी और संवाद से लैस नयनाभिराम रामलीला

वाल्मीकि रामायण के बाद भी अलग अलग सदियों में, अलग अलग भाषाओं में, थोड़ा बहुत कहानियों में फेरबदल कर, कुछ पात्र जोड़ घटाकर कई महापुरुषों ने रामायण को अपने अपने तरीके से लिखा है। सीरियल्स या फिल्मों में भी अलग अलग तरीके से इन्हें दर्शाया गया है। ऐसे में ओम राउत ने आदिपुरूष के रूप में अपना संस्करण जनता के आमने रखा है। स्पेशल इफेक्ट्स से युक्त जिसमें सबसे ज्यादा फोकस विजुअल्स पर किया गया है। कई दृश्य नयनाभिराम हैं।

Adipurush

ऐसे में पुरानी रामायण आधारित फिल्मों या सीरियल्स से अलग रखने की कोशिश में कुछ बदलाव भी हुए हैं सो आलोचनाओं की भी काफी गुंजाइश है। शायद हर युग में रामायण का अपना संस्करण लिखने वालों को ये आलोचना सहनी ही पड़ी होगी, बशर्ते मूल आत्मा को चोट न पहुंचाई गई हो। आदिपुरुष में भी ऐसा नहीं किया गया है।

सबसे पहले बात कहानी की। शुरुआत में ही विवादों से बचने के लिए डिस्क्लेमर में बताया गया कि वाल्मीकि रामायण से कथा ली गई है। लेकिन आदिपुरुष में कहानी वानप्रस्थ से शुरू की गई है और रावण वध तक कई सारे दृश्यों में आपको लग सकता है कि इसमें ऐसे क्यों दिखाया गया, ये क्यों नहीं। उसकी दो वजहें हैं। एक, आदिपुरुष की कहानी वाल्मीकि रामायण पर आधारित है, रामचरित मानस पर नहीं। दूसरा, समय की कमी थी, केवल 179 मिनट का समय था, सो कई दृश्य सीमित किए गए हैं।

ऐसे में कई ऐसे पात्र और घटनाएं हैं जो इस मूवी में हैं ही नहीं। अहिरावण का रोल नहीं है ऐसे में हनुमानजी के बेटे मकरध्वज भी नहीं हैं। कुंभकरण को भी खाने से नहीं जगाया जाता। नल नील दिखाए गए हैं लेकिन उनकी कोई बात या करामात नहीं है। केवट राज निशाद का दृश्य भी नहीं है।शबरी हैं लेकिन अहिल्या नहीं हैं। आदिपुरुष में शबरी का भी अग्नि में जलना बहुतों को अजीब लगेगा। आखिर में रावण को मारने के लिए श्री राम नाभि में तीर तो मारते हैं, लेकिन बाकी सारों के लिए अलग से तीर नहीं मारते। शूर्पणखा का लक्ष्मण से शादी का प्रस्ताव भी नहीं है। बाली का आधा बल खींच लेने की भी बात नहीं है। अंगद के पैर वाली लीला भी नहीं है।

इनके अलावा क्या-क्या आलोचना का विषय बन सकता है? इंद्रजीत और हनुमान का एक संवाद जिसमें वो आम मुंबईया फिल्मों की तरह डायलॉग बोल रहे हैं "तेल तेरे बाप का, कपड़ा तेरे बाप का, आग भी तेरे बाप की, जलेगी भी तेरे बाप की"। किरदारों के लुक्स तो आलोचना का विषय पहले से हैं। रावण के सारे रिश्तेदार फौजी कट बाल में हैं। मुकुट भी कोई नहीं पहनता, जैसा की हमें देखने की आदत है। विभीषण की पत्नी नया किरदार है, जो सुषेण वैद्य की जगह संजीवनी से उपचार करती है। बाकी लोग चाहें तो हॉलीवुड फिल्मों की तरह के सेट्स, एवेंजर्स मूवीज की तरह के किरदारों, सेट्स, गेम्स और थ्रोन की तरह की स्टाइल कॉपी करने का आरोप लगा सकते हैं। दिक्कत गुंडे की तरह सीता माता की गर्दन पर कटार रखकर उनकी गर्दन काटने के सीन पर भी हो सकती है।

लेकिन अगर हम अलग अलग रामायण, रामलीला के इतिहास, रचनात्मकता और श्रीराम के प्रति अगाध विश्वास को याद करें तो बस एक संदेश जाता है कि मन में राम के प्रति श्रद्धा है तो जूठे बेर भी स्वीकार हैं। ओम राउत ने वाकई में कड़ी मेहनत की है। रामभक्तों के इस देश में राम की मूंछों वाली छवि गढ़ना आसान काम भी नहीं था। बड़ा रिस्क उन्होंने लिया है रामायण का अपना ये संस्करण बनाकर। लेकिन ये भी सच है कि हॉल में बैठे बच्चों और किशोरों को ये मूवी काफी पसंद आ रही थी। कई सीन ऐसे थे, जो वाकई में हिंदी फिल्मों में कुछ सालों पहले तक नामुमकिन जैसे थे, ब्रह्मास्त्र से कई गुना बेहतर स्पेशल इफेक्ट्स और सेट्स तैयार किए गए हैं, मेहनत साफ साफ नजर आती है।

