‘महिलाएं बेहतर होती हैं’ कहकर भेदभाव करने वाले मेडिकल स्कूल पर जुर्माना

Provided by Deutsche Welle

टोक्यो, 20 मई। जापान की टोक्यो स्थित जुनटेंडो यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा नीति को अदालत ने भेदभावपूर्ण माना है. अपनी तरह के पहले फैसले में अदालत ने यूनिवर्सिटी को 13 महिला परीक्षार्थियों को हर्जाना देने का हुक्म सुनाया है.

जुनटेंडो यूनिवर्सिटी ने महिला परीक्षार्थियों के लिए यह कहते हुए ज्यादा सख्त अनिवार्यताएं तय की थीं कि उनकी संवाद क्षमताएं बेहतर होती हैं और इसलिए इंटरव्यू में उन्हें पुरुषों के मुकाबले फायदा मिल जाता है.

बन सकती थीं डॉक्टर

जज ने अपने आदेश में कहा कि यूनिवर्सिटी की महिलाओं के लिए तय की गईं अनिवार्यताएं भेदभावपूर्ण हैं. अदालत ने इस संस्थान को लगभग 80 लाख येन यानी 50 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया.

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यूनिर्सिटी की "अतार्किक और पक्षपाती" नीतियों के कारण महिलाओं को भावनात्मक परेशानी हुई. टोक्यो स्थित क्योडो न्यूज के मुताबिक जिन 13 महिलाओं को हर्जाना मिलेगा, उन्होंने 2011 से 2018 के बीच इस यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा दी थी लेकिन उन्हें दाखिला नहीं मिला.

अखबार ने लिखा है कि अगर प्रवेश परीक्षा के नतीजों के साथ छेड़छाड़ ना की गई होती तो उनमें से दो महिलाओं का दाखिला हो जाता और वे डॉक्टर बन सकती थीं. जुनटेंडो यूनिवर्सिटी ने दलील दी थी कि महिलाओं के कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर होते हैं इसलिए उन्हें प्रवेश परीक्षा के इंटरव्यू वाले हिस्से में फायदा मिल जाता है.

कई स्कूलों ने किया भेदभाव

इससे पहले टोक्यो मेडिकल यूनिवर्सिटी को महिला आवेदकों के अंकों के साथ छेड़छाड़ करने का दोषी पाया गया था. यह छेड़छाड़ लगभग 12 साल तक चलती रही थी जिसके बाद 2018 में सरकार ने जांच शुरू की और यूनिवर्सिटी को दोषी माना.

इस जांच में यह बात भी सामने आई कि जापान के कई मेडिकल स्कूल अपनी प्रवेश परीक्षाओं के साथ छेड़खानी कर रहे थे ताकि कम महिलाएं दाखिला ले पाएं. तब स्थानीय मीडिया में ऐसी खबरें छपी थीं कि कई विश्विद्यालयों ने महिलाओं को कम दाखिला देने के लिए छेड़खानी इसलिए की क्योंकि प्रशासन में बैठे अधिकारियों को लगता था कि शादी या बच्चे हो जाने के बाद महिलाएं जल्दी डॉक्टरी का पेशा छोड़ जाएंगी अथवा कम घंटे काम करने लगेंगी.

जुनटेंडो यूनिवर्सिटी ने भी माना है कि हाल के सालों में उसने जो नीतियां अपनाईं उसके चलते दर्जनों महिलाओं का अन्यायपूर्ण तरीके से दाखिलों से खारिज कर दिया गया. यह एक निजी संस्थान है. सरकारी जांच में पता चला कि देश के 81 मेडिकल संस्थानों में से चार ने महिला परीक्षार्थियों के साथ भेदभाव किया ताकि उनकी संख्या तीस प्रतिशत के आसपास रखी जा सके.

2018 में सरकार की रिपोर्ट आने के बाद इस तरह के दर्जनों मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. टोक्यो मेडिकल स्कूल, जुनटेंडो यूनिवर्सिटी और कितासातो यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती मानी है और माफी भी मांगी है. सेंट मारियाना यूनिवर्सिटी ने इन दावों को गलत बताया है.

वीके/एए (एएफपी)

Source: DW

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