हालांकि कई जगह लगता है इमोशंस और म्यूजिक को और तरजीह दी जानी चाहिए थी, लेकिन उनकी कमी काफी हद तक स्पेशल इफेक्ट्स ने पूरी की गयी है। रावण के 10 सिरों का सीधी लाइन की बजाय 2 लाइनों में अलग-अलग आकर आपस में बात करना आदि अच्छा प्रयोग था, लेकिन हनुमान और लक्ष्मण के तौर पर एक्टर्स लोगों को ज्यादा समझ नहीं आए। दिलचस्प है कि राम को पूरी मूवी में राघव और लक्ष्मण को शेष नाम से संबोधित करना भी ओम राउत का एक प्रयोग ही है।

पिछले साल जब आदि पुरुष के पात्रों के फर्स्ट लुक सामने आए थे, टीजर के जरिए वीएफएक्स के सीन सामने आए थे तो काफी आलोचना हुई थी। तब जाकर लोगों को पता चला था कि इन वीएफएक्स के पीछे प्रसाद सुतार का चेहरा है। हाल के कुछ वर्षों में आई फिल्मों बाजीराव मस्तानी और ओम राउत की ही तान्हाजी के स्पेशल इफेक्ट्स के लिए तो उन्हें अवार्ड भी मिला। लेकिन जब आदिपुरुष के पात्रों के लुक्स की जमकर आलोचना हुई तो उनकी कंपनी ने साफ मना कर दिया कि उन्होंने ये वीएफएक्स बनाए हैं। तब पता चला कि प्रसाद व्यक्तिगत रूप से आदिपुरुष के वीएफएक्स सुपरवाइजर थे।

ऐसे में आदिपुरुष की आलोचना अगर दोबारा भी सोशल मीडिया पर हो रही है तो पात्रों के लुक और डायलॉग्स के चलते हो रही है, जिसके लिए मनोज मुंतशिर को निशाने पर लिया जा रहा है। लेकिन इन दोनों वजहों से फिल्म में जिस स्तर पर स्पेशल इफेक्ट्स का काम हुआ है, उसकी चर्चा ही नहीं हो पा रही है। ये सच है कि ऐसे ही सभी सीन्स को देखकर हम हॉलीवुड फिल्मों में तालियां बजाते रहे हैं, लेकिन चूंकि ये किसी हिंदी फिल्म में है तो लोग आलोचना पर उतर आये हैं।

अजय अतुल का म्यूजिक पहले ही गानों के साथ चर्चा में आ चुका है। दो डायलॉग्स जरूर अच्छे लगे, राघव के मुंह से "आओ, गाड़ दो अहंकार की छाती पर धर्म का भगवा ध्वज" और विभीषण का "धर्म और अधर्म की लड़ाई में निष्पक्ष रहना अपराध है"। ऐसे डायलॉग्स निश्चय ही आम जनमानस में चर्चा का विषय भी बनेंगे और आलोचना का भी क्योंकि इनके राजनीतिक निहितार्थ भी जरुर निकाले जाएंगे। कुल मिलाकर ओम राउत का ये एक अनूठा प्रयोग है। प्रभास, कृति सनोन और सैफ अली खान ने अपनी एक्टिंग से इसे बेहतरीन बनाने में मदद की है। नई पीढ़ी के बीच रामायण और राम कथा पहुंचाने में ये मूवी अहम योगदान देगी, इसमें कोई शक नहीं।

शायद आदिपुरुष बनाने का मकसद भी यही है कि नयी पीढी को नयी तकनीकी के जरिए परंपरा से परिचय कराया जाए। जो आलोचना कर रहे हैं वो अतीत की कोई छवि लेकर चल रहे हैं। ऐसे लोगों को यह सोचना चाहिए कि भविष्य की पीढी तकनीकी के जिस रथ पर सवार है उसके लिए रामानंद सागर की रामलीला अरुचिकर ही लगेगी, भले ही उसे कितनी शुद्धता से बनाया गया हो। जिस दर्शक वर्ग को लक्ष्य बनाकर आदिपुरुष बनायी गयी है, उसमें जरूर सफल होगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

आदिपुरुष उन नौजवानों के लिए एक आकर्षण जरूर होगी जो हॉलीवुड की फिल्मों के ही दीवाने होते हैं। दुनियाभर के 10 हजार सिनेमा पर्दे पर एक साथ रिलीज होनेवाली आदिपुरुष ने ओपनिंग डे पर 95 करोड़ की कमाई करके साबित भी कर दिया है कि नयी तकनीकी से लैस बड़े पर्दे की इस रामलीला का तीर निशाने पर लगा है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